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13 June 2019

How to Remove Pimples and get fair skin? | कील-मुहाँसे दूर कर रूप निखारने की आयुर्वेदिक औषधि


हर लोग सुन्दर दिखना चाहते हैं ख़ासकर हमारी यंग जनरेशन चाहे वह लड़का हों या लड़की. पिम्पल्स या कील-मुहाँसे और दाग-धब्बे अगर चेहरे पर हो जाएँ तो हर लोग इस से जल्दी छुटकारा पाना चाहते हैं और इसके लिए तरह-तरह की क्रीम ट्राई करते हैं. अगर आपमें से भी किसी को पिम्पल्स हो, दाग-धब्बे हों और अपना रंग निखार कर गोरा दिखना चाहते हों आज की जानकारी आपके काम की है, आईये पूरी डिटेल्स जानते हैं - 

पिम्पल्स के लिए हर लोग कोई न कोई क्रीम ज़रूर ट्राई करते हैं यह बात सौ फीसदी सच है, अगर आपको भी कभी पिम्पल्स हुआ होगा तो आपने भी कुछ लगाया ही होगा. 

तो क्या सिर्फ़ किसी क्रीम से पिम्पल्स जा सकता है? तो जवाब है नहीं

आयुर्वेद का सिधान्त कहता है कि कील-मुहांसे और दाग धब्बों के लिए सिर्फ़ लगाने की दवा से नहीं होगा बल्कि खाने वाली दवा भी लेनी होगी. 

पिम्पल्स और दाग-धब्बों को दूर कर रूप निखारने वाली औषधि यौवनपीड़ीकान्तक टेबलेट और रूपसी उबटन के बारे में आज बताने वाला हूँ. इसमें एक खाने की दवा है तो दूसरी लगाने की.

यौवनपीड़ीकान्तक टेबलेट कील-मुहाँसों के मूलकारन को दूर कर खून साफ़ करती है और रूप निखारती है. 


रूपसी उबटन को फेसपैक की तरह चेहरे पर लगाना होता है दूध या गुलाब जल में पेस्ट बनाकर. 

बेहतरीन जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनी शत प्रतिशत शुद्ध आयुर्वेदिक औषधि है यह जो न सिर्फ़ पिम्पल्स को जड़ से दूर कर देती है बल्कि रूप निखारकर गोरा बना देती है. 

यह दोनों ऑनलाइन अवेलेबल है जिसका लिंक दिया जा रहा है- 





05 June 2019

Panduhari Capsule | पाण्डुहारी कैप्सूल- जौंडिस और खून की कमी की औषधि


खून की कमी, जौंडिस, पीलिया और लिवर बढ़ने जैसी बीमारियों का सबसे बेस्ट ट्रीटमेंट आयुर्वेद में ही है. इन्ही रोगों को दूर करने वाली औषधि पाण्डुहारी कैप्सूल के बारे में आज बताने वाला हूँ, तो आईये जानते हैं पाण्डुहारी कैप्सूल के गुण, उपयोग और प्रयोगविधि के बारे में विस्तार से - 

पाण्डुहारी कैप्सूल जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है पाण्डु को हराने वाला कैप्सूल. शरीर में खून की कमी होने को ही आयुर्वेद में पाण्डु कहा जाता है. 

किसी भी कारण से शरीर में  खून की कमी होना, लम्बी बीमारी के बाद खून की कमी होना, जौंडिस होना, जौंडिस के कारण शरीर का पीला पड़ जाना, अवरोधक कामला या Obstructive Jaundice, भूख की कमी, लिवर का बढ़ जाना, सुजन, पेशाब का पीलापन इत्यादि समस्या होने पर इसके से आशानुरूप लाभ होता है. 

बस मोटे तौर पर यह समझ लीजिये कि खून की कमी, जौंडिस, शरीर के  पीलापन और पेशाब  पीला होने पर इसे आप आँख मूंदकर प्रयोग कर सकते हैं. 

हर तरह का हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस, लिवर कैन्सर और ब्लड कैंसर इत्यादि में भी इसे सहायक औषधि के रूप में ले सकते हैं.

पाण्डुहारी कैप्सूल के घटक या कम्पोजीशन - 

सबसे पहले आपको बता दूँ कि इसमें गोमूत्र की भावना दी गयी है, जो लोग गोमूत्र से बनी औषधि नहीं लेना चाहें वो 'लिवट्रीट' टेबलेट प्रयोग कर सकते हैं.

पाण्डुहारी कैप्सूल के इनग्रीडेंट की बात करें तो इसे लौह भस्म, मंडूर भस्म, त्रिफला घनसत्व, चिरायता घनसत्व, गिलोय घनसत्व, पुनर्नवा घनसत्व, निम्ब घनसत्व और कुटकी घनसत्व के मिश्रण में गोमूत्र और गिलोय स्वरस की भावना देकर बनाया गया है. इसका कॉम्बिनेशन अपने आप में बेजोड़ है. कई लोग पतंजलि की नीम वटी, गुडूचीघन वटी त्रिफला चूर्ण इत्यादि पचीस तरह की दवा लेते हैं. पर उन सब से अच्छा है कि सिर्फ पाण्डुहारी कैप्सूल लीजिये और फिर चमत्कार देखिए

पाण्डुहारी कैप्सूल की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो कैप्सूल तक सुबह-शाम पानी से. इसका सेवन करते हुवे भोजन के बाद अगर दो-दो स्पून कुमार्यासव + रोहित्कारिष्ट + पुनर्नवारिष्ट लिया जाये तो तेज़ी से लाभ होता है, और जहाँ अंग्रेज़ी दवा फेल हो गई हो वैसे रोगी भी स्वस्थ हो जाते हैं.

इसके 60 कैप्सूल की क़ीमत है सिर्फ़ 180 रुपया जो मिलेगा ऑनलाइन lakhaipur.in पर जिस लिंक दिया गया है - 


02 June 2019

Arshantak Capsule & Arshhar Vati for Piles | बवासीर की रामबाण औषधि


अर्शान्तक कैप्सूल और अर्शहर वटी ख़ूनी और बादी दोनों तरह की बवासीर को निर्मूल करने वाली आयुर्वेदिक औषधि है.

ख़ूनी बवासीर में शौच के बाद रक्तस्राव होता है, इसे ब्लीडिंग पाइल्स भी कहा जाता है. जबकि बादी बवासीर में ब्लीडिंग नहीं होती है, पर इसमें ज़्यादा कष्ट होता है. मस्से दोनों तरह की बवासीर में हो सकते हैं. इन सब के बारे में ज़्यादा बताने की ज़रूरत नहीं, आप सभी इसके बारे में जानते ही हैं. 

अर्शान्तक कैप्सूल और अर्शहर वटी पाइल्स या बवासीर से मुक्ति दिलाने में सक्षम है. पाइल्स को आयुर्वेद में अर्श के नाम से जाना जाता है. ख़ूनी बवासीर को रक्तार्श और बादी बवासीर को वातार्श

दोनों तरह की बवासीर में अर्शान्तक कैप्सूल और अर्शहर वटी में से एक-एक सुबह-शाम गर्म पानी से लेना चाहिए.

इन दोनों के इस्तेमाल से ब्लीडिंग बंद हो जाती है और मस्से धीरे-धीरे सुख जाते हैं. यह मल ढीला करती है और कब्ज़ियत दूर करती है. 

अर्शान्तक कैप्सूल और अर्शहर वटी के कम्पोजीशन की डिटेल्स आप दिए गए लिंक ओपन कर पढ़ सकते हैं. दोनों का कॉम्बिनेशन बेजोड़ है, इतनी असरदार दवा कोई और नहीं. 

यह दोनों दवा ऑनलाइन अवेलेबल है lakhaipur.in पर जिसका लिंक दिया गया है. अर्शान्तक कैप्सूल की कीमत है सिर्फ 180 रुपया और अर्शहर वटी सिर्फ 135 रुपया में उपलब्ध है. 


30 May 2019

Punswan Capsule | पुंसवन कैप्सूल – पुत्र प्राप्ति की आयुर्वेदिक औषधि


आज मैं बताने वाला हूँ पुत्र प्राप्ति में मदद करने वाली आयुर्वेदिक औषधि पुंसवन कैप्सूल के बारे में. तो आईये इसके बारे में डिटेल्स जानते हैं - 

अगर कोई दम्पति चाहते हैं कि उनकी आने वाली संतान पुत्र या बेटा हो तो इस दवा इस्तेमाल करना चाहिए. यह औषधि आयुर्वेद के पुंसवन कर्म पर आधारित है जिसके प्रयोग से पुत्र प्राप्ति होती है. यह गर्भ में पल रहे शिशु का सम्यक पोषण करने में भी सहायक है. इसे कैप्सूल के रूप में प्रस्तुत किया गया जिसे हर किसी को लेने में आसानी होती है.

मात्रा और प्रयोग विधि –

 Pregnancy का पता लगते ही यानी जब Pregnancy कन्फर्म हो जाये तो इसे एक-एक कैप्सूल सुबह-शाम गाय के दूध से लगातार तीन महीने तक लेना चाहिए. 

बस ध्यान रखें की दवा उल्टी न हो, अगर खाने के बाद किसी टाइम उल्टी हो जाये तो फिर एक कैप्सूल खा लेना चाहिए.

परहेज़- महिला को सुपाच्य आहार या आसानी से पचने वाले भोजन देना चाहिए. तले हुवे पदार्थ, खट्टी चीज़ें, अधीक मिर्च मसाला वाले भोजन से परहेज़ रखना चाहिए.

सैंकड़ों महिलाओं पर इसका प्रयोग कराकर अच्छी सफ़लता पायी गयी है, विश्वास के साथ प्रयोग करें. 

पुंसवन कैप्सूल के एक पैक की कीमत है सिर्फ 300 रुपया, एक पैक में 60 कैप्सूल हैं जो पुरे एक महीने के लिए हैं. इसे लगातार तीन महीने तक यूज़ करना है, तो एक साथ 3 पैक आर्डर कर लें. यह ऑनलाइन अवेलेबल है हमारे स्टोर www.lakhaipur.in पर जिसका लिंक दिया गया है. 



तो दोस्तों, अगर आप अपनी अगली संतान पुत्र के रूप में चाहते हैं तो पुंसवन कैप्सूल का प्रयोग अवश्य करें. आपको पुत्र रत्न की प्राप्ति ज़रूर होगी, यह आयुर्वेद का वरदान है. 

पुंसवन कर्म- मनचाही संतान बेटा या बेटी कैसे प्राप्त करें 

शिवलिंगी बीज, बेटा प्राप्त करने की बूटी 



28 May 2019

Kalmeghasava Benefits in Hindi | कालमेघासव के फ़ायदे


कालमेघासव आयुर्वेदिक औषधि है जो हर तरह के मलेरिया बुखार में प्रयोग की जाती है, यह लिवर और स्प्लीन बढ़ने में भी असरदार है तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं - 

कालमेघासव जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कालमेघ से बना हुवा आसव या एक तरह का सिरप. इसमें सिर्फ़ कालमेघ नहीं होता, बल्कि कालमेघ इसका मुख्य घटक है और इसमें कई तरह की दूसरी जड़ी-बूटियाँ भी होती हैं, तो सबसे पहले जानते हैं- 

कालमेघासव के घटक या कम्पोजीशन - 

इसे कालमेघ, गिलोय, सप्तपर्ण, कुटकी, करंज पञ्चांग, कुटज छाल, गुड़, धाय के फूल, लौह चूर्ण, रक्तरोहिड़ा त्वक, त्रिकटु, त्रिजात, एलुआ, हर्रे, बहेड़ा और बबूल की छाल के मिश्रण से आसव निर्माण विधि से सन्धान या Fermentation होने के बाद इसे बनाया जाता है. 

कालमेघासव के गुण - 

इसके गुणों की बात करें तो यह विषम ज्वर नाशक, Anti Malarial, Liver protective, Digestive, रक्त प्रसादक या Heamatemic जैसे कई तरह के गुणों से भरपूर होता है.

कालमेघासव के फ़ायदे - 


  • इसके इस्तेमाल से हर तरह की मलेरिया बुखार और ठण्ड लगकर आने वाली बुखार दूर होती है. 
  • मलेरिया पुराना होने पर लिवर-स्प्लीन बढ़ जाती है, अंग्रेज़ी दवाओं के साइड इफ़ेक्ट से खून की कमी, जौंडिस और भूख की कमी जैसी प्रॉब्लम भी हो जाती है, वैसी अवस्था में इसके सेवन से लाभ होता है. 
  • इसके सेवन से भूख बढ़ती है, खून की कमी दूर होती है. रस-रक्तादि धातुओं का शोधन कर यह बुखार हमेशा के लिए दूर कर देता है. 

कालमेघासव की मात्रा और सेवन विधि - 

15 से 30 ML तक रोज़ दो से तीन बार तक भोजन के बाद बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर लेना चाहिए. इसके साथ दुसरे ज्वरनाशक योग लेने से अच्छा लाभ मिलता है. 


24 May 2019

प्रदरान्तक कैप्सूल/टेबलेट ल्यूकोरिया/सफ़ेद पानी की कारगर दवा | Leucorrhea Ayurvedic Medicines


महिलाओं की बीमारी ल्यूकोरिया को लोग कई तरह के नामों से जानते हैं जैसे सफ़ेद पानी आना, धात गिरना, श्वेत प्रदर/रक्त प्रदर इत्यादि. यह ऐसी बीमारी है जो शरीर में घुन की तरह लग जाता है जिस से महिलाओं का स्वास्थ ख़राब हो जाता है. इस बीमारी को जड़ से दूर करने के लिए कम से तीन तरह की दवाओं को साथ लेना चाहिए जिसे आज बता रहा हूँ – प्रदरान्तक कैप्सूल, प्रदरान्तक टेबलेट और पुष्यानुग चूर्ण. तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं – 

सबसे पहेल जानते हैं प्रदरान्तक कैप्सूल के बारे में. जैसा कि इसका नाम है प्रदर यानि ल्यूकोरिया का अंत करने वाला

प्रदरान्तक कैप्सूल का कम्पोजीशन – 

अशोक घनसत्व, उदम्बर घनसत्व, लोध्र घनसत्व, चौलाई घनसत्व, खरैटी घनसत्व, संगजराहत भस्म और स्फटिक भस्म जैसी बेजोड़ और असरदार औषधियों के मिश्रण से इसे  बनाया गया है. 

अब जानते हैं प्रदरान्तक टेबलेट के बारे में –

प्रदरान्तक टेबलेट के घटक या कम्पोजीशन –

इसके घटक भी ऑलमोस्ट सेम हैं प्रदरान्तक कैप्सूल जैसे. ल्यूकोरिया के लिए हिमालया लुकोल के बारे में मैंने बताया है जिस से अनेकों लोगों को फ़ायदा हुआ है, पुराने ल्यूकोरिया में अगर उस से फ़ायदा न हुआ हो तो यहाँ बताई दवाओं का प्रयोग करना चाहिए.

पुष्यानुग चूर्ण – 

यह एक पोपुलर क्लासिक मेडिसिन है जिसकी डिटेल यहाँ पढ़ सकते हैं. 

आईये अब जानते हैं इन औषधियों के फ़ायदे- 

सफ़ेद पानी या ल्यूकोरिया और लाल पानी में यह विशेष उपयोगी है. ल्यूकोरिया की वजह से होने वाले कमर दर्द, पीठ दर्द, हाथ-पैरों की जलन, लगातार रहने वाला सर दर्द, कमज़ोरी, खून की कमी, भूख की कमी इत्यादि रोग दूर होते हैं. 

इन दवाओं के सेवन से ल्यूकोरिया की बीमारी दूर होकर महिलाओं का स्वास्थ ठीक हो जाता है. 

नयी पुरानी हर तरह की बीमारी में इन दवाओं को साथ में लेना चाहिए.

अब जानते हैं इसकी मात्रा और प्रयोग विधि – 

प्रदरान्तक कैप्सूल एक-एक सुबह शाम पानी से. प्रदरान्तक टेबलेट एक-एक सुबह-शाम पानी से. पुष्यानुग चूर्ण एक स्पून शहद या चावल के धोवन से लेना चाहिए. भोजन के बाद चार स्पून पत्रांगासव भी लिया जाये तो अति उत्तम. 

ल्यूकोरिया के लिए तरह-तरह की दवा खाकर थक गए हों तो भी इन दवाओं के इस्तेमाल से बीमारी दूर हो जाती है. 

इन औषधियों का सेवन करते हुवे तेज़ मिर्च-मसाला, खटाई और गरिष्ठ भोजन का त्याग करना चाहिए. 

प्रदरान्तक कैप्सूल, प्रदरान्तक टेबलेट और पुष्यानुग चूर्ण तीनों दवा ऑनलाइन अवेलेबल है उचित मूल्य में हमारे स्टोर lakhaipur.in पर जिसका लिंक दिया गया है. 

प्रदरान्तक कैप्सूल(180 rupya)

प्रदरान्तक टेबलेट(160 सिर्फ़ 160 रुपया)

पुष्यानुग चूर्ण 100 ग्राम(सिर्फ़ 146 रुपया)


20 May 2019

Tarang Gold Massage Oil | तरंग गोल्ड मसाज आयल- पुरुषों के लिए



कई नवयुवक अप्राकृतिक कर्मों या फिर दूसरी वजह से नसों की कमजोरी, लिंग का ढीलापन, साइज़ का छोटापन और शीघ्रपतन जैसी कई तरह की प्रॉब्लम के शिकार हो जाते हैं और इसके लिए कई तरह के तेल और तिला का प्रयोग करते रहते हैं. अगर आपको किसी अच्छे और इफेक्टिव तेल की ज़रूरत है तो आज की जानकारी आपके लिए. जी हाँ दोस्तों, आज मैं  बताने वाला हूँ तरंग गोल्ड मसाज आयल के बारे में जो न सिर्फ़, नसों की कमज़ोरी और ढीलापन दूर करता है बल्कि साइज़ को भी बढ़ाने में मदद करता है, तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं –

तरंग गोल्ड मसाज आयल मालिश के लिए बेहतरीन तेल है जो अपने क्वालिटी के हिसाब से चीप एंड बेस्ट है. इस से कमज़ोर कम्पोजीशन वाले तेल तो मार्केट में हज़ार रूपये में लुटने वाली कंपनियाँ बेच रही हैं.

इसे विशुद्ध आयुर्वेदिक प्रोसेस से तिल तेल के बेस पर मालकांगनी, अकरकरा, असगन्ध, जायफल, लौंग, कूठ, कुचला और दालचीनी जैसी असरदार औषधियों के मिश्रण से बनाया गया है.

तरंग गोल्ड मसाज आयल के फ़ायदे –

नसों की कमज़ोरी, ढीलापन, शीघ्रपतन, साइज़ का छोटापन और तनाव की कमी जैसी प्रॉब्लम में इस तेल की मालिश से स्थायी लाभ होता है.

समागम से दस मिनट पहले मालिश करने से पूर्ण आनन्द की प्राप्ति होती है.

तरंग गोल्ड मसाज आयल की प्रयोग विधि –

शिश्न के मणिभाग या ग्लान्स पेनिस को छोड़कर दो-तीन मिनट तक हल्की मालिश करनी चाहिए. मैरिड/अनमैरिड सभी लोग इसका प्रयोग कर सकते हैं. 

साइज़ का छोटापन और ढीलापन वाले युवकों को सुबह-शाम इसकी मालिश करनी चाहिए. पुरे फ़ायदे के लिए लगातार दो-तीन महीने तक प्रयोग करें. यह बिल्कुल सेफ़ होता है, किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है.

25 ML का दो पैक सिर्फ़ 175 रुपया में ऑनलाइन अवेलेबल है जिसका लिंक दिया गया है-







16 May 2019

Heart Disease Treatment | ह्रदयरोगों की असरदार औषधि- हृदयरोगान्तक कैप्सूल/चूर्ण



दिल की बीमारी या हार्ट डिजीज, यह सुनकर ही कुछ लोग घबरा जाते हैं. पर आप घबराएँ नहीं, इसकी चीप एंड बेस्ट दवा बताने वाला हूँ.

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल और ह्रदयरोगान्तक चूर्ण. यह तरह की हार्ट की प्रॉब्लम के लिए बेजोड़ है, चाहे दिल की कमजोरी हो, धड़कन बढ़ती हो, ब्लॉकेज हो या फिर ब्लड प्रेशर. तो आईये इन दोनों दवाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं –

हार्ट की बीमारी को लोग अक्सर महँगी बीमारी समझते हैं और ऐसा है भी. पर इसके कुछ सस्ते उपाय भी हैं जो आज बता रहा हूँ. आम आदमी के लिए महँगा ट्रीटमेंट आसान नहीं है, पर आयुर्वेद में इसका भी उपाय है. अर्जुन हृदय रोगों की प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है और इसी का योग है ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल और ह्रदय रोगान्तक चूर्ण. तो सबसे पहले जानते हैं -

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल के घटक या कम्पोजीशन – 

इसे अर्जुनत्वक घनसत्व, अर्जुनत्वक चूर्ण, मुक्ता पिष्टी और अकीक पिष्टी के मिश्रण से बनाया गया है.

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल के फ़ायदे-

हार्ट की हर तरह की बीमारी में बेहद असरदार है. हार्टबीट या धड़कन बढ़ना, घबराहट होना, हार्ट में दर्द होना, हार्ट की कमज़ोरी, वाल्व की कमज़ोरी और हार्ट की ब्लॉकेज में इस से फ़ायदा होता है. यह ब्लड प्रेशर को नार्मल करता है, BP लो होने या BP हाई होने में भी असरदार है.

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल की  मात्रा और सेवन विधि – एक से दो कैप्सूल सुबह-शाम अर्जुनारिष्ट या अर्क गावज़बाँ से लेना चाहिए.

ह्रदयरोगान्तक चूर्ण              

इसका कम्पोजीशन सिंपल पर बेजोड़ है. से अर्जुन की छाल, असगंध और पोहकरमूल के मिश्रण से  बनाया गया है.

ह्रदयरोगान्तक चूर्ण के फ़ायदे- 

यह चूर्ण ह्रदयरोग या हार्ट की हर तरह की बीमारी में बेहद असरदार है. हार्टबीट या धड़कन बढ़ना, घबराहट होना, हार्ट में दर्द होना, हार्ट की कमज़ोरी और हार्ट की ब्लॉकेज में इस से फ़ायदा होता है. यह हाई ब्लड प्रेशर को भी कण्ट्रोल करता है.

ह्रदयरोगान्तक चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि – 

एक से दो स्पून तक सुबह-शाम भोजन के बाद लेना चाहिए. या फिर विशेष लाभ के लिए क्षीरपाक विधि से लें. इसके लिए 250 ML दूध में 100 ML पानी और दो स्पून ह्रदयरोगान्तक चूर्ण मिक्स कर उबालें और जब सिर्फ 200 ML दूध बचे तो छानकर रोज़ एक-दो बार पीना चाहिए.

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल और ह्रदयरोगान्तक चूर्ण दोनों ऑनलाइन अवेलेबल हैं हमारे स्टोर पर जिसका लिंक दिया गया है-



ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल के 60 कैप्सूल की क़ीमत है सिर्फ 180 रुपया और चूर्ण की क़ीमत है 165 रुपया.

तो दोस्तों हार्ट की बीमारी में आप इन दोनों दवाओं का इस्तेमाल कीजिये और फिर देखिये इसके फ़ायदे.