भारत की सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक हिन्दी वेबसाइट लखैपुर डॉट कॉम पर आपका स्वागत है

10 December 2018

Ras Sindoor | रस सिन्दूर एक विवेचना


रस सिन्दूर कुपिपक्व रसायन केटेगरी की ऐसी औषधि जो अनुपान भेद से हर तरह के रोगों को दूर करती है. अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ़ एक दवा और हर तरह की बीमारी को कैसे दूर करेगी?? सब बताऊंगा रस सिन्दूर क्या है? कितने तरह का होता है? कौनसा बेस्ट होता है? क्या-क्या फ़ायदे हैं? कैसे यूज़ करना है? 
रस सिन्दूर क्या है?

आयुर्वेद में रस का मतलब होता है पारा जिसे पारद भी कहते हैं. रस सिन्दूर दो चीज़ें मिलाकर बनाया जाता है शुद्ध पारा और शुद्ध गन्धक. यही दो चीजें इसके घटक होते हैं.

रस सिन्दूर कैसे बनाया जाता है?

आम आदमी के लिए इसे बनाना आसान नहीं है, फिर भी संक्षेप में इसका प्रोसेस समझा देता हूँ.

इसे बनाने के लिए शुद्ध पारा और शुद्ध गन्धक को खरलकर आतशी शीशी में डालकर सात बार कपड़मिट्टी कर सुखाकर मिट्टी के हांडी में डालकर बालू भरा जाता है, जिसे आयुर्वेद में बालुकायंत्र कहा जाता है. 

अब इसे भट्ठी में चढ़ाकर तीन चार घन्टे तक मृदु, मध्यम और तीव्र अग्नि दी जाती है. इसके बाद ठण्डा होने पर लाल रंग की दवा निकालकर रख ली जाती है. इसे बनाते हुवे कई तरह का ध्यान रखा जाता है जो कि औषध निर्माण में अनुभवी वैद्य ही कर सकता है.

रस सिन्दूर बनाने में थोड़ी अलग-अलग विधि अपनाई जाती है और उस तरह से रस सिन्दूर चार प्रकार का होता है जैसे -

रस सिन्दूर अन्तर्धूम 

रस सिन्दूर अर्द्धगन्धकजारित 

रस सिन्दूर द्युगुण गन्धकजारित और 

रस सिन्दूर षडगुण बलिजारित 

इसमें सबसे लास्ट वाला षडगुण बलिजारित रस सिन्दूर सबसे ज़्यादा इफेक्टिव होता है.

रस सिन्दूर के फ़ायदे जानने से पहले इसके गुण या Properties को जान लीजिये -

आयुर्वेदानुसार यह उष्णवीर्य है मतलब तासीर में गर्म. यह योगवाही, रसायन, ब्लड फ्लो बढ़ाने वाला, रक्तदोष नाशक और हृदय को बल देने वाले गुणों से परिपूर्ण होता है. पित्त प्रकृति वालों और पित्त प्रधान रोगों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए और सेवन करना ही हो पित्तशामक दवाओं के साथ सही डोज़ में ही लेना चाहिए.

रस सिन्दूर के फ़ायदे-

कफ़ और वात प्रधान रोगों में इसे प्रमुखता से प्रयोग किया जाता है. पित्त रोगों में इसे गिलोय सत्व, प्रवाल पिष्टी और मोती पिष्टी जैसी औषधियों के साथ लेना चाहिए. अनुपान भेद से यह अनेकों रोगों को दूर करती है.

इन रोगों में इसका प्रयोग किया जाता है जैसे - 

नयी पुरानी बुखार, टॉन्सिल्स, प्रमेह, श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया, रक्त प्रदर, बवासीर, भगंदर, दौरे पड़ना, पागलपन, न्युमोनिया, खाँसी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, टी. बी., जौंडिस, हेपेटाइटिस, पेशाब की जलन, मूत्र रोग, अजीर्ण, पेट दर्द, बेहोशी, उल्टी, सुजन, ज़ख्म, गर्भाशय के रोग, कफ-वात प्रधान सर दर्द, सर काम्पना, चर्मरोग, जोड़ों का दर्द, आमवात, टेटनस, स्वप्नदोष, वीर्य विकार, मर्दाना कमज़ोरी, सामान्य कमज़ोरी इत्यादि. 

कुछ वैद्य लोग सिर्फ़ रस सिन्दूर से ही हर तरह की बीमारी का इलाज करते हैं. रस सिन्दूर है ही एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम मेडिसिन.

रस सिन्दूर की मात्रा और सेवन विधि - 

125 mg से 250 mg तक सुबह-शाम शहद या फिर रोगानुसार उचित अनुपान से लेना चाहिए. बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार 15 से 60 mg तक देना चाहिए. 

सावधान- यह तेज़ी से असर करने वाली दवा है! इसे डॉक्टर की सलाह से सही मात्रा में ही लिया जाना चाहिए नहीं तो नुकसान भी हो सकता है. 

कई तरह की बीमारियों के रस सिन्दूर के साथ सेवन करने वाली दवाओं का बेहतरीन योग आपको मेरी किताब में मिल जाएगी. 

इसे भी जानिए - 



07 December 2018

Ashwagandha Pak | अश्वगन्धा पाक के फ़ायदे क्या आप जानते हैं?


अश्वगन्धा पाक जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मेन इनग्रीडेंट अश्वगन्धा या असगंध है जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस अवलेह-पाक निर्माण विधि से बनाया जाता है. इसमें असगंध, गाय का दूध, रस सिन्दूर, अभ्रक भस्म, नाग भस्म, वंग भस्म, लौह भस्म के अलावा दालचीनी, तेजपात, नागकेशर, इलायची, जायफल, केसर, बंशलोचन, मोचरस, जटामांसी, चन्दन, खैरसार, जावित्री, पिपरामूल, लौंग, कंकोल, पाढ़, अखरोट, शुद्ध भिलावा, सिंघाड़ा और गोखरू जैसी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं. 

अश्वगन्धा पाक के गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह बल वर्धक, अग्नि प्रदीपक, पौष्टिक और रसायन गुणों से भरपूर होता है.

अश्वगन्धा पाक के फ़ायदे- 

प्रमेह और मूत्र रोगों को दूर कर यह शरीर की कान्ति बढ़ाता है. 

वीर्यदोष, स्वप्नदोष, धातु विकार या पेशाब के साथ वीर्य जाना जैसी प्रॉब्लम में इसका सेवन करना चाहिए. 

वात वाहिनी नाड़ी, वीर्य वाहिनी नाड़ी और किडनी पर इसका अच्छा असर होता है.
हाथ-पैर, कमर या शरीर में कहीं दर्द हो वात वृद्धि के कारन तो इसके सेवन से फ़ायदा होता है. 

अश्वगन्धा पाक की मात्रा और सेवन विधि - 

पांच से दस ग्राम तक सुबह-शाम दूध से, शहद से या फिर पानी से भी ले सकते हैं. चूँकि इसमें कई तरह की भस्म मिली हुयी है तो इसे डॉक्टर की सलाह से ही सही डोज़ में यूज़ करना चाहिए. इसे आप घर बैठे ऑनलाइन खरीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 



इसे भी जानिए -





01 December 2018

Mahachaitas Ghrit | महाचैतस घृत


अगर किसी को मृगी या एपिलेप्सी की बीमारी है या फिर दिमाग की किसी भी तरह की प्रॉब्लम है तो इस अयुर्वेदिक औषधि का सेवन करना चाहिए जिसका नाम है महाचैतस घृत. जी हाँ दोस्तों, तो आईये आज इसी के बारे में चर्चा करते हैं -

महाचैतस घृत दिमाग के रोगों में बेहद असरदार है. यह दिमाग की कमज़ोरी, मेमोरी लॉस से लेकर मृगी और पागलपन तक में फ़ायदा करती है.

महाचैतस घृत के घटक या कम्पोजीशन -

यह एक ऐसी बेजोड़ औषधि है जिसे अनेकों प्रकार की जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया जाता है. इसे बनाने के लिए आठ तरह की जड़ी-बूटियों का क्वाथ और 40 तरह की जड़ी-बूटियों का कल्क और देशी गाय के घी का प्रयोग होता है. इसे आयुर्वेदिक प्रोसेस घृतपाक विधि से बनाया जाता है. यह चक्रदत्त का योग है. इस से कम असरदार एक औषधि है चैतस घृत जिसमे सिर्फ़ 12 तरह की जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं. 

महाचैतस घृत के फ़ायदे -


  • मानसिक रोगों या दिमाग की बीमारी के लिए आयुर्वेद में घृत वाली जितनी भी औषधियाँ हैं उनमे से यह सबसे बेस्ट और सबसे ज़्यादा असरदार है इसे यूनिक फार्मूलेशन की वजह से.
  • दिमाग की कमज़ोरी, यादाश्त की कमी, मेमोरी लॉस, मृगी और पागलपन जैसे रोगों में इसे दूसरी दवाओं के साथ लेने से निश्चित रूप से लाभ होता है. 
  • मृगी या एपिलेप्सी की बीमारी से छुटकारा पाने के लिए इसका सेवन करना चाहिए.


  •  मृगी की बेस्ट आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट के लिए आप हमारे विशेषज्ञों की सलाह ले सकते हैं, अधीक जानकारी आपको विडियो की डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी.


महाचैतस घृत की मात्रा और सेवन विधि -


तीन से छह ग्राम तक मिश्री मिलाकर खायें और ऊपर से दूध पीना चाहिए. बच्चों को कम डोज़ में देना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा होती है, इसे लॉन्ग टाइम तक यूज़ कर सकते हैं. इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं.

 ब्राह्मी घृत के फायदे 

महातिक्त घृत चर्मरोगों की औषधि 


24 November 2018

Gokshuradi Churna | गोक्षुरादि चूर्ण के चमत्कारी फ़ायदे


गोक्षुरादि चूर्ण ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जिसका कम्पोजीशन साधारण होते हुवे भी असरदार है. यह मर्दाना कमज़ोरी दूर कर बल-वीर्य और कामोत्तेजना को बढ़ाती है. तो आईये जानते हैं गोक्षुरादि चूर्ण का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से -

गोक्षुरादि चूर्ण के घटक या कम्पोजीशन -

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें गोखरू के अलावा पांच चीजें होती हैं. गोखरू, तालमखाना, शतावर, कौंच बीज, नागबला और अतिबला. 

बनाने का तरीका बहुत आसान है, सभी को बराबर वज़न में लेकर कूटपीसकर चूर्ण बना लिया जाता है. यह योगतरंगिणी नामक ग्रन्थ का नुस्खा है. गोक्षुरादि चूर्ण का दूसरा नुस्खा भी है जो महिलारोगों में प्रयोग किया जाता है, इस से बिल्कुल अलग होता है जो की भैषज्य रत्नावली का योग होता है. उसकी जानकारी फिर कभी दी जाएगी.

गोक्षुरादि चूर्ण के गुण -

यह मूत्रल यानि पेशाब साफ़ लाने वाला, बल-वीर्य बढ़ाने वाला, कामोत्तेजक, वीर्य गाढ़ा करने वाला, मेल हार्मोन Testosterone बढ़ाने वाला और बाजीकरण जैसे गुणों से भरपूर होता है.

गोक्षुरादि चूर्ण के फ़ायदे- 

यौनेक्षा की कमी, वीर्य का पतलापन और शीघ्रपतन जैसे पुरुष यौन रोगों में इसका प्रयोग करने से अच्छा लाभ मिलता है. 

अधीक मैथुन के कारन वीर्य का नाश का कर चुके व्यक्तियों को धैर्यपूर्वक इसका सेवन करना चाहिए. 

यह स्ट्रेस को कम कर कामोत्तेजना और आनन्द बढ़ाता है. 

गोक्षुरादि चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि -

2.5 से 5 ग्राम तक सोने से एक घंटा पहले मिश्री मिले दूध से लेना चाहिए. वीर्य का नाश कर चुके युवकों को इसे सुबह-शाम कुछ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुवे लेना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. इसके 100 ग्राम की क़ीमत क़रीब 110 रुपया है जिसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 




इसे भी जानिए -







20 November 2018

Kukkutandtwak Bhasma | कुक्कुटाण्डत्वक भस्म | Kushta Baiza Murgh


आज एक ऐसी चीज़ और ऐसी दवा के बारे में बताने वाला हूँ जिसे अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं पर इसी से बनी यह दवा बेहद असरदार होती है.

जी हाँ दोस्तों, इसका नाम है आयुर्वेद में कुक्कुटाण्डत्वक भस्म जबकि यूनानी में इसे कुश्ता बैज़ा मुर्ग़ के नाम से जाना जाता है जो कि अन्डे के छिल्के से बनायी जाती है. तो आईये इसके बारे में पूरी डिटेल जानते हैं - 

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म- इसका पूरा नाम चार शब्दों के मिश्रण से बना है 
कुक्कुट = मुर्गी, अण्ड = अंडा, त्वक = छिल्का, भस्म = भस्म या राख 

मतलब हुवा मुर्गी के अण्डों के छिल्को से बनी भस्म. देसी मुर्गी जिसे आर्गेनिक आहार खिलाया गया हो उसी के अण्डों के छिल्को से बनी भस्म असरदार होती है. फार्म या पोल्ट्री वाले अण्डों की नहीं. 

तो इसे बनाने के लिए देसी मुर्गी के अंडे के छिल्के चाहिए, ध्यान रहे अन्डे के कवर के अन्दर भी एक पतली झिल्ली होती है उसे हटाकर ऊपर वाला हार्ड कवर ही लिया जाता है. 

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म निर्माण विधि -

बताये गए अण्डों के छिलके 100 ग्राम लेकर मोटा-मोटा कूटकर मिट्टी के छोटे बर्तन में रखकर उसमे चान्गेरी का रस इतन डालें की छिल्का पूरा डूब जाये. अब बर्तन का ढक्कन बन्द कर कपड़मिट्टी कर 10 किलो उपलों के बीच में रखकर गजपुट में फूँक दें. पूरी तरह से ठण्डा होने पर निकालकर पीसकर रख लिया जाता. अगर एक बार में सफ़ेद मुलायम भस्म न बने तो दुबारा उसी तरह से चान्गेरी का रस डालकर पुट देना चाहिए. इसकी भस्म हल्की, सफ़ेद और मुलायम बनती है.

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म के गुण - 

यह कैल्शियम से भरपूर मूत्ररोग नाशक, बाजीकरण और रसायन गुणों से भरपूर होता है.

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म के फ़ायदे -

प्रमेह और मूत्र रोगों में यह बेहद असरदार है, महिला-पुरुष दोनों के लिए सामान रूप से लाभकारी है.

पुरुषों के रोग जैसे प्रमेह, स्वप्नदोष, वीर्य विकार और धातुस्राव जैसे रोगों में दूसरी दवाओं के साथ देने से बेजोड़ लाभ मिलता है. 

महिलाओं के पीरियड रिलेटेड रोग, ल्यूकोरिया, सोमरोग और डिलीवरी के बाद की कमज़ोरी में दूसरी दवाओं के साथ लेने से फ़ायदा होता है.

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म की मात्रा और सेवन विधि -

250mg से 375mg तक सुबह-शाम शहद से देना चाहिए. पुरुष रोगों में वंग भस्म, लौह भस्म और महिलाओं को दशमूल क्वाथ के साथ देना चाहिए. 

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म अपने तरह की एक बेजोड़ औषधि है जिसे आयुर्वेदिक चिकित्सक कई तरह के रोगों में दूसरी दवाओं के साथ प्रयोग करते हैं. इसे किन रोगों में किस तरह से प्रयोग करना चाहिए इसकी पूरी डिटेल आप मेरी आने वाली पुस्तक में पढ़ सकते हैं. इसे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से -




इसे भी जानिए - 







14 November 2018

Gorakhmundi Arq | गोरखमुण्डी अर्क


यह एक ऐसी बूटी है जिसे आयुर्वेद के साथ-साथ यूनानी में भी इस्तेमाल किया जाता है. गोरखमुण्डी अर्क हर तरह के चर्मरोगों या  स्किन डिजीज में असरदार है. तो आईये जानते हैं गोरखमुण्डी अर्क बनाने का तरीका, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल - 

गोरखमुण्डी को मुण्डी के नाम से भी जाना जाता है जो अभी के मौसम में खेतों में मिल जाएगी. हमारे क्षेत्र में तो यह धान की फसल कटने के बाद खेतों में खुद उग आती है. यह पानी वाली जगहों और नदी, तालाब आदि के किनारे भी पाई जाती है, इसका फोटो देखकर आप समझ सकते हैं. 


इसका अर्क बनाने के लिए इसके फुल या फिर पूरा पंचांग जड़ सहित उखाड़ लें. 500 ग्राम इसके पंचांग को साफकर मोटा-मोटा कूटकर 5 लीटर पानी में शाम को भीगा देना चाहिए और सुबह भबका यंत्र या अर्क निकालने वाली मशीन से क़रीब 2.5 लीटर तक अर्क निकाल लेना चाहिए. 

कई लोग प्रेशर कुकर से भी इसका अर्क निकालते हैं, मैंने भी ट्राई किया है अच्छा निकलता है. इसके लिए कुकर की सिटी वाली जगह से सिटी निकाल कर उसमे एक पतली ताम्बे या प्लास्टिक लगा लिया जाता है और इस पाइप को ठण्डे पानी भरे हुवे गमले से गुज़ारना होता है जिस से भाप ठण्डी हो जाती है और दुसरे बर्तन में अर्क जमा किया जाता है. गमले का पानी समय-समय पर बदलना पड़ता है, स्लो फ्लेम में ही इसे  बनाया जाता है. वैसे गोरखमुण्डी अर्क आयुर्वेदिक और यूनानी दवा दुकान में बना बनाया मिल जाता है.

गोरखमुण्डी अर्क के फ़ायदे - 

यह अर्क खाज-खुजली, फोड़े-फुन्सी से लेकर, चकत्ते पड़ना, एक्जिमा, सोरायसिस और कुष्ठव्याधि तक में असरदार है. 

इसके सेवन से चेहरे और स्किन के काले धब्बे दूर होते हैं और त्वचा में निखार आता है. 

यह रक्तदोष या खून की ख़राबी को दूर कर खून साफ़ कर देता है. इसके सेवन से सुज़ाक और फिरंग जैसे रोगों में भी फ़ायदा होता है. 

गोरखमुण्डी अर्क की मात्रा और सेवन विधि - 

25 से 50ML तक रोज़ तीन चार-बार तक लेना चाहिए. दूसरी रक्तशोधक दवाओं के साथ लेने से ही इस से अच्छा लाभ मिलता है. सिर्फ़ इसका अकेला सेवन करने से भी फ़ायदा मिल सकता है ठीक वैसे जैसे युद्ध में अकेला सैनिक. अर्क न बना सकें या न मिले तो इसका काढ़ा या चूर्ण भी सेवन कर सकते हैं. इसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 




इसे भी जानिए -








10 November 2018

Eladi Churna | एलादि चूर्ण के चमत्कारी लाभ


एलादि चूर्ण हर तरह की उल्टी, ज़्यादा प्यास लगना, मुँह सुखना और पित्तज विकारों की प्रसिद्ध औषधि है. तो आईये जानते हैं एलादि चूर्ण का कम्पोजीशन और फ़ायदे के बारे में विस्तार से- 

एलादि चूर्ण का कम्पोजीशन -

आयुर्वेद में इलायची को एला कहा जाता है जो कि दो तरह की होती है लघु एला और दिर्घ एला,  जिसे आम बोलचाल में छोटी इलायची और बड़ी इलायची के नाम से जाना जाता है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें- 

 छोटी इलायची, नागकेशर, दालचीनी, तेजपात, तालीसपत्र, बंशलोचन, मुनक्का बीज निकला हुवा, अनार दाना, धनिया, काला जीरा और सफ़ेद जीरा प्रत्येक दो-दो भाग, पीपल, पिपरामूल, चव्य, चित्रकमूल, सोंठ, कालीमिर्च, अजवायन, तिन्तिड़ीक, अम्लवेत, अजमोद, असगन्ध और कौंच बीज छिल्का निकले हुवे प्रत्येक एक-एक भाग और मिश्री सोलह भाग मिला होता है. 

इसे बनाने का तरीका यह होता है कि सभी जड़ी-बूटियों को बारीक कपड़छन चूर्ण कर पीसी हुयी मिश्री मिलाकर रख लिया जाता है. यह भारतभैषज्यरत्नाकर का योग है. 

एलादि चूर्ण के फ़ायदे - 

उल्टी, उबकाई आना और पित्तरोगों की यह असरदार दवा है. उल्टी किसी भी कारन से हो वातज, पित्तज या कफज इसके सेवन से लाभ होता है. 

पेट में छोभ और उत्तेजना होने से जब कुछ ही खाने-पिने से उल्टी हो जाये तो इसके सेवन से तेज़ी से फ़ायदा होता है.

पित्तदोष बढ़ने से अधीक प्यास लगना, गला सुखना और ज़्यादा गर्मी लगना जैसी प्रॉब्लम में इस से फ़ायदा होता है. 

एलादि चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि - 

तीन से छह ग्राम तक पीसी हुयी मिश्री और शहद में मिलाकर चाटना चाहिए रोज़ तीन-चार बार या आवश्यकतानुसार. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, किसी तरह का कोई नुकसान या साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. जब अंग्रेजी दवाओं से भी उल्टी न रूकती हो तो भी इस से लाभ हो जाता है. इसके 50 ग्राम के पैक की क़ीमत 85 रुपया के क़रीब है जिसे आप ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 






इसे भी जानिए -



07 November 2018

Kumarkalyan Ras | कुमारकल्याण रस के चमत्कारी लाभ


कुमारकल्याण रस बच्चों की बीमारीओं के लिए स्वर्णयुक्त बेजोड़ औषधि है. बच्चों की बीमारियों के लिए आयुर्वेद में इसका बड़ा महत्त्व है. यह बच्चों की हर तरह की बीमारी में तेज़ी से असर करती है. तो आईये जानते कुमारकल्याण रस के गुण और उपयोग के बारे में विस्तार से -

कुमारकल्याण रस का कम्पोजीशन - 

यह स्वर्णघटित रसायन औषधि है जिसमे स्वर्ण भस्म के अलावा मोती भस्म, रस सिन्दूर, अभ्रक भस्म, लौह भस्म और स्वर्णमाक्षिक भस्म मिला होता है. 

बनाने का तरीका यह होता है कि सभी भस्मों को बराबर वज़न में लेकर ग्वारपाठे के ताज़े रस में खरलकर मूंग के दाने के बराबर या 60mg की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. कई वैद्य रस सिन्दूर की जगह पर मकरध्वज मिलाकर बनाते हैं और यह ज़्यादा गुणकारी भी होता है. 

कुमारकल्याण रस के फ़ायदे- 

यह एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम मेडिसिन है जो हार्ट, फेफड़े, ब्रेन, लिवर, Digestive System, नर्वस सिस्टम और यूरिनरी सिस्टम सभी पर अच्छा असर करती है. 

यह बच्चों की खाँसी, अस्थमा, न्युमोनिया, उल्टी, दस्त, पेट की ख़राबी, सुखारोग, टी.बी. जैसी हर तरह की छोटी-बड़ी बीमारियों को दूर कर देता है.

इसके इस्तेमाल से लिवर, पेट के रोग, फेफड़ों के रोग जैसे खाँसी, न्युमोनिया, दिल, दिमाग और पेशाब के रोग दूर होते हैं. 

यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है जिस से बच्चे जल्दी बीमार नहीं होते और बच्चों को चेचक, टाइफाइड जैसी बीमारियों से भी बचाता है. 

कुल मिलाकर बस यह समझ लीजिये कि बच्चों के लिए आयुर्वेद की यह टॉप क्लास की मेडिसिन है. 

कुमारकल्याण रस की मात्रा और सेवन विधि -

 आधी से एक गोली तक शहद से सुबह-शाम चटाना चाहिए. या फिर रोगानुसार उचित अनुपन और दूसरी दवाओं के साथ देना चाहिए. चूँकि यह तेज़ी से असर करने वाली रसायन औषधि है इसलिए इसे डॉक्टर की सलाह से ही देना चाहिए. इसके 10 टेबलेट की क़ीमत करीब 1000 रुपया होती है जिसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते निचे दिए लिंक से - 




इसे भी जानिए -