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10 October 2017

यशद भस्म के फ़ायदे | Yashad Bhasma Benefits in Hindi


यशद भस्म एक क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो बॉडी में जिंक की कमी को पूरा करती है और जिंक की कमी से होने वाली बीमारीयों को दूर करती है. इसे कई तरह के रोगों में इस्तेमाल किया जाता है, तो आईये जानते हैं यशद भस्म के फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

यशद भस्म जिंक या जस्ते से बनाया जाता है. यशद एक धातु और खनिज है इसे यशद, जसद, जस्ता जैसे नामों से जाना जाता है. अंग्रेज़ी में इसे Zinc कहा जाता है. 
प्योर यशद या जस्ते को आयुर्वेदिक प्रोसेस से शोधन मारण करने के बाद एलो वेरा जूस की भावना देकर भस्म बनाया जाता है. इसकी भस्म बॉडी में अच्छे तरह से अब्ज़ोरब होती है. 


यशद भस्म के औषधिय गुण - 

यह कई तरह के गुणों से भरपूर होता है. यह तासीर में ठंडा होता है. Antacid, दर्द-सुजन नाशक, पाचक और रक्तवर्धक या बॉडी में खून बनाने और हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले(Haematinic, Hematogenic) गुणों से भरपूर होता है. 

यशद भस्म के फ़ायदे - 

यह बुखार, दस्त, मलेरिया, डायबिटीज, दिमाग और नर्वस सिस्टम के रोग, खून की कमी, आँख और कान के रोग, फेफड़ों के रोग जैसे खाँसी-अस्थमा, जुकाम वगैरह, पाचन शक्ति की समस्या, बालों के रोग, चर्मरोग, ज़ख्म जो जल्दी नहीं भरते हों और पुरुष रोग जैसे प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ जाना, इनफर्टिलिटी और इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसे रोगों में फ़ायदेमंद है. 

यह हर तरह की बुखार में भी असरदार है, यह इम्युनिटी पॉवर को बढ़ाकर बीमारियों से बचाता है. 

इसे रोगानुसार दूसरी सहायक औषधियों के साथ सही मात्रा में लिया जाता है. 


यशद भस्म की मात्रा और सेवन विधि - 

15 mg से 125 mg तक सही अनुपान के साथ लेना चाहिए. इसे कम डोज़ में ही यूज़ करना अच्छा रहता है. 

सर्दी-खांसी, वायरल फ्लू , गले की खराश, टॉन्सिल्स में इसे सितोपलादि चूर्ण के साथ लेना चाहिए. 

आँख आने, आँख लाल होने, आँखों की सुजन जैसी प्रॉब्लम में इसे शहद के साथ लें. 

माउथ अल्सर, पेप्टिक अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसे रोगों में इसे गिलोय सत्व, मुलेठी चूर्ण या प्रवाल पंचामृत रस के साथ लेना चाहिए. 

कील-मुहाँसे और दुसरे चर्मरोगों जैसे एक्जिमा, सोरायसिस में खून साफ़ करने वाली दवाओं के साथ लेना चाहिए. इसी तरह से कई तरह रोगों में सही डोज़ और सही अनुपान के साथ लेने से फ़ायदा होता है. 

यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, बच्चे बड़े-बूढ़े, प्रेगनेंसी और ब्रैस्टफीडिंग में भी यूज़ कर सकते हैं. बस इसका डोज़ सही या कम डोज़ में ही यूज़ करें. इसे लॉन्ग टाइम तक यूज़ न करें. 


ज्यादा डोज़ में यूज़ करने से कुछ साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं जैसे चक्कर, उल्टी, पेट दर्द, थकान, पेट और किडनी की ख़राबी वगैरह. 

बैद्यनाथ, डाबर, पतंजलि जैसी आयुर्वेदिक कम्पनियों का यह आयुर्वेदिक दवा दुकान में मिल जाता है, या फिर इसे ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं.


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