आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी बूटी की जानकारी और बिमारियों को दूर करने के आयुर्वेदिक फ़ार्मूले और घरेलु नुस्खे की जानकारी हम यहाँ आपके लिए प्रस्तुत करते हैं

19 September 2018

Babularishta | बब्बूलारिष्ट के फ़ायदे


बब्बूलारिष्ट क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो खाँसी, दमा, टी.बी., थायसीस, रक्तपित्त, पेशाब के रोग और खून की ख़राबी जैसी कई तरह की बीमारियों में असरदार है, तो आईये जानते हैं बब्बूलारिष्ट का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से - 

बब्बूलारिष्ट के घटक या कम्पोजीशन-

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक बबूल होता है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बबूल की छाल, गुड़, धाय के फूल, पिपल, जायफल, लौंग, कंकोल, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेशर और काली मिर्च से मिश्रण से आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव-अरिष्ट निर्माण विधि से बनाया जाता है. 

बब्बूलारिष्ट के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह कफ़-पित्त नाशक, रक्तशोधक और रक्तरोधक भी है. इसमें Antitussive, Anti-inflammatory, Styptic और पाचक जैसे गुण पाये जाते हैं. 

बब्बूलारिष्ट के फ़ायदे- 

खाँसी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, टी. बी. थाईसीस, मूत्ररोग और रक्तविकार यानि स्किन डिजीज में आयुर्वेदिक डॉक्टर इसका प्रयोग कराते हैं.

टी.बी. वाली खाँसी जिसमे कफ़ के साथ ब्लड निकलता हो साथ में कमज़ोरी, बुखार और भूक की कमी हो तो इसका सेवन करना चाहिए.

पेशाब की जलन, नाक मुंह से खून आने या रक्तपित्त, फोड़े-फुंसी और दुसरे स्किन डिजीज में सहायक औषधियों के साथ लेने से फ़ायदा होता है.

बब्बूलारिष्ट की मात्रा और सेवन विधि -

15 से 30ML तक बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर खाना के बाद सुबह शाम लेना चाहिय या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसका डोज़ लेना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा होती है जिसे बच्चे-बड़े सभी यूज़ कर सकते हैं सही डोज़ में. बैद्यनाथ के 450ML की क़ीमत 126 रुपया है. 

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17 September 2018

Bol Parpati | बोल पर्पटी के फ़ायदे जानिए


बोल पर्पटी क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो रक्त प्रदर, पीरियड में ज़्यादा ब्लीडिंग होना, ख़ूनी बवासीर और ब्लीडिंग वाली बीमारियों में असरदार है. तो आइये जानते हैं बोल पर्पटी का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

बोल पर्पटी का कम्पोजीशन- 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक बोल नाम की औषधि है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक एक-एक भाग और बोल दो भाग के मिश्रण से बनाया जाता है.

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पारा और गंधक को खरलकर कज्जली बना ली जाती है और उसके बोल को मिक्स कर कड़ाही में डालकर पिघलने तक गर्म किया जाता है. इसके बाद केले के पत्ते पर इसे फैलाकर ऊपर से दूसरा केले का पत्ता डालकर दबा दिया जाता है, जिस से पपड़ी की तरह बन जाये. पपड़ी को ही आयुर्वेद में पर्पटी का नाम दिया गया है. 

आयुर्वेदानुसार बोल पर्पटी पित्त दोष को कम करती है. यह रक्तपित्त नाशक और रक्तरोधक या खून  बंद करने वाले गुणों से भरपूर होती है. 

बोल पर्पटी के फ़ायदे - 

जैसा कि शुरू में ही बताया गया है रक्त प्रदर, पीरियड की हैवी ब्लीडिंग, नकसीर, ख़ूनी बवासीर और ब्लीडिंग वाली दूसरी बीमारियों में इसका प्रयोग किया जाता है. 

बोल पर्पटी की मात्रा और सेवन विधि - 

125mg से 250mg तक रोज़ दो-तीन बार तक शहद या मिश्री के साथ लेना चाहिए. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही सही मात्रा में लेना चाहिए क्यूंकि हैवी मेटल वाली दवा है, ग़लत डोज़ होने से नुकसान भी हो सकता है. बैद्यनाथ के 5 ग्राम की क़ीमत 58 रुपया है. 


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12 September 2018

Brahmi Ghrita | ब्राह्मी घृत


ब्राह्मी घृत क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो दिमाग की बीमारियों के लिए असरदार है. इसके इस्तेमाल से एकाग्रता या कंसंट्रेशन, बुद्धि, सिखने की क्षमता और मेमोरी पॉवर बढ़ती है. चिंता, तनाव, स्ट्रेस, मानसिक थकान, मृगी और मानसिक रोगों में भी असरदार है. इसे ब्राह्मी घृत और ब्राह्मी घृतम के नाम से भी जाना जाता है, तो आईये जानते हैं ब्राह्मी घृत का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

ब्राह्मी घृत जो घी के तरह मेडिकेटेड घी वाली दवा है जिसका मेन इनग्रीडेंट ब्राह्मी नाम की बूटी होती है. 

ब्राह्मी घृत का कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें ब्राह्मी स्वरस, गाय का घी के अलावा त्रिकटु, त्रिवृत, दन्तीमूल, शंखपुष्पि,हल्दी, बच, कुठ, मोथा जैसी चीज़ें मिली होती हैं. जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस घृत पाक विधि से बनाया जाता है. अलग-अलग ब्रांड्स का कम्पोजीशन थोड़ा डिफरेंट होता है परन्तु घी और ब्राह्मी का जूस की सबका मेन इनग्रीडेंट होता है. कम्पोजीशन डिफरेंट होने की वजह यह है कि आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका योग अलग-अलग बताया गया है. 

ब्राह्मी घृत के गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह वात और पित्त नाशक है. यह मेमोरी बूस्टर, एंटी स्ट्रेस, एंटी डिप्रेशन, ब्रेन टॉनिक, एन्टी कैंसर और आक्षेप नाशक यानि Anticonvulsant जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

ब्राह्मी घृत के फ़ायदे -

चिंता, तनाव, स्ट्रेस, मानसिक थकान, बोलने और उच्चारण में समस्या होना, यादाश्त की कमज़ोरी, स्नायु दुर्बलता यानि Nervous Weakness और मृगी जैसी बीमारियों में यह असरदार है.

पंचकर्म में भी ब्राह्मी घृत का प्रयोग किया जाता है. 

ब्राह्मी घृत की मात्रा और सेवन विधि - 

10ML रोज़ सुबह एक बार ख़ाली पेट लेना चाहिए. बच्चों बहुत कम मात्रा में एक से ढाई ML तक ही देना चाहिए. बुजुर्गों को 5ML से ज़्यादा नहीं देना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ दवा है उम्र के मुताबिक़ सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. प्रेगनेंसी में दूध पिलाने वाली माताएँ भी कम डोज़ में इसे ले सकती हैं. डॉक्टर की सलाह से ही लेना बेस्ट है. ज़्यादा डोज़ होने से पेट का भारीपन, भूख की कमी और दस्त जैसी प्रॉब्लम हो सकती है. बैद्यनाथ के 100ML की क़ीमत 275 रुपया है. अलग-अलग कम्पनियों का प्राइस अलग है. ब्राह्मी घृत ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 
https://goo.gl/GkZ5kx 


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08 September 2018

Mahamash Tail | महामाष तेल (निरामिष)


महामाष तेल शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जो वातरोगों में असरदार है. इसकी मालिश से मसल्स को ताक़त मिलती है, जोड़ों का दर्द, सुजन, जकड़न, लकवा, पक्षाघात, साइटिका और आमवात में फ़ायदा होता है. तो आइये जानते हैं महामाष तेल का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल -

महामाष तेल के घटक या कम्पोजीशन- 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक माष यानि उड़द की दाल होती है जिसे तिल तेल के बेस पर बनाया जाता है. इसे महामाष तेल निरामिष भी कहते हैं, दुसरे तेल में नॉन वेज मटेरियल भी होता है, पर इसमें नहीं. 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - माष, तिल का तेल, गाय का दूध, दशमूल, एरण्ड मूल, बला, जेठीमध, देवदार, इलायची, रासना, जटामांसी, खरेटी, घोड़बच, सोया, कचूर, सोंठ, मिर्च पीपल, अगर, पुनर्नवा, सेंधा नमक, विदारीकन्द, प्रसारनी और अश्वगन्धा जैसी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस तेलपाक विधि से तेल सिद्ध किया जाता है. 

महामाष तेल के फ़ायदे- 

यह हर तरह के वात रोगों में फ़ायदेमंद है, जोड़ों का दर्द, मसल्स का दर्द, जकदन, गठिया, आमवात, कम्पवात, एकांगवात, अर्धांगवात, लकवा, पक्षाघात, बॉडी में कहीं भी होने वाला मसल्स और हड्डी का दर्द जैसे  हर तरह के दर्द वात व्याधि में इसकी मालिश करनी चाहिए. 

कान में सांय-सांय की आवाज़ होना, घंटी बजना, Tinnitus में इसे कान में डालना चाहिए. 

शीघ्रपतन और लिंग की कमज़ोरी में भी इसकी मालिश से फ़ायदा होता है. 

महामाष तेल की प्रयोग विधि -

प्रयाप्त मात्रा में इस तेल को लेकर पीड़ित स्थान पर रोज़ दो-तीन बार मालिश करनी चाहिए. यह बिल्कुल सेफ तेल है, सभी लोग इसकी मालिश कर सकते हैं. डाबर के 50ML की क़ीमत 290 रुपया है जबकि कामधेनु के 100ML की क़ीमत सिर्फ 188 रुपया है, इसे ऑनलाइन खरीदें निचे दिए लिंक से - 




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31 August 2018

Panchamrit Parpati | पंचामृत पर्पटी संग्रहणी की आयुर्वेदिक औषधि


पंचामृत पर्पटी एक तरह की पपड़ी वाली दवा है जिसे स्पेशल तरीके से बनाया जाता है जिसमे केले के ताज़े पत्ते का इस्तेमाल होता है.

पंचामृत पर्पटी के घटक या कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें शुद्ध पारा- 48 ग्राम, शुद्ध गंधक-96 ग्राम, अभ्रक भस्म-12 ग्राम, लौह भस्म-24 ग्राम और ताम्र भस्म- 12 ग्राम जैसी चीजें मिली होती हैं.

पंचामृत पर्पटी निर्माण विधि -

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पहले शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक को खरल में डालकर कज्जली बना लें. इसके बाद दुसरे भस्मों को मिक्स कर लोहे के बर्तन में डालकर पिघलने तक गर्म करना होता है. इसके बाद एक प्लेट में केले के ताज़े पत्ते के ऊपर पिघली हुयी दवा को डालकर फैला दें और ऊपर से केले का दूसरा पत्ता डालकर दबा दें. इस तरह से दवा फैलकर पपड़ी की तरह हो जाती है. ठंडा होने पर पीसकर रख लिया जाता है. 

पंचामृत पर्पटी के फ़ायदे- 

संग्रहणी, IBS और दस्त में ही इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है, और यह काफी असरदार भी है. 

दिन में कई बार पॉटी जाना, अपच और एसिडिटी में उचित अनुपान से लेने से अच्छा लाभ होता है. 

ब्लीडिंग वाले रोग जैसे खुनी बवासीर, नाक-मुंह से खून आना और रक्त प्रदर में भी इस से फायदा होता है. 

पंचामृत पर्पटी की मात्रा और सेवन विधि - 

125mg से 375mg तक दिन में दो बार भुने हुवे जीरे के चूर्ण और शहद के साथ मिक्स चाटना चाहिए और ऊपर से छाछ पीना चाहिए. बैद्यनाथ के 10 ग्राम की क़ीमत 121 रुपया है जिसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 
Panchamrit Parpati (10 grams)

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29 August 2018

Aanandda Vati | आनन्ददा वटी के फ़ायदे जानिए


आनन्ददा वटी क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो पुरुषों के बल, वीर्य, वर्ण और मैथुन शक्ति को बढ़ाती है. तो आईये जानते हैं आनन्ददा वटी का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

आनन्ददा वटी के घटक या कम्पोजीशन- 

इसे बनाने के लिए चाहिए होता है शुद्ध अहिफेन, रस सिन्दूर प्रत्येक 10-10 ग्राम, उत्तम कस्तूरी, कपूर 3-3 ग्राम, काली मिर्च का चूर्ण 10 ग्राम, जायफल चूर्ण, जावित्री चूर्ण, केसर और  शुद्ध हिंगुल प्रत्येक 6-6 ग्राम लेना होता है.

आनन्ददा वटी निर्माण विधि -

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पहले रस सिन्दूर को अच्छी तरह से खरल करने के बाद दूसरी चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर खरलकर भाँग के पत्तों के रस की तीन भावना देने के बाद दो-दो रत्ती या 250mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लें. यही आनन्ददा वटी है, यह बनी बनाई मार्केट में नहीं मिलती है. कस्तूरी तो अब दुर्लभ है और अहिफेन भी बैन है. योग्य वैद्य ही इसे बना सकते हैं वैकल्पिक औषधियों के मिश्रण से.


आनन्ददा वटी की मात्रा और सेवन विधि - 

एक गोली सोने से एक घंटा पहले मलाई, दूध या फिर पान में पत्ते में रखकर खाना चाहिए.

आनन्ददा वटी के फ़ायदे-

इसके सेवन से पॉवर-स्टैमिना और लिबिडो बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है. बल, वीर्य की वृद्धि होती है और पाचक अग्नि भी बढ़ जाती है.

शास्त्रों के अनुसार मैथुन से एक घंटा पहले एक गोली मलाई के साथ सेवन करने से पुरुष मदमस्त स्त्रियों के साथ इच्छानुसार रमण कर सकता है. 

वीर्य स्तम्भन और बल वृद्धि के लिए कुछ दिनों तक मलाई या दूध के साथ इसका सेवन करना चाहिए. यानी PE और ED के लिए यह एक इफेक्टिव दवा है. 




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23 August 2018

Panna Bhasma Benefits & Use | पन्ना भस्म के फ़ायदे


पन्ना भस्म क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो एक तरह के पत्थर से बनायी जाती है. पन्ना को ही एमेराल्ड के नाम से जाना जाता है. पन्ना भस्म जो है दिमाग की बीमारी, अस्थमा, दिल की बीमारी, धड़कन, एसिडिटी, चक्कर, उल्टी, पेशाब की जलन और पेशाब के रोगों में असरदार है. तो आईये जानते हैं पन्ना भस्म के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल - 

पन्ना भस्म के घटक या कम्पोजीशन -

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो पन्ना नाम रत्न जो कि एक तरह का स्टोन है वही इसका मेन इनग्रीडेंट होता है. पन्ना हल्के हरे रंग का कीमती पत्थर होता है जिसे लोग अंगूठी में भी पहनते हैं. शोधन मारण जैसे आयुर्वेदिक प्रोसेस के बाद इसे अग्नि देकर भस्म बनाया जाता है. 

पन्ना भस्म के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह तासीर में सहित या ठंडा होता है. वात-पित्त नाशक, Antacid, Anti Emetic, Cardio protective और Digestive जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

पन्ना भस्म के फ़ायदे  - 

वैसे तो यह कई तरह की बीमारियों में असरदार है परन्तु आयुर्वेदिक डॉक्टर लोग इसे दिमाग की बीमारी, नर्वस सिस्टम की कमजोरी, पेशाब की प्रॉब्लम, धड़कन और हार्ट से रिलेटेड बीमारी, पित्त बढ़ने, उल्टी-चक्कर और पेट की बीमारियों के लिए ही यूज़ करते हैं. 


पन्ना भस्म की मात्रा और सेवन विधि - 

125mg सुबह शाम शहद से या फिर रोगानुसार उचित औषधि और अनुपान के साथ लेना चाहिए. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही सही डोज़ में यूज़ करें, नहीं तो सीरियस नुकसान भी हो सकता है. 





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15 August 2018

Narshingh Churna | नारसिंह चूर्ण के फ़ायदे जानिए


कमज़ोर आदमी को शेर जैसी ताक़त देने वाली दवा है नारसिंह चूर्ण. यह वात रोगों को दूर करने वाली, बल-वीर्य बढ़ाने वाली और उत्तम बाजीकरण औषधि है जो बुढ़ापे के लक्षणों को दूर कर देती है. तो आइये जानते हैं नारसिंह चूर्ण के कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

नारसिंह चूर्ण के घटक एवम निर्माण विधि - 

शतावर, धोये  हुवे तिल, विदारीकन्द और गोखरू प्रत्येक 64-64 तोला, वराहीकन्द 80 तोला, गिलोय 100 तोला, शुद्ध भिलावा 128 तोला, चित्रकमूल छाल 40 तोला, दालचीनी, तेजपात और छोटी इलायची प्रत्येक 11-11 तोला और मिश्री 280 तोला.
बनाने का तरीका यह है कि सभी को कुटपिसकर कपडछन चूर्ण बनाकर एयर टाइट डब्बे में रख लें. 


नारसिंह चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि -

तीन ग्राम इस चूर्ण को सुबह-शाम एक स्पून घी और दो स्पून शहद के साथ मिक्स कर खाएं और ऊपर से गाय का दूध पियें. यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है. इसका सेवन करते हुवे दूध, घी और मक्खन मलाई ज़्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही इसे यूज़ करना चाहिए. 

नारसिंह चूर्ण के फ़ायदे- 

यह चूर्ण हर तरह के वात रोगों के असरदार है. यह उत्तम बलकारक, बाजीकरण और रसायन है. 

काम शक्ति की कमी, आलस, कमज़ोरी, बल-वीर्य की कमी, नामर्दी, शुक्राणुओं की कमी जैसी पुरुषरोग दूर हो जाते हैं इस चूर्ण के प्रयोग से. 

इस से पाचन शक्ति ठीक होती है और भूख बढ़ती है. 

इसे आप आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं  निचे दिए लिंक से- 



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14 August 2018

चाँदी के बर्तन में खाने से क्या होता है? Benefits of Eating in Silverware


आज मैं बताऊंगा चाँदी यानी सिल्वर के बर्तन के फ़ायदे के बारे में. जी हाँ दोस्तों, आपने ज़रूर सुना होगा कि राजा-महाराजा लोग सोने-चाँदी के बर्तन में खाना खाया करते थे. आज भी राज घरानों में चाँदी के बर्तन का इस्तेमाल होता है. और यही नहीं बल्कि आपके घर में भी छोटे बचों को चाँदी के चम्मच और कटोरी से खाना खिलाया जाता है, पर क्यूँ? क्या आप जानते है? आईये यही सब आज के इस पोस्ट में जानते हैं- 

चाँदी का आयुर्वेद में बड़ा महत्त्व है, इसे शीतल यानी तासीर में ठण्डी, पित्त नाशक, दिल दिमाग को ताक़त देने वाला और टॉनिक माना गया है. तो आईये अब जानते हैं कि चाँदी के बर्तन में खाना खाने से क्या-क्या फ़ायदे मिल सकते हैं?


  • चाँदी के ग्लास में पानी पिने या चाँदी के बर्तन में खाना खाने से बॉडी को ठंडक मिलती है, बढ़ा हुवा पित्त दोष कम होता है. ज़्यादा गर्मी लगना और गुस्सा आने में फ़ायदा होता है.



  • चाँदी को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. यह बैक्टीरिया फ्री होता है और इन्फेक्शन से भी बचाता है. 



  • चाँदी के बर्तन में खाना पकाने पर गर्म होने पर इसकी तासीर खाने में मिल जाती है, जिसे से चाँदी के गुण खाने में आते हैं और बॉडी को इसका फ़ायदा मिलता है. 




  • अगर आप चाँदी के ग्लास में पानी या चाय-काफ़ी पिते हैं तो यह सर्दी-जुकाम होने से बचाता है, पित्त कम करता है जिस से एसिडिटी, बॉडी, हाथ-पैर की जलन में फ़ायदा होता है. 



  • चांदी के बर्तन में खाना खाने से दिमाग को शांति और ताक़त मिलती है जिस से यादाश्त बढ़ती है और इस से आँखों को भी फ़ायदा होता है. 



  • किसी भी चीज़ के बर्तन में ख़ासकर मेटल वाले बर्तन में अगर आप खाना खाते हैं तो उसका कुछ न कुछ हिस्सा आपके पेट जाता है और उसका असर ज़रूर होता है. इसी तरह से चाँदी के बर्तन का भी असर होता है. चाँदी एक बेहतरीन धातु है जो हेल्थ के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद है. पर ध्यान रहे, चाँदी प्योर होनी चाहिए तभी फ़ायदा होगा.  


तो दोस्तों, अगर आपका बजट अलाव करता है तो चाँदी का कम से कम कप या ग्लास लाकर रोज़मर्रा के लिए इस्तेमाल कर फ़ायदा ले सकते हैं. 


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10 August 2018

Dr. Ortho Review | डॉ. और्थो कैप्सूल/आयल असरदार है?


डॉ. और्थो का ऐड आपने टीवी पर ज़रूर देखा होगा, यह जोड़ों के दर्द, जोड़ों की सुजन, कन्धों का दर्द, मसल्स का दर्द जैसे हर तरह के दर्द में असरदार है. डॉ. और्थो जो है कैप्सूल, आयल और स्प्रे के रूप में अवेलेबल है. तो आईये जानते हैं डॉ. और्थो के कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल - 

डॉ. और्थो का कम्पोजीशन - 

सबसे पहले जान लेते हैं डॉ. और्थो कैप्सूल के कम्पोजीशन के बारे में. डॉ. और्थो कैप्सूल जो है कुंदुरु, शुद्ध गुग्गुल, रास्ना, मेथी, सोंठ, अश्वगंधा, शुद्ध शिलाजीत और विषमुष्टि या कुचला जैसी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया गया है. 

इसमें मिलाई गई जड़ी-बूटियाँ दर्द, सुजन और जकड़न को दूर करने के जानी जाती हैं. जैसे शुद्ध गुग्गुल दर्द-सुजन के लिए बेजोड़ चीज़ है. रास्ना वात नाशक औषधि है. मेथी, सोंठ और अश्वगंधा दर्द, जकड़न, सुजन को दूर कर ब्लड फ्लो को बढ़ाती है. शिलाजीत ताक़त देता है और विषमुष्टि या कुचला दर्द दूर करता है और नर्व को शक्ति देता है. 

डॉ. और्थो आयल का कम्पोजीशन - 

डॉ. और्थो आयल के कम्पोजीशन की बात करें तो इसे आठ तरह के तेलों के मिश्रण से बनाया गया है. जैसे अलसी का तेल, कपूर तेल, पुदीना तेल, चीड़ तेल, गंधपुरा तेल, निर्गुन्डी तेल, ज्योतिष्मती तेल और तिल तेल

निर्गुन्डी जो है वातरोग नाशक जानी-मानी औषधि है, इसका तेल दर्द दूर करने में असरदार है. इसके साथ पुदीना, कपूर, चिड और गंधपूरा या गन्धपूर्णा का मिश्रण इसे फ़ास्ट एक्टिंग बना देता है. डॉ. और्थो स्प्रे भी इसी तरह की दर्दनाशक दवाओं के मिश्रण से बनाया गया है. इसके तेल को जली-कटी स्किन और ज़ख्म पर नहीं लगाना चाहिए. 

जोड़ों का दर्द, सुजन, जकड़न और मसल्स के दर्द जैसी प्रॉब्लम में डॉ. और्थो कैप्सूल का सेवन करने और डॉ. और्थो आयल की मालिश से फ़ायदा होता है. पूरा लाभ के लिए कम से कम तीन महिना तक यूज़ करना चाहिए. एक से दो कैप्सूल सुबह शाम गर्म पानी या दूध से लेना चाहिए. तेल या स्प्रे से रोज़ दो-तीन बार मालिश करें. 

डॉ. और्थो के 30 कैप्सूल की क़ीमत 183 रुपया है, डॉ. और्थो आयल के 100ML की क़ीमत 295 रुपया है जबकि इसका स्प्रे 127 रुपया है, इसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 



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04 August 2018

Himalaya Neem & Turmeric Soap Review


नहाने के लिए मैं हिमालया नीम एंड टर्मेरिक सोप यूज़ करता हूँ जो कि इंडिया के अलावा दुसरे कई सारे देशों में भी मिल जाता है. यहाँ दुबई में तो यह हर जगह मिल जाता है. तो आईये जानते हैं हिमालया नीम एंड टर्मेरिक सोप के बारे में पूरी डिटेल - 
हिमालया का यह हर्बल प्रोडक्ट है और जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है हिमालया नीम एंड टर्मेरिक यानी नीम और हल्दी के मिश्रण से बना हुवा साबुन.

नीम और हल्दी स्किन के लिए जानी मानी चीज़ है. नीम जो है ब्लड प्योरीफाई करने एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल एक्शन के लिए दुनियाभर में जानी जाती है. 
इफेक्टिव होने की वजह से ही इसे आयुर्वेद की कई सारी दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है. 

टर्मेरिक या हल्दी को कौन नहीं जानता? खाना बनाने के लिए हर रोज़ किचन में इसका इस्तेमाल होता है. हल्दी स्किन को हेल्दी रखती है. दाग-धब्बे दूर करती है और नेचुरल एंटी बायोटिक की तरह भी काम करती है. 

हिमालया नीम एंड टर्मेरिक सोप में नीम की पत्ती का एक्सट्रेक्ट, नीम का तेल, हल्दी, निम्बू, वेजिटेबल आयल और सोप बेस वाली चीज़ें मिली होती हैं. 


हिमालया नीम एंड टर्मेरिक सोप के फ़ायदे- 

इसके फ़ायदे की बात करें तो इसे नार्मल साबुन की तरह यूज़ कर सकते हैं. बॉडी में अगर किसी तरह का फ़ंगल इन्फेक्शन, खुजली, घमौरी, दाना वगैरह तो ज़रूर यूज़ करें.

बारिश के इस मौसम में खुजली और इन्फेक्शन से बचने के लिए इसका इस्तेमाल करना अच्छा है. 

इसकी खुशबु भी अच्छी है, इस से नहाने के बाद बड़ा ही फ्रेश महसूस होता है. 

इसके 125 ग्राम के एक साबुन की क़ीमत 44 रुपया है. अमेज़न में इसके छह पैक की क़ीमत डिस्काउंट के साथ सिर्फ 212 रुपया है जिसे आप ऑनलाइन आर्डर कर मंगा सकते हैं, निचे दिए लिंक से - 



इसे भी जानिए - हिमालया नीम फेस वाश के फ़ायदे 






31 July 2018

गर्भधारण रोकने के उपाय | Home Remedies to Stop Pregnancy | Vaidya Ji Ki Diary#12


वैद्य जी की डायरी आज मैं बताने वाला हूँ गर्भधारण या प्रेगनेंसी रोकने वाले कुछ आयुर्वेदिक प्रयोग के बारे में. 

आयुर्वेद में इस तरह के कई सारे प्रयोग भरे पड़े हैं जिनका आसानी से यूज़ कर फ़ायदा ले सकते हैं. आयुर्वेद में इसे दो भाग में रखा गया है- पहला है पूर्व प्रयोग जिसे मोस्टली पीरियड के टाइम किया जाता है जिसे प्रेगनेंसी नहीं होती.

दूसरा होता है पश्चात् प्रयोग जिसे प्रेगनेंसी के  बाद किया जाता है यानी एबॉर्शन वाला प्रयोग. 

आज यहाँ पूर्व प्रयोग ही बताने वाला हूँ. यहाँ कुछ खाने वाले आसान से नुस्खे बता रहा हूँ -


  • पीपल, वायविडंग और सुहागा इन तीनों को बराबर वज़न में लेकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को एक स्पून रोज़ ख़ाली पेट ठन्डे पानी से पीरियड के दौरान चार दिनों तक लेने से गर्भ नहीं ठहरता है.



  • कायफल, नागकेशर, कलौंजी, छोटी हर्रे, कला जीरा और कचूर सभी दस-दस ग्राम लेकर कूटपीसकर चूर्ण बना लें और पानी मिक्स कर खरलकर एक-एक ग्राम की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लें. इसे एक-एक गोली सुबह शाम पानी से 7 दिनों तक लेने से स्त्री को गर्भधारण नहीं होता है. 



  • तालिशपत्र और स्वर्णगैरिक दोनों बराबर मात्रा में लेकर पीसकर रख लें. अब इस चूर्ण को छह ग्राम रोज़ पानी से लेने से प्रेगनेंसी नहीं होती है. 



  • चित्रकमूल 12 ग्राम, सुहागा 12 ग्राम, हल्दी 1 ग्राम और काली मिर्च 2 ग्राम सभी को पीसकर 16 डोज़ बना लें. इसे एक-एक पुड़िया सुबह शाम गर्म पानी से पीरियड में लेने से प्रेगनेंसी नहीं होती है. 



  • ढाक के बीजों की राख को हींग के साथ सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता है. 


दो दोस्तों ये थे प्रेगनेंसी रोकने वाले कुछ आसान से प्रयोग. अगले किसी विडियो के अस्थाई रूप से गर्भधारण रोकने वाले कुछ स्पेशल योग की जानकारी दूंगा. 



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28 July 2018

Panchtikta Ghrita Guggulu | पंचतिक्त घृत गुग्गुल | Lakhaipur.com


पंचतिक्त घृत गुग्गुल क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है छोटे-बड़े, नए पुराने एक्जिमा, सोरायसिस और लेप्रोसी जैसे हर तरह के चर्मरोगों को दूर करता है. वातरक्त या गठिया, पाइल्स, फिश्चूला, ट्यूमर, ग्लैंड जैसी कई दूसरी बीमारियों में भी असरदार है. तो आईये जानते हैं पंचतिक्त घृत गुग्गुल क्या है? इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

पंचतिक्त घृत गुग्गुल भैषज्य रत्नावली का योग है जो कि घी के रूप में होती है. यह एक तरह की मेडिकेटेड घी वाली दवा है.

पंचतिक्त घृत गुग्गुल के घटक या कम्पोजीशन - 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है पंचतिक्त यानी पाँच तरह की तिक्त या कड़वी जड़ी-बूटियाँ घी और गुग्गुल ही इसका मेन इनग्रीडेंट है पर इसमें और भी दूसरी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं.

पंचतिक्त में आती है नीम की छाल, गिलोय, बांसा, पटोल-पत्र और छोटी कटेरी. 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है नीम की छाल, गिलोय, बांसा, पटोल-पत्र और छोटी कटेरी प्रत्येक चार-चार सौ ग्राम, पानी 25 लीटर, गाय का घी 1280 ग्राम, 

शुद्ध गुग्गुल 200 ग्राम और पाठा, वायविडंग, देवदार, गजपीपल, सज्जीक्षार, यवक्षार, सोंठ, हल्दी, सौंफ़, चव्य, कूठ, मालकांगनी, काली मिर्च, इन्द्रजौ, जीरा, चित्रकमूल छाल, कुटकी, शुद्ध भिलावा, बच, पिपलामुल, मंजीठ, अतीस, हर्रे, बहेड़ा, आँवला और अजवाइन प्रत्येक 10-10 ग्राम लेना होता है.

पंचतिक्त घृत गुग्गुल निर्माण विधि - 

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पहले पंचतिक्त वाली पांच जड़ी-बूटियों को मोटा-मोटा कूटकर 25 लीटर पानी में डालकर क्वाथ बनायें. जब एक चौथाई पानी बचे तो घी, गुग्गुल और दूसरी जड़ी-बुटियों का चूर्ण मिक्स कर घृतपाक विधि से पकाने के बाद छान कर लिया जाता है. यही पंचतिक्त घृत गुग्गुल कहलाता है. 

पंचतिक्त घृत गुग्गुल के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह त्रिदोष को दूर करता है. विष नाशक यानि बॉडी से toxins को दूर करने वाला, रक्तदोष नाशक यानि ब्लड प्योरीफ़ायर, एंटी फंगल, एंटी लेप्रोसी, पाचक यानी Digestive सिस्टम को इम्प्रूव करने वाला और लिवर प्रोटेक्टिव जैसे गुणों से भरपूर है.


पंचतिक्त घृत गुग्गुल के फ़ायदे - 


  • रक्त दोष या खून की ख़राबी से होने वाली बीमारियों में इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है. यह खून को साफ़ करती है और शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर कर देती है. 



  • हर तरह के स्किन डिजीज फोड़े-फुंसी से लेकर एक्जिमा, सोरायसिस और कुष्ठव्याधि तक में यह बेहद असरदार है. 



  • वातरक्त यानी बड़ा ही कष्टकारी रोग जिसे गठिया, बाय, आर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द के नाम से जाना जाता है, उसमे भी यह असरदार है.



  • हर तरह ट्यूमर, नाड़ीव्रण, ग्लैंड, पाइल्स, फिश्चूला और गण्डमाला जैसे रोगों में भी इसका प्रयोग किया जाता है. 



  • इसे लॉन्ग टाइम तक लगातार इस्तेमाल करते रहने से बड़ी-बड़ी बीमारियाँ दूर हो जाती हैं. 



पंचतिक्त घृत गुग्गुल की मात्रा और सेवन विधि - 

6 से 12 ग्राम तक सुबह शाम दूध या पानी से खाना के बाद लेना चाहिए या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही मात्रा और सही अनुपान से. यह बिलकुल सेफ़ दवा है सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से- 









22 July 2018

Accumass Review & Giveaway! | एक्यूमास वज़न बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा


एक्यूमास ग्रेनुल्स और कैप्सूल वज़न बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक दवा है जिस से दुबलापन दूर होकर वज़न बढ़ जाता है. यह बच्चे और बड़े सभी लोगों के लिए असरदार है. इसका एक सेट आपमें से किसी एक को बिल्कुल फ्री में देने वाला हूँ, तो आईये आज के इस विडियो में जानते हैं इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल -

एक्यूमास जो है जड़ी-बूटियों से बनी पूरी तरह से आयुर्वेदिक दवा है. यह ग्रेनुल्स और कैप्सूल दोनों रूप में अवेलेबल है, अच्छे रिजल्ट के लिए दोनों का इस्तेमाल करना होता है. 


एक्यूमास ग्रेनुल्स का कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - अश्वगंधा, सेब, कदली या केला, शतावरी, खजूर, आँवला, गोक्षुर, द्राक्षा, विदारीकंद, वराहीकन्द, सोंठ, मिर्च, पीपल, दालचीनी, जीरा और मुसली जैसी 18 तरह की जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं. 

एक्यूमास कैप्सूल का कम्पोजीशन - 

इसमें अश्वगंधा, आँवला, गोक्षुर, शतावर, पिप्पली, जीरा, विडंग, यष्टिमधु, विदारीकन्द, सेब और द्राक्षा जैसी 11 तरह की चीज़ें मिली होती हैं. 


एक्यूमास के फ़ायदे- 


  • जड़ी-बुटियों के कॉम्बिनेशन से बनी यह दवा एक हेल्थ सप्लीमेंट है और वेट गेनर का काम करती है.



  • इसमें मिलाई गयी जड़ी-बूटियाँ शरीर के मेटाबोलिज्म को सही करती हैं जिस से बॉडी के ऑर्गन सही से काम करते हैं, Digestion ठीक होता है और खाया पिया शरीर को लगता है. 



  • जिम जाने वाले और एक्सरसाइज करने वाले लोगों के लिए भी यह एक असरदार सप्लीमेंट है. 


कुल मिलाकर बस समझ लीजिये कि वेट गेन करने या वज़न बढ़ाने की यह एक अच्छी दवा है जो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के काम करती है. 

एक्यूमास का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका - 

एक से दो स्पून या 20 ग्राम तक एक ग्लास गुनगुने दूध में मिक्स कर सुबह शाम लेना चाहिए. इसके साथ एक्यूमास कैप्सूल भी एक-एक सुबह शाम लें. यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है. कम उम्र के लोगों को उनकी उम्र के अनुसार सही डोज़ में देना चाहिए. इसे लड़का-लड़की, महिला-पुरुष सभी लोग यूज़ कर सकते हैं. पूरा फ़ायदा के लिए कम से कम तीन महिना या पूरा लाभ होने तक यूज़ करना ही चाहिए. 

इसके 500 ग्राम के ग्रेनुल्स की क़ीमत 580 रुपया है जबकि इसके 60 कैप्सूल की क़ीमत 336 रुपया है. इसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं विडियो की डिस्क्रिप्शन में दिए लिंक से - 



इसे भी जानिए - 






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20 July 2018

Garbha Chintamani Ras | गर्भ चिंतामणि रस


गर्भ चिंतामणि रस स्वर्णयुक्त क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो महिला रोगों को दूर करती है. यह ल्यूकोरिया और प्रेगनेंसी में होने वाली कई तरह की बीमारियों में असरदार है. तो आईये जानते हैं गर्भ चिंतामणि रस का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

गर्भ चिंतामणि रस के घटक या कम्पोजीशन - 

इसे बनाने के लिए चाहिए होता है शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, स्वर्णभस्म, लौह भस्म, रजत भस्म, माक्षिक भस्म, शुद्ध हरताल, वंग भस्म और अभ्रक भस्म. भावना देने के लिए ब्राह्मी, वासा, भृंगराज, पर्पटाका और दशमूल भी चाहिए होता है. 


गर्भ चिंतामणि रस निर्माण विधि -

बनाने का तरीका यह होता है सबसे पहले शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक की कज्जली बनाकर दुसरे भस्मों को मिक्स कर अच्छी तरह से घुटाई कर ब्राह्मी, वासा और भृंगराज के रस की सात-सात भावना दें और पर्पटाका और दशमूल क्वाथ की भी सात-सात भावना देखर 250mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लें. यही गर्भ चिंतामणि रस है. इस गर्भ चिंतामणि रस वृहत के नाम से भी जाना जाता है. 
यह वात और पित्त दोष को बैलेंस करती है. 


गर्भ चिंतामणि रस के फ़ायदे - 

महिला रोगों के लिए यह हाई क्लास की दवा है सोना-चाँदी जैसे कीमती चीज़ों से बनी होने से. 

हैवी ब्लीडिंग, लेस ब्लीडिंग, पेशाब की जलन, इन्फेक्शन, ल्यूकोरिया, सूतिका रोग और प्रेगनेंसी में होने वाली Complication में असरदार है. 

यह गर्भस्थ शिशु को पोषण देती है जिस से स्वस्थ शिशु का जन्म होता है. 

गर्भ चिंतामणि रस की मात्रा और सेवन विधि -

एक-एक गोली सुबह शाम शहद से. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए. हैवी मेटल वाली दवा है, ग़लत डोज़ होने या सूट नहीं करने पर सीरियस नुकसान हो सकता है. सही डोज़ में और कम समय तक ही इसका इस्तेमाल किया जाता है. 



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