आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी बूटी की जानकारी और बिमारियों को दूर करने के आयुर्वेदिक फ़ार्मूले और घरेलु नुस्खे की जानकारी हम यहाँ आपके लिए प्रस्तुत करते हैं

03 August 2016

बच्चों के लिए घरेलू उपचार, दस्त, उल्टी, खांसी-सर्दी के लिए Home remedy for children for dysentery, vomit, cough and cold




नमस्कार दोस्तों,

आपका बहुत-बहुत स्वागत है. आज मैं बताऊंगा बच्चों के लिए बहुत ही असरदार घरेलू दवा के बारे में. 

बच्चे जब बीमार हो जाते हैं तो उनके पैरेन्ट्स परेशान हो जाते हैं और डॉक्टर और चाइल्ड स्पेशलिस्ट का चक्कर लगाना पड़ता है. 

आपने कई तरह के घरेलू  उपचार सुने होंगे पर आपको बताना चाहूँगा कि तरह-तरह के नुस्खे और नीम-हकीमों के फ़ार्मूले इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, वर्ना लेने के देने पड़ सकते हैं. ख़ास कर बच्चों के लिए सावधानी ज़रूरी है. 

छोटे बच्चों को अगर हरे-पीले दस्त, सर्दी-खांसी, उलटी, बदहजमी और गैस बनने की प्रॉब्लम हो जाये तो इस दवा का इस्तेमाल करना चाहिए जो मैं बताने जा रहा हूँ. 

इसका बहुत ही प्रसिद्ध नाम है 'चौहद्दी'  यह एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जिसे 'बालचतुर्भद्र चूर्ण' के नाम से भी जाना जाता है. छोटे बच्चों के लिए बहुत ही गुणकारी अमृत सामान है.


यह बना बनाया मार्केट में मिल जाता है फिर भी अगर आप ख़ुद घर पर बनाना चाहें तो आसानी से बना सकते हैं. 



इसके लिए आपको सिर्फ चार चीजें चाहिए - मोथा , अतिस, छोटी पीपल और काकड़ासिंघी सभी 10-10 ग्राम 

इन सभी को कूट-पीस कर बारीक कपड़छन चूर्ण बना कर रख डब्बे में रख लीजिये. बस दवा तैयार है. 

अब जानते हैं कि बच्चों की किन समस्याओं में इसका प्रयोग करना चाहिए -
बच्चों के दस्त में 
उल्टी होने पर 
खांसी-सर्दी होने पर 
बुखार होने पर
पेट दर्द और पेट फूलने पर 

यह चूर्ण बच्चों के पाचन तंत्र को ठीक करता है और रोग पर्तिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. बच्चों को आवश्यक पोषण प्रदान कर उनके विकास में मदद करता है. पेट में गैस बनने से रोकता है और ऐंठन को दूर करता है. बच्चों को इन्फेक्शन वाली बिमारियों से बचाता है. 

मात्रा और सेवन विधि - 

छह महीने से कम उम्र के बच्चों को 125 मिलीग्राम या एक मसूर के बराबर शहद में मिलाकर चटाना चाहिए. इसी तरह छह महीने से एक साल के बच्चे को 250 मिलीग्राम तक शहद से देना चाहिए. बच्चों के उम्र और वज़न के हिसाब से मात्रा कम या अधिक कर सकते हैं. बच्चों के दस्त में इसे दिन में 3-4 बार देना चाहिए. 

ऐसे भी अगर रोज़  एक बार बच्चों को दिया जाये तो यह कई तरह की बिमारियों से बचाता है. 



इसका सिरप भी कुछ कंपनियां बनाती है, अगर न मिले तो इसके चूर्ण से आप सिरप बना सकते हैं. सिरप बनाने के लिए 10 ग्राम बालचातुर्भद्र चूर्ण को सौ मिलीलीटर पानी में उबाल लीजिये और जब एक चौथाई या 25 मिलीलीटर शेष बचे तो छान लीजिये. ठंडा होने पर इसमें 25 ग्राम शहद मिलाकर रख लें. 

छोटे बच्चों को इसे खिलाना आसान होता है, इसे आप ड्रॉपर से दे सकते हैं. 10-15 बूंद दिन में 3-4 बार देना चाहिए. 

तो दोस्तों आपने जाना बच्चों के दस्त, सर्दी-खाँसी और बुखार का घरेलू असरदार उपचार. 

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