आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी बूटी की जानकारी और बिमारियों को दूर करने के आयुर्वेदिक फ़ार्मूले और घरेलु नुस्खे की जानकारी हम यहाँ आपके लिए प्रस्तुत करते हैं

22 October 2018

Dhatri Lauh Benefits | धात्री लौह के फ़ायदे


यह आयुर्वेद की पॉपुलर दवाओं में से एक है जो पेट की कई तरह की बीमारियों को दूर करती है, तो आईये जानते हैं धात्री लौह का कम्पोजीशन, बनाने की विधि, इसके गुण और उपयोग के बारे में विस्तार से - 

धात्री लौह का कम्पोजीशन -

यह एक लौह भस्म प्रधान दवा है, इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है मुलेठी चूर्ण एक भाग, लौह भस्म दो भाग और आँवले का चूर्ण चार भाग. मुलेठी और आँवले का बारीक कपड़छन चूर्ण होना चाहिए. 

सभी को अछी तरह से खरल कर ताज़े गिलोय के रस की दो-तीन भावना देकर 500mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. कुछ कंपनियां इसका टेबलेट बनाती है तो कुछ इसे पाउडर फॉर्म में ही रखती हैं. यह बना-बनाया मार्केट में मिल जाता है. 

धात्री लौह की मात्रा और सेवन विधि - एक से दो गोली तक खाना से पह ले या बाद में घी या शहद के साथ लेना चाहिए.

धात्री लौह के फ़ायदे -

खाना खाने के बाद पेट दर्द होना, खाने पचने टाइम पेट दर्द होना, सिने की जलन, खट्टी डकार, एसिडिटी, अपच और कब्ज़ जैसी बीमारीओं में यह बेहद असरदार है.

लौह भस्म मिला होने से खून की कमी या एनीमिया और जौंडिस में भी इस से फ़ायदा होता है. 

इस से पाचन शक्ति ठीक होती है और सफ़ेद हुवे बालों को काला करने में हेल्प करता है.

बच्चों के लिए भी फ़ायदेमन्द है अगर सही डोज़ में दिया जाये. इसका लगातार इस्तेमाल करने से कमज़ोरी दूर होती है और इम्युनिटी पॉवर भी बढ़ती है. इसे आप ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं निचे दिए लिंक से -




इसे भी जानिए - 




18 October 2018

IBS Treatment | संग्रहणी का आयुर्वेदिक उपचार - Vaidya Ji Ki Diary


आज वैद्य जी की डायरी में मैं आज बताने वाला हूँ संग्रहणी या IBS के लिए असरदार आयुर्वेदिक योग के बारे में. 

जी हाँ दोस्तों, आप में से कई लोग अक्सर पूछते रहते हैं इस बीमारी के इलाज के बारे में. तो आईये जानते हैं संग्रहणी या IBS के लिए इफेक्टिव आयुर्वेदिक योग की पूरी डिटेल - 

जैसा कि आप सभी जानते है IBS में रोगी को कई बार दस्त होते हैं जो तरह-तरह की दवा लेने पर भी जल्दी ठीक नहीं होता है. आज मैं इसके लिए बेहद असरदार आयुर्वेदिक योग बता रहा हूँ जिसे एक बार ट्राई ज़रूर करें-

इसके लिए आपको चाहिए होगा - 

प्रवाल पंचामृत रस(मोती युक्त) 5 ग्राम 

पंचामृत पर्पटी 5 ग्राम 

वृहत लोकनाथ रस 10 ग्राम 

कुटजघन वटी 10 ग्राम 

भुने हुवे जीरे का चूर्ण 10 ग्राम

बिल्वावलेह

चित्रकादि वटी 

कुटजारिष्ट

प्रवाल पंचामृत रस(मोती युक्त) 5 ग्राम + पंचामृत पर्पटी 5 ग्राम + वृहत लोकनाथ रस 10 ग्राम + कुटजघन वटी 10 ग्राम + भुने हुवे जीरे का चूर्ण 10 ग्राम. 

सभी को पीसकर अछी तरह से मिलाकर 40 मात्रा बना लेना है. एक-एक मात्रा रोज़ दो से तीन बार तक एक स्पून बिल्वावलेह के साथ देना चाहिए. 

खाना के बाद 2 गोली चित्रकादि वटी और चार स्पून कुटजारिष्ट पीना चाहिय. लगातार कुछ हफ्ते तक इसका इस्तेमाल से करने से आप IBS से छुटकारा पा सकते हैं.

इसका इस्तेमाल करते हुवे हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाएं. तेल-मसाला वाले हैवी फ़ूड, नॉन वेज और फ़ास्ट फ़ूड बिल्कुल नहीं खाना चाहिए. 




वैद्य जी की डायरी के दुसरे चमत्कारी योग को यहाँ देखें 

05 October 2018

Ajmodadi Churna | अजमोदादि चूर्ण सुजन और दर्द की औषधि


अजमोदादि चूर्ण क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो सुजन और हर तरह के वात रोगों में बेहद असरदार है. इसके इस्तेमाल से सुजन, जोड़ों का दर्द, गठिया, साइटिका, आमवात, कमर दर्द, पीठ का दर्द और बॉडी का दर्द जैसे वातरोग दूर होते हैं. तो आईये जानते हैं अजमोदादि चूर्ण का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से -

अजमोदादि चूर्ण के घटक या कम्पोजीशन -

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसमें अजमोद के अलावा दूसरी कई सारी जड़ी-बूटियाँ होती हैं. यह दो तरह के योग से बनाया जाता है. सबसे पहले जानते हैं प्रचलित योग के बारे में -

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है अजमोद, वायविडंग, सेंधा नमक, देवदार, चित्रकमूल छाल, सोया, पीपल, पीपलामूल और काली मिर्च प्रत्येक 10-10 ग्राम, हर्रे 50 ग्राम, विधारा और सोंठ प्रत्येक 100 ग्राम. सभी को कूट-पीसकर चूर्ण बना लिया जाता है. यह शारंगधर संहिता का योग है. इसमें गुड़ मिलाकर बड़ी-बड़ी गोलियाँ भी बनाया जाता है जिसे अमोदादि वटक कहते हैं.

दुसरे वाले अजमोदादि चूर्ण का कम्पोजीशन कुछ इस तरह से होता है - अजमोद, बच, कूठ, अमलतास, सेंधा नमक, सज्जीक्षार, हर्रे, त्रिकटु, ब्रह्मदंडी, मोथा, हुलहुल, सोंठ और काला नमक. सभी को बराबर वज़न में लेकर चूर्ण बनाया जाता है. दोनों ही योग के फ़ायदे एक जैसे ही होते हैं, पहले वाले योग को ही मैंने रोगियों पर इस्तेमाल कर अच्छा रिजल्ट देखा है.

अजमोदादि चूर्ण के गुण- यह वात और कफ़ नाशक है. दर्द-सुजन दूर करने वाला, वायु नाशक और पाचक होता है.

अजमोदादि चूर्ण  के फ़ायदे -

आमवात जिसमे जोड़ों में दर्द हो, सुजन में, शरीर में सुजन और हल्का बुखार हो तो इसे दूसरी वातनाशक औषधियों के साथ देने से अच्छा लाभ मिलता है.

गठिया, साइटिका, कमर दर्द, पीठ दर्द या फिर बॉडी में कहीं भी दर्द-सुजन हो तो इसका इस्तेमाल करना चाहिए. इसे लॉन्ग टाइम तक यूज़ करने से ही पूरा फ़ायदा दीखता है.

अजमोदादि चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि - 

तीन से छह ग्राम तक सुबह-शाम गर्म पानी से लेना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ दवा है, किसी तरह कोई नुकसान नहीं होता है लॉन्ग टाइम तक यूज़ करने से भी. इसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 




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02 October 2018

Parpatadhrishta | पर्पटाद्यरिष्ट के फ़ायदे


पर्पटाद्यरिष्ट क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो लिवर-स्प्लीन की बीमारी, जौंडिस, कामला, हेपेटाइटिस, सुजन और मलेरिया में बेहद असरदार है. तो आईये जानते हैं पर्पटाद्यरिष्ट का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल - 

पर्पटाद्यरिष्ट का कम्पोजीशन-

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है पर्पटा नाम की बूटी ही इसका मुख्य घटक है. पर्पटा को ही पित्तपापड़ा के नाम से जाना जाता है. 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बनाने के लिए पित्तपापड़ा 5 किलो लेकर 40 लीटर पानी के क्वाथ बनायें और जब 10 लीटर पानी बचे तो ठण्डा होने पर छानकर पुराना गुड़ 10 किलो और धाय के फूल आधा किलो मिक्स करें. गिलोय, सोंठ, मिर्च, पीपल, नागरमोथा, दारूहल्दी, छोटी कटेरी, धमासा, चव्य, चित्रकमूल और वायविडंग प्रत्येक 50-50 ग्राम का जौकुट चूर्ण मिक्स कर रिष्ट वाले चिकने बर्तन में सन्धान के लिए रख दिया जाता है. 

एक महिना बाद अच्छी तरह से फ़िल्टर कर काँच के बोतल में भरकर रख लेना चाहिए. इसे आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव-अरिष्ट निर्माण विधि से ही बनाया जाता है जो कि औषध निर्माण में अनुभवी वैद्य ही बना सकता है. यह बना बनाया मार्केट में शायेद ही मिलता हो.

पर्पटाद्यरिष्ट के फ़ायदे -

यह लिवर-स्प्लीन की हर तरह की बीमारी में बेहद इफेक्टिव है. लिवर बढ़ा हो, स्प्लीन बढ़ा हो, जौंडिस हो या फिर हेपेटाइटिस भी हो तो इस से फ़ायदा होता है. पर इसके साथ में और भी दवाएँ लेनी चाहिए.

पेट की बीमारी, गोला बनना, सुजन, मलेरिया, भूख की कमी और दिल की कमज़ोरी में भी फ़ायदा होता है.

यह पाचन तंत्र को ठीक कर भूख बढ़ाता है. 

पर्पटाद्यरिष्ट की मात्रा और सेवन विधि - 15 से 30 ML तक सुबह-शाम खाना के बाद बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर लेना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, बस शुगर वाले रोगी को यूज़ नहीं करें क्यूंकि इसमें गुड़ की मात्रा होती है. 





30 September 2018

Swamala Compound | स्वामला कम्पाउंड


यह धूतपापेश्वर नाम की कम्पनी का पेटेंट प्रोडक्ट है जो हेल्थ टॉनिक की तरह काम करता है यह कमज़ोरी को दूर कर चुस्ती-फुर्ती लाता है और पॉवर स्टैमिना को बढ़ा देता है, तो आईये जानते हैं स्वामला कम्पाउंड क्या है? और साथ जानेंगे इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

स्वामला कम्पाउंड अवलेह या हलवे की तरह की दवा ठीक च्यवनप्राश जैसी, बल्कि इसे अडवांस च्यवनप्राश कह सकते हैं. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो च्यवनप्राश इसका मेन इनग्रीडेंट है. 

इसके हर दस ग्राम में स्वर्ण भस्म और रौप्य भस्म या चाँदी भस्म 1-1mg, अभ्रक भस्म 5mg, कान्तलौह भस्म और प्रवाल पिष्टी प्रत्येक 10-10mg, मकरध्वज 14mg और बाक़ी च्यवनप्राश होता है. 

आयुर्वेद की पोपुलर दवा च्यवनप्राश में सोना-चाँदी और मकरध्वज जैसी चीज़ों का मिश्रण इसे असरदार बना देता है. यह त्रिदोष नाशक है.

स्वामला कम्पाउंड के फ़ायदे-

थकान, आलस कमज़ोरी, बुखार, खाँसी, टी. बी., पुरानी बीमारी और बीमारी के बाद की कमज़ोरी दूर करने के लिए इसे लेना चाहिए.

यह पॉवर-स्टैमिना को बढ़ाता है, यौन कमज़ोरी दूर करता है और महिला-पुरुष की इनफर्टिलिटी की प्रॉब्लम में भी इस से फ़ायदा होता है.

इसे जनरल हेल्थ टॉनिक के रूप में भी यूज़ कर सकते हैं.

स्वामला कम्पाउंड का डोज़ - 

एक से दो स्पून तक सुबह-शाम ख़ाली पेट लेना चाहिए, इसे एक से दो महिना तक लगातार ले सकते हैं. 

मकरध्वज जैसा हैवी मेटल मिला होने से लॉन्ग टाइम तक ज़्यादा यूज़ नहीं करना चाहिए. इसके 500ग्राम के पैक की क़ीमत है 545 रुपया है जिसे डिस्काउंट प्राइस में आप घर बैठे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से -





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26 September 2018

Low BP Treatment | लो ब्लड प्रेशर(निम्न रक्तचाप) की आयुर्वेदिक चिकित्सा - वैद्य जी की डायरी # 13


वैद्य जी की डायरी में आज मैं बताऊंगा लो ब्लड प्रेशर या निम्न रक्तचाप को दूर करने वाले आयुर्वेदिक योग के बारे में. जी हाँ दोस्तों, कई लोगों को लो ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम होती है और आपमें से कई लोग अक्सर मुझसे पूछते भी रहते हैं इसकी दवा के बारे में, तो आईये जानते हैं लो BP को दूर करने वाले आयुर्वेदिक योग के बारे में विस्तार से -


कई लोग BP बढ़ाने के लिए नमक ज़्यादा खाते हैं जिस से कुछ टाइम के लिए ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, पर ज़्यादा नमक खाने से कई तरह के दुसरे नुकसान भी हो सकते हैं, इस बात को समझ लीजिये. आज जो योग मैं बता रहा हूँ यह बिल्कुल टेस्टेड और 100% इफेक्टिव है, इसका नाम मैंने रखा है -

निम्न रक्तचापनाशक योग - 

इसके लिए आपको चाहिए होगा रस सिन्दूर 2.5gm + लौह भस्म शतपुटी 2.5gm + अभ्रक भस्म शतपुटी 2.5gm + शुद्ध कुचला चूर्ण 2.5gm + शुद्ध शिलाजीत 5gm

सबसे पहले रस सिन्दूर को खरल में डालकर अच्छी तरह से पिस लें उसके बाद दूसरी चीज़ों को अच्छी तरह से मिक्स बराबर मात्रा की 30 पुड़िया बनाना है. 

एक-एक पुड़िया सुबह-शाम शहद से खाकर आधे घंटे के बाद द्राक्षासव + लोहासव + बलारिष्ट तीनो दो-दो स्पून एक कप पानी में मिक्स कर लेना चाहिए. यह व्यस्क व्यक्ति के लिए डोज़ बताया गया है. सारी दवाएं भोजन के बाद ही लेना है. 

यहाँ पर दो बातों का ध्यान रखें -

(1) अगर पित्त बढ़ा हो और पित्त प्रकृति वाले हों तो शुद्ध कुचला चूर्ण इसमें शामिल न करें. 

(2) और दूसरी बात यह कि इस योग को शहद के साथ खाने से भी मुँह का टेस्ट कड़वा हो जाता है शुद्ध कुचला मिला होने से, चाहें तो इसकी गोली बनाकर या फिर कैप्सूल में भरकर निगल सकते हैं. 

बताया गया योग हमारे चिकित्सक साथी, वैद्य, हकीम और आयुर्वेद के छात्रों के लिए बेहद उपयोगी रहेगा. अपने दर्शकों से कहना चाहूँगा कि अगर आपको लो ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है तो बताया गया योग स्थानीय वैद्य जी की देख रेख में ही यूज़ करें.

तो दोस्तों वैद्य जी की डायरी में आज इतना ही, उम्मीद आज की जानकारी आपको पसंद आयेगी, तो एक लाइक और शेयर तो बनता है. 

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21 September 2018

Prameh Gajkeshri Ras | प्रमेहगजकेशरी रस


प्रमेहगजकेशरी रस शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जो प्रमेह, धात की समस्या, मधुमेह या डायबिटीज, पेशाब की जलन, पत्थरी और बॉडी की गर्मी जैसी कई तरह की बीमारियों में बेहद असरदार है. तो आईये जानते हैं प्रमेहगजकेशरी रस का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से - 

प्रमेहगजकेशरी रस के बारे में आयुर्वेदिक ग्रंथों में दो तरह का योग बताया गया है. पहला है स्वर्णभस्म वाला और दूसरा है बिना स्वर्ण भस्म का साधारण वाला. स्वर्णयुक्त ही सबसे ज़्यादा इफेक्टिव होता है. सबसे पहले स्वर्णभस्म वाले का कम्पोजीशन जानते हैं -

प्रमेहगजकेशरी रस स्वर्णयुक्त -

स्वर्ण भस्म, वंग भस्म, कान्त लौह भस्म, रस सिन्दूर, मोती पिष्टी या भस्म, दालचीनी, छोटी इलायची, तेजपात और नागकेशर का चूर्ण सभी को बराबर वज़न में लेकर घृतकुमारी के रस में खरल कर 125 मिलीग्राम की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यह रसेन्द्र सार संग्रह का योग है.

प्रमेहगजकेशरी रस साधारण -

इसके लिए चाहिए होता है लौह भस्म, नाग भस्म और बंग भस्म प्रत्येक एक-एक भाग, अभ्रक भस्म चार भाग, शुद्ध शिलाजीत पांच भाग और गोखरू का चूर्ण छह भाग लेकर अच्छी तरह से मिक्स कर निम्बू के रस में सात दिनों तक खरलकर एक-एक रत्ती या 125 मिलीग्राम की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लें. 

प्रमेहगजकेशरी रस के फ़ायदे- 

प्रमेह और मधुमेह यानि शुक्रस्राव या धात की समस्या और डायबिटीज के लिए यह आयुर्वेद की महान औषधियों में से एक है. 

स्वर्णयुक्त प्रमेहगजकेशरी रस डायबिटीज में इन्सुलिन की तरह तेज़ी से असर करता है. इसी तरह प्रमेह और धतुस्राव या धात गिरने को या तीन दिनों में रोक देता है ऐसा शास्त्रों में कहा गया है. 

ज्यादा प्यास लगना, मुंह सुखना, ज़्यादा पेशाब होना, भूख की कमी जैसी डायबिटीज से रिलेटेड प्रॉब्लम इस से दूर होती है.

पेशाब की जलन, खुलकर पेशाब नहीं होना, पेशाब की नली में रुकावट होने में असरदार है.

प्रमेहगजकेशरी रस की मात्रा और सेवन विधि -

एक-एक गोली सुबह शाम पानी या गुडमार के क्वाथ से लेना चाहिए. ऑनलाइन ख़रीदें निचे दिए लिंक से -

Pramehagaj Kesari (50 Tablets)


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19 September 2018

Babularishta | बब्बूलारिष्ट के फ़ायदे


बब्बूलारिष्ट क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो खाँसी, दमा, टी.बी., थायसीस, रक्तपित्त, पेशाब के रोग और खून की ख़राबी जैसी कई तरह की बीमारियों में असरदार है, तो आईये जानते हैं बब्बूलारिष्ट का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से - 

बब्बूलारिष्ट के घटक या कम्पोजीशन-

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक बबूल होता है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बबूल की छाल, गुड़, धाय के फूल, पिपल, जायफल, लौंग, कंकोल, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेशर और काली मिर्च से मिश्रण से आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव-अरिष्ट निर्माण विधि से बनाया जाता है. 

बब्बूलारिष्ट के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह कफ़-पित्त नाशक, रक्तशोधक और रक्तरोधक भी है. इसमें Antitussive, Anti-inflammatory, Styptic और पाचक जैसे गुण पाये जाते हैं. 

बब्बूलारिष्ट के फ़ायदे- 

खाँसी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, टी. बी. थाईसीस, मूत्ररोग और रक्तविकार यानि स्किन डिजीज में आयुर्वेदिक डॉक्टर इसका प्रयोग कराते हैं.

टी.बी. वाली खाँसी जिसमे कफ़ के साथ ब्लड निकलता हो साथ में कमज़ोरी, बुखार और भूक की कमी हो तो इसका सेवन करना चाहिए.

पेशाब की जलन, नाक मुंह से खून आने या रक्तपित्त, फोड़े-फुंसी और दुसरे स्किन डिजीज में सहायक औषधियों के साथ लेने से फ़ायदा होता है.

बब्बूलारिष्ट की मात्रा और सेवन विधि -

15 से 30ML तक बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर खाना के बाद सुबह शाम लेना चाहिय या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसका डोज़ लेना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा होती है जिसे बच्चे-बड़े सभी यूज़ कर सकते हैं सही डोज़ में. बैद्यनाथ के 450ML की क़ीमत 126 रुपया है. 

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17 September 2018

Bol Parpati | बोल पर्पटी के फ़ायदे जानिए


बोल पर्पटी क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो रक्त प्रदर, पीरियड में ज़्यादा ब्लीडिंग होना, ख़ूनी बवासीर और ब्लीडिंग वाली बीमारियों में असरदार है. तो आइये जानते हैं बोल पर्पटी का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

बोल पर्पटी का कम्पोजीशन- 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक बोल नाम की औषधि है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक एक-एक भाग और बोल दो भाग के मिश्रण से बनाया जाता है.

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पारा और गंधक को खरलकर कज्जली बना ली जाती है और उसके बोल को मिक्स कर कड़ाही में डालकर पिघलने तक गर्म किया जाता है. इसके बाद केले के पत्ते पर इसे फैलाकर ऊपर से दूसरा केले का पत्ता डालकर दबा दिया जाता है, जिस से पपड़ी की तरह बन जाये. पपड़ी को ही आयुर्वेद में पर्पटी का नाम दिया गया है. 

आयुर्वेदानुसार बोल पर्पटी पित्त दोष को कम करती है. यह रक्तपित्त नाशक और रक्तरोधक या खून  बंद करने वाले गुणों से भरपूर होती है. 

बोल पर्पटी के फ़ायदे - 

जैसा कि शुरू में ही बताया गया है रक्त प्रदर, पीरियड की हैवी ब्लीडिंग, नकसीर, ख़ूनी बवासीर और ब्लीडिंग वाली दूसरी बीमारियों में इसका प्रयोग किया जाता है. 

बोल पर्पटी की मात्रा और सेवन विधि - 

125mg से 250mg तक रोज़ दो-तीन बार तक शहद या मिश्री के साथ लेना चाहिए. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही सही मात्रा में लेना चाहिए क्यूंकि हैवी मेटल वाली दवा है, ग़लत डोज़ होने से नुकसान भी हो सकता है. बैद्यनाथ के 5 ग्राम की क़ीमत 58 रुपया है. 


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12 September 2018

Brahmi Ghrita | ब्राह्मी घृत


ब्राह्मी घृत क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो दिमाग की बीमारियों के लिए असरदार है. इसके इस्तेमाल से एकाग्रता या कंसंट्रेशन, बुद्धि, सिखने की क्षमता और मेमोरी पॉवर बढ़ती है. चिंता, तनाव, स्ट्रेस, मानसिक थकान, मृगी और मानसिक रोगों में भी असरदार है. इसे ब्राह्मी घृत और ब्राह्मी घृतम के नाम से भी जाना जाता है, तो आईये जानते हैं ब्राह्मी घृत का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

ब्राह्मी घृत जो घी के तरह मेडिकेटेड घी वाली दवा है जिसका मेन इनग्रीडेंट ब्राह्मी नाम की बूटी होती है. 

ब्राह्मी घृत का कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें ब्राह्मी स्वरस, गाय का घी के अलावा त्रिकटु, त्रिवृत, दन्तीमूल, शंखपुष्पि,हल्दी, बच, कुठ, मोथा जैसी चीज़ें मिली होती हैं. जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस घृत पाक विधि से बनाया जाता है. अलग-अलग ब्रांड्स का कम्पोजीशन थोड़ा डिफरेंट होता है परन्तु घी और ब्राह्मी का जूस की सबका मेन इनग्रीडेंट होता है. कम्पोजीशन डिफरेंट होने की वजह यह है कि आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका योग अलग-अलग बताया गया है. 

ब्राह्मी घृत के गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह वात और पित्त नाशक है. यह मेमोरी बूस्टर, एंटी स्ट्रेस, एंटी डिप्रेशन, ब्रेन टॉनिक, एन्टी कैंसर और आक्षेप नाशक यानि Anticonvulsant जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

ब्राह्मी घृत के फ़ायदे -

चिंता, तनाव, स्ट्रेस, मानसिक थकान, बोलने और उच्चारण में समस्या होना, यादाश्त की कमज़ोरी, स्नायु दुर्बलता यानि Nervous Weakness और मृगी जैसी बीमारियों में यह असरदार है.

पंचकर्म में भी ब्राह्मी घृत का प्रयोग किया जाता है. 

ब्राह्मी घृत की मात्रा और सेवन विधि - 

10ML रोज़ सुबह एक बार ख़ाली पेट लेना चाहिए. बच्चों बहुत कम मात्रा में एक से ढाई ML तक ही देना चाहिए. बुजुर्गों को 5ML से ज़्यादा नहीं देना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ दवा है उम्र के मुताबिक़ सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. प्रेगनेंसी में दूध पिलाने वाली माताएँ भी कम डोज़ में इसे ले सकती हैं. डॉक्टर की सलाह से ही लेना बेस्ट है. ज़्यादा डोज़ होने से पेट का भारीपन, भूख की कमी और दस्त जैसी प्रॉब्लम हो सकती है. बैद्यनाथ के 100ML की क़ीमत 275 रुपया है. अलग-अलग कम्पनियों का प्राइस अलग है. ब्राह्मी घृत ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 
https://goo.gl/GkZ5kx 


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08 September 2018

Mahamash Tail | महामाष तेल (निरामिष)


महामाष तेल शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जो वातरोगों में असरदार है. इसकी मालिश से मसल्स को ताक़त मिलती है, जोड़ों का दर्द, सुजन, जकड़न, लकवा, पक्षाघात, साइटिका और आमवात में फ़ायदा होता है. तो आइये जानते हैं महामाष तेल का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल -

महामाष तेल के घटक या कम्पोजीशन- 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक माष यानि उड़द की दाल होती है जिसे तिल तेल के बेस पर बनाया जाता है. इसे महामाष तेल निरामिष भी कहते हैं, दुसरे तेल में नॉन वेज मटेरियल भी होता है, पर इसमें नहीं. 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - माष, तिल का तेल, गाय का दूध, दशमूल, एरण्ड मूल, बला, जेठीमध, देवदार, इलायची, रासना, जटामांसी, खरेटी, घोड़बच, सोया, कचूर, सोंठ, मिर्च पीपल, अगर, पुनर्नवा, सेंधा नमक, विदारीकन्द, प्रसारनी और अश्वगन्धा जैसी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस तेलपाक विधि से तेल सिद्ध किया जाता है. 

महामाष तेल के फ़ायदे- 

यह हर तरह के वात रोगों में फ़ायदेमंद है, जोड़ों का दर्द, मसल्स का दर्द, जकदन, गठिया, आमवात, कम्पवात, एकांगवात, अर्धांगवात, लकवा, पक्षाघात, बॉडी में कहीं भी होने वाला मसल्स और हड्डी का दर्द जैसे  हर तरह के दर्द वात व्याधि में इसकी मालिश करनी चाहिए. 

कान में सांय-सांय की आवाज़ होना, घंटी बजना, Tinnitus में इसे कान में डालना चाहिए. 

शीघ्रपतन और लिंग की कमज़ोरी में भी इसकी मालिश से फ़ायदा होता है. 

महामाष तेल की प्रयोग विधि -

प्रयाप्त मात्रा में इस तेल को लेकर पीड़ित स्थान पर रोज़ दो-तीन बार मालिश करनी चाहिए. यह बिल्कुल सेफ तेल है, सभी लोग इसकी मालिश कर सकते हैं. डाबर के 50ML की क़ीमत 290 रुपया है जबकि कामधेनु के 100ML की क़ीमत सिर्फ 188 रुपया है, इसे ऑनलाइन खरीदें निचे दिए लिंक से - 




इसे भी जानिए -





31 August 2018

Panchamrit Parpati | पंचामृत पर्पटी संग्रहणी की आयुर्वेदिक औषधि


पंचामृत पर्पटी एक तरह की पपड़ी वाली दवा है जिसे स्पेशल तरीके से बनाया जाता है जिसमे केले के ताज़े पत्ते का इस्तेमाल होता है.

पंचामृत पर्पटी के घटक या कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें शुद्ध पारा- 48 ग्राम, शुद्ध गंधक-96 ग्राम, अभ्रक भस्म-12 ग्राम, लौह भस्म-24 ग्राम और ताम्र भस्म- 12 ग्राम जैसी चीजें मिली होती हैं.

पंचामृत पर्पटी निर्माण विधि -

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पहले शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक को खरल में डालकर कज्जली बना लें. इसके बाद दुसरे भस्मों को मिक्स कर लोहे के बर्तन में डालकर पिघलने तक गर्म करना होता है. इसके बाद एक प्लेट में केले के ताज़े पत्ते के ऊपर पिघली हुयी दवा को डालकर फैला दें और ऊपर से केले का दूसरा पत्ता डालकर दबा दें. इस तरह से दवा फैलकर पपड़ी की तरह हो जाती है. ठंडा होने पर पीसकर रख लिया जाता है. 

पंचामृत पर्पटी के फ़ायदे- 

संग्रहणी, IBS और दस्त में ही इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है, और यह काफी असरदार भी है. 

दिन में कई बार पॉटी जाना, अपच और एसिडिटी में उचित अनुपान से लेने से अच्छा लाभ होता है. 

ब्लीडिंग वाले रोग जैसे खुनी बवासीर, नाक-मुंह से खून आना और रक्त प्रदर में भी इस से फायदा होता है. 

पंचामृत पर्पटी की मात्रा और सेवन विधि - 

125mg से 375mg तक दिन में दो बार भुने हुवे जीरे के चूर्ण और शहद के साथ मिक्स चाटना चाहिए और ऊपर से छाछ पीना चाहिए. बैद्यनाथ के 10 ग्राम की क़ीमत 121 रुपया है जिसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 
Panchamrit Parpati (10 grams)

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29 August 2018

Aanandda Vati | आनन्ददा वटी के फ़ायदे जानिए


आनन्ददा वटी क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो पुरुषों के बल, वीर्य, वर्ण और मैथुन शक्ति को बढ़ाती है. तो आईये जानते हैं आनन्ददा वटी का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

आनन्ददा वटी के घटक या कम्पोजीशन- 

इसे बनाने के लिए चाहिए होता है शुद्ध अहिफेन, रस सिन्दूर प्रत्येक 10-10 ग्राम, उत्तम कस्तूरी, कपूर 3-3 ग्राम, काली मिर्च का चूर्ण 10 ग्राम, जायफल चूर्ण, जावित्री चूर्ण, केसर और  शुद्ध हिंगुल प्रत्येक 6-6 ग्राम लेना होता है.

आनन्ददा वटी निर्माण विधि -

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पहले रस सिन्दूर को अच्छी तरह से खरल करने के बाद दूसरी चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर खरलकर भाँग के पत्तों के रस की तीन भावना देने के बाद दो-दो रत्ती या 250mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लें. यही आनन्ददा वटी है, यह बनी बनाई मार्केट में नहीं मिलती है. कस्तूरी तो अब दुर्लभ है और अहिफेन भी बैन है. योग्य वैद्य ही इसे बना सकते हैं वैकल्पिक औषधियों के मिश्रण से.


आनन्ददा वटी की मात्रा और सेवन विधि - 

एक गोली सोने से एक घंटा पहले मलाई, दूध या फिर पान में पत्ते में रखकर खाना चाहिए.

आनन्ददा वटी के फ़ायदे-

इसके सेवन से पॉवर-स्टैमिना और लिबिडो बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है. बल, वीर्य की वृद्धि होती है और पाचक अग्नि भी बढ़ जाती है.

शास्त्रों के अनुसार मैथुन से एक घंटा पहले एक गोली मलाई के साथ सेवन करने से पुरुष मदमस्त स्त्रियों के साथ इच्छानुसार रमण कर सकता है. 

वीर्य स्तम्भन और बल वृद्धि के लिए कुछ दिनों तक मलाई या दूध के साथ इसका सेवन करना चाहिए. यानी PE और ED के लिए यह एक इफेक्टिव दवा है. 




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23 August 2018

Panna Bhasma Benefits & Use | पन्ना भस्म के फ़ायदे


पन्ना भस्म क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो एक तरह के पत्थर से बनायी जाती है. पन्ना को ही एमेराल्ड के नाम से जाना जाता है. पन्ना भस्म जो है दिमाग की बीमारी, अस्थमा, दिल की बीमारी, धड़कन, एसिडिटी, चक्कर, उल्टी, पेशाब की जलन और पेशाब के रोगों में असरदार है. तो आईये जानते हैं पन्ना भस्म के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल - 

पन्ना भस्म के घटक या कम्पोजीशन -

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो पन्ना नाम रत्न जो कि एक तरह का स्टोन है वही इसका मेन इनग्रीडेंट होता है. पन्ना हल्के हरे रंग का कीमती पत्थर होता है जिसे लोग अंगूठी में भी पहनते हैं. शोधन मारण जैसे आयुर्वेदिक प्रोसेस के बाद इसे अग्नि देकर भस्म बनाया जाता है. 

पन्ना भस्म के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह तासीर में सहित या ठंडा होता है. वात-पित्त नाशक, Antacid, Anti Emetic, Cardio protective और Digestive जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

पन्ना भस्म के फ़ायदे  - 

वैसे तो यह कई तरह की बीमारियों में असरदार है परन्तु आयुर्वेदिक डॉक्टर लोग इसे दिमाग की बीमारी, नर्वस सिस्टम की कमजोरी, पेशाब की प्रॉब्लम, धड़कन और हार्ट से रिलेटेड बीमारी, पित्त बढ़ने, उल्टी-चक्कर और पेट की बीमारियों के लिए ही यूज़ करते हैं. 


पन्ना भस्म की मात्रा और सेवन विधि - 

125mg सुबह शाम शहद से या फिर रोगानुसार उचित औषधि और अनुपान के साथ लेना चाहिए. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही सही डोज़ में यूज़ करें, नहीं तो सीरियस नुकसान भी हो सकता है. 





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15 August 2018

Narshingh Churna | नारसिंह चूर्ण के फ़ायदे जानिए


कमज़ोर आदमी को शेर जैसी ताक़त देने वाली दवा है नारसिंह चूर्ण. यह वात रोगों को दूर करने वाली, बल-वीर्य बढ़ाने वाली और उत्तम बाजीकरण औषधि है जो बुढ़ापे के लक्षणों को दूर कर देती है. तो आइये जानते हैं नारसिंह चूर्ण के कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

नारसिंह चूर्ण के घटक एवम निर्माण विधि - 

शतावर, धोये  हुवे तिल, विदारीकन्द और गोखरू प्रत्येक 64-64 तोला, वराहीकन्द 80 तोला, गिलोय 100 तोला, शुद्ध भिलावा 128 तोला, चित्रकमूल छाल 40 तोला, दालचीनी, तेजपात और छोटी इलायची प्रत्येक 11-11 तोला और मिश्री 280 तोला.
बनाने का तरीका यह है कि सभी को कुटपिसकर कपडछन चूर्ण बनाकर एयर टाइट डब्बे में रख लें. 


नारसिंह चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि -

तीन ग्राम इस चूर्ण को सुबह-शाम एक स्पून घी और दो स्पून शहद के साथ मिक्स कर खाएं और ऊपर से गाय का दूध पियें. यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है. इसका सेवन करते हुवे दूध, घी और मक्खन मलाई ज़्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही इसे यूज़ करना चाहिए. 

नारसिंह चूर्ण के फ़ायदे- 

यह चूर्ण हर तरह के वात रोगों के असरदार है. यह उत्तम बलकारक, बाजीकरण और रसायन है. 

काम शक्ति की कमी, आलस, कमज़ोरी, बल-वीर्य की कमी, नामर्दी, शुक्राणुओं की कमी जैसी पुरुषरोग दूर हो जाते हैं इस चूर्ण के प्रयोग से. 

इस से पाचन शक्ति ठीक होती है और भूख बढ़ती है. 

इसे आप आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं  निचे दिए लिंक से- 



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