आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी बूटी की जानकारी और बिमारियों को दूर करने के आयुर्वेदिक फ़ार्मूले और घरेलु नुस्खे की जानकारी हम यहाँ आपके लिए प्रस्तुत करते हैं

18 July 2018

Eyova Oil Review in Hindi | इयोवा आयल- काले, घने, लम्बे और मज़बूत बालों के लिए


इयोवा तेल नेचुरल हेयर आयल है जो बालों को झड़ना रोकता है, रुसी या Dandruff दूर करता है, बालों को काला, घना और मज़बूत बनाता है. साथ ही बालों को समय से पहले सफ़ेद होने से बचाता है. इसे मैंने यूज़ कर काफ़ी इफेक्टिव पाया है. तो आईये जानते हैं इयोवा आयल क्या है? और जानेंगे इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

अगर आप बालों की किसी भी प्रॉब्लम से परेशान हैं  और तरह-तरह के आयल लगाकर थक चुके हैं तो आपकी समस्या का समाधान है- इयोवा आयल 

सबसे पहले जान लेते हैं कि इयोवा आयल है क्या चीज़?

इयोवा आयल अण्डों से बना तेल है जो की 100% नेचुरल है. इसके 50ML तेल को बनाने के लिए 20 अण्डों का इस्तेमाल किया गया है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें एग आयल, कैनोला आयल और खुशबु का मिश्रण होता है.

लाखों डॉलर खर्च करने के बाद कोल्ड प्रेस्ड टेक्नोलॉजी से अण्डों का तेल निकालकर इस प्रोडक्ट को बनाया गया है जो बालों के लिए 100% इफेक्टिव है.

Biotin, ओमेगा 2 & 6, गुड कोलेस्ट्रॉल, एंटी ऑक्सीडेंट और Immunoglobulins जैसे ज़रूरी पोषक तत्व इसमें पाए जाते हैं तो बालों की हर समस्या  को दूर करने में सक्षम हैं. 


इयोवा आयल के फ़ायदे- 

बालों का गिरना, बालों की जड़ें कमज़ोर होना, रुसी, बालों का रूखापन, दोमुहें बाल होना, बालों का सफ़ेद होना जैसी बालों को प्रॉब्लम को दूर करता है. 

अगर आपके बाल झड़ रहे हैं और समय से पहले सफ़ेद हो रहे हैं और आप गंजा होने से बचना चाहते हैं तो इयोवा आयल का इस्तेमाल शुरू कर दें. 

इस तेल के बारे में पहले मैंने भी सुना था और सोचा कि क्यूँ न पहले इसे टेस्ट कर लूँ इसके बाद आपको बताऊँ. इसकी एक बोतल मैंने एक भाई को कुछ दिन पहले दिया यूज़ करने के लिए जिनके बाल लगभग आधे झड़ चुके हैं. पहले हफ्ते में ही उनका हेयर फॉल कण्ट्रोल हो गया और जैसा इसका रिजल्ट है दो-तीन महीने में उनके बाल घने हो जायेंगे. वाकई में यह कमाल का तेल है. 

एग आयल होने के बावजूद इसमें अंडे की कोई गंध नहीं है, बल्कि इसकी खुशबू अच्छी है और चिपचिपा भी नहीं है. 

अपने देश में बालों की समस्या तो है ही यहाँ दुबई या फिर सऊदी, क़तर, बहरीन जैसे कोई भी गल्फ़ कंट्री में हेयर फॉल की प्रॉब्लम की ज़्यादा है क्योंकि यहाँ के पानी में क्लोरीन मिला होता है.  

तो दोस्तों, आप पुरुष हों या महिला, बच्चे हों या बड़े इस तेल का इस्तेमाल कीजिये और बालों को काला, घाना और मज़बूत बनाइये.


इयोवा आयल यूज़ कैसे करें?

इयोवा आयल को बालों की जड़ों में हाथों की उँगलियों से अच्छी तरह से लगायें. कम से कम तीन घंटा लगा रहने के बाद शैम्पू से सर धों लें. या फिर रात में सोने से पहले इस तेल को लगा लें और सुबह शैम्पू कर लें. कोई भी हर्बल शैम्पू या फिर अपनी पसंद का शैम्पू यूज़ कर सकते हैं. 

यह खुशबूदार तेल है, इसे लगाकर काम पर भी जा सकते हैं. इसे हफ़्ते में तीन बार यूज़ करें और पुरे फ़ायदे के लिए कम से कम लगातार तीन महीने तक इस्तेमाल करें और फिर चमत्कार देखें. 

इसके 50ML की क़ीमत है सिर्फ 590 रूपये जिसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से, अभी आर्डर कीजिये और इस्तेमाल शुरू कीजिये. 




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17 July 2018

Marichyadi Tail | मरिच्यादी तेल

मरिच्यादी तेल आयुर्वेदिक तेल है जो हर तरह की स्किन प्रॉब्लम में असरदार है. यह खाज-खुजली, फोड़े-फुंसी से लेकर, दाद-एक्जिमा, सफ़ेद दाग, सोरायसिस से लेकर  कुष्ठ व्याधि तक में असरदार है. तो आईये जानते हैं मरिच्यादी तेल का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

मरिच्यादी तेल के घटक या कम्पोजीशन -

इसे पीले सरसों के तेल बेस पर कई तरह की जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाया जाता है. इसमें सरसों तेल के अलावा वत्सनाभ, काली मिर्च, हरताल, मैन्शील, मोथा, कनेर, अर्क क्षीर, जटामांसी, त्रिवृत, विशाला, कुष्ठ, हल्दी, दारूहल्दी, देवदार, सफ़ेद चन्दन, गोमय और गोमूत्र जैसी चीज़ों का मिश्रण होता है. 

एक दूसरी दवा महा मरिच्यादी तेल भी है जिसका कम्पोजीशन थोड़ा अलग है, उसमे इन सभी चीज़ों के अलावा दूसरी कई और चीज़े मिली होती हैं, उसका फ़ायदा भी इस से कहीं ज़्यादा होता है. उसकी जानकारी भी जल्द दी जाएगी. 


मरिच्यादी तेल के गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह चर्मरोग नाशक है. इसमें एन्टी सेप्टिक, एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी इचिंग जैसे गुण पाए जाते हैं. 

मरिच्यादी तेल फ़ायदे - 

चर्मरोगों या स्किन डिजीज में एक्सटर्नल यूज़ करने वाली यह जानी-मानी दवा है. 
खुजली, फंगल इन्फेक्शन, दाद-दिनाय या एक्जिमा और सोरायसिस में इसे लगाया जाता है. 

सफ़ेद दाग या ल्यूकोडर्मा में भी असरदार है. रस माणिक्य और गंधक रसायन के साथ इसे लगाने से सफ़ेद दाग दूर होता है. 

फोड़े-फुंसी और ज़ख्म में इस तेल की ड्रेसिंग करने से अच्छा फायदा होता है.
बस कुल मिलाकर समझ लीजिये हर तरह की स्किन प्रॉब्लम के लिए यह एक असरदार दवा है. 


इसे लगाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धोना चाहिए क्यूंकि यह वत्सनाभ, मैन्शील और हरताल जैसी ज़हरीले चीजों से बनी दवा है. इसे आँखों में लगने से बचाएं और मुंह में नहीं जानी चाहिए. आयुर्वेदिक कंपनियों की यह मिल जाती है इसे आप ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं, निचे दिए लिंक से- 






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14 July 2018

Pet Saffa Review | पेट सफ़ा कब्ज़ की हर्बल दवा



पेट सफ़ा कब्ज़ या Constipation को दूर करने वाली आयुर्वेदिक दवा है जिसका ऐड आपने टीवी पर ज़रूर देखा होगा. तो आईये आज के इस विडियो में जानेंगे कि यह दवा कैसी है? और जानेंगे इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

पेट सफ़ा एक प्रॉपरायट्री आयुर्वेदिक प्रोडक्ट है जो कब्ज़ और गैस को दूर करता है और पाचन शक्ति को इम्प्रूव करता है. 

पेट सफ़ा का कम्पोजीशन- 

यह जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनी दवा है, इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

सनाय की पत्ती, काला नमक, अजवाइन, इसबगोल, त्रिफला, सेंधा नमक, सज्जीक्षार, अमलतास का गूदा, सौंफ़, सोंठ, निशोथ, जीरा और एरंड तेल मिलाकर बनाया गया है. 


                  

सनाय की पत्ती, त्रिफला, इसबगोल और अमलतास का गूदा कब्ज़ को दूर करने वाली आयुर्वेद की जानी औषधियां हैं जिन्हें सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है. 


पेट सफ़ा के औषधिय गुण -

इसके गुणों की बात करें तो यह रेचक यानि Laxative, अनुलोमन यानि पेट से गैस और मल को बाहर करने वाला, पाचक यानि Digestive जैसे गुणों से भरपूर है. 

पेट सफ़ा के फ़ायदे- 

कब्ज़ को दूर करने की यह पॉपुलर दवाओं में से एक है. पेट साफ़ नहीं होना, गैस, मल कड़ा होना जैसी प्रॉब्लम में इसका इस्तेमाल करना चाहिए.

यह कब्ज़ को दूर करता है और पाचन शक्ति को इम्प्रूव करता है. 

कब्ज़ की वजह से होने वाले रोग जैसे पाइल्स और एनल फिशर में भी फ़ायदेमंद है.

पेट सफ़ा की डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका- 

5 से 10 ग्राम तक या फिर एक से दो स्पून तक सोने से पहले रोज़ रात में एक बार गुनगुने पानी से लेना चाहिए. इसकी टेबलेट लेनी हो तो दो टेबलेट रोज़ एक बार गुनगुने पानी से लेना चाहिए. बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कम डोज़ में देना चाहिए. 


पेट सफ़ा के साइड इफेक्ट्स- 

वैसे तो यह सेफ़ दवा है, सही डोज़ में लेने से कोई नुकसान नहीं होता. पेट में ऐंठन, हल्का दर्द और दस्त की समस्या हो सकती है ग़लत डोज़ होने से. प्रेगनेंसी में इसका इस्तेमाल न करें. 

सनाय की मिला होने से लॉन्ग टाइम तक यूज़ न करें, नहीं तो इसकी आदत भी पड़ सकती है. हाई BP और बॉडी में Pottasium की अधीक मात्रा हो तो इसका यूज़ न करें. 

इसके 120gm के ग्रेनुल्स के दो पैक की क़ीमत है 156 रुपया और इसके 30 टेबलेट के 2 पैक की क़ीमत है 140 रुपया अमेज़न में. इसे घर बैठे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 







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Leela Vilas Ras | लीलाविलास रस के फ़ायदे


लीलाविलास रस क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो गैस्ट्रिक और पित्त रोगों में असरदार है. तो आईये जानते हैं लीलाविलास रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

लीलाविलास रस के घटक या कम्पोजीशन- 

रसायन औषधि होने से इसमें शुद्ध पारा, गंधक के अलावा दूसरी जड़ी-बूटियां भी होती हैं. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें- 

शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, वंशलोचन, हर्रे, बहेड़ा, आंवला और भृंगराज के रस का मिश्रण होता है.

लीलाविलास रस के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह पित्तशामक है, पित्त दोष को बैलेंस करता है. यह Antacid, पाचक या Digestive और लिवर प्रोटेक्टिव जैसे गुणों से भरपूर होता है. 


लीलाविलास रस के फ़ायदे- 

पाचन तंत्र या Digestive System की बीमारियों के लिए यह असरदार दवा है. इसके इस्तेमाल से सीने की जलन, हाइपर एसिडिटी, गैस्ट्रिक, पेट की सुजन, उल्टी, बदहज़मी जैसी प्रॉब्लम दूर होती है. 

लिवर के फंक्शन को सही करता है, भूख बढ़ाता है. इसके अलावा पेशाब की कमी और पेशाब की तकलीफ़ में भी इस से फ़ायदा होता है. 


लीलाविलास रस की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो गोली तक शहद के साथ खाना के पहले या बाद लेना चाहिए. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए. हैवी मेटल वाली रसायन औषधि है, ग़लत डोज़  होने से नुकसान भी हो सकता है. प्रेगनेंसी में इसका इस्तेमाल न करें. बैद्यनाथ के 40 टेबलेट की क़ीमत 122 रुपया है ऑनलाइन में. 



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11 July 2018

Bio Combination 21 बच्चों के दांत निकलने के समय होने वाली परेशानियों की दवा


बायो कॉम्बिनेशन 21 होमियो बायोकेमीक साल्ट है जो छोटे बच्चों के दांत निकलने के समय होने वाली परेशानियों को दूर करता है. Teething Troubles दूर करने वाली दवा के नाम से भी इसे जाना जाता है. तो आईये जानते हैं बायो कॉम्बिनेशन 21 का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

बायो कॉम्बिनेशन 21 का कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें दो तरह के बायो केमीक साल्ट होते हैं -
Ferrum Phos. 3x और Calcarea Phos. 3x

इसमें मिलाई गयी दोनों दवाएँ अपने आप में बेजोड़ हैं जो कई तरह के लक्षणों को दूर करने में सक्षम हैं. 

बायो कॉम्बिनेशन 21 के फ़ायदे- 

जैसा कि आप सभी जानते हैं छोटे बच्चों को दांत निकलने से पहले और दांत निकलने के दौरान कई तरह की प्रॉब्लम होती है जैसे सर्दी-खाँसी, बुखार, उल्टी, हरे पीले दस्त, मसूड़ों की सुजन, पेट की ख़राबी, पेट दर्द, चिडचिडापन, बेचैनी जैसी प्रॉब्लम पाई जाती है. 

इस तरह की प्रॉब्लम में बायो कॉम्बिनेशन 21 काफ़ी असरदार है. इसका इस्तेमाल करने से बच्चों के दांत आसानी से निकल जाते हैं. 

अगर दांत निकलने से पहले इसे लगातार दिया जाये तो किसी तरह की समस्या नहीं होने देता है. नहीं तो एलोपैथ वाले तरह-तरह के एंटीबायोटिक और इंजेक्शन देते  हैं ऐसी कंडीशन में. 

यह हाजमा ठीक करता है और  भूख बढ़ाता है.

कुल मिलाकर बस इतना समझ लीजिये की दांत निकलने के टाइम बच्चों को होने वाली हर तरह की परेशानियों के लिए यह एक बेहतरीन दवा है जो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के काम करती है. सिर्फ़ बच्चे ही नहीं बल्कि बड़ों के दांत की प्रॉब्लम में भी इस से फ़ायदा होता है.  

बायो कॉम्बिनेशन 21 का डोज़ - 

दो टेबलेट हर तीन घंटे पर यानी रोज़ चार बार देना चाहिए. बड़ों को चार टेबलेट चार बार. यह मीठी दवा है, बच्चे बिना किसी परेशानी के खा लेते हैं. इसे स्पून में डालकर थोड़ा पानी मिक्स कर  भी दे सकते हैं. SBL के 25 ग्राम के पैक की क़ीमत क़रीब 85 रुपया है ऑनलाइन में. 



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08 July 2018

Shirah Shuladi Vajra Ras for All Types of Headache | शिरःशूलादि वज्र रस | हर तरह के सर दर्द की बेजोड़ औषधि


शिरःशूलादि वज्र रस क्लासिक आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो हर तरह के सर दर्द को दूर करती है, चाहे सर दर्द किसी भी कारण से क्यूँ न हो. तो आईये जानते हैं शिरःशूलादि वज्र रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

शिरःशूलादि वज्र रस जैसा कि इसके नाम से पता चलता है शिरःशूल यानी सर दर्द को वज्र के समान दूर करने वाली रसायन औषधि. जिस तरह से वज्रपात से असुरों का नाश होता है, उसी तरह से इस दवा से सर दर्द या Headache का नाश होता है. इसे शिरःशुलाद्री वज्र रस भी कहा जाता है. 

शिरःशूलादि वज्र रस के घटक या कम्पोजीशन- 

यह रसायन औषधि है तो इसमें शुद्ध-पारा और शुद्ध गंधक के अलावा दूसरी जड़ी-बूटियां मिली होती हैं. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है - शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, लौह भस्म, ताम्र भस्म प्रत्येक 40-40 ग्राम, त्रिफला 80 ग्राम, कुठ, यष्टिमधु, पीपल, सोंठ, गोक्षुर, विडंग, बिल्व, अग्निमन्था, श्योनका, गम्भारी, पाटला, शालपर्णी, पृष्णपर्णी, बृहती और कंटकारी प्रत्येक 10-10 ग्राम, शुद्ध गुग्गुल 160 ग्राम. भावना देने के लिए दशमूल क्वाथ और थोड़ी मात्रा में घी.


शिरःशूलादि वज्र रस निर्माण विधि -

बनाने के तरीका यह की सबसे पहले शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक को पत्थर के खरल डालकर कज्जली बना लें और दूसरी जड़ी-बूटियों का बारीक चूर्ण मिक्स करें और भस्म वगैरह भी. अब इसमें दशमूल क्वाथ की दो-तीन भावना देने के बाद शुद्ध गुग्गुल मिक्स कर अच्छी तरह से घोंटकर हाथ में घी लगाकर चने के बराबर की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लें. यही शिरःशूलादि वज्र रस है. वैसे यह बना हुवा भी मिल जाता है. यह भैषज्य रत्नावली का योग है.

शिरःशूलादि वज्र रस के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह त्रिदोष नाशक है. कफ़, पित्त और वात तीनों दोषों पर इसका असर होता है. शूलनाशक ख़ासकर सर दर्द दूर करने वाले गुणों से भरपूर होता है.

शिरःशूलादि वज्र रस के फ़ायदे - 

हर तरह के सर दर्द के लिए यह बेहद असरदार दवा है. कफज, पित्तज, वातज, श्लैश्मिक या किसी भी वजह से होने वाले सर दर्द को दूर करती है.

अधकपारी, माईग्रेन, टेंशन वाला सर दर्द जैसे सर दर्द में फ़ायदा होता है.

ज़्यादा टेंशन, मानसिक थकान और मेंटल प्रेशर की वजह से होने वाले सर दर्द में भी असरदार है.

अपने एक्सपीरियंस की बात करूँ तो जितने लोगों को भी यह दवा दिया है, अच्छा रिजल्ट  मिला है. पर सर दर्द के मूल कारण का भी उपचार होना चाहिए. 


शिरःशूलादि वज्र रस की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो गोली तक सुबह शाम बकरी के दूध या शहद से. या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही डोज़ में उचित अनुपान से लेना चाहिए. कम उम्र के लोगों को भी दे सकते हैं पर आयु के अनुसार सही मात्रा होनी चाहिए. हैवी मेटल वाली दवा है, ग़लत डोज़ होने से नुकसान भी हो सकता है. इसे लगातार चार से छह वीक तक लिया जा सकता है. 



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06 July 2018

Brahmi Vati Memory Booster | ब्राह्मी वटी मेमोरी पॉवर और बुद्धि बढ़ाने की बेजोड़ औषधि


ब्राह्मी वटी मेमोरी पॉवर बढ़ाने और बुद्धि बढ़ाने की बेजोड़ आयुर्वेदिक औषधि है, इसके इस्तेमाल से दिमाग की कमज़ोरी और दिमाग की दूसरी बीमारियाँ दूर होती हैं. तो आईये जानते हैं ब्राह्मी वटी कितने तरह की होती है? इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

ब्राह्मी वटी का नाम तो आपने पहले भी सुना होगा पर बहुत लोगों को यह पता नहीं कि यह तीन तरह की होती है. 

ब्राह्मी वटी न. - 1 (स्वर्णयुक्त)
ब्राह्मी वटी (बुद्धि वर्धक) इसे ब्राह्मी वटी न. 2 के नाम से भी जाना जाता है 
ब्राह्मी वटी(चेचक) 

तीनों का कॉम्बिनेशन अलग-अलग होता है. यहाँ मैं बताने वाला हूँ ब्राह्मी वटी बुद्धिवर्धक या ब्राह्मी वटी न. 2 के बारे में. 

ब्राह्मी वटी(बुद्धि वर्धक) के घटक या कम्पोजीशन - 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, इसमें ब्राह्मी नाम की बूटी भी मिली होती है. इसे बनाने के लिए चाहिए होता है - 

छाया में सुखाई हुई ब्राह्मी दो भाग, शंखपुष्पी दो भाग, बच एक भाग, काली मिर्च आधा भाग, गावज़बाँ दो भाग, स्वर्णमाक्षिक भस्म और रस सिन्दूर एक-एक भाग. जटामांसी भी चाहिए भावना देने के लिए. 


ब्राह्मी वटी(बुद्धि वर्धक) निर्माण विधि - 

बनाने का तरीका यह है कि सबसे पहले रस सिन्दूर को खरल करें उसके बाद स्वर्णमाक्षिक भस्म मिक्स कर दूसरी जड़ी-बूटियों का बारीक चूर्ण मिक्स कर जटामांसी के क्वाथ की भावना देकर 250mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लें. यही ब्राह्मी वटी(बुद्धि वर्धक) है, वैसे यह बनी बनायी भी मिल जाती है. 

ब्राह्मी वटी(बुद्धि वर्धक) के फ़ायदे -

यह एक बेहतरीन ब्रेन टॉनिक है, मेमोरी पॉवर बढ़ाने, दिमाग की कमज़ोरी दूर करने और बुद्धि बढ़ाने की यह बेजोड़ दवा है. 

स्टूडेंट्स, टीचर, प्रोफेसर, जज, वकील और दुसरे लोग जिनको दिमागी काम ज़्यादा करना पड़ता है, या फिर जिनको मेंटल वर्क करना पड़ता है, उनके लिए यह एक असरदार और उपयोगी औषधि  है.

नींद की कमी, चिंता, तनाव, स्ट्रेस, बेहोशी, हिस्टीरिया और दुसरे मानसिक रोगों में भी असरदार है. 


ब्राह्मी वटी(बुद्धि वर्धक) की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो गोली तक सुबह शाम एक चम्मच ब्राह्मी घृत को दूध में मिक्स कर लेना चाहिए. इसे लेते हुवे भोजन के बाद सारस्वतारिष्ट दो स्पून सुबह शाम लेने से अच्छा रिजल्ट मिलता है. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. बैद्यनाथ के 80 टेबलेट की क़ीमत 170 रुपया है, इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं. 




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02 July 2018

Shulvarjini Vati | शूलवर्जिनि वटी दर्द की आयुर्वेदिक औषधि


शूलवर्जिनि वटी जो है शास्त्रीय आयुर्वेदिक दवा है जो पेट दर्द और दुसरे कई तरह के दर्द को दूर करती है. इसके इस्तेमाल से से एसिडिटी, गुल्म या पेट में गोला बनना, भूख की कमी, पाइल्स, फिश्चूला और दस्त में फ़ायदा होता है, तो आईये जानते हैं शूलवर्जिनि वटी क्या है? इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

शूलवर्जिनि वटी जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है शूल यानि दर्द को दूर करने वाली टेबलेट. यह एक तरह की रसायन औषधि है.

शूलवर्जिनि वटी के घटक या कम्पोजीशन - 

रसायन औषधि होने से इसमें शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक के अलावा दूसरी जड़ी-बूटियाँ और भस्म भी मिले होते हैं. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है -

शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, लौह भस्म और शंख भस्म प्रत्येक 20-20 ग्राम. शुद्ध सुहागा, शुद्ध हिंग, सोंठ, मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आंवला, दालचीनी, तेजपात, तालिशपत्र, जायफल, लौंग, अजवाइन, ज़ीरा और धनियाँ प्रत्येक 10-10 ग्राम.


शूलवर्जिनि वटी निर्माण विधि - 

बनाने का तरीका है कि जड़ी-बूटियों का बारीक कपड़छन चूर्ण कर अलग रख लें, अब शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक को खरल में डालकर कज्जली बना लें. इसके बाद जड़ी-बूटियों का चूर्ण मिक्स कर खरल करें और आँवले के रस में तीन दिनों तक घोंटकर 250mg की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लें. यही शूलवर्जिनि वटी है, वैसे  यह बनी-बनाई भी मार्केट में मिल जाती है. 

शूलवर्जिनि वटी के गुण -

आयुर्वेदानुसार इस से वात, पित्त और कफ़ तीनों तरह के दोषों में फ़ायदा होता है. यह शूलनाशक, गैसनाशक, पाचक है. इसमें  Anti-colic, Antacid, Digestive aur Anti-pyretic जैसे गुण होते हैं. 


शूलवर्जिनि वटी के फ़ायदे - 

किसी भी वजह से होने वाली पेट दर्द में इसको लेते ही आराम मिलता है. मन्दाग्नि की वजह से होने वाले पेट दर्द, जिसमे हल्का-हल्का दर्द होते रहता है उसके लिए यह बेहद इफेक्टिव दवा है. 

एसिडिटी, गैस, पेट में गोला बनना, खाने में रूचि नहीं होना, बवासीर, भगंदर, दस्त और जोड़ों के दर्द में भी इस से फ़ायदा होता है. 

जहाँ तक मेरा एक्सपीरियंस है, इसे पेट दर्द में ही सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है. 

शूलवर्जिनि वटी की मात्रा और सेवन विधि -

एक से दो गोली तक रोज़ दो से तीन बार तक नार्मल पानी से या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए. हैवी मेटल वाली दवा है इसे सही डोज़ में डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए. बैद्यनाथ के 40 टेबलेट की क़ीमत 71 रुपया है, इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं. 





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30 June 2018

Karpur Ras Benefits | कर्पूर रस के फ़ायदे


कर्पूर रस क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो दस्त और डायरिया में असरदार है. तो आईये जानते हैं कर्पूर रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

कर्पूर रस जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कपूर से बनी रसायन औषधि. आयुर्वेद में कपूर को कर्पुर के नाम से जाना जाता है जिसे अंग्रेज़ी में Camphor कहते हैं. 

कर्पूर रस के घटक या कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे शुद्ध हिंगुल, शुद्ध अहिफेन, मोथा, इन्द्रजौ, जातिफल और कपूर के मिश्रण से बनाया जाता है. 

बनाने का तरीका यह होता है की सभी चीज़ों को बराबर वज़न में लेकर खरलकर थोड़ा पानी मिक्स कर 125 mg की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यह भैषज्य रत्नावली का योग है.


कर्पूर रस के गुण या Properties - 

इसके गुणों की बात करें तो यह वात और कफ़ दोष को कम करता है, ग्राही और पाचक है. यानी Antidiarrheal, Digestive, Anti-bacterial और एंटी कैंसर जैसे गुणों से भी भरपूर होता है. 

कर्पूर रस के फ़ायदे  - 

लूज़ मोशन, दस्त और डायरीया के लिए इसे प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है. 
नये दस्त और डायरीया में ही आयुर्वेदिक डॉक्टर इसका प्रयोग कराते हैं. 


कर्पूर रस की मात्रा और सेवन विधि -

एक गोली सुबह शाम या रोज़ तीन बार तक शहद के साथ. या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार. इसे डॉक्टर की सलाह से ही लें, क्यूंकि यह रसायन औषधि है. आयुर्वेदिक कम्पनियों की यह मिल जाती है, इसे ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं. 




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27 June 2018

Zahar Mohra Pishti/Bhasma | ज़हरमोहरा पिष्टी/भस्म के फ़ायदे


ज़हरमोहरा पिष्टी/भस्म क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो एक तरह के खनिज या पत्थर से बनाई जाती है जो दस्त, डायरिया, उल्टी, पेट की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट के लिए फ़ायदेमन्द है, तो आईये जानते हैं ज़हरमोहरा पिष्टी/भस्म क्या है? इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

ज़हरमोहरा एक तरह का पत्थर जैसा खनिज होता है. जैसा कि इसका नाम है यह ज़हर या Poision नहीं होता पर साँप-बिच्छू के ज़हर की काट ज़रूर करता है.  इसका उपयोग करने से पहले शोधन ज़रूर किया जाता है ताकि किसी तरह का नुकसान न हो. इसे अंग्रेज़ी में Serpentine कहा जाता है जो की Magnesium Silicate का एक रूप है. 

ज़हरमोहरा को आयुर्वेद में नागपाषाण भी कहा जाता है. इसकी पिष्टी और भस्म भी बनाई जाती है, इसकी पिष्टी को ज़हरमोहरा खताई पिष्टी भी कहते हैं. इसके मिलते जुलते नाम वाली दवा 'जवाहर मोहरा' दूसरी दवा है जो हार्ट की बीमारियों में असरदार है. 

इसकी भस्म या फिर पिष्टी बनाने से पहले शोधन-मारण जैसे आयुर्वेदिक प्रोसेस से गुज़ारना पड़ता है. 

ज़हरमोहरा शोधन विधि- 

इसे शुद्ध करने का तरीका यह है कि आग में लाल होने तक गर्म कर गाय के दूध में 21 बार डालकर बुझायें, इसी तरह से त्रिफला के काढ़े में भी 21 बार बुझाना होता है. इसके बाद गुलाब जल या फिर चंदनादि अर्क में सात दिनों तक खरलकर पिष्टी बनाई जाती है. 

भस्म बनाने के लिए इन सब प्रोसेस के बाद गाय के दूध में छह घंटा तक खरलकर टिकिया बनाकर सुखाने के बाद गजपुट की अग्नि देकर भस्म बनाया जाता है. वैसे ज़हरमोहरा पिष्टी/भस्म बना बनाया मार्केट में मिल जाता है. 


ज़हरमोहरा पिष्टी/भस्म के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह वात, पित्त और कफ़ तीनों को बैलेंस करता है. यह Antidiarrheal, Antiemetic यानि उल्टीनाशक, Antacid, Anti-hypertensive यानी BP कम करने वाला, Antibaceterial, पाचक या Digestive और साँप-बिच्छू का Antidote जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

ज़हरमोहरा पिष्टी/भस्म के फ़ायदे - 

छोटे बच्चों के उल्टी-दस्त, या फिर हरे पीले दस्त होने पर यह बेहद असरदार है. इसे साथ चौहद्दी या बालचतुरभद्र चूर्ण को शहद में मिक्स कर चटाने से अच्छा फ़ायदा होता है, यह मेरा कई सालों का एक्सपीरियंस है. 

हाई ब्लड प्रेशर में यह काफ़ी असरदार है सर्पगंधा चूर्ण और मोती पिष्टी के साथ इसे लेने से अच्छा फ़ायदा होता है. 

पेट की गर्मी, सीने की जलन, पुरानी बुखार, महिलाओं की हैवी ब्लीडिंग जैसी प्रॉब्लम में दूसरी दवाओं के साथ लेने से अच्छा फ़ायदा होता है. 

आयुर्वेदिक डॉक्टर इसे कई तरह की बीमारियों में प्रयोग करते हैं, इसे डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए. 

ज़हरमोहरा पिष्टी/भस्म की मात्रा और सेवन विधि- 

125 mg से 250 mg तक सुबह-शाम उचित अनुपान से यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है. बच्चो को 30 से 60 mg तक डॉक्टर की सलाह से ही सही डोज़ में देना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, सही डोज़ में लेने से कोई नुकसान नहीं होता है, प्रेगनेंसी में इसका इस्तेमाल न करें. आयुर्वेदिक कंपनियों का यह मिल जाता है, इसे ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं. 





इसे भी जानिए - 








25 June 2018

Shila Sindoor | शिला सिन्दूर


शिला सिन्दूर क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो हर तरह के स्किन डिजीज या चर्मरोग, खून की ख़राबी, इन्फेक्शन, बुखार, फेफड़ों की बीमारी, सुज़ाक और मोटापा जैसी बीमारियों को दूर करता है. तो आईये जानते हैं शिला सिन्दूर का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

शिला सिन्दूर के घटक या कम्पोजीशन - 

यह कुपिपक्व रसायन औषधि है जिसे बनाना आसान नहीं होता. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें शुद्ध मैनशील, शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक और ग्वारपाठा का रस मिला होता है जिसे कुपिपक्व रसायन निर्माण विधि से हाई टेम्परेचर में बनाया जाता है. 

शिला सिन्दूर के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह कफ़-पित्त नाशक है. रक्त शोधक या ब्लड प्योरीफ़ायर, संक्रमण या इन्फेक्शन दूर करने वाला, Broad Spectrum Anti-biotic, मेद या चर्बी नाशक या Anti-obesity जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

शिला सिन्दूर के फ़ायदे - 

यह तेज़ असर करने वाली दवा है जिसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से और डॉक्टर की देख रेख में ही यूज़ करना चाहिए. गर्मी में इसे यूज़ करना ठीक नहीं. 

हर तरह का चर्मरोग जैसे खाज-खुजली, फोड़ा-फुंसी से लेकर कुष्ठव्याधि तक में यह असरदार है.

खाँसी और अस्थमा ख़ासकर कफ़ या वात प्रधान खाँसी जिसमे सफ़ेद कफ़ निकलता हो तो इसका इस्तेमाल करें. 

इन्फेक्शन, इन्फेक्शन वाली बुखार, मलेरिया जैसे रोगों में भी असरदार है. 

मोटापा दूर करने में भी यह असरदार है. जब ज़्यादा फैटी फ़ूड खाने और बैठे रहने से चर्बी बढ़ गयी हो तो इसके इस्तेमाल से चर्बी बननी बंद होती है और फैट को कम कर देता है. 

शिला सिन्दूर की मात्रा और सेवन विधि - 

60 mg से 125 तक सुबह शाम शहद के साथ लेना या फिर डॉक्टर की सलाह से सही अनुपान से लेना चाहिए. गर्मी के मौसम में बहुत कम डोज़ में 15 से 30 mg तक ही यूज़ करें. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की देख रेख में ही लेना चाहिए, ग़लत डोज़ होने से सीरियस नुकसान हो सकता है. 


22 June 2018

The Vitamins for Healthy Strong Hair Review in Hindi & Giveaway


The Vitamins for Healthy Strong Hair लन्दन यानी ब्रिटेन का बना यह प्रोडक्ट है जो बालों के लिए बेहद असरदार है. यह बालों को घना, मज़बूत और काला बनाता है. 90 दिनों में गारंटीड फ़ायदा हो जाता है यह कंपनी का चैलेंज है. तो आईये जानते हैं The Vitamins for Healthy Strong Hair के फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

The Vitamins for Healthy Strong Hair का कम्पोजीशन - 

यह पूरी तरह से नेचुरल विटामिन्स से बनी दवा है. फल, सब्जिओं और नेचुरल वनस्पतियों से निकाली गयी चुनिन्दा विटामिन्स का कॉम्बिनेशन है. जो कि शुगर फ्री, जिलेटिन फ्री, ग्लूटेन फ्री है. किसी भी तरह का केमिकल, कलर, Preservative, साल्ट और  कोई भी नॉन वेज प्रोडक्ट नहीं है इसमें. 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें कई तरह की विटामिन्स और मिनरल्स का मिश्रण है जैसे -

Biotin, Copper, Folic Acid, Inositol, Iodine, Iron, Manganese, PABA, Rosehip, Rutin, Selenium, Vitamin A, Vitamin B1, Vitamin B12, Vitamin B2, Vitamin B3, Vitamin B6, Vitamin C, Vitamin D, Vitamin E और Zinc जैसी चीज़ें मिली होती हैं. 

The Vitamins for Healthy Strong Hair के फ़ायदे- 

अगर आपके बाल घने नहीं है, पतले और कमज़ोर हैं, झड़ते हैं तो यह दवा आपके लिए बड़े काम की है. 

यह बालों को घना, मज़बूत और चमकदार बनाता है, बालों की जड़ों को मज़बूत बनाता है और नया बाल उगने में मदद करता है. 

अगर आप तरह-तरह की  दवा खाकर थक गए है तो भी इसे एक बार ट्राई करें, गारन्टीड फ़ायदा होगा, यह कंपनी का चैलेंज है. 

The Vitamins for Healthy Strong Hair की मात्रा और सेवन विधि - 

दो टेबलेट रोज़ एक बार खाना के बाद एक गिलास पानी से. यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है. अगर आपकी उम्र 18 साल से कम है तो रोज़ एक टेबलेट भी चलेगा. 

वैसे तो इसका इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है. प्रेगनेंसी और ब्रेस्ट फीडिंग में इसका इस्तेमाल न करें. और अगर अगले तीन महीने में प्रेगनेंसी की प्लानिंग है तो भी इसका इस्तेमाल न करें. इसको लेते हुवे कोई दूसरा विटामिन्स यूज़ न करें. 

इसके तीन महीने के पुरे कोर्स की क़ीमत है 7876.00 रुपया. जिसे आप www.itreallyworksvitamins.com  पर जाकर ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं यहाँ आपको 20% कम प्राइस में 6300 में मिल सकता है. थोड़ा महँगा तो लगता है, पर फ़ायदे भी तो हैं. लोग अपने बालों के लिए तो लाखों ख़र्च करते हैं. वैसे भी यह लन्दन का प्रोडक्ट है जो विदेश में धूम मचा रहा है. 

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19 June 2018

Chia Seed Benefits | चिया बीज के फ़ायदे


चिया सीड और सब्ज़ा सीड को लेकर कई लोग कन्फ्यूज्ड रहते हैं और इसका अंतर नहीं समझ पाते. तो आईये जानते हैं चिया सीड के फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल और चिया और सब्ज़ा सीड का अंतर -

चिया सीड विटामिन्स और दुसरे पोषक तत्वों से भरपूर होता है. यह एंटी ऑक्सीडेंट, कैल्शियम, आयरन, फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और दुसरे मिनरल्स से भरपूर होता है. अपने चमत्कारी गुणों के कारन यह दुनियाभर में मशहूर है. यहाँ मैं बता रहा हूँ इसके कुछ खास फ़ायदों के बारे में. 

स्किन के लिए - 

चिया जो है एंटी ऑक्सीडेंट रिच होता है जिसकी वजह से यह स्किन के लिए फ़ायदेमंद है. इस से स्किन प्रॉब्लम में फ़ायदा होता है और एंटी एजिंग होने से स्किन में होने वाली झुर्रियों से बचाता है. 

वज़न कम करे - 

चिया सीड को वज़न कम करने के लिए सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है. नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने से एक्स्ट्रा फैट को दूर कर कर वज़न कम करता है. 

पाचन सम्बन्धी रोगों के लिए - 

फाइबर रिच होने से यह कब्ज़ दूर करता है. हाजमा दुरुस्त कर Digestive सिस्टम को स्ट्रोंग बनाता है. इसके इस्तेमाल से शुगर लेवल भी कण्ट्रोल होता है. 

हड्डियों के लिए - 

कैल्शियम रिच होने से यह हड्डियों को मज़बूत बनाता है. गठिया, आर्थराइटिस जैसी बीमारियों से बचाता है और दाँतों को मज़बूत बनाता है. 

ह्रदय रोगों के लिए - 

इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स हार्ट के लिए फ़ायदेमंद हैं. यह BP और कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद करता है. 

एनर्जी और बॉडी मसल्स के लिए- 

कई तरह के विटामिन्स से भरपूर होने से यह बॉडी को एनर्जी देता है और मसल्स को मज़बूत बनाता है. 

तो ये हैं चिया सीड के कुछ ख़ास फ़ायदे.

चिया सीड को इस्तेमाल कैसे करें?

एक से दो स्पून तक रोज़ पानी में भीगाकर लेना चाहिए. इसका पाउडर बनाकर भी ले सकते हैं. इसके बीजों को भिगाकर ड्रिंक्स में मिक्स कर या फिर खाना के साथ भी ले सकते हैं. 

आईये अब जान लेते हैं चिया सीड के नुकसान या साइड इफेक्ट्स- 

वैसे तो सही डोज़ में लेने से इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. पर किसी-किसी को इसे खाने के बाद पेट दर्द हो सकता है. फाइबर रिच होने से यह पानी बहुत सोखता है. इसे खाने के बाद पानी ज़्यादा पीना चाहिए. 

ये तो हो गयी चिया सीड की जानकारी, सब्ज़ा सीड की डिटेल आप यहाँ पढ़ सकते हैं जिसे मैं पहले ही बता चूका हूँ. चिया सीड ऑनलाइन ख़रीदें अमेज़न से - 




 इसे भी जानिए - 



18 June 2018

Dabur Hepano for Healthy Liver | डाबर हेपानो के फ़ायदे


हेपानो जानी-मानी आयुर्वेदिक कम्पनी डाबर का पेटेंट या प्रोपरायटरी ब्रांड है जो लिवर की बीमारियों में असरदार है. तो आईये जानते हैं डाबर हेपानो का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

डाबर हेपानो का कम्पोजीशन - 

इसे लिवर के फंक्शन को सही करने वाली जानी-मानी जड़ी-बूटियों से बनाया गया है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें  - 

भूमिआँवला, गुडूची, निम्बा, कालमेघ, हरीतकी, आमलकी, विभितकी, कुटकी और पिप्पली मिला होता है. इसके टेबलेट और सिरप दोनों का कम्पोजीशन ऑलमोस्ट सेम होता है. 


डाबर हेपानो के फ़ायदे - 


  • हैवी मेटल्स और केमिकल वाले भोजन से लिवर को होने वाले नुकसान से बचाता है. 



  • SGOT, SGPT बढ़ा होने, जौंडिस, लिवर की ख़राबी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों में असरदार है. 



  • यह लिवर के फंक्शन को सही करता है और लिवर को हेल्दी बनाता है. 



  • यह लिवर को डैमेज करने वाले कारणों से बचाता है. भूख बढ़ाने और पाचनशक्ति को ठीक करने में मदद करता है. 



  • नार्मल आदमी भी इसे लिवर को हेल्दी रखने के लिए इस्तेमाल कर सकता है.



डाबर हेपानो का डोज़- 

5 से 10 ML तक सुबह शाम खाना के पहले. इसका टेबलेट 1 से 2 सुबह शाम या फिर डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना चाहिए. इसके 200ML के बोतल की क़ीमत 85 रुपया है जबकि इसके 60 टेबलेट की क़ीमत 75 रुपया है. इसे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से -  




इसे भी जानिए - 






16 June 2018

Chandanadi Lauh | चन्दनादि लौह(प्रमेह) के फ़ायदे


चन्दनादि लौह हर तरह के प्रमेह की असरदार आयुर्वेदिक औषधि है. इसके इस्तेमाल से प्रमेह, पेशाब के साथ मेह, शुक्र, पस सेल्स, ब्लड सेल्स, फॉस्फेट, साल्ट, प्रोटीन वगैरह आने की प्रॉब्लम दूर होती है. तो आईये जानते हैं चन्दनादि लौह का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल - 

चन्दनादि लौह नार्मल जो होता है वो उसका कम्पोजीशन अलग है. यहाँ चन्दनादि लौह प्रमेह के बारे में बताया जा रहा है. 

चन्दनादि लौह(प्रमेह) के घटक या कम्पोजीशन - 

इसके घटक या कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें चन्दन और लौह भस्म के अलावा कई तरह की जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं जैसे- 

सफ़ेद चन्दन, सेमल के फूल, दालचीनी, इलायची के बीज, तेजपात, हल्दी, दारुहल्दी, अनंतमूल, श्यामलता, नागरमोथा, मुलेठी, आँवला, मुसली, वंशलोचन, भारंगी, देवदार, बड़ी हर्रे और ख़स प्रत्येक एक-एक भाग और लौह भस्म 36 भाग. यानी अगर जड़ी-बूटियाँ दस-दस ग्राम ले रहे हैं तो लौह भस्म 360 ग्राम लेना है. 

बनाने का तरीका यह है कि सभी जड़ी-बूटियों का बारीक कपड़छन चूर्ण कर लें और उसमे लौह भस्म मिलाकर अच्छी तरह से घोंटकर रख लें. बस चन्दनादि लौह तैयार है. यह भैषज्य रत्नावली का योग है. 

चन्दनादि लौह के फ़ायदे- 


  • यह हर तरह के प्रमेह की श्रेष्ठ औषधि है. जब पेशाब के साथ प्रोटीन, फैट, साल्ट, पस सेल्स, ब्लड, फॉस्फेट वगैरह कुछ भी आने लगे तो इसका सेवन करना चाहिए. 



  • जब यूरिन टेस्ट में इस तरह की चीज़ें पाई जाएँ तो चन्दनादि लौह और चंद्रप्रभा वटी दोनों को मिलाकर शहद के साथ लेना चाहिए. 



  • जीर्ण ज्वर या पुरानी बुखार में इसका प्रयोग कराया जाता है ख़ासकर जब एंटी बायोटिक से फ़ायदा न होता हो तो इसका इस्तेमाल करना चाहिए. 



  • कामला, जौंडिस और खून कमी में भी यह फ़ायदेमंद है. 


चन्दनादि लौह की मात्रा और सेवन विधि - 

125 से 250 mg तक सुबह शाम शहद से या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से रोगानुसार उचित अनुपान से लेना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. 


इसे भी जानिए - 








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