आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी बूटी की जानकारी और बिमारियों को दूर करने के आयुर्वेदिक फ़ार्मूले और घरेलु नुस्खे की जानकारी हम यहाँ आपके लिए प्रस्तुत करते हैं

21 January 2018

केशकुन्तल टेबलेट | Keshkuntal Tablets Hair Loss Supplement, Hair Care Scalp and Baldness


केशकुन्तल टेबलेट एक नेचुरल हेयर सप्लीमेंट है जो बालों की हर तरह की प्रॉब्लम को दूर करता है. इसके इस्तेमाल से बालों का गिरना और टाइम से पहले सफ़ेद होना रुकता है. बालों को लम्बा, मज़बूत और चमकदार बनाता है. तो आईये जानते हैं केशकुन्तल टेबलेट का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

व्यास फार्मा का केशकुन्तल टेबलेट जड़ी-बूटी और भस्मों के कॉम्बिनेशन से बनाया गया है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

आमलकी रसायन, श्रिंग भस्म, कुमास्थी भस्म, प्रवाल भस्म, शंख भस्म, शुक्ति भस्म, लौह भस्म, मंडूर भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, कुक्कुटान्त्वक भस्म, अश्वगंधा और शतावरी के मिश्रण से बनाया गया है. 


केशकुन्तल टेबलेट के फ़ायदे- 

बालों का गिरना रोकता है और जड़ों को मज़बूत करता है. 

समय से पहले बालों को सफ़ेद होने से रोकता है और समय से पहले सफ़ेद हो चुके बालों को काला करने में मदद करता है. 

नए बाल उगाने में मदद करता है जिसे से गंजापन में भी फ़ायदा होता है. बालों को काला, मज़बूत और चमकदार बनाता है.

कुल मिलाकर देखा जाये तो यह एक बेहतरीन हेयर टॉनिक और हेयर सप्लीमेंट है जिसे औरत-मर्द, बच्चे-बड़े सभी यूज़ कर सकते हैं. 


केशकुन्तल टेबलेट की मात्रा और सेवन विधि - 

दो टेबलेट सुबह शाम पानी से भोजन के बाद कम से कम तीन महीने तक लेना चाहिए. बच्चों को कम डोज़ में देना चाहिए. 

इसके इस्तेमाल करते हुवे केशकुन्तल पाउडर से बालों को धोएं और 'महा भृंगराज तेल' बालों में लगाना चाहिए. इसके 100 टेबलेट की क़ीमत 175 रुपया के कारीब है, इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं. 



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20 January 2018

बैद्यनाथ पंचासव के फ़ायदे | Baidyanath Panchasava Benefits & Use in Hindi


पंचासव जो है बैद्यनाथ का एक प्रोडक्ट है जो पेट की बीमारियों के लिए असरदार है, इसके इस्तेमाल से गैस, कब्ज़, एसिडिटी, पेट दर्द और अपच जैसे पाचन सम्बन्धी रोग दूर होते हैं. तो आईये जानते हैं पंचासव का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल- 

पंचासव जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसमें पाँच तरह के आसव/रिष्ट मिला होता है यानि पांच तरह के आयुर्वेदिक सिरप का मिश्रण है यह. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें -

द्राक्षासव 

कुमार्यासव 

लोहासव 

बलारिष्ट और 

दशमूलारिष्ट का मिश्रण होता है. 

इन पाँच तरह के आयुर्वेदिक दवाओं का कॉम्बिनेशन इसे एक बेहद असरदार औषधि बना देता है. इन पाँचों आसव और रिष्ट की अलग-अलग जानकारी आप हमारे चैनल और वेबसाइट पर देख सकते हैं. 


पंचासव के फ़ायदे- 

भूख की कमी, पाचन की कमज़ोरी, गैस, डकार आना, एसिडिटी, कब्ज़, खून की कमी, सामान्य कमज़ोरी, थकान जैसी प्रॉब्लम में इसका इस्तेमाल करना चाहिए. 

पंचासव न सिर्फ Digestion की प्रॉब्लम को दूर करता है बल्कि यह एक टॉनिक की तरह भी काम करता है. 

यह लीवर के फंक्शन को ठीक कर देता है, भूख बढ़ाता है और पाचन तंत्र को मज़बूत बना देता है. 

खून की कमी को दूर करता है, शरीर को शक्ति देता है और ताक़त बढ़ाता है. बीमारी के बाद इसका इस्तेमाल करने से कमज़ोरी दूर हो जाती है. 

कुल मिलाकर देखा जाये तो पंचासव एक बेहतरीन Digestive Tonic है जो ओवरआल हेल्थ को इम्प्रूव कर देता है. 


पंचासव की मात्रा और सेवन विधि - 

15 से 30 ML तक सुबह शाम खाना के बाद बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर लेना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, बच्चे-बड़े सभी यूज़ कर सकते हैं बस उम्र के मुताबिक़ सही डोज़ होना चाहिए. इसके 450 ML की क़ीमत क़रीब 115 रुपया है. 


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18 January 2018

Loknath Ras Vrihat | लोकनाथ रस वृहत् लीवर स्प्लीन और पेट के रोगों की औषधि


लोकनाथ रस एक क्लासिकल रसायन औषधि है जो लीवर, स्प्लीन, पेट का ट्यूमर, दर्द, सुजन और पाचन सम्बन्धी पेट के रोगों को दूर करती है. तो आईये जानते हैं लोकनाथ रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

आयुर्वेद में रस या रसायन औषधियां तेज़ी से असर करने वाली होती हैं और इनमे अक्सर शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक मिला होता है. लोकनाथ रस के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

शुद्ध पारा एक भाग, शुद्ध गंधक दो भाग, अभ्रक भस्म एक भाग, लौह भस्म और ताम्र भस्म प्रत्येक दो-दो भाग और कपर्दक भस्म नौ भाग का मिश्रण होता है. 

बनाने का तरीका यह होता है कि पारा-गंधक की कज्जली बनाकर अभ्रक भस्म मिलायें और ग्वारपाठे के रस  की भावना देकर मर्दन करें. उसके बाद दुसरे भस्मों को मिक्स कर मकोय के रस की भावना देकर मर्दन करें और जब गोला या टिकिया बनाने लायक हो जाये तो टिकिया बनाकर सुखा लें. इसके बाद सराब-सम्पुट में बंद कर लघुपुट की अग्नि देनी होती है. 

पूरी तरह से ठंडा होने पर अच्छी तरह से खरल कर रख लें. यह भैषज्य रत्नावली में बताया गया तरीका है. यह दो तरह का होता है- वृहत लोकनाथ रस और दूसरा लोकनाथ रस. वृहत वाला ज़्यादा इफेक्टिव है इसीलिए इसकी जानकारी यहाँ दे रहा हूँ. 


वृहत लोकनाथ रस के फ़ायदे - 

लीवर और स्प्लीन के बढ़ जाने और लीवर-स्प्लीन की दूसरी हर तरह की प्रॉब्लम के लिए यह बेहद असरदार दवा है. 

गुल्म(Abdominal lump, Tumor), पेट के अन्दर ट्यूमर या सिस्ट होना, सुजन वगैरह को दूर करता है. यह digestive सिस्टम को सही कर पाचन शक्ति ठीक कर देता है. 

इन सब के अलावा पुराना बुखार, अतिसार और पेट की दूसरी बीमारियों में भी यह असरदार है. 


वृहत लोकनाथ रस की मात्रा और सेवन विधि - 

125 mg से 250 mg  तक शहद + पिप्पली चूर्ण के साथ. सर्पुन्खामूल चूर्ण या गोमूत्र से भी ले सकते हैं. या फिर डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए. इसके साथ में कुमार्यासव लेने से अच्छा लाभ मिलता है. वृहत लोकनाथ रस आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं. 



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17 January 2018

Himalaya Styplon Benefits | हिमालया स्टिपलोन के फ़ायदे


हिमालया स्टिपलोन हर्बल मेडिसिन है जो बॉडी में कहीं से भी होने वाली ब्लीडिंग को रोकता है. तो आईये जानते हैं हिमालया स्टिपलोन का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

हिमालया स्टिपलोन जड़ी-बूटियों और भस्मों के कॉम्बिनेशन से बनाया जाता है, इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - वसाका, आमलकी, दूर्वा, नागकेसर, लज्जालु, लोध्र, चन्दन, अनन्तमूल, प्रवाल पिष्टी, त्रिनकान्तमणि पिष्टी और सौराष्ट्री भस्म का मिश्रण होता है. 

इसमें मिलायी गयी जड़ी-बूटियां ब्लीडिंग रोकने में बेहद असरदार हैं.


हिमालया स्टिपलोन के फ़ायदे- 

ब्लीडिंग वाली हर तरह की बीमारी में इसका इस्तेमाल किया जाता है. 

मसूड़ों से खून आना, पाइल्स की ब्लीडिंग, नकसीर या नाक से खून आना, पेशाब से खून आना, Uterine ब्लीडिंग और पीरियड की Excessive ब्लीडिंग में इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है. 

कुल मिलाकर समझ लीजिये कि ब्लीडिंग वाली किसी भी बीमारी में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. 


हिमालया स्टिपलोन का डोज़- 

2-2 टेबलेट रोज़ तीन बार पानी से कम से कम पांच दिन या फिर डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना चाहिए. इसका ऑलमोस्ट कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है, इसके 30 टेबलेट के पैक की क़ीमत करीब 75 रुपया है. इसे मेडिकल स्टोर से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं निचे दिए लिंक से- 




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16 January 2018

Jawarish Mastagi Benefits & Usage | जवारिश मस्तगी के फ़ायदे और इस्तेमाल


जवारिश मस्तगी पेट की बीमारियों की दवा है जो दस्त, लीवर की कमज़ोरी को दूर कर हाजमा ठीक करती है, तो आईये जानते हैं जवारिश मस्तगी का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

जवारिश मस्तगी के कम्पोजीशन की बात करें तो इसे रूमी मस्तगी, अर्क गुलाब और कंद सफ़ेद मिलाकर बनाया जाता है. यह यूनानी मेडिसिन की जवारिश कैटेगरी की दवा है. 


जवारिश मस्तगी के फ़ायदे- 

यह पेट, लीवर और आँतों को ताक़त देती है, हाजमा की कमज़ोरी की वजह से होने वाले दस्त को रोकती है. ज्यादा पेशाब होना, मुंह का मज़ा ख़राब होना, ज़्यादा राल बनना जैसी प्रॉब्लम दूर करती है. 

यह लीवर के फंक्शन को सही करती है, भूख बढ़ाती है और Digestion को ठीक कर देती है. 

जवारिश मस्तगी का डोज़ - 

 5 से 10 ग्राम तक सुबह शाम अर्क बादियान या पानी से लेना चाहिए. हमदर्द, रेक्स जैसी कंपनियों की यह दवा यूनानी दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ले सकते हैं. 



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15 January 2018

गुग्गुल क्या है? गुग्गुल के फ़ायदे और शुद्ध करने का तरीका


गुग्गुल जो है एक तरह का गोंद है जो गुग्गुल वृक्ष से निकलता है. इसे गुग्गुल, गुग्गुलु, देवधूप, जैसे नामों से जाना जाता है. गुग्गुल को अंग्रेजी में Commiphora Mukul कहा जाता है. यह बड़े कमाल की चीज़ है, इसे कई तरह की आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है. गुग्गुल को धुवन की तरह भी आग में जलाया जाता है जिस से वातावरण शुद्ध होता है. इसे पूजा-पाठ और हवन में इस्तेमाल किया जाता है. 
आयुर्वेदानुसार गुग्गुल जो है तासीर में गर्म, कफ़, वात, कृमि और अर्श नाशक होता है. 

गुग्गुल को खाने में इस्तेमाल करने से पहले शोधित करना होता है, शुद्ध गुग्गुल को ही आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है. आईये जानते हैं गुग्गुल शोधित करने की विधि के बारे में - 

पंसारी की दुकान में गुग्गुल मिल जाता है, पर महँगा होने की वजह से इसमें कई तरह की मिलावट भी होती है, इसमें इसकी तरह के दुसरे गोंद भी मिले होते हैं. 
सबसे पहले तो इसमें जो मिट्टी या कंकड़-पत्थर दिखे, उसे निकाल दें. गुग्गुल शोधन के लिए त्रिफला और ताज़ी गिलोय भी चाहिए होती है.

अगर आपको एक किलो गुग्गुल शुद्ध करना है तो एक किलो त्रिफला और दो किलो ताज़ी गिलोय चाहिए होगी. त्रिफला और गिलोय को मोटा-मोटा कूटकर 12 लीटर पानी में काढ़ा बनायें. जब चार लीटर पानी बचे तो छानकर इस काढ़े को एक कड़ाही में डालकर आंच पर चढ़ाएँ. 

अब गुग्गुल को कपड़े की एक पोटली में बाँधकर उबलते हुवे काढ़े में रखना है, ताकि गुग्गुल घुल-घुलकर काढ़े में आ जाये. 


ओरिजिनल गुग्गुल पोटली से घुलकर काढ़े में आ जाता है, बाकी दूसरी मिलावटी चीज़ें और दुसरे गोंद पोटली में रह जाते हैं. जब गुग्गुल घुलकर काढ़े में आ जाये तो काढ़े को उबालते हुवे गाढ़ा कर लें, जब हलवे की तरह हो जाये तो धुप में सुखाकर रख लें. लोहे की कड़ाही में बनाया गया शुद्ध गुग्गुल काले रंग का होता है. 

गुग्गुल शोधन का एक दूसरा तरीका यह भी होता है कि त्रिफला और गिलोय के काढ़े में डायरेक्ट गुग्गुल को डाल दें और जब घुल जाये तो काढ़े के ऊपर मलाई की तरह जमने वाली परत को जमा करना होता है और फिर उसे गाढ़ा कर सुखा लिया जाता है और कढ़ाही के तले में बचने वाले कचरे को फेक दिया जाता है. पर जहाँ तक मेरा एक्सपीरियंस है पोटली वाला तरीका आसान होता है. 


तो दोस्तों, यही है गुग्गुल शुद्ध करने का तरीका! 

शुद्ध गुग्गुल में ही जड़ी-बूटियों का चूर्ण और भस्मों को मिलाकर कई तरह के आयुर्वेदिक गुग्गुल बनाये जाते हैं, जिनकी जानकारी मैं अक्सर देते रहता हूँ. 

अकेले शुद्ध गुग्गुल को कम ही इस्तेमाल किया जाता है, इसे मिलाकर बनायी गयी दवा ही सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाती है. 

गुग्गुल जो है हर तरह के दर्द, सुजन, मोटापा से कोलेस्ट्रॉल जैसी कई तरह की बीमारियों को दूर करता है. 



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13 January 2018

शिलाप्रवंग स्पेशल टेबलेट | Shilapravang Special Details in Hindi


शिलाप्रवंग स्पेशल टेबलेट आयुर्वेदिक दवा कम्पनी धूतपापेश्वर का पेटेंट ब्रांड है जिसे शीघ्रपतन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन और Oligospermia जैसे पुरुष यौन रोगों में प्रयोग किया जाता है. तो आईये जानते हैं शिलाप्रवंग स्पेशल टेबलेट का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

शिलाप्रवंग स्पेशल टेबलेट जड़ी-बूटियों के अलावा सोना, मोती, मकरध्वज जैसे कीमती भस्मों के मिश्रण से बनाया गया है.  इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसके हर टेबलेट में - 

शुद्ध शिलाजीत - 40mg, प्रवाल भस्म- 20mg, वंग भस्म- 20mg, स्वर्णमाक्षिक भस्म- 20mg, गिलोय सत्व- 20mg, अश्वगंधा- 60mg, शतावर- 15mg, गोक्षुर- 15mg, बला- 15mg, आँवला-10mg, अकरकरा- 10mg, जायफल- 5mg, कपूर- 5mg, लता कस्तूरी- 20mg, कौंच बीज- 90mg, मकरध्वज- 10 mg, स्वर्ण भस्म- 1mg और मुक्ता पिष्टी- 1mg का मिश्रण होता है. 


शिलाप्रवंग के फ़ायदे- 

शिलाप्रवंग स्पेशल टेबलेट पुरुष यौन रोगों की एक असरदार दवा है इसके बेहतरीन कम्पोजीशन की वजह से. 

पुरुषों की बहुत की कॉमन प्रॉब्लम PE, ED, स्वप्नदोष, वीर्य का पतलापन में इसका इस्तेमाल किया जाता है. 

यह शारीरिक मानसिक थकान, कमज़ोरी, चिंता, तनाव को दूर कर यौन शक्ति को बढ़ा देता है. 

ओलिगोस्पेर्मिया या शुक्राणुओं की कमी की वजह से होने वाली मेल इनफर्टिलिटी में भी फ़ायदेमंद है. 


शिलाप्रवंग स्पेशल टेबलेट की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो टेबलेट तक दूध के साथ सुबह शाम खाना खाने के बाद या फिर डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना चाहिए. इसे लगातार तीन महिना तक ले सकते हैं. इसके 30 टेबलेट के पैक की क़ीमत क़रीब 600 रुपया है, इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीदें निचे दिए लिंक से - 


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10 January 2018

Kumkumadi Tailam(Kumkumadi Oil) for Fairness and Beauty | कुमकुमादि तैलम के फ़ायदे


कुमकुमादि तैलम या कुमकुमादि आयल सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक औषधि है जो चेहरे के दाग़ धब्बे, कील-मुहाँसे, डार्क सर्कल्स, स्कार्स जैसी प्रॉब्लम को दूर करता है और रंग निखार कर गोरा होने में भी मदद करता है वो भी बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के. आईये जानते हैं कुमकुमादि तैलम का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

कुमकुमादि तैलम जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बना हर्बल आयल है जिसमे कुमकुम या केसर भी मिला होता है इसलिए इसका नाम कुमकुमादि तैलम रखा गया है. यह भैषज्य रत्नावली का योग है ईसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें कई तरह की चीज़े मिली होती हैं जिन्हें तीन पार्ट में जानेंगे, जैसे - क्वाथ द्रव्य, कल्क द्रव्य और बेस आयल 

क्वाथ द्रव्य(जड़ी-बूटियाँ जिनका क्वाथ या काढ़ा बनाना होता है)-

लाल चन्दन, मंजीठ, यष्टिमधु, दारूहल्दी, उशीर, पद्माख, नील कमल, बरगद की जटा, पाकड़, कमल केसर, बेल, अग्निमंथा, श्योनका, गंभारी, पाटला, शालपर्णी, प्रिश्नपर्णी, गोक्षुर, वृहती और कंटकारी प्रत्येक 48 ग्राम 

कल्क द्रव्य(जिनका पेस्ट या चटनी बनानी है)-

मंजीठ, यष्टिमधु, महुआ, लाख और पतंगा प्रत्येक 12 ग्राम 

आयल बेस के लिए - तिल तेल 192 ML, बकरी का दूध- 384 ML चाहिए होगा और केसर- 48 ग्राम और थोड़ा गुलाब जल भी चाहिए. 


कुमकुमादि तैलम बनाने का तरीका- 

बनाने का तरीका यह है कि सबसे पहले क्वाथ द्रव्य की जड़ी-बूटियों को मोटा-मोटा कूटकर 9 लीटर पानी में काढ़ा बनायें और जब दो लीटर पानी बचे तो ठण्डा होने पर छान लें. 

अब कल्क द्रव्य को पिस लें और थोड़ा पानी मिलाकर चटनी या पेस्ट की तरह बना लें. अब काढ़े में पेस्ट, तिल का तेल और बकरी का दूध मिक्स कर उबालना है स्लोआँच में. जब पानी का अंश उड़ जाये और सिर्फ़ तेल बचे तो ठण्डा होने पर छान लें. 

अब केसर में थोड़ा गुलाब जल मिक्स कर खरल में डालकर पिस लें और तेल में मिक्स कर लें. बस कुमकुमादि तैल तैयार है. वैसे यह बना-बनाया मार्केट में मिल जाता है. 


कुमकुमादि तैलम के गुण - 

इसके गुणों की बात करें तो यह एंटी-ऑक्सीडेंट, Moisturizer, Anti-hyperpigmentation, एन्टी बैक्टीरियल, एंटी इंफ्लेमेटरी और Natural Sun Screen जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

कुमकुमादि तैलम के फ़ायदे- 

कुमकुमादि तैलम एक बेहतरीन ब्यूटी आयल है जो न सिर्फ़ रंग को निखारता है बल्कि डार्क सर्कल्स, Hyperpigmentation, Blemishes, ब्लैक स्पॉट, स्कार्स, कील-मुहाँसे और दाग़ धब्बों को दूर कर देता है. 

चेहरे में होने वाले दाग़ धब्बों को दूर कर नेचुरल मॉइस्चराइजर का काम करता है. इसका इस्तेमाल कील-मुहाँसे होने से बचाता है. 

कुमकुमादि तैलम ऑलमोस्ट हर तरह की स्किन टाइप में असरदार है, ख़ासकर ड्राई स्किन में ज़्यादा फ़ायदा करता है. 


कुमकुमादि तैलम को यूज़ कैसे करें?

अपने हाथ और चेहरे को अच्छी तरह से धोकर कुमकुमादि तैलम की कुछ बूंद लेकर हाथों से चेहरे की हल्की मसाज करें और कम से कम तीन घंटा तक लगा रहने दें. ऑयली स्किन वाले कम से कम एक घंटा लगा रहने दें, उसके बाद चेहरा धो लें. ड्राई स्किन वाले सोने से पहले भी इसे लगा सकते हैं. 

कुमकुमादि तैलम को Nasal Drops की तरह भी नाक में भी डाला जाता है जिस से wrinkles, ब्लैक स्पॉट और दाग़ धब्बों में फ़ायदा होता है. आर्य वैद्यशाला के 10 ML के पैक की क़ीमत 410 रुपया है, इसे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 

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09 January 2018

Divya Vrikkdoshhar Vati | दिव्य वृक्कदोषहर वटी के फ़ायदे


दिव्य वृक्कदोषहर वटी पतंजलि का एक प्रोडक्ट है जो सुजन, किडनी फैल्योर और पेशाब की बीमारियों के लिए इस्तेमाल की जाती है, तो आईये जानते हैं वृक्कदोषहर वटी का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है वृक्कदोषहर वटी यानि किडनी की प्रॉब्लम को दूर करने वाली टेबलेट. पुनर्नवा, पाषाणभेद, वरुण की छाल जैसी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से इसे बनाया गया है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

ढ़ाक, पित्तपापड़ा, पुनर्नवा, पाषाणभेद, कुल्थी, अपामार्ग, कासनी, पीपल, नीम, मकोय, गोखुरू, धमासा, कुश, खस, धनिया, सरकंडा, इछु, गिलोय, ऊँटकटारा, अरणी, अमलतास, शतावर, विदारीकन्द, छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी, जव, कुटकी और गोंद के मिश्रण से बनाया जाता है. 


वृक्कदोषहर वटी के गुण- 

यह तासीर में ठण्डी, मूत्रल या Diuretic, एंटी इंफ्लेमेटरी, शरीर से Toxins या विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने वाली, पत्थरी नाशक, और किडनी डिसफंक्शन को ठीक करने वाले गुणों से भरपूर है. 

वृक्कदोषहर वटी के फ़ायदे- 

यह किडनी और मूत्र रोगों की असरदार दवा है, पेशाब का पीलापन, पेशाब के क्रिस्टल, यूरिया, Creatnine आना जैसी प्रॉब्लम से लेकर किडनी फैल्योर तक में फ़ायदा करती है. 

इसके इस्तेमाल से किडनी और ब्लैडर में होने वाली पत्थरी घुलकर निकल जाती है. 

वृक्कदोषहर वटी के इस्तेमाल से मूत्र संक्रमण या Urinary Tract Infection(UTI) दूर होता है. कुल मिलाकर देखा जाये तो किडनी और पेशाब के हर तरह के रोगों में इसका इस्तेमाल कर फ़ायदा ले सकते हैं. 


वृक्कदोषहर वटी की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो टेबलेट दो से तीन बार तक खाना खाने के बाद पानी से लेना चाहिए. 

इसके साथ में वृक्कदोषहर क्वाथ, गोक्षुरादि गुग्गुल, चंद्रप्रभा वटी जैसी औषधियाँ भी ले सकते हैं. वृक्कदोषहर वटी के 20 ग्राम के पैक की क़ीमत 60 रुपया है जिसे पतंजलि स्टोर से या फिर ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं. 



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07 January 2018

अर्जुन की छाल के फ़ायदे और इस्तेमाल | Arjun Bark Benefits and Use


अर्जुन को अर्जुन और अर्जुना नाम से भी जाना जाता है जबकि अंग्रेज़ी में इसे Terminalia Arjuna कहा जाता है. 

अर्जुन के गुण

★ अर्जुन शीतल, हृदय के लिए हितकारी, स्वाद में कषैला, घाव, क्षय (टी.बी.), विष, रक्तविकार, मोटापा, प्रमेह, घाव, कफ तथा पित्त को नष्ट करता है.

★ इससे हृदय की मांसपेशियों को बल मिलता है, हृदय की पोषण क्रिया अच्छी होती है.

★ मांसपेशियों को बल मिलने से हृदय की धड़कन सामान्य होती है.

★ इसके उपयोग से सूक्ष्म रक्तवाहिनियों का संकुचन होता है, जिससे रक्त, भार बढ़ता है. इस प्रकार इससे हृदय सशक्त और उत्तेजित होता है. इससे रक्त वाहिनियों के द्वारा होने वाले रक्त का स्राव भी कम होता है, जिससे यह सूजन को दूर करता है. यह एक बेहतरीन Cardioprotective और हार्ट टॉनिक है. 

अर्जुन की छाल को सबसे ज़्यादा हार्ट की प्रॉब्लम के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो आईये सबसे पहले जान लेते हैं कि हार्ट की बीमारियों के लिए इसे कैसे इस्तेमाल करना चाहिए- 

अर्जुन की मोटी छाल का महीन चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में मलाई रहित एक कप दूध के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करते रहने से हृदय के समस्त रोगों में लाभ मिलता है, हृदय की बढ़ी हुई धड़कन सामान्य होती है.

अर्जुन की छाल के चूर्ण को चाय के साथ उबालकर ले सकते हैं. चाय बनाते समय एक चम्मच इस चूर्ण को डाल दें. इससे भी समान रूप से लाभ होगा. अर्जुन की छाल के चूर्ण के प्रयोग से उच्च रक्तचाप भी अपने-आप सामान्य हो जाता है. यदि केवल अर्जुन की छाल का चूर्ण डालकर ही चाय बनायें, उसमें चायपत्ती न डालें तो यह और भी प्रभावी होगा, इसके लिए पानी में चाय के स्थान पर अर्जुन की छाल का चूर्ण डालकर उबालें, फिर उसमें दूध व चीनी आवश्यकतानुसार मिलाकर पियें.

हार्ट अटैक के बाद 40 मिलीलीटर अर्जुन की छाल का दूध के साथ बना काढ़ा सुबह तथा रात दोनों समय सेवन करें. इससे दिल की तेज धड़कन, हृदय में पीड़ा, घबराहट होना आदि रोग दूर होते हैं.


 अर्जुन छाल क्षीरपाक विधि : अर्जुन की ताजा छाल को छाया में सूखाकर चूर्ण बनाकर रख लें. इसे 250 मिलीलीटर दूध में 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर हल्की आंच पर रख दें और उसमें उपरोक्त तीन ग्राम (एक चाय का चम्मच हल्का भरा) अर्जुन छाल का चूर्ण मिलाकर उबालें. जब उबलते-उबलते पानी सूखकर दूध मात्र अर्थात् आधा रह जाये तब उतार लें. पीने योग्य होने पर छानकर रोगी द्वारा पीने से सम्पूर्ण हृदय रोग नष्ट होते है और हार्ट अटैक से बचाव होता है.
अर्जुन के फल और पत्ते 

आईये अब जानते हैं अर्जुन के कुछ दुसरे प्रयोग- 

मुंह के छाले (Mouth ulcers): अर्जुन की छाल के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर छालों पर लगायें. इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं.

पेट दर्द : आधा चम्मच अर्जुन की छाल, जरा-सी भुनी-पिसी हींग और स्वादानुसार नमक मिलाकर सुबह-शाम गर्म पानी के साथ फंकी लेने से पेट के दर्द, गुर्दे का दर्द और पेट की जलन में लाभ होता है.

उरस्तोय रोग (फेफड़ों में पानी भर जाना) : अर्जुन वृक्ष का चूर्ण, यष्टिमूल तथा लकड़ी को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए. इस चूर्ण को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में 100 से 250 मिलीमीटर दूध के साथ दिन में 2 बार देने से उरस्तोय रोग (फेफड़ों में पानी भर जाना) में लाभ होता है.

अतिक्षुधा (अधिक भूख लगना) रोग : शालपर्णी और अर्जुन की जड़ को बराबर मात्रा में मिश्रण बनाकर पीने से भस्मक रोग मिट जाता है.


हड्डी के टूटने पर : हड्डी के टूटने पर अर्जुन की छाल पीसकर लेप करने से लाभ होता है.  प्लास्टर चढ़ा हो तो अर्जुन की छाल का महीन चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार एक कप दूध के साथ कुछ हफ्ते तक सेवन करने से हड्डी मजबूत होती है. टूटी हड्डी के स्थान पर भी इसकी छाल को घी में पीसकर लेप करें और पट्टी बांधकर रखें, इससे भी हड्डी शीघ्र जुड़ जाती है.

मोटापा दूर करें : अर्जुन का चूर्ण 2 ग्राम को अग्निमथ (अरनी) के बने काढ़े के साथ मिलाकर पीने से मोटापे में लाभ होता हैं.

प्रमेह (वीर्य विकार) में : अर्जुन की छाल, नीम की छाल, आमलकी छाल, हल्दी तथा नीलकमल को समान मात्रा में लेकर बारीक पीसकर चूर्ण करें. इस चूर्ण की 20 ग्राम मात्रा को 400 मिलीलीटर पानी में पकायें, जब यह 100 मिलीलीटर शेष बचे, तो इसे शहद के साथ मिलाकर नित्य सुबह-शाम सेवन करने से पित्तज प्रमेह नष्ट हो जाता है.
Arjuna Tree

कान का दर्द : अर्जुन के पत्तों का 3-4 बूंद रस कान में डालने से कान का दर्द मिटता है.

मधुमेह का रोग : अर्जुन के पेड़ की छाल, कदम्ब की छाल और जामुन की छाल तथा अजवाइन बराबर मात्रा में लेकर जौकूट (मोटा-मोटा पीसना) करें. इसमें से 24 ग्राम जौकूट लेकर, आधा लीटर पानी के साथ आग पर रखकर काढ़ा बना लें. थोड़ा शेष रह जाने पर इसे उतारे और ठंडा होने पर छानकर पीयें. सुबह-शाम 3-4 सप्ताह इसके लगातार प्रयोग से मधुमेह में लाभ होगा.



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05 January 2018

हमदर्द लिपोटैब के फ़ायदे और इस्तेमाल | Hamdard Lipotab to Reduce Cholesterol


हमदर्द लिपोटैब कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल कर नार्मल करता है, हार्ट की प्रॉब्लम को दूर कर हार्ट को हेल्दी रखता है. तो आईये जानते हैं हमदर्द लिपोटैब का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल-

लिपोटैब जो है यूनानी दवा कम्पनी हमदर्द का पेटेंट ब्रांड है जो की जड़ी-बूटियों के कॉम्बिनेशन से बना है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसके हर टेबलेट में - 

Badranjboya Ext (Nepeta hindostana) - 39.97mg
Safoof Seer (Allium sativum) - 144.84mg
Safoof Chobzard (Curcuma longa) - 55.70mg
Lactose - 111.42mg
Chalk Powder - 73.57mg
Starch - 55.70mg
Gum Acacia (Acacia arabica) - 55.70mg का मिश्रण होता है. 

लिपोटैब के फ़ायदे - 

हल्दी, लहसुन और कैटनिप जैसी असरदार जड़ी-बूटियों का फ़ॉर्मूला कोलेस्ट्रॉल कम करने में असरदार है. यह खून में मौजूद लिपिड को कण्ट्रोल कर कोलेस्ट्रॉल लेवल को नार्मल कर देता है. 

बैड कोलेस्ट्रॉल या LDL और ट्राइग्लिसराइड को कम कर नार्मल कर देता है और इसकी वजह से होने वाली प्रॉब्लम को दूर कर देता है. 

चेस्ट पेन या सिने का दर्द और साँस लेने में तकलीफ़ होना दूर करता है. 

इसके इस्तेमाल से वज़न भी कम करने में मदद मिलती है. कुल मिलाकर देखा जाये तो कोलेस्ट्रॉल और इस से रिलेटेड प्रॉब्लम के लिए हमदर्द लिपोटैब एक अच्छी दवा है. 


हमदर्द लिपोटैब का डोज़-

दो टेबलेट रोज़ एक बार शाम को खाना खाने से तीस मिनट पहले लेना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, लॉन्ग टाइम तक यूज़ कर सकते हैं. इसके 60 टेबलेट के पैक क़ीमत क़रीब 145 रुपया है. इसे यूनानी दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं. 



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03 January 2018

भृंगराजासव के फ़ायदे | Bhringrajasava Benefits and Use


भृंगराजासव क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो सिरप के रूप में होती है. यह आँखों के रोग, बालों के रोग, बालों का समय से पहले सफ़ेद होना, प्रमेह और कफ़ जैसे रोगों को दूर करता है. यह लीवर को प्रोटेक्ट करता है और जनरल टॉनिक की तरह भी काम करता है. तो आईये जानते हैं भृंगराजासव का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

भृंगराजासव जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मेन इनग्रीडेंट भृंगराज या भांगरा होता है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

भृंगराज- 25 भाग, गुड़- 10 भाग, हरीतकी- 4 भाग, पिप्पली, जायफल, लौंग, दालचीनी, इलायची, तेजपात और नागकेशर एक-एक भाग का मिश्रण होता है. 

बनाने का तरीका यह होता है कि इसे आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव-अरिष्ट निर्माण विधि से संधान के बाद आसव या सिरप बनाया जाता है. 

भृंगराजासव के गुण- 

यह कफ़ और वात और बैलेंस करता है. इसके गुणों की बात करें तो यह एंटी ऑक्सीडेंट, पाचक, भूख बढ़ाने वाला, हेयर ग्रोथ करने वाला, लीवर प्रोटेक्टिव, कार्डियोप्रोटेक्टिव, एंटी-इंफ्लेमेटरी और टॉनिक जैसे गुणों से भरपूर होता है. 


भृंगराजासव के फ़ायदे- 

खाँसी, सर्दी, अस्थमा, बार-बार नज़ला जुकाम होने में असरदार है.

बालों का गिरना, टाइम से पहले सफ़ेद होना रोकता है. बालों को उचित पोषण देकर जड़ों को मज़बूत बनाता है. 

सुस्ती, कमज़ोरी, भूख की कमी को दूर करता है. पाचक पित्त को बढ़ाता है और लीवर के फंक्शन को सही करता है. 

महिलाओं के गर्भाशय को शक्ति देता है और फर्टिलिटी को बढ़ाता है, लगातार इस्तेमाल से पुरुषों की यौनशक्ति भी बढ़ती है. 


भृंगराजासव की मात्रा और सेवन विधि - 

15 से 25 ML तक सुबह शाम खाना के बाद बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर लेना चाहिए. बच्चो को कम डोज़ में देना चाहिए. 

सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई नुकसान या  साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है, प्रेगनेंसी में इसे नहीं  लेना चाहिए. बैद्यनाथ, डाबर जैसी कम्पनीयों का यह मिल जाता है. 450 ML की क़ीमत 150 रुपया के करीब है. 



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01 January 2018

सफ़ेद दाग का चमत्कारी नुस्खा | Herbal Medicine for Leucoderma Vitiligo or Skin Pigmentation & Skin Disease


सफ़ेद दाग को आयुर्वेद में श्वेत कुष्ठ कहा जाता है जिसमे बॉडी में कहीं भी स्किन का रंग सफ़ेद हो जाता है, हालांकि इसमें कोई तकलीफ़ नहीं होती पर देखने में अच्छा नहीं लगता है. तो आईये आज जानते हैं सफ़ेद दाग के लिए एक बेहद असरदार और आसान से आयुर्वेदिक प्रयोग के बारे में पूरी डिटेल - 

दोस्तों, सफ़ेद दाग के लिए आयुर्वेदिक दवाएं बेहद असरदार होती हैं. आज जो मैं बता रहा हूँ वो लगाने की दवा है. इसके लिए आपको चाहिए होगा - 

बाकुची के बीजों का चूर्ण 80 ग्राम 

 रस माणिक्य 10 ग्राम 

मरिच्यादी तेल - एक शीशी(100 ML)

रस माणिक्य और मरिच्यादी तेल आयुर्वेदिक औषधि है जो बैद्यनाथ, डाबर जैसी कंपनियों की मिल जाती है. बाकुची के बीज आपको जड़ी-बूटी या पंसारी की दुकान से मिल जाएगी, जिसे लाकर चूर्ण या पाउडर बनाना होगा. बाकुची को बावची, सोमराजी जैसे नामों से जाना जाता है. 


बनाने का तरीका -

रस माणिक्य को खरल में डालकर पिस लें और इसमें बाकुची के बीजों का चूर्ण अच्छी तरह से मिक्स कर लें और डब्बे में रख लें. 

इस्तेमाल करने का तरीका -


अब इस चूर्ण को थोड़ा सा लेकर मरिच्यादी तेल इतना मिक्स करें की पेस्ट की तरह बन  जाये, अब इस पेस्ट को दाग वाली जगह पर लगाना है. जहाँ-जहाँ सफ़ेद दाग हो इसे लगायें और कम से कम एक घंटे के बाद पोंछ लें. ऐसा रोज़ एक से दो बार करें. 
कुछ ही दिनों में आपको फ़ायदा दिखने लगेगा और लगातार इस्तेमाल से सफ़ेद दाग दूर हो जायेंगे, सफ़ेद दाग चाहे कितना भी पुराना क्यूँ न हो. 

 
तो दोस्तों, ये थी आज की जानकारी सफ़ेद दाग को दूर करने के बेहद असरदार उपाय के बारे में. सफ़ेद दाग में निम्बादि चूर्ण, कैशोर गुग्गुल, महा मंजिष्ठारिष्ट, दिव्य कायाकल्प वटी जैसी दवाएँ भी ले सकते हैं. 


30 December 2017

योगेन्द्र रस के गुण और उपयोग | Yogendra Ras Benefits and Usage


योगेन्द्र रस क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो स्वर्णयुक्त और रसायन औषधि है. यह हर तरह के वात रोगों के अलावा हार्ट, किडनी, लीवर, मानसिक रोग और पुरुष रोगों में भी इस्तेमाल किया जाता है. यह कई तरह के बीमारियों में फ़ायदा करती है, तो आईये जानते हैं योगेन्द्र रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

योगेन्द्र रस स्वर्णयुक्त औषधि है जिसमे सोना जैसी महँगी चीजें मिली होती हैं. योगेन्द्र रस आयुर्वेदिक ग्रन्थ 'भैषज्य रत्नावली' का योग है, इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

रस सिन्दूर- दो भाग, कान्त लौह भस्म, अभ्रक भस्म, स्वर्ण भस्म, मुक्ता भस्म और वंग भस्म प्रत्येक एक-एक भाग का मिश्रण होता है जिसे घृतकुमारी के रस में खरल कर 125 mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यही योगेन्द्र रस कहलाता है. 


योगेन्द्र रस के गुण - 

यह वात और पित्त दोष को दूर करता है. एंटी इंफ्लेमेटरी, antacid, पाचक, ह्रदय को बल देने वाला(Cardio protective) और Nervine टॉनिक जैसे गुण इसमें पाए जाते हैं. 


योगेन्द्र रस के फ़ायदे- 

यह हर तरह के वातरोगों की असरदार दवा है यानि जोड़ो का दर्द, गठिया, कमरदर्द आर्थराइटिस से लेकर लकवा, साइटिका, पक्षाघात, एकांगवात, कम्पवात जैसे हर तरह के दर्द वाले या वातरोगों में आयुर्वेदिक डॉक्टर इसका इस्तेमाल करते हैं. 

यह दिमाग को ताक़त देता है और मानसिक रोगों को भी दूर करता है जैसे एपिलेप्सी, हिस्टीरिया, बेहोशी पागलपन जैसे मानसिक रोग. 

योगेन्द्र रस हार्ट के रोगों में भी असरदार है, हार्ट की कमजोरी, घबराहट, दिल का ज़्यादा धड़कना जैसे रोगों में असरदार है. हाई BP को भी कण्ट्रोल करता है. 

एसिडिटी, अपच को दूर कर पाचन शक्ति को ठीक करता है. 

किडनी पर भी इसका अच्छा असर होता है, प्रमेह, बहुमूत्र जैसे रोगों में फ़ायदेमंद है. 

यह बल वीर्य को बढ़ाता है, नर्व और मसल्स को ताक़त देता है. यह एक नेचुरल यौनशक्ति वर्धक है, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसे पुरुष रोगों में भी फ़ायदेमंद है. 

योगेन्द्र रस ऐसी दवा है जिसे दूसरी दवा के साथ मिलाकर लेने से उसका पॉवर बढ़ जाता है. 

कुल मिलाकर देखा जाये तो योगेन्द्र रस ऐसी स्वर्णयुक्त दवा है जिसके इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियाँ दूर होती हैं. 

योगेन्द्र रस की मात्रा और सेवन विधि - 

एक गोली सुबह शाम शहद या फिर रोगानुसार उचित अनुपान के साथ. वात रोगों में एरंडमूल क्वाथ से, पित्त रोगों में त्रिफला के पानी और मिश्री के साथ, हार्ट के रोगों में अर्जुन की छाल के चूर्ण से, हिस्टीरिया, मृगी जैसी मानसिक रोगों में जटामांसी के काढ़े से और बल-वीर्य बढ़ाने या पुरुष यौन रोगों के लिए लिए मक्खन-मलाई या दूध से लेना चाहिए. इसे डॉक्टर की सलाह से और डॉक्टर की देख रेख में ही यूज़ करें. 
बैद्यनाथ, डाबर, पतंजलि जैसी आयुर्वेदिक कंपनियों का यह मिल जाता है, इसे ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं.



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29 December 2017

ज़माद शबाब क्रीम ब्रेस्ट साइज़ बढ़ाने की यूनानी दवा | Hamdard Zamad Shabab Review in Hindi


बड़े और सुडौल स्तन पाने के लिए जानी-मानी यूनानी दवा कम्पनी हमदर्द ने पेश किया है 'ज़माद शबाब' क्रीम जिसका इस्तेमाल कर महिलाएं अपने स्तन को बड़ा, सुन्दर और सुडौल बना सकती हैं. 

'ज़माद शबाब' क्रीम का कम्पोजीशन - 

सफैदा जस्त, सुहागा बिर्या, संगजराहत सईदा, वेसिलीन सफ़ेद और गुलाब की खुशबु के मिश्रण से बनाया गया है.

'ज़माद शबाब' क्रीम के फ़ायदे- 

यह ब्रेस्ट के नेचुरल और प्रॉपर डेवलपमेंट में मदद करता है, स्तन के शेप और साइज़ को सही करता है, बड़ा और सुडौल बनाता है. 

स्तन में ब्लड फ्लो को सही करता है, ब्रेस्ट की ग्लैंड को पोषण देता है और साइज़ बढ़ाने में मदद करता है. 


'ज़माद शबाब' क्रीम को कैसे इस्तेमाल करें?

क्रीम को लेकर हल्के हाथों से गोलाई में मालिश करें, रोज़ सोने से पहले मालिश करें और ब्रा पहनकर सो जाएँ. कुछ दिनों के लगातार इस्तेमाल से फ़ायदा नज़र आने लगता है. 'ज़माद शबाब' क्रीम के 50 ग्राम के दो पैक की क़ीमत 229 रुपया है, इसे यूनानी दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं. 



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