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18 October 2017

Manas Mitra Vati Benefits | मानसमित्र वटी हर तरह के मानसिक रोगों की आयुर्वेदिक औषधि


मानसमित्र वटी को मानसमित्र वटक और मानसमित्र वटकम के नाम से भी जाना जाता है, यह हर तरह के मानसिक रोगों की बेहतरीन दवा है. यह चिन्ता, तनाव, डिप्रेशन, मेमोरी लॉस, मैनिया, फ़ोबिया, नीन्द की कमी, सिजोफ्रेनिया, अल्ज़ाइमर जैसे जितने भी मेंटल डिजीज हैं, सभी को जड़ से दूर करता है, तो आईये जानते हैं मानसमित्र वटी का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

दोस्तों, आज की हमारी बिजी, भाग-दौड़ भरी मॉडर्न लाइफ़ स्टाइल में चिंता, स्ट्रेस, डिप्रेशन जैसी प्रॉब्लम बहुत ही कॉमन है, और इस टाइप सारी प्रॉब्लम को दूर करने यह एक बेस्ट दवा है जो किसी भी अंग्रेजी दवा से कई गुना बेहतर है. 

मानसमित्र वटी में कई तरह की जड़ी-बूटि और भस्मों के अलावा सोना-चाँदी जैसी कीमती चीज़ों का भी मिश्रण होता है, जो इसे बेहद इफेक्टिव मेडिसिन बना देता है. मानसमित्र वटी के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

(मिलायी जाने वाली जड़ी-बूटी)

बला 
नागबला 
बिल्व 
प्रिश्नपर्णी 
शंखपुष्पी 
पुष्करमूल 
कुकरौन्दा 
पद्माख 
बच 
सफ़ेद चन्दन 
लाल चन्दन 
यष्टिमधु 
दालचीनी 
पिप्पली 
कपूर 
एलायची 
इन्द्रजौ 
रतनजोत 
निर्गुन्डी 
मोथा 
रास्ना 
गोजिव्हा 
कमल केसर 
जीवक 
ऋषभक
काकोली 
कंटकारी 
वृहती 
गोरखमुंडी 
कालमेघ 
अमलतास 
फालसा 
हर्रे 
बहेड़ा 
आँवला 
गिलोय
सुगंधबाला 
तगर 
जीवन्ती 
सोमलता 
असगंध 
हल्दी 
उशीर 
द्राक्षा 
ऋद्धि 
वृद्धि 
दूर्वा 
हंसपादी या कीटमाता 
भद्रा 
लौंग 
तुलसी 
केसर प्रत्येक एक-एक भाग 


(मिलाये जाने वाले भस्म और खनिज)

स्वर्ण भस्म 
रजत भस्म 
लौह भस्म 
मृगश्रृंग भस्म 
स्वर्णमाक्षिक भस्म 
प्रवाल पिष्टी 
मोती पिष्टी 
शुद्ध शिलाजीत 
और कस्तूरी एक-एक भाग 

(भावना द्रव्य)

त्रायमान 
ब्रह्मी 
शंख पुष्पि 
बच 
यवासा 
लक्ष्मणा 
बेल की जड़ 
बला 
जीरा 
गाय का दूध 
सोमलता 

बनाने का तरीका यह होता है कि जड़ी बूटियों का फाइन पाउडर बनाकर, भस्म, पिष्टी और शिलाजीत को मिक्स करने के बाद त्रायमान, यवासा, बेल की जड़, बच, जीरा, बला और लक्ष्मणा का काढ़ा बनाकर भावना दें, ब्रह्मी और शंख पुष्पि के रस और दूध की भावना भी दें. अच्छी तरह से खरलकर एक-एक रत्ती या 125 mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यही मानसमित्र वटी है. 


मानसमित्र वटी के औषधीय गुण - 

मानसमित्र वटी माइंड और ब्रेन के लिए इफेक्टिव है, नर्वस सिस्टम को स्ट्रोंग बनाती है. तासीर में नार्मल यानि मातदिल. तीनों दोषों पर असर करती है. किसी भी दोष के बढ़ने से होने वाले मानसिक रोग को दूर करने वाले गुणों से भरपूर है. Anti-stress, Anxiolytic, Antidepressant, Neuroprotective, Antioxidant, Nervine Tonic, Memory Booster, Mind Sharpner जैसे गुण पाए जाते हैं. 
मानसमित्र वटी के फ़ायदे - 

जैसा कि शुरू में ही मैंने बताया है यह हर तरह की मानसिक समस्या की बेजोड़ दवा है. चाहे स्ट्रेस, तनाव, चिंता, डिप्रेशन, नींद की कमी हो या कोई भी मेंटल प्रॉब्लम हो तो इसका इस्तेमाल करना चाहिए 

यह साधारण स्ट्रेस से लेकर अल्झाइमर और सिजोफ्रेनिया तक में असरदार है. 

मूड की ख़राबी, तुनकमिजाज़ि, चिडचिडापन, गुस्सा आना, Frustration, होपलेस, ख़ालीपन महसूस होना, ख़ुद को कसूरवर समझना, अनजाना दर, फोबिया, किसी काम में मन नहीं लगना, कंसंट्रेशन की कमी, ग़मगीन होना, भूलने की बीमारी, मानसिक थकान और सुसाइड का ख्याल आना जैसी कोई भी मेंटल प्रॉब्लम हो तो इस दवा से दूर होती है. 

मानसमित्र वटी के इस्तेमाल से बुद्धि, कंसंट्रेशन और मेमोरी पॉवर बढ़ती है, मानसिक थकान और मानसिक समस्या को दूर कर अच्छी नीन्द लाने में मदद करता है. 

हकलाना और आवाज़ की ख़राबी को दूर कर वौइस् क्वालिटी को भी इम्प्रूव करता है. कुल मिलाकर आप यह समझ लीजिये कि किसी भी तरह की मेंटल प्रॉब्लम में मानसमित्र वटी के इस्तेमाल से फ़ायदा होता है. 


मानसमित्र वटी की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो गोली तक रोज़ दो बार दूध से खाना खाने के बाद लेना चाहिए. बच्चों को कम मात्रा में आधी से एक गोली तक रोज़ दो बार दे सकते हैं. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, मैक्सिमम छह महिना तक लगातार यूज़ कर सकते हैं. 

दूसरी दवाओं के साथ भी ले सकते हैं बस दो-घंटे के अंतर पर इसे लेना चाहिए. मेमोरी पॉवर और कंसंट्रेशन बढ़ाने के लिए पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट भी इसे यूज़ कर सकते हैं. इसे आर्य वैधशाला जैसी कुछ आयुर्वेदिक कम्पनियां ही बनाती हैं, इसे ऑनलाइन ख़रीदें निचे दिए लिंक से - 









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