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19 अगस्त 2023

Appendix ka Upchar | अपेंडिक्स का आयुर्वेदिक उपचार | Vaidya Ji Ki Diary

 

appendix ka ilaj

आज वैद्यजी की डायरी में बताने वाला हूँ अपेंडिक्स के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जिस से आप बिना ऑपरेशन के इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं. 

दोस्तों, आपने अक्सर सुना होगा कि फलां आदमी को अपेंडिक्स हो गया और इसका ऑपरेशन कराना पड़ा. 

अगर आपको गैस की वजह से भी पेट दर्द है तो कई धूर्त सर्जन लोग पैसा बनाने के चक्कर  में मरीज़ को डराकर ऑपरेशन कर देते हैं. जबकि गैस की वजह से होने वाला दर्द ऑपरेशन के बाद भी बना रहता है. 

यदि आपने इस तरह की परेशानी झेली है या आपके जानने वाले के साथ ऐसा कुछ हुआ है तो कमेन्ट कर ज़रुर बताईयेगा.

अपेंडिक्स क्या है? 

सभी के शरीर में यह होता है जो बड़ी आंत के निचे दाहिनी साइड अँगुली के जैसी लम्बी एक छोटी से पूंछ होती है जो अन्दर से खोखली होती जिसकी लम्बाई दो से चार इंच होती है. इसकी औसत लम्बाई 3.5 इंच होती है. 

आंत के साथ पूंछ के जैसा जुड़ा होने से इसे 'आंत्रपुच्छ' कहा जाता है आयुर्वेद में. इसे ही अंगेज़ी में Appendix कहा जाता है. 

शरीर में इस अंग का क्या काम है, मेडिकल साइंस अब तक पता नहीं लगा पाया है. 

जब किसी वजह से इस अंग में यानी में अपेंडिक्स में सुजन हो जाये तभी इसकी जगह पर पेट में दर्द होता है और तब इसे Appendicitis कहा जाता है. इस स्थिति को आयुर्वेद में आंत्रपुच्छ शोथ, आंत्रपुच्छ प्रदाह, उन्दुकपुच्छशोथ, उपान्त्रशोथ जैसे नामों से जाना जाता है. 

तो अब आप समझ गए होंगे कि अपेंडिक्स यानी आंत्रपुच्छ और Appendicitis यानि आंत्रपुच्छ प्रदाह में क्या अन्तर होता है. 

आम बोलचाल में लोग Appendicitis को ही अपेंडिक्स बोल देते हैं. 

Appendicitis यानि आंत्रपुच्छ शोथ के कारण 

इसमें सुजन और संक्रमण होना ही मुख्य कारन है, कई लोगों का मानना है कि निम्बू, संतरा के साबुत बीज या भोजन का कोई अंश जब बड़ी बड़ी आंत से इसमें चला जाता है तब सड़कर वहां रोग की उत्त्पत्ति करता है. 

Appendicitis यानि आंत्रपुच्छ शोथ के लक्षण या Symptoms

इसके लक्षणों की बात करुँ तो यह दर्द वाली बीमारी है. पेट में बहुत तेज़, न सहने वाला दर्द होना ही इसका प्रधान लक्षण होता है. पहले पेट के उपरी हिस्से या नाभि के एरिया में दर्द उठता है इसके बाद निचे दाहिने तरफ़ जाकर दर्द स्थिर हो जाता है. तेज़ दर्द के बाद उल्टी और बुखार जैसे लक्षण भी पाये जाते हैं. 

सोनोग्राफी से इस रोग का सटीक निदान हो जाता है, वैसे अनुभवी वैद्यगण रोगी का पेट चेक कर भी बता देते हैं. 

Appendicitis यानि आंत्रपुच्छ शोथ का आयुर्वेदिक उपचार 

मैं आपको बता देना चाहूँगा कि अगर समस्या बहुत बढ़ी नहीं हो रोग की शुरुआत ही हो तो आयुर्वेदिक उपचार से यह रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है. सिर्फ़ इमरजेंसी में ही इसका ऑपरेशन करवाना चाहिए. 

Appendicitis के आयुर्वेदिक उपचार के लिए मैं आपको अनुभवी वैद्यों की सफ़ल चिकित्सा का निचोड़ बता रहा हूँ जो इस बीमारी में शत प्रतिशत सफल है- 

Appendicitis के लिए आयुर्वेदिक व्यवस्था 

1) शंख वटी दो-दो गोली खाना के बाद गर्म पानी से 

2) आंत्रपुच्छ शोथहर योग एक-एक पुड़िया सुबह-शाम शहद से 

3) कुमार्यासव 2 स्पून + पुनर्नवारिष्ट 2 + 4 स्पून पानी मिक्स कर सुबह-शाम खाना के बाद 

4) उदरशोथारी लेप - दर्द वाली जगह पर रोज़ दो-तीन बार लेप करने के लिए 

5) सुगम चूर्ण या पंचसकार चूर्ण रात में सोने से पहले गर्म पानी से 

आंत्रपुच्छ शोथहर योग और उदरशोथारी लेप अनुभूत योग है जो बना हुआ आपको मार्केट से नहीं मिलेगा. इन दोना का नुस्खा आपको बता रहा हूँ - 

आंत्रपुच्छ शोथहर योग 

अग्नितुंडी वटी 20 ग्राम + शुल्वार्जिनी वटी 20 ग्राम + पुनर्नवादि मंडूर 20 ग्राम लेकर पीसकर वरुनादि क्वाथ और घृतकुमारी की एक-एक भावना देकर सुखा कर रख लिया जाता है. 

उदरशोथारी लेप 

इसे बनाए के लिए चाहिए होता है - दशांग लेप 100 ग्राम + शुद्ध कुचला चूर्ण 10 ग्राम + आमा हल्दी चूर्ण 10 ग्राम. सभी को मिक्स कर रख लें.

इसकी प्रयोग विधि 

दो स्पून इस चूर्ण को लेकर स्टील के बर्तन के डालकर इतना पानी मिक्स करें की पेस्ट जैसा हो जाये फिर इसको चूल्हे पर रखकर हलवे के जैसा उबाल कर पका लेना है. इसके बाद सुहाता-सुहाता दर्द वाली जगह पर लेप कर देना है. लेप करने के एक घंटे के बाद जब लेप सुख जाये तो हलके से लेप को छुड़ाकर उस जगह पर कोई तेल क्रीम या विषगर्भ तेल लगा लेना चाहिए. 

यह दोनों योग बनाने में यदि किसी कोई समस्या हो तो आप मुझे मेसेज किजिए, मैं उपलब्ध करा दूंगा. 

वैद्य जी की डायरी में आज जो प्रयोग मैं बताया हूँ इसे आप वैद्यगण आंत्रपुच्छ शोथ के अलावा बड़ी आंत की सुजन, लिवर-स्प्लीन की सुजन और अग्नाशयशोथ इत्यादि में भी प्रयोग कर सकते हैं. 





06 अगस्त 2023

Shakti Chandroday Vati | शक्ति चन्द्रोदय वटी


shakti chandroday vati

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है शक्ति या ताक़त देने वाली, चंद्रोदय सिद्ध मकरध्वज का ही दूसरा नाम है, वटी का मतलब गोली या टेबलेट

पिछली सदी से इसका काफ़ी यूज़ किया जा रहा है. मेरे आयुर्वेद के गुरु जी जो सौ साल की उम्र तक जिये वह भी इसे यूज़ करते थे और कमज़ोरी वाले सभी मरीज़ों को इसे खुद बनाकर देते थे. 

शक्ति चन्द्रोदय वटी क्या है?

शक्ति चन्द्रोदय वटी अपने आप में एक बड़ा ही यूनिक फार्मूलेशन है जिसे पुराने वैद्य लोग बनाकर यूज़ करवाते थे, आज के टाइम में इसे इक्का-दुक्का कंपनी ही बनाती है. मार्केटिंग के इस ज़माने में कम्पनियां ज़्यादा प्रॉफिट वाले प्रोडक्ट ही बनाती है. 

शक्ति चन्द्रोदय वटी के घटक या कम्पोजीशन 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे सिद्ध मकरध्वज, शुद्ध विषबीज, त्रिफला और शुद्ध विजया के मिश्रण से बनाया जाता है. 

इसे कौन-कौन लोग यूज़ कर सकते हैं? 

इसे 18 साल से की उम्र से लेकर 100 साल तक की उम्र के सभी लोग यूज़ कर सकते हैं. सिर्फ़ हाइपर एसिडिटी और हाई BP वाले लोगों को वैद्य जी की सलाह से ही इसे लेना चाहिए.

इसे कैसे यूज़ करें? 

दो-दो गोली सुबह-शाम दूध या पानी से भोजन के लेना चाहिए

इसके क्या-क्या फायदे हैं?

शक्ति चन्द्रोदय वटी के फ़ायदे की बात करूँ तो इन रोगों में यूज़ करना चाहिए जैसे- 

प्रमेह, स्वप्नदोष, धातु स्राव, हस्तमैथुन के कारण होने वाली कमज़ोरी, शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, मानसिक नपुंसकता, स्नायुविक दुर्बलता यानी नर्वस Weakness, वृद्धावस्था जन्य दुर्बलता यानी बुढ़ापे की कमज़ोरी, मधुमेह जन्य दुर्बलता यानी डायबिटीज की वजह से होने वाली कमजोरी, लो BP की वजह से होने वाली कमज़ोरी, किसी भी बीमारी के बाद होने वाली कमजोरी, जनरल Weakness, सर दर्द, कमर दर्द, सर्दी-जुकाम और पाचन की कमजोरी इत्यादि.

आसान भाषा में कहूँ तो अगर आपको किसी भी तरह की मर्दाना कमज़ोरी है, धात की प्रॉब्लम है, टाइमिंग की प्रॉब्लम है, मास्टरबेशन की वजह से हुयी कमज़ोरी है तो इसका यूज़ कर सकते हैं. 

ज़्यादा उम्र के लोग और शुगर के पेशेन्ट भी इसका इस्तेमाल कर कमज़ोरी दूर कर सकते हैं. 

शक्ति चन्द्रोदय वटी का कोई नुकसान भी है?

इसका कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. इसकी इसकी तासीर थोड़ी गर्म होती है तो अगर आप पित्त प्रकृति के या गर्म तासीर के हैं, हाई BP है और बदन में गर्मी की ज़्यादा प्रॉब्लम है तो इसे गिलोय सत्व के साथ, किसी ठंडी तासीर की चीज़ के साथ या फिर वैद्य जी की सलाह से ही इसका इस्तेमाल करें. 

इसे लगातार तीन महिना या ज़्यादा टाइम तक भी यूज़ कर सकते हैं. 

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