भारत की सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक हिन्दी वेबसाइट लखैपुर डॉट कॉम पर आपका स्वागत है

29 August 2018

Aanandda Vati | आनन्ददा वटी के फ़ायदे जानिए


आनन्ददा वटी क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो पुरुषों के बल, वीर्य, वर्ण और मैथुन शक्ति को बढ़ाती है. तो आईये जानते हैं आनन्ददा वटी का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

आनन्ददा वटी के घटक या कम्पोजीशन- 

इसे बनाने के लिए चाहिए होता है शुद्ध अहिफेन, रस सिन्दूर प्रत्येक 10-10 ग्राम, उत्तम कस्तूरी, कपूर 3-3 ग्राम, काली मिर्च का चूर्ण 10 ग्राम, जायफल चूर्ण, जावित्री चूर्ण, केसर और  शुद्ध हिंगुल प्रत्येक 6-6 ग्राम लेना होता है.

आनन्ददा वटी निर्माण विधि -

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पहले रस सिन्दूर को अच्छी तरह से खरल करने के बाद दूसरी चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर खरलकर भाँग के पत्तों के रस की तीन भावना देने के बाद दो-दो रत्ती या 250mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लें. यही आनन्ददा वटी है, यह बनी बनाई मार्केट में नहीं मिलती है. कस्तूरी तो अब दुर्लभ है और अहिफेन भी बैन है. योग्य वैद्य ही इसे बना सकते हैं वैकल्पिक औषधियों के मिश्रण से.


आनन्ददा वटी की मात्रा और सेवन विधि - 

एक गोली सोने से एक घंटा पहले मलाई, दूध या फिर पान में पत्ते में रखकर खाना चाहिए.

आनन्ददा वटी के फ़ायदे-

इसके सेवन से पॉवर-स्टैमिना और लिबिडो बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है. बल, वीर्य की वृद्धि होती है और पाचक अग्नि भी बढ़ जाती है.

शास्त्रों के अनुसार मैथुन से एक घंटा पहले एक गोली मलाई के साथ सेवन करने से पुरुष मदमस्त स्त्रियों के साथ इच्छानुसार रमण कर सकता है. 

वीर्य स्तम्भन और बल वृद्धि के लिए कुछ दिनों तक मलाई या दूध के साथ इसका सेवन करना चाहिए. यानी PE और ED के लिए यह एक इफेक्टिव दवा है. 




 इसे भी जानिए -





loading...
हमारे विशेषज्ञ आयुर्वेदिक डॉक्टर्स की टीम की सलाह पाने के लिए यहाँ क्लिक करें
Share This Info इस जानकारी को शेयर कीजिए
loading...

0 comments:

Post a Comment

 
Blog Widget by LinkWithin