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27 June 2017

मल्ल सिन्दूर के गुण और उपयोग | Malla Sindoor Usage, Indication & Side Effects


सिद्ध योग संग्रह का यह नुस्खा ज़्यादा पॉपुलर नहीं है पर आयुर्वेदिक डॉक्टर इसका इस्तेमाल करते हैं, इसके इस्तेमाल से अस्थमा, खाँसी, न्योमोनिया, Paralysis, वात रोग, Influenza, Convulsion, हिस्टीरिया जैसे कई तरह के रोग दूर होते हैं, तो आईये जानते हैं मल्ल सिन्दूर का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 
मल्ल सिन्दूर जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, यह कुपीपक्व रसायन औषधि है जिसका मुख्य घटक मल्ल होता है. मल्ल को संखिया, गौरीपाषाण और अंग्रेज़ी में Arsenic के नाम से जाना जाता है. यह एक तरह का तेज़ ज़हर है, जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस से शुद्ध करने के बाद इस्तेमाल किया जाता है. 

मल्ल सिन्दूर के कम्पोजीशन की बात करें तो यह शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, रस कपूर, मल्ल या संखिया और घृतकुमारी का मिश्रण होता है. आयुर्वेदिक प्रोसेस कुपीपक्व विधि द्वारा हाई टेम्परेचर में प्रोसेस कर इसे बनाया जाता है. 

यह बहुत ही तेज़ असर करने वाली दवा है जिसे डॉक्टर की सलाह के बिना बिल्कुल भी यूज़ नहीं करना चाहिए. यह वात और कफ़ नाशक होती है. इन्फेक्शन को दूर करना, एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है.


मल्ल सिन्दूर के फ़ायदे- 

पक्षाघात, लकवा, Paralysis, आमवात, गठिया जैसे रोगों में इस से लाभ होता है.
खाँसी, पुराना अस्थमा, इन्फ्लुएंजा, मलेरिया-विषम ज्वर, कमज़ोरी जैसे रोगों में आयुर्वेदिक डॉक्टर इसका प्रयोग करते हैं.

इसके इस्तेमाल से पुरुषों की यौन कमज़ोरी, प्रमेह, हिस्टीरिया, सुजाक, सिफिलिस जैसे रोग दूर होते हैं.

यह हैजा, कॉलरा जैसे रोगों में भी असरदार है. 


मल्ल सिन्दूर की मात्रा और सेवन विधि- 

60 से 125 mg तक शहद और अदरक के रस के साथ या रोगानुसार अनुपान के साथ लेना चाहिए. इसे ख़ुद से इस्तेमाल न करें, आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से डॉक्टर की देख-रेख में ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए नहीं तो सीरियस नुकसान हो सकता है. पित्त प्रकृति वालों को और तेज़ बुखार में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसके साइड इफ़ेक्ट की बात करें तो यह हार्ट बीट को बढ़ा देती है, ब्लड फ्लो भी बढ़ जाता है. इसीलिए डॉक्टर की सलाह के बिना प्रयोग नहीं करना चाहिए. बैद्यनाथ के एक ग्राम के पैक की क़ीमत 53 रुपया है.  

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