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14 January 2019

Dant Rachhak Powder | दांत और मसूड़ों की हर समस्या का एक उपचार- दन्त रक्षक पाउडर


आज मैं एक बेजोड़ आयुर्वेदिक मंजन के बारे में बताने वाला हूँ जिसका नाम है 'दन्त रक्षक पाउडर'. मसूड़ों से खून आना या पायरिया, मसूड़ों की सुजन, दांत हिलना, दाँतों का कालापन, दाँत दर्द, सेंसिटिविटी या ठंडा-गर्म लगना और मुंह की बदबू जैसी प्रॉब्लम में इसका कोई जवाब नहीं. तो आईये इसके बारे में जानते हैं पूरी डिटेल - 

'दन्त रक्षक पाउडर' का जो कॉम्बिनेशन है वो बेजोड़ है, इसके जैसे कॉम्बिनेशन वाला कोई भी प्रोडक्ट मार्किट में नहीं मिलता है. इसका फार्मूला मैंने आज से करीब 20 साल पहले तैयार किया था और यह शत प्रतिशत सफल है.

'दन्त रक्षक पाउडर' के घटक या कम्पोजीशन -

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे काली मिर्च, सोंठ, पिप्पली, तुम्बुल, अमृतयोग, माजूफल, अकरकरा, लौंग, सेंधव लवण, बबूल की अन्तरछाल, नीम की अन्तरछाल, मौलश्री, जायफल और संगजराहत के मिश्रण से बनाया जाता है. इसमें मिलाये जाने वाले खनिज और जड़ी-बूटियाँ अपने-आप में बेजोड़ हैं.

यह मंजन इतना असरदार है कि इसे जानने वाले लोग इसे दुबई, सऊदी जैसे गल्फ़ कंट्री के अलावा अमेरिका और लन्दन भी लेकर जाते हैं. 

'दन्त रक्षक पाउडर' के फ़ायदे-

पायोरिया या दाँतों से खून, पस आना, दांत का दर्द, मसूड़ों की कमज़ोरी, मसूड़ों की सुजन, दांत हिलना, सेंसिटिविटी या दाँतों में ठण्डा-गर्म लगना, दाँतों का कालापन जैसी दाँतों की हर तरह की प्रॉब्लम के लिए बेजोड़ है. 

'दन्त रक्षक पाउडर' आपके दांतों को सम्पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है, अगर आपको दाँतों की कोई प्रॉब्लम नहीं भी है तो अपने दाँतों को मज़बूत बनाने के लिए इसका प्रयोग करें ताकि जीवनभर आपके मुँह में दांत रहें.

अगर आपको दांत-मसूड़ों की किसी भी तरह की प्रॉब्लम है या फिर मुँह से बदबू आती है तो इसका प्रयोग करें, इसके पहले पैक से ही आपको फ़ायदा मिलेगा और दुसरे सारे टूथपेस्ट और मंजन आप भूल जायेंगे. 

बच्चे-बड़े, बूढ़े सभी लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. निश्चित रूप से फ़ायदा मिलेगा यह मेरी गारंटी है, एक बार यूज़ करके तो देखिये.

'दन्त रक्षक पाउडर' की प्रयोग विधि -

इसे मंजन की तरह की दांत और मसूड़ों पर मलें या फिर टूथ ब्रश का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. बेस्ट रिजल्ट के लिए सुबह और रात में सोने से पहले भी यूज़ करें और फिर चमत्कार देखें. 

इसके 50 ग्राम के दो पैक की कीमत है सिर्फ 199 रुपया, शिपिंग फ्री. इसे आप सब के लिए ऑनलाइन उबलब्ध करा रहा हूँ जिसका लिंक निचे दिया जा रहा है - 



तो दोस्तों, यह थी आजकी जानकारी दाँतों-मसूड़ों की हर तरह की समस्या को दूर करने वाली बेजोड़ औषधि 'दन्त रक्षक पाउडर' के बारे में. 



Keshrog Nashak Yog for All Hair Problems | केशरोग नाशक योग(सेट) केश रोगों की सम्पूर्ण चिकित्सा


बालों की हर तरह की प्रॉब्लम का सबसे बेस्ट उपाय आपके लिए लेकर आया हूँ जिसका नाम है 'केशरोग नाशक योग' यह एक तरह की कम्पलीट किट है जिसमे लगाने के लिए तेल, खाने का एक चूर्ण और एक कैप्सूल है. बालों का गिरना, झड़ना या टूटना, बालों का समय से पहले सफ़ेद होना, दाढ़ी मुछों का समय से पहले सफ़ेद होना, Dandruff या रुसी होना, बालों में खुजली होना जैसी बालों की हर तरह की प्रॉब्लम के लिए यह एक बेजोड़ योग है जो महिला-पुरुष सभी के लिए समान रूपसे लाभकारी है. तो आईये इसके बारे में विस्तार से बात करता हूँ - 

दोस्तों, आज के समय में बालों की समस्या से बहुत लोग परेशान हैं. कम उम्र में ही बालों का सफ़ेद होना बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम हो गयी है. तरह-तरह के ऐड देखकर लोग तरह-तरह का हेयर आयल लोग ट्राई करते रहते हैं और फ़ायदा शायेद ही होता है. 
आपमें से कई लोग मुझसे अक्सर पूछते रहते हैं बालों के लिए बेस्ट उपचार के बारे में. और मैंने कहा भी था कि आपके लिए बेस्ट दवाई बताऊंगा. 

बालों की हर तरह की प्रॉब्लम के लिए दशकों से जो औषधि हम अपने रोगियों को प्रयोग कराते हैं उसी को आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे 'केशरोग नाशक योग' नाम दिया गया है. इसे बालों को पोषण देनी वाली आयुर्वेद की जानी-मानी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया गया है. इस सेट में तीन तरह की औषधि है- तेल, चूर्ण और कैप्सूल 

सबसे पहले जानते हैं 'केशरोग नाशक तेल' के बारे में - यह विशुद्ध आयुर्वेदिक प्रोसेस 'क्षीरपाक विधि' से बनाया गया तेल  है जिसमे असली ताज़े कृष्ण भृंगराज के अलावा 15 तरह की दूसरी बेहतरीन जड़ी-बूटियों का एक्सट्रेक्ट है जैसे - गैरिक, अनंतमूल, हरिद्रा, दारू हल्दी, प्रियंगु, नागकेशर, मुलेठी, कमल पुष्प, पद्माख, लोध्र, चन्दन, खरेंटी इत्यादि .

 बालों के अलावा दाढ़ी-मूँछ में भी लगा सकते हैं. 

'केशरोग नाशक चूर्ण'- के घटकों की बात करें तो इसे छाया में सुखा हुवा काला भांगरा, जंगली आँवला, तिल और मिश्री मिला होता है. 

'केशरोग नाशक कैप्सूल'- यह कैप्सूल 'केशरोग नाशक योग' का महत्वपूर्ण अंग है इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे स्वर्णमाक्षिक भस्म, आँवला एक्सट्रेक्ट, हरीतकी एक्सट्रेक्ट, यष्टिमधु घनसत्व और भृंगराज घनसत्व के मिश्रण से बनाया गया है. यह अपने-आप में बेजोड़ योग है जो बालों को उचित पोषण प्रदान करता है. नए बालों को उगाता है, बालों की जड़ों को मजबूत कर बालों को घना, काला और लम्बा बनाता है. 

'केशरोग नाशक योग' के फ़ायदे- 

अगर आपको किसी भी तरह की प्रॉब्लम है 'केशरोग नाशक योग' के तीनों चीजों का इस्तेमाल कीजिये और चमत्कार देखिये.

बालों का गिरना, टूटना, समय से पहले सफ़ेद होना, रुसी होना, बालों का रूखापन, गंजापन जैसी कोई भी समस्या क्यूँ न हो इसके इस्तेमाल से निश्चित रूप से लाभ होता है. 

अगर आप पुरुष हैं और समय से पहले दाढ़ी-मूँछ के बाल सफ़ेद हो रहे हैं तो दाढ़ी-मूँछ में इस तेल को लगायें इसके चूर्ण और कैप्सूल को खाएं.

'केशरोग नाशक योग' 100% आयुर्वेदिक योग है जिस से आपको 100% फ़ायदा होगा यह मेरी गारंटी है. विश्वास के साथ प्रयोग कीजिये पहले महीने से ही आपको फ़ायदा दिखेगा. 

'केशरोग नाशक योग' की प्रयोग विधि -

तेल को बालों की जड़ों में और बालों में अच्छी तरह से रोज़ लगाया करें. चूर्ण को एक स्पून(लगभग 3 ग्राम तक) सुबह-शाम नाश्ते-खाने के बाद नार्मल पानी से लेना है. इसी तरह से कैप्सूल को भी एक-एक सुबह-शाम नार्मल पानी से निगल लेना है. यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है. अगर आपकी उम्र 18 साल से कम है तो चूर्ण को आधा स्पून सुबह-शाम लें. और कैप्सूल रोज़ एक बार. तेल को आवशयकतानुसार लगाया करें. 

अब सवाल यह उठता है कि इसे कितना समय तक यूज़ करना है? 

जहाँ तक टाइम की बात है तो आपकी प्रॉब्लम जितना पुरानी होगी, उतना ज़्यादा टाइम लगेगा. इसे कम से कम लगातार 3 से 6 महिना तक यूज़ करना चाहिए. इसके एक महीने के पुरे सेट की क़ीमत है सिर्फ 1650 रूपये. इसे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए गए  लिंक से -



साइड इफेक्ट्स - वैसे तो यह पूरी तरह से सुरक्षित औषधि है इसके सेवन से किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. 'केशरोग नाशक योग' के चूर्ण में मिश्री की थोड़ी मात्रा होती है तो शुगर के रोगी सावधानी से यूज़ करें या फिर कम मात्रा में यूज़ करें. और जिनको बार-बार सर्दी-ज़ुकाम हो जाता है या फिर सर्द मिजाज़ वाले लोग चूर्ण को कम मात्रा में यूज़ करें. 



11 January 2019

Adhunik Ayurvedic Chikitsa | आधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा- Dr. S. R. Lakhaipuri


क्या आप आयुर्वेदिक दवाओं और आयुर्वेदिक उपचार जानने के इच्छुक हैं? क्या आप एक डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं? क्या आप आयुर्वेद के स्टूडेंट हैं? क्या आप फार्मेसी या मेडिकल स्टोर चलाते हैं? क्या आप आयुर्वेद के प्रेमी हैं और अपना आयुर्वेदिक ज्ञान बढ़ाना चाहते हैं? या फिर आप एक कॉमन मैन या आम आदमी हैं? इनमे से आप कोई भी हों आज की जानकारी आप सभी के लिए बड़े काम की है.

जी हाँ दोस्तों, आज किसी दवा के  बारे नहीं बता रहा बल्कि 'आधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा' नाम की  किताब के बारे में बात करने वाला हूँ जिसमे न सिर्फ दवाओं की जानकारी है बल्कि हर तरह के रोगों का उपचार भी. इस किताब को मैंने ही लिखा है जो आप सभी के काम आने वाली है. तो आईये इसके बारे में डिटेल्स जानते हैं- 

आधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में मैंने आयुर्वेद औषधियों और आयुर्वेदिक उपचार की हर वो जानकारी शामिल की है जिसकी आज के समय में ज़रूरत है. 
Cover Page

इस पुस्तक में करीब 350 से अधिक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधियों की सॉलिड जानकारी, इनके उपयोग, मात्रा और सेवन विधि आसान शब्दों में बताया गया है. इसमें रस-रसायन, भस्म, चूर्ण, अवलेह-पाक, गुग्गुल, वटी, आसव-अरिष्ट, क्वाथ, क्षार-लवण, तेल-घृत, लौह-मंडूर और कुपिपक्व रसायन जैसी सभी क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन की जानकारी है. 

200 से ज़्यादा तरह की बीमारियों आयुर्वेदिक उपचार और ऐसे-ऐसे आयुर्वेदिक योग बताये गए हैं जिनका प्रयोग कर कोई भी अपनी बीमारी दूर कर सकता हैं. इस पुस्तक में मैंने अनुभव आधार पर ऐसे-ऐसे कॉम्बिनेशन और सटीक योग बताया हूँ जो आपको कहीं और नहीं मिलेंगे. मैंने भी सर्च किया है ऐसे सटीक योगों की जानकारी देने वाली कोई भी किताब मार्केट में अवेलेबल नहीं है. 

इस किताब में नयी-पुरानी हर तरह की बीमारी का उपचार बताया  गया है. इसमें पुरुष यौन रोग, महिला रोग, वातरोग, चर्मरोग, उदररोग या पेट की बीमारियाँ, किडनी की बीमारी, ह्रदयरोग जैसे हर तरह की बीमारियों का सटीक उपचार बताया गया है. बस समझ लीजिये कि हर तरह की बीमारी का उपचार आपको इस किताब में मिल जायेगा.

यह एक ऐसी किताब है जिसे हर घर में होना चाहिए ताकि परिवार में अगर किसी को अगर कोई बीमारी हो तो इस पुस्तक की सहायता से सही औषधियों का सेवन कर बीमारी से मुक्ति पाई जा सके. 

हाई क्वालिटी के पेपर में सुन्दर छपाई और बेहतरीन लैमिनेटेड कवर वाली इस प्रीमियम बुक की क़ीमत है 1500 रुपये, पर आप सभी के लिए जो हमारे चैनल के सब्सक्राइबर और विवर हैं आपको यह सिर्फ़ 999 रुपया में दी जा रही है. इसकी लिमिटेड कॉपी है यानि सिमित संख्या में उपलब्ध है, तो पहले आयें और पहले पायें की आधार पर जल्दी आर्डर करें. ऑनलाइन आर्डर का लिंक निचे दिया गया है - 



यह पुस्तक आपके जीवनभर काम आने वाली है, इस से न सिर्फ आपका आयुर्वेद का ज्ञान बढ़ेगा बल्कि अपनी या अपने परिवार की बीमारियों को दूर कर आप हजारों रूपये बचा भी सकते हैं. इस किताब में आयुर्वेदिक चिकित्सा की ऐसी-ऐसी जानकारी है जैसे गागर में सागर हो!!

मैं वचन देता हूँ कि इस पुस्तक को खरीदने के बाद आप इसकी उपयोगिता से कभी निराश नहीं होंगे!!!

इसकी सॉफ्ट कॉपी भी आप आर्डर कर सकते हैं, इसका पेमेंट लिंक यह है - 




पेमेंट आने के बाद इसकी सॉफ्ट कॉपी आपको मेल कर दी जाएगी. इसकी सॉफ्ट कॉपी को आप अपने मोबाइल फोन, टेबलेट या कंप्यूटर में रख सकते हैं. सबसे ज्यादा तो पोर्टेबल मोबाइल में है, आप जहाँ भी हों यह किताब आपके मोबाइल में हमेशा साथ रहेगी. 

तो दोस्तों, अभी आर्डर कीजिये और इसका फ़ायदा लिजिए. 





05 January 2019

'वात रोग नाशक योग' - साइटिका, लकवा, पक्षाघात, जोड़ों का दर्द जैसे रोगों की बेजोड़ औषधि - Vaidya Ji Ki Diary


वैद्य जी की डायरी में आज बताने वाला हूँ 'वात रोग नाशक योग' के बारे में. जी हाँ दोस्तों, यह एक ऐसा नुस्खा है जो हर तरह के छोटे-बड़े वातरोगों को दूर कर देता है. इसके इस्तेमाल से साइटिका, लकवा, पक्षाघात, Spondylosis, जोड़ों का दर्द, गठिया, अर्थराइटिस, कमरदर्द जैसे हर तरह के वात रोग दूर होते हैं. इस योग को हमारे यहाँ 40 साल से भी ज़्यादा टाइम से सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है. तो आईये इस योग के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं- 

'वात रोग नाशक योग' जैसा कि इसका नाम रखा है समस्त वात रोगों को यह नष्ट कर देता है. इसे रस भस्मों, जड़ी-बूटियों और सोना-चाँदी जैसी बहुमूल्य औषधियों के मिश्रण से बनाया गया है. 

'वात रोग नाशक योग' के घटक -

इसके नुस्खे या कम्पोजीशन की बात करें तो इसे - 

स्वर्ण भस्म, अभ्रक भस्म, मोती पिष्टी, प्रवाल भस्म, रौप्य भस्म, वंग भस्म, रस सिन्दूर, स्वर्णमाक्षिक भस्म, कज्जली, शुद्ध टंकण, शुद्ध हरताल, शुद्ध कुचला 
असगंध, लौंग, जावित्री, जायफल, काकोली, काकड़ासिंघी, हर्रे, बहेड़ा, आंवला, शुद्ध बच्छनाग, अरणी की जड़, त्रिकटु, अजवायन, चित्रकमूल छाल, वायविडंग, सफ़ेद जीरा भुना हुआ, सज्जी क्षार, सेंधा नमक, सौवर्च नमक, समुद्र लवण,
भावना- गोरखमुंडी, संभालू, ग्वारपाठा और जम्बिरी निम्बू की एक-एक भावना देकर बनाया जाता है.

शुद्ध कुचला भी मिला होने से इसे ऐसे खाने से मुंह का स्वाद ख़राब हो जाता है इसलिए इसे कैप्सूल में भरकर देता हूँ. 

यह एक स्वर्णयुक्त योग है जिसे सोना-चाँदी, मोती जैसी कीमती दवाओं के अलावा बेहतरीन जड़ी-बूटियों का मिश्रण है.

'वात रोग नाशक योग' के फ़ायदे -

साइटिका की बीमारी नयी हो या पुरानी, तरह-तरह की दवाओं को खाने से भी फ़ायदा न हुआ हो तो इस योग के सेवन से बीमारी दूर हो जाती है. 

जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, आमवात, संधिवात, अर्थराइटिस, रुमाटायड अर्थराइटिस, लकवा, फेसिअल पैरालिसिस, पक्षाघात, एकांगवात, अर्धांगवात, स्लिप डिस्क, हर तरह की Spondylosis, मसल्स का दर्द, Frozen Shoulder, Stiffneck, नर्व पेन, हाथ-पैर काम्पना, सर हिलना जैसे हर तरह के वातरोगों में यह बेहद असरदार है.

आम का पाचन करता है, गैस दूर करता है और पाचन शक्ति को ठीक करता है. 
बस यह समझ लीजिये कि कैसा भी वातरोग हो, छोटा-बड़ा, नया-पुराना सभी में इसका प्रयोग कर लाभ ले सकते हैं. 

इस योग को हमारे यहाँ 40 सालों से भी अधीक समय से प्रयोग कर हजारों रोगियों को ठीक किया जा चूका है. आयुर्वेदाचार्य मेरे पिताश्री से यह योग मुझे विरासत में मिली है. 

तो दोस्तों, इस तरह की किसी भी बीमारी से आप या कोई और लोग पीड़ित हैं तो इसका सेवन ज़रूर करें.

'वात रोग नाशक योग' की मात्रा और सेवन विधि -

एक से दो कैप्सूल सुबह-शाम भोजन के बाद 4 स्पून महारास्नादि क्वाथ के साथ लेना चाहिए. अगर समस्या अधीक न हो तो एक-एक कैप्सूल दूध से भी ले सकते हैं. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, इसे लगातार तीन से छह महिना तक भी ले सकते हैं सही डोज़ में. 

सावधानी - वैसे इस से कोई नुकसान नहीं होता परन्तु इसमें शुद्ध कुचला की थोड़ी मात्रा होती है, जिसके कारन पित्त प्रकृति वाले रोगी या जिनका पित्त दोष बहुत बढ़ा हो तो कम डोज़ में सेवन में सेवन करें और दूध का प्रयोग किया करें.

पुरे कॉन्फिडेंस, श्रधा और विश्वास के साथ यूज़ करें. 100% आयुर्वेदिक मेरा अनुभूत योग है निश्चित रूप से लाभ होता है.

अब सवाल उठता है कि यह मिलेगा कैसे ?

इसे आप सबके लिए ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा हूँ. इसका 60 कैप्सूल डब्बे में पैक कर दे रहा हूँ जिसकी कीमत है सिर्फ़ 999 रुपया, शिपिंग फ्री. ऑनलाइन खरीदें निचे दिए लिंक से - 






10 December 2018

Ras Sindoor | रस सिन्दूर एक विवेचना


रस सिन्दूर कुपिपक्व रसायन केटेगरी की ऐसी औषधि जो अनुपान भेद से हर तरह के रोगों को दूर करती है. अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ़ एक दवा और हर तरह की बीमारी को कैसे दूर करेगी?? सब बताऊंगा रस सिन्दूर क्या है? कितने तरह का होता है? कौनसा बेस्ट होता है? क्या-क्या फ़ायदे हैं? कैसे यूज़ करना है? 
रस सिन्दूर क्या है?

आयुर्वेद में रस का मतलब होता है पारा जिसे पारद भी कहते हैं. रस सिन्दूर दो चीज़ें मिलाकर बनाया जाता है शुद्ध पारा और शुद्ध गन्धक. यही दो चीजें इसके घटक होते हैं.

रस सिन्दूर कैसे बनाया जाता है?

आम आदमी के लिए इसे बनाना आसान नहीं है, फिर भी संक्षेप में इसका प्रोसेस समझा देता हूँ.

इसे बनाने के लिए शुद्ध पारा और शुद्ध गन्धक को खरलकर आतशी शीशी में डालकर सात बार कपड़मिट्टी कर सुखाकर मिट्टी के हांडी में डालकर बालू भरा जाता है, जिसे आयुर्वेद में बालुकायंत्र कहा जाता है. 

अब इसे भट्ठी में चढ़ाकर तीन चार घन्टे तक मृदु, मध्यम और तीव्र अग्नि दी जाती है. इसके बाद ठण्डा होने पर लाल रंग की दवा निकालकर रख ली जाती है. इसे बनाते हुवे कई तरह का ध्यान रखा जाता है जो कि औषध निर्माण में अनुभवी वैद्य ही कर सकता है.

रस सिन्दूर बनाने में थोड़ी अलग-अलग विधि अपनाई जाती है और उस तरह से रस सिन्दूर चार प्रकार का होता है जैसे -

रस सिन्दूर अन्तर्धूम 

रस सिन्दूर अर्द्धगन्धकजारित 

रस सिन्दूर द्युगुण गन्धकजारित और 

रस सिन्दूर षडगुण बलिजारित 

इसमें सबसे लास्ट वाला षडगुण बलिजारित रस सिन्दूर सबसे ज़्यादा इफेक्टिव होता है.

रस सिन्दूर के फ़ायदे जानने से पहले इसके गुण या Properties को जान लीजिये -

आयुर्वेदानुसार यह उष्णवीर्य है मतलब तासीर में गर्म. यह योगवाही, रसायन, ब्लड फ्लो बढ़ाने वाला, रक्तदोष नाशक और हृदय को बल देने वाले गुणों से परिपूर्ण होता है. पित्त प्रकृति वालों और पित्त प्रधान रोगों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए और सेवन करना ही हो पित्तशामक दवाओं के साथ सही डोज़ में ही लेना चाहिए.

रस सिन्दूर के फ़ायदे-

कफ़ और वात प्रधान रोगों में इसे प्रमुखता से प्रयोग किया जाता है. पित्त रोगों में इसे गिलोय सत्व, प्रवाल पिष्टी और मोती पिष्टी जैसी औषधियों के साथ लेना चाहिए. अनुपान भेद से यह अनेकों रोगों को दूर करती है.

इन रोगों में इसका प्रयोग किया जाता है जैसे - 

नयी पुरानी बुखार, टॉन्सिल्स, प्रमेह, श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया, रक्त प्रदर, बवासीर, भगंदर, दौरे पड़ना, पागलपन, न्युमोनिया, खाँसी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, टी. बी., जौंडिस, हेपेटाइटिस, पेशाब की जलन, मूत्र रोग, अजीर्ण, पेट दर्द, बेहोशी, उल्टी, सुजन, ज़ख्म, गर्भाशय के रोग, कफ-वात प्रधान सर दर्द, सर काम्पना, चर्मरोग, जोड़ों का दर्द, आमवात, टेटनस, स्वप्नदोष, वीर्य विकार, मर्दाना कमज़ोरी, सामान्य कमज़ोरी इत्यादि. 

कुछ वैद्य लोग सिर्फ़ रस सिन्दूर से ही हर तरह की बीमारी का इलाज करते हैं. रस सिन्दूर है ही एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम मेडिसिन.

रस सिन्दूर की मात्रा और सेवन विधि - 

125 mg से 250 mg तक सुबह-शाम शहद या फिर रोगानुसार उचित अनुपान से लेना चाहिए. बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार 15 से 60 mg तक देना चाहिए. 

सावधान- यह तेज़ी से असर करने वाली दवा है! इसे डॉक्टर की सलाह से सही मात्रा में ही लिया जाना चाहिए नहीं तो नुकसान भी हो सकता है. 

कई तरह की बीमारियों के रस सिन्दूर के साथ सेवन करने वाली दवाओं का बेहतरीन योग आपको मेरी किताब में मिल जाएगी. 

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07 December 2018

Ashwagandha Pak | अश्वगन्धा पाक के फ़ायदे क्या आप जानते हैं?


अश्वगन्धा पाक जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मेन इनग्रीडेंट अश्वगन्धा या असगंध है जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस अवलेह-पाक निर्माण विधि से बनाया जाता है. इसमें असगंध, गाय का दूध, रस सिन्दूर, अभ्रक भस्म, नाग भस्म, वंग भस्म, लौह भस्म के अलावा दालचीनी, तेजपात, नागकेशर, इलायची, जायफल, केसर, बंशलोचन, मोचरस, जटामांसी, चन्दन, खैरसार, जावित्री, पिपरामूल, लौंग, कंकोल, पाढ़, अखरोट, शुद्ध भिलावा, सिंघाड़ा और गोखरू जैसी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं. 

अश्वगन्धा पाक के गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह बल वर्धक, अग्नि प्रदीपक, पौष्टिक और रसायन गुणों से भरपूर होता है.

अश्वगन्धा पाक के फ़ायदे- 

प्रमेह और मूत्र रोगों को दूर कर यह शरीर की कान्ति बढ़ाता है. 

वीर्यदोष, स्वप्नदोष, धातु विकार या पेशाब के साथ वीर्य जाना जैसी प्रॉब्लम में इसका सेवन करना चाहिए. 

वात वाहिनी नाड़ी, वीर्य वाहिनी नाड़ी और किडनी पर इसका अच्छा असर होता है.
हाथ-पैर, कमर या शरीर में कहीं दर्द हो वात वृद्धि के कारन तो इसके सेवन से फ़ायदा होता है. 

अश्वगन्धा पाक की मात्रा और सेवन विधि - 

पांच से दस ग्राम तक सुबह-शाम दूध से, शहद से या फिर पानी से भी ले सकते हैं. चूँकि इसमें कई तरह की भस्म मिली हुयी है तो इसे डॉक्टर की सलाह से ही सही डोज़ में यूज़ करना चाहिए. इसे आप घर बैठे ऑनलाइन खरीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 



इसे भी जानिए -





01 December 2018

Mahachaitas Ghrit | महाचैतस घृत


अगर किसी को मृगी या एपिलेप्सी की बीमारी है या फिर दिमाग की किसी भी तरह की प्रॉब्लम है तो इस अयुर्वेदिक औषधि का सेवन करना चाहिए जिसका नाम है महाचैतस घृत. जी हाँ दोस्तों, तो आईये आज इसी के बारे में चर्चा करते हैं -

महाचैतस घृत दिमाग के रोगों में बेहद असरदार है. यह दिमाग की कमज़ोरी, मेमोरी लॉस से लेकर मृगी और पागलपन तक में फ़ायदा करती है.

महाचैतस घृत के घटक या कम्पोजीशन -

यह एक ऐसी बेजोड़ औषधि है जिसे अनेकों प्रकार की जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया जाता है. इसे बनाने के लिए आठ तरह की जड़ी-बूटियों का क्वाथ और 40 तरह की जड़ी-बूटियों का कल्क और देशी गाय के घी का प्रयोग होता है. इसे आयुर्वेदिक प्रोसेस घृतपाक विधि से बनाया जाता है. यह चक्रदत्त का योग है. इस से कम असरदार एक औषधि है चैतस घृत जिसमे सिर्फ़ 12 तरह की जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं. 

महाचैतस घृत के फ़ायदे -


  • मानसिक रोगों या दिमाग की बीमारी के लिए आयुर्वेद में घृत वाली जितनी भी औषधियाँ हैं उनमे से यह सबसे बेस्ट और सबसे ज़्यादा असरदार है इसे यूनिक फार्मूलेशन की वजह से.
  • दिमाग की कमज़ोरी, यादाश्त की कमी, मेमोरी लॉस, मृगी और पागलपन जैसे रोगों में इसे दूसरी दवाओं के साथ लेने से निश्चित रूप से लाभ होता है. 
  • मृगी या एपिलेप्सी की बीमारी से छुटकारा पाने के लिए इसका सेवन करना चाहिए.


  •  मृगी की बेस्ट आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट के लिए आप हमारे विशेषज्ञों की सलाह ले सकते हैं, अधीक जानकारी आपको विडियो की डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी.


महाचैतस घृत की मात्रा और सेवन विधि -


तीन से छह ग्राम तक मिश्री मिलाकर खायें और ऊपर से दूध पीना चाहिए. बच्चों को कम डोज़ में देना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा होती है, इसे लॉन्ग टाइम तक यूज़ कर सकते हैं. इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं.

 ब्राह्मी घृत के फायदे 

महातिक्त घृत चर्मरोगों की औषधि 


24 November 2018

Gokshuradi Churna | गोक्षुरादि चूर्ण के चमत्कारी फ़ायदे


गोक्षुरादि चूर्ण ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जिसका कम्पोजीशन साधारण होते हुवे भी असरदार है. यह मर्दाना कमज़ोरी दूर कर बल-वीर्य और कामोत्तेजना को बढ़ाती है. तो आईये जानते हैं गोक्षुरादि चूर्ण का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से -

गोक्षुरादि चूर्ण के घटक या कम्पोजीशन -

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें गोखरू के अलावा पांच चीजें होती हैं. गोखरू, तालमखाना, शतावर, कौंच बीज, नागबला और अतिबला. 

बनाने का तरीका बहुत आसान है, सभी को बराबर वज़न में लेकर कूटपीसकर चूर्ण बना लिया जाता है. यह योगतरंगिणी नामक ग्रन्थ का नुस्खा है. गोक्षुरादि चूर्ण का दूसरा नुस्खा भी है जो महिलारोगों में प्रयोग किया जाता है, इस से बिल्कुल अलग होता है जो की भैषज्य रत्नावली का योग होता है. उसकी जानकारी फिर कभी दी जाएगी.

गोक्षुरादि चूर्ण के गुण -

यह मूत्रल यानि पेशाब साफ़ लाने वाला, बल-वीर्य बढ़ाने वाला, कामोत्तेजक, वीर्य गाढ़ा करने वाला, मेल हार्मोन Testosterone बढ़ाने वाला और बाजीकरण जैसे गुणों से भरपूर होता है.

गोक्षुरादि चूर्ण के फ़ायदे- 

यौनेक्षा की कमी, वीर्य का पतलापन और शीघ्रपतन जैसे पुरुष यौन रोगों में इसका प्रयोग करने से अच्छा लाभ मिलता है. 

अधीक मैथुन के कारन वीर्य का नाश का कर चुके व्यक्तियों को धैर्यपूर्वक इसका सेवन करना चाहिए. 

यह स्ट्रेस को कम कर कामोत्तेजना और आनन्द बढ़ाता है. 

गोक्षुरादि चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि -

2.5 से 5 ग्राम तक सोने से एक घंटा पहले मिश्री मिले दूध से लेना चाहिए. वीर्य का नाश कर चुके युवकों को इसे सुबह-शाम कुछ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुवे लेना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. इसके 100 ग्राम की क़ीमत क़रीब 110 रुपया है जिसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 




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