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13 November 2017

Best Herbal Medicine for Heart and Heart Disease | अर्जुनारिष्ट(पार्थाधरिष्ट) ह्रदय रोगों की महान औषधि


अर्जुनारिष्ट ह्रदय रोगों या हार्ट डिजीज की एक बेहतरीन दवा है जिसे सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है. 

यह एक क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो हार्ट की हर तरह की बीमारियों को दूर कर हार्ट को हेल्दी बनाती है, तो आईये जानते हैं अर्जुनारिष्ट के फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

अर्जुनारिष्ट का एक दूसरा नाम पार्थाधरिष्ट भी है पर वैध समाज में यह अर्जुनारिष्ट के नाम से ही प्रचलित है. अर्जुनारिष्ट जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मेन इनग्रीडेंट अर्जुन की छाल होती है,इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें अर्जुन की छाल, मुनक्का, महुआ के फूल, धाय के फूल और गुड़ का मिश्रण होता है. जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव-अरिष्ट निर्माण विधि से संधान के बाद रिष्ट बनता है. आयुर्वेदिक कंपनियों का यह बना-बनाया मार्केट में हर जगह मिल जाता है. 


अर्जुनारिष्ट के गुण - 

इसके गुणों की बात करें तो यह पित्त और कफ़दोष नाशक, ह्रदय को बल देने वाला, Cardioprotective, बेहतरीन हार्ट टॉनिक और एंटी इंफ्लेमेटरी जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

अर्जुनारिष्ट के फ़ायदे  - 

अर्जुनारिष्ट जो है ह्रदय रोगों के लिए एक बेजोड़ दवा है, इसे चीप एंड बेस्ट हार्ट टॉनिक कह सकते हैं. 

यह ह्रदय को बल देता है, हार्ट बीट को नार्मल करता है, हार्ट को मज़बूत करने और हार्ट को प्रोटेक्ट करने के लिए यह एक बेहतरीन दवा है. 

यह ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को भी नार्मल करता है. 

दिल का ज़्यादा धड़कना, पसीना आना, मुंह सुखना, घबराहट, नींद की कमी जैसी प्रॉब्लम इसके इस्तेमाल से दूर होती है. इसका इस्तेमाल करते रहने से हार्ट फेल नहीं होता है. 

हार्ट का वाल्व, बढ़ जाना, सिकुड़ जाना, दिल का दर्द जैसे रोगों में असरदार है. कुल मिलाकर देखा जाये तो हार्ट के रोगों के लिए यह एक बेहतरीन दवा है. 


अर्जुनारिष्ट की मात्रा और सेवन विधि - 

15 से 30 ML तक दिन में दो बार भोजन के बाद बराबर मात्रा में पानी मिलाकर लेना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, लॉन्ग टाइम तक यूज़ कर सकते हैं. बच्चे-बड़े, बूढ़े सभी ले सकते हैं सही डोज़ में. गुड़ की मात्रा मिला होने से डायबिटीज वाले सावधानीपूर्वक यूज़ करें.  इसे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए गए लिंक से - 





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