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29 April 2017

Hamdard Jernide Syrup Review | हमदर्द जरनाइड सिरप के फ़ायदे और इस्तेमाल


जरनाइड सिरप एक हर्बल यूनानी दवा है जो पुरुषों की जनरल कमज़ोरी, वीर्यविकार, स्वप्नदोष, पेशाब की जलन और मेल ऑर्गन की कमज़ोरी में इस्तेमाल की जाती है
तो आईये जानते हैं हमदर्द जरनाइड सिरप का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल-

जरनाइड के कम्पोजीशन की बात करें तो यह बड़ा ही सिंपल होता है इसमें बर्ग बकायन, बर्ग झाऊ, बर्ग यब्रूज, मुलेठी और कंद सोख्ता का मिश्रण होता है

जरनाइड सिरप के फ़ायदे- 

यह पुरुषों की सामान्य कमज़ोरी में फ़ायदा करती है

वीर्य विकार या जिर्यान, स्वप्नदोष और पेशाब की जलन में इस से फ़ायदा होता है
बच्चों में या फिर बड़ों में सोते हुवे बिस्तर पर पेशाब होने की प्रॉब्लम इसके इस्तेमाल से दूर होती है

अधीक उत्तेजना होना और मेल ऑर्गन की कमज़ोरी में भी इस से फ़ायदा होता है
कुल मिलाकर यह एक अच्छी दवा है जिसे बताई गयी प्रोब्लेम्स में दूसरी दवाओं के साथ भी इस्तेमाल कर सकते हैं


जरनाइड सिरप का डोज़-

पाँच से सात ML तक दिन में 2-3 बार तक खाना खाने के बाद लेना चाहिए. यह बिलकुल सेफ़ दवा है किसी तरह कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. इसे यूनानी दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीदा जा सकता है, इंडिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इसकी अलग-अलग क़ीमत होती है


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28 April 2017

सब्ज़ा के फ़ायदे | Benefits of Sabja Seeds/Sweet Basil Seeds Lose Weight & Natural Coolant


शरीर को ठंडक देने, गर्मी और लू से बचने के लिए गर्मी के दिनों में इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है, गर्मी के दिनों में इसके इस्तेमाल से तरह- तरह के ड्रिंक, मिल्क शेक और शरबत बनाया जाता है

सब्ज़ा को Sweet Basil Seed, तुक्मारिया, तुख्मलंगा, फ़ालूदा सीड जैसे कई तरह के नामों से जाना जाता है. इसके इस्तेमाल से एसिडिटी, कब्ज़, मोटापा, डायबिटीज, बालों की प्रॉब्लम, स्किन प्रॉब्लम जैसे कई तरह के रोगों में फ़ायदा होता है, तो आईये जानते हैं इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी जानकारी. सबसे पहले देख लीजिये कि यह दीखता कैसा है -

सब्ज़ा सीड कई सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है इसमें कार्बोहायड्रेट, प्रोटीन, विटामिन A, विटामिन C, ओमेगा 3 फैटी एसिड, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे मिनरल पाए जाते हैं

सब्ज़ा सीड को इस्तेमाल करने से पहले कम से कम 15-20 मिनट तक ठन्डे पानी में भीगा लेना चाहिए, भीगने के बाद इसका साइज़ कई गुना तक बढ़ जाता है.

सब्ज़ा सीड के फ़ायदे- 

सब्ज़ा सीड को कई तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं, तो आईये जानते हैं कि किन रोगों में
कैसे यूज़ करना चाहिए -

गर्मी दूर करने और लू से बचने के लिए भीगे हुवे सब्ज़ा सीड को किसी भी चीज़ में मिलाकर ड्रिंक बनाकर पी सकते हैं जैसे निम्बू पानी में मिलाकर, छाछ में मिलाकर, दूध में मिलाकर मिल्क शेक बनाकर या फिर किसी भी जूस में मिक्स कर पी सकते हैं

वज़न कम करने के लिए - 

सब्ज़ा सीड फाइबर रिच होता है, लो कैलोरी और भूक को कम करता है, खाना खाने के पहले इसका इस्तेमाल करने से वज़न कम होता है.

एसिडिटी के लिए -

एसिडिटी और सीने की जलन दूर करने के लिए इसे दूध के साथ लेना चाहिए, यह एसिडिटी और पेट की जलन को कम करता है और पेट को ठंडक पहुँचाता है


कब्ज़ और बवासीर के लिए -

अगर आपको कब्ज़ या Constipation की प्रॉब्लम हो, पेट साफ़ नहीं होता हो या फिर बवासीर हो तो सोने से पहले एक चम्मच भीगा हुवा सब्ज़ा सीड लेना चाहिए. इस से पेट साफ़ होता है, शरीर से Toxins को निकालता है और बवासीर में फ़ायदा होता है

डायबिटीज के लिए - 

अगर आप शुगर के रोगी हैं तो रोज़ एक चम्मच सब्ज़ा सीड दूध के साथ इस्तेमाल करेंगे तो शुगर कण्ट्रोल में रहेगा. यह टाइप - 2 डायबिटीज में बहुत फ़ायदेमंद है

हेयर हेल्थ के लिए -

आयरन, विटामिन्स और मिनरल से भरपूर होने के कारन यह बालों के लिए भी फ़ायदेमंद है, बालों को हेल्दी, काला, चमकदार और मज़बूत बनाता है. बालों की जड़ों को मज़बूत करता है जिस से बालों का गिरना भी कम होता है

स्किन प्रॉब्लम के लिए -

स्किन की हर तरह की प्रॉब्लम में इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है. नारियल तेल में इसके बीजों को डालकर आँच में जला लें और ठंडा होने पर छानकर रख लें. इस तेल को लगाने से स्किन का रूखापन, एक्जिमा और सोरायसिस जैसे रोगों में फ़ायदा होता है

सब्ज़ा सीड के इस्तेमाल से तरह-तरह के ड्रिंक, फ़ालूदा और खीर वगैरह बनाये जाते हैं, जिनका इस्तेमाल कर आप फ़ायदा उठा सकते हैं. सब्ज़ा सीड को आप ग्रोसरी से या पंसारी के यहाँ से ले सकते हैं. Buy Online. ऑनलाइन खरीदें निचे दिए लिंक से-

      




27 April 2017

मिस्वाक, डाबर मिस्वाक टूथपेस्ट के फ़ायदे | Miswak, Dabur Meswak Toothpaste Benefits - Lakhaipurtv


कई लोगों ने जानना चाहा था कि मेरे चमकते दाँतों का राज़ क्या है और मैं कौन सा पेस्ट यूज़ करता हूँ. तो आपको मैं बता दूँ कि यह कोई राज़ नहीं है, बस मैं मिस्वाक टूथपेस्ट से रोज़ दो बार ब्रश करता हूँ, तो आईये अब जानते हैं कि मिस्वाक टूथपेस्ट क्या है और इसके क्या-क्या फ़ायदे हैं

मिस्वाक टूथपेस्ट जानी-मानी कम्पनी डाबर का एक ब्रांड है जिसमे मिस्वाक नाम की जड़ी का एक्सट्रेक्ट मिला होता है. मिस्वाक एक तरह के पौधे की जड़ होती है जिसे दातुन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. मिस्वाक का वानस्पतिक नाम Salvadore Persica' है, इसे अर्क और अल अर्क के नाम से भी जाना जाता है. दातून के रूप में इसका सदियों से इस्तेमाल हो रहा है

इसी मिस्वाक के एक्सट्रेक्ट को मिलाकर डाबर मिस्वाक टूथपेस्ट बनाया गया है जो दाँतों के लिए चीप एंड बेस्ट टूथपेस्ट है

मिस्वाक मसूड़ों को मज़बूत बनाता है, मसूड़ों से खून बहना या पायरिया को दूर करता है, दाँतों को कैविटी और सड़ने से बचाता है, एंटी बैक्टीरियल है.

मिस्वाक के इस्तेमाल से न सिर्फ दाँतों और मसूड़ों की प्रॉब्लम दूर होती बल्कि यह दाँतों को सफ़ेद और चमकदार भी बनाता है.


मिस्वाक की दातून का चमत्कारी गुणों के कारण धार्मिक महत्त्व भी है, अरब कंट्री के लोग इसे सदियों से यूज़ करते रहे हैं. निचे दिए लिंक से मिस्वाक ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं-


तो दोस्तों, अगर आपको दाँतों की कोई समस्या है तो मिस्वाक की दातुन या मिस्वाक टूथपेस्ट का इस्तेमाल कीजिये और फ़ायदा देखिये.

Watch here in Hindi/Urdu


26 April 2017

प्रवाल पिष्टी के गुण और उपयोग | Praval Pishti Benefits, Use & Side Effects in Hindi


प्रवाल पिष्टी जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है यह प्रवाल से बनायी जाने वाली दवा है, प्रवाल को आम बोलचाल में मूँगा के नाम से जाना जाता है, अंग्रेज़ी में इसे Coral Calcium कहते हैं. इसके इस्तेमाल से शरीर से कहीं से भी खून बहने, कैल्शियम की कमी, सुखी खांसी, कमज़ोरी, सर दर्द, जलन, एसिडिटी, गैस्ट्रिक, अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस, हेपेटाइटिस, जौंडिस, आँखों का लाल होना और पेशाब की जलन जैसे रोग दूर होते हैं

तो आईये जानते हैं प्रवाल पिष्टी के गुण, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी जानकारी -

प्रवाल या मूँगा के इस्तेमाल से पिष्टी और भस्म भी बनाया जाता है, भस्म बनाने के लिए इसे शुद्ध करने के बाद अग्नि दी जाती है जबकि पिष्टी बनाने के लिए गुलाब जल में खरलकर फाइन पाउडर बनाया जाता है

प्रवाल पिष्टी और प्रवाल भस्म के गुण लगभग एक जैसे होते हैं. अगर इसके गुणों की बात करें तो यह कैल्शियम से भरपूर एक बेहतरीन Antacid, पाचक, दर्द और सुजन कम करने वाले गुणों से भरपूर होता है


प्रवाल पिष्टी के फ़ायदे- 

प्रवाल पिष्टी को कैल्शियम की कमी और एसिडिटी के अलावा भी कई दुसरे रोगों में इस्तेमाल किया जाता है

इसके प्रयोग से सामान्य कमज़ोरी, डिप्रेशन, तनाव, चिंता, बेचैनी, दिल का ज़्यादा धड़कना, सुखी, खाँसी, अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस, ब्लीडिंग पाइल्स, हड्डियों की कमज़ोरी, Osteoporosis, पेशाब की जलन, बॉडी की जलन, पीरियड के दर्द, Heavy Menstrual Bleeding जैसे रोगों में दूसरी दवाओं के साथ इस्तेमाल किया जाता है

बुखार में इसके इस्तेमाल से अच्छा लाभ मिलता है, बुखार में इसे गोदंती भस्म के साथ लेना चाहिए. यह बॉडी Temperature को कम करता है और कमज़ोरी नहीं होने देता

पुरानी बुखार या किसी पुरानी बीमारी के बाद भी कमज़ोरी और थकावट दूर करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है


प्रवाल पिष्टी की मात्रा और सेवन विधि - 

125 mg से 250 mg तक दिन में दो से तीन बार तक शहद या गुलकंद के साथ लेना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई भी नुकसान नहीं होता है. कई सारी कंपनियाँ इसे बनाती हैं, आयुर्वेदिक मेडिकल से या ऑनलाइन ख़रीदा जा सकता है



24 April 2017

Kamdudha Ras Benfits, Uses, Dosage & Side Effects | कामदुधा रस के गुण और उपयोग - Lakhaipur.com


कामदुधा रस पित्त को शांत करने वाली एक बेहतरीन दवा है, इसके इस्तेमाल से एसिडिटी, हाइपर एसिडिटी, पेप्टिक अल्सर, रक्तपित्त, शरीर की गर्मी और पित्त बढ़ने की वजह से होने वाले हर तरह के रोग दूर होते हैं

तो आईये जानते हैं कामदुधा रस के कम्पोजीशन, फायदे, डोज़ और इस्तेमाल की पूरी जानकारी

कामदुधा रस दो तरह का होता है कामदुधा रस मोती युक्त और कामदुधा रस साधारण
कामदुधा रस मोती युक्त के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें मोती पिष्टी, प्रवाल पिष्टी, मुक्ताशुक्ति पिष्टी, कपर्दक भस्म, शंख भस्म, शुद्ध सोनागेरू और गिलोय सत्व सभी बराबर मात्रा में मिक्स कर खरलकर रखा जाता है. सोनागेरू के कारण यह हल्के लाल रंग का दीखता है

कामदुधा रस साधारण में सिर्फ़ मोती पिष्टी नहीं होती,बाक़ी कॉम्बिनेशन सेम रहता है

कामदुधा रस के गुण - 

कामदुधा रस एक बेहतरीन नेचुरल Antacid है, एंटी एमेटिक, एंटी ऑक्सीडेंट, चक्कर, जलन, दाह और गर्मी और पित्त दोष को दूर करने वाले गुणों से भरपूर होता है


कामदुधा रस के फ़ायदे-

यह एक सौम्य या मातदिल दवा है, पित्त को शांत करती है, एसिडिटी और जलन को कम करती है. पित्त की अधिकता के कारन होने वाले सर दर्द, चक्कर आना, पेशाब की जलन, हाथ-पैर की जलन को दूर करता है

पेट में बहुत ज़्यादा एसिड बनना, खट्टी डकार आना, उल्टी, बदहज़मी, सीने की जलन, शरीर में कहीं से भी ब्लीडिंग होना, पित्ती निकलना, मुँह आना या माउथ अल्सर, पेप्टिक अल्सर जैसे रोगों को दूर करता है

गैस्ट्रिक, एसिडिटी, मुँह का स्वाद ख़राब होना जैसे लक्षणों में अच्छा फ़ायदा होता है
अल्कोहल या किसी अंग्रेज़ी दवा के साइड इफ़ेक्ट की वजह से पित्त बढ़ जाने या शरीर में गर्मी होने पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है

कुल मिलाकर देखा जाये तो बढे हुवे पित्त को शांत करने और उसकी वजह से होने वाली हर तरह की प्रॉब्लम के लिए यह एक अच्छी दवा है जो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के काम करती है


कामदुधा रस की मात्रा और सेवन विधि- 

250 से 500 mg तक दिन में 2-3 बार तक लिया जा सकता है. इसे गुलकंद या शहद में मिला कर लेना चाहिए. बताई गयी मात्र व्यस्क व्यक्ति की है, बच्चों को कम डोज़ में देना चाहिए. इस दवा को आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं



23 April 2017

चन्दनासव मूत्र संक्रमण की आयुर्वेदिक औषधि | Chandanasava Benefits & Use Review By Lakhaipur.com


चन्दनासव एक आयुर्वेदिक सिरप है ख़ासकर पेशाब और किडनी के रोगों में इस्तेमाल किया जाता है, इसके इस्तेमाल से पेशाब की जलन, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, Dysuria, यूरिक एसिड, किडनी की पत्थरी, सिस्ट, किडनी फेलियर और सुजाक जैसे रोग दूर होते हैं

तो आईये अब जानते हैं चन्दनासव के कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

चन्दनासव के कम्पोजीशन की बात करें तो इसे सफ़ेद चन्दन या White Sandal Wood के अलावा दूसरी कई सारी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया जाता है इसमें नेत्रबला, नागरमोथा, गम्भारी, नील कमल, प्रियंगु, पद्माख, लोध्र, मंजीठ, लाल चन्दन, पाठा, चिरायता, बरगद, आम की छाल, मोचरस, धायफुल, द्राक्षा, शर्करा और गुड़ के मिश्रण को आसव निर्माण विधि द्वारा आसव या सिरप बनाया जाता है


चन्दनासव के गुण - 

चन्दनासव गुण में शीतल होता है, एंटी बैक्टीरियल, पत्थरी के कारन को रोकने वाला, एंटी ऑक्सीडेंट, Diuretic, पेशाब की जलन और शरीर की जलन को कम करने वाला, ह्रदय को शक्ति देने वाला और एंटी गाउट भी होता है

चन्दनासव के फ़ायदे- 

चन्दनासव शीतल प्रकृति का और मूत्रल गुणों से भरपूर होने के कारन पेशाब की जलन, पेशाब का इन्फेक्शन, शरीर की जलन, किडनी स्टोन और किडनी फेलियर में इसका प्रयोग करना चाहिए

शरीर में अधीक गर्मी हो, जलन हो तो इसका इस्तेमाल ज़रुर करना चाहिए

पेशाब की इन्फेक्शन या UTI में इसके साथ चंद्रप्रभा लेना चाहिए. इसी तरह से किडनी की प्रॉब्लम में इसके साथ दूसरी सहायक औषधि लेने से अच्छा फ़ायदा होता है. किडनी स्टोन में इसके साथ में गोक्षुरादी गुग्गुल और सिस्टोंन ले सकते हैं


चन्दनासव की मात्रा और सेवन विधि -

15 से 30 ML तक बराबर मात्रा में पानी मिलाकर भोजन के तुरन्त बाद दिन में दो बार लेना चाहिए

चन्दनासव ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. इसे आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं



22 April 2017

मिर्गी की बीमारी जाएगी जड़ से | Epilepsy Treatment in Ayurveda - Lakhaipur.com


आज मैं बता रहा हूँ मृगी या एपिलेप्सी ट्रीटमेंट के बारे में यानि मृगी में असरदार आयुर्वेदिक योग के बारे में. यह एक ऐसी बीमारी है जिस से रोगी का जीवन ख़तरे में पड़ जाता है और इसका दौरा कब और कहाँ पड़ेगा कोई नहीं जानता है.

तो आईये जानते हैं एपिलेप्सी का कम्पलीट आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट - 

इसके लिए जो आयुर्वेदिक दवाएँ चलाई जाती हैं वो कुछ इस तरह से हैं

1) स्मृति सागर रस 1 टेबलेट + वातकुलान्तक रस 1 टेबलेट + शंखपुष्पी 2 टेबलेट सभी मिलाकर एक ख़ुराक दिन में दो बार सुबह शाम

2) बच का चूर्ण 2 ग्राम + असगंध चूर्ण 2 ग्राम + सारस्वत चूर्ण 2 ग्राम सभी मिलाकर एक ख़ुराक शहद में मिलाकर सुबह शाम

3) अश्वगंधारिष्ट 2 चम्मच और सारस्वतारिष्ट 2 चम्मच एक कप पानी मिलाकर दिन में दो बार भोजन के बाद

यहाँ बताई गयी मात्रा व्यस्क व्यक्ति की है, कम उम्र  के लोगों को कम डोज़ में देना चाहिए

स्मृति सागर रस, वातकुलान्तक रस, शंखपुष्पी टेबलेट, अश्वगंधारिष्ट, सारस्वतारिष्ट और सारस्वत चूर्ण आयुर्वेदिक दवा दुकान में मिल जायेगा जबकि बच और असगंध जड़ी बूटी की दुकान से लाकर चूर्ण बना लेना चाहिए. बच दो तरह की होती है मीठी बच और घोड़बच, यहाँ इस योग में मीठी बच का इस्तेमाल करना है.

बताये गए योग को कम से कम छह महिना या अधीक समय तक प्रयोग करने से मृगी की बीमारी दूर हो जाती है. इसमें बताई गयी दवाएँ आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए. इन दवाओं को यूज़ करते हुवे दुसरे विडियो में बताया गया टोटका भी यूज़ कर सकते हैं.


21 April 2017

Shankh Bhasma Benefits in Hindi | शंख भस्म के गुण और उपयोग - Lakhaipur.com


जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है यह शंख से बनायी गयी दवा होती है  जो दस्त, कील-मुहांसे, लीवर-स्प्लीन बढ़ने, पेट दर्द, अपच, भूख की कमी, सिने की जलन, एसिडिटी और पेट के कई तरह के रोगों में लाभकारी है

तो आईये अब जानते हैं शंख भस्म के कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी जानकारी

शंख भस्म के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें शंख और निम्बू का रस होता है. शंख को शोधित करने के बाद अग्नि देकर भस्म बनाया जाता है. शंख भस्म सफ़ेद रंग का फाइन पाउडर होता है

शंख भस्म के गुण -

शंख भस्म के गुणों की बात करें तो यह Antacid, Anti-diarrheal, Antispasmodic, Antioxidant, Anti-emetic और Anti-inflammatory होता है खासकर लीवर, स्प्लीन और आँतों की सुजन के लिए

शंख भस्म के फ़ायदे- 

शंख भस्म के इस्तेमाल से हाइपर एसिडिटी, भूख की कमी, अपच जैसी प्रॉब्लम दूर होती है

लीवर बढ़ जाने, तिल्ली बढ़ जाने में इसे दूसरी दवाओं के साथ लेने से फ़ायदा होता है
पेट की गैस, जकड़न, पेट फूलना, पतले दस्त होना, हिचकी और कील-मुहांसों में फ़ायदा होता है

लूज़ मोशन, मरोड़ के साथ दस्त होना जैसी प्रॉब्लम में इस से अच्छा फ़ायदा होता है


शंख भस्म का डोज़- 

125 mg शहद या फिर दूसरी दवाओं के साथ मिक्स लेना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, हर उम्र के लोग यूज़ कर सकते हैं, सिर्फ प्रेगनेंसी में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. वैसे तो कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं पर अधीक यूज़ करने पर कब्ज़ हो सकता है. कई सारी आयुर्वेदिक कंपनियां इसे बनाती हैं, आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं



20 April 2017

सिंहनाद गुग्गुल, गठिया की आयुर्वेदिक दवा | Singhnad Guggul Benefits and Use Review by Lakhaipur.com


सिंहनाद गुग्गुल वात रक्त यानि गठिया और रुमाटाइड आर्थराइटिस के लिए बहुत ही असरदार दवा है, इसके इस्तेमाल से जोड़ों का दर्द, सुजन और जकड़न दूर होती है

तो आईये जानते हैं सिंहनाद गुग्गुल का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल
सिंहनाद गुग्गुल के कम्पोजीशन की बात करें तो यह हर्रे, बहेड़ा, आमला, शुद्ध गंधक, शुद्ध गुग्गुल और एरण्ड तेल के मिश्रण से बना होता है, यह गोली या टेबलेट के रूप में होता है

सिंहनाद गुग्गुल के गुणों की बात करें तो यह वात-कफ़ नाशक, त्रिदोष को बैलेंस करने वाला, आमपाचक यानि Detoxifier  और शोथ नाशक है, एंटी इंफ्लेमेटरी, Antibacterial, Antifungal, Antigout, रक्तशोधक और यूरिक एसिड को कम करने वाले गुणों से भरपूर होता है


सिंहनाद गुग्गुल के फ़ायदे- 

गठिया, जोड़ों का दर्द, आमवात, रुमाटाइड आर्थराइटिस, जोड़ों की सुजन, जकड़न जैसे हर तरह के वात रोगों में इसका प्रयोग करना चाहिए

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, कमर दर्द, पीठ दर्द इत्यादि हर तरह के दर्द में फ़ायदा होता है

शरीर से यूरिक एसिड को कम करता है, जिस से इसकी वजह से होने वाली सारी प्रॉब्लम दूर होती है

इसके इस्तेमाल से एनीमिया, त्वचा रोग, खाँसी-दमा, पेट दर्द, Digestion की प्रॉब्लम, और समय से पहले बाल सफ़ेद होने में भी फ़ायदा होता है


सिंहनाद गुग्गुल का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका-

एक से दो गोली दिन में 2 बार गुनगुने पानी से भोजन के बाद लेना चाहिए, इसके साथ में दूसरी वातनाशक दवाएँ लेने से जल्दी फ़ायदा होता है. इसके इस्तेमाल से तुरंत फ़ायदा नहीं मिलता पर लगातार यूज़ करते रहने से बीमारी जड़ से दूर हो जाती है. लॉन्ग टाइम तक यूज़ किया जा सकता है, किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. इसके साथ में अमृतारिष्ट, पुनर्नवारिष्ट, गिलोय का रस, चोपचिन्यादी चूर्ण जैसे दवा ली जा सकती है. बैद्यनाथ, डाबर, झंडू, दिव्य जैसी कंपनियों का यह मिल जाता है



19 April 2017

IMC श्री तुलसी ड्रॉप्स के चमत्कारी फ़ायदे | IMC Shri Tulsi Benefits & Use Review by Lakhaipur.com


श्री तुलसी एक हर्बल प्रोडक्ट है जिसमे पांच तरह की तुलसी का एक्सट्रेक्ट होता है. तुलसी अपने गुणों के कारण दुनिया भर में जानी जाती है.

तुलसी के चमत्कारी गुणों को देखते हुवे IMC ने इसे ड्राप के रूप में प्रस्तुत किया है, श्री तुलसी ड्रॉप्स से पुरे शरीर के कई तरह के रोग दूर होते हैं जैसे फ्लू, स्वाइन फ्लू, डेंगू, जॉइंट पेन, पत्थरी, ब्लड प्रेशर, मोटापा, शुगर, अलर्जी, हेपेटाइटिस, गठिया, पेशाब के रोग, पाइल्स, फेफड़ों के रोग, वीर्य की कमी, हिचकी, थकान, भूख की कमी, पेट दर्द, उल्टी इत्यादि. कम्पनी का कहना है कि इसके इस्तेमाल से दो सौ से भी ज़्यादा तरह की बीमारियों में फ़ायदा होता है, तो आईये जानते हैं इसके फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी जानकारी -


श्री तुलसी ड्रॉप्स का कम्पोजीशन- 

अगर इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें पांच तरह की तुलसी का एक्सट्रेक्ट होता है जैसे सफ़ेद तुलसी, काली तुलसी, राम तुलसी, वन तुलसी और निम्बू तुलसी. यहाँ मैं बता देना चाहूँगा कि काली तुलसी को कृष्ण तुलसी और श्याम तुलसी भी कहा जाता है जबकि सफ़ेद तुलसी को विष्णु तुलसी और श्वेत तुलसी भी कहा जाता है. पांच तरह के तुलसी के एक्सट्रेक्ट से बनी यह दवा नेचुरल पावरफुल मेडिसिन बन जाती है

श्री तुलसी ड्रॉप्स के गुण- 

श्री तुलसी ड्रॉप्स के गुणों की बात करें तो  यह एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल, एंटी फ्लू, एंटी सेप्टिक, नेचुरल एंटी बायोटिक और  एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है. अगर संक्षेप में कहूँ तो यह एक एंटी डिजीज मेडिसिन है

श्री तुलसी ड्रॉप्स के फ़ायदे- 

जैसा कि पहले मैंने बताया फ्लू, सर्दी-जुकाम से लेकर हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, लीवर की प्रॉब्लम, गठिया जैसे ऑलमोस्ट हर तरह के रोगों में इसका इस्तेमाल कर फ़ायदा उठा सकते हैं

इस्तेमाल करने का नार्मल तरीका यह है कि एक कप पानी में 2-3 ड्राप मिलाकर पी जाना है. बच्चे, बड़े, बूढ़े सभी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. बच्चों को एक से दो बूंद शहद में मिलाकर देना चाहिए. बच्चों के दस्त-उल्टी, सर्दी-खाँसी, बुखार जैसे हर तरह के रोगों में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं

कैंसर रोगी को भी इसके प्रयोग से लाभ होता है, कैंसर रोगी को इसे दही में मिक्स कर देना चाहिए और दूध-दही अधीक प्रयोग कराना चाहिए. ऑनलाइन यहाँ से खरीदें-


IMC श्री तुलसी ड्रॉप्स के 20 ML के पैक की क़ीमत 195 रुपया है, डिस्काउंट प्राइस में लेने के लिए इस नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं - 09934875422



18 April 2017

Shadbindu Tail for Sinus and Migraine | षडबिंदु तेल साइनस और माईग्रेन की आयुर्वेदिक औषधि


षडबिंदु तेल सायनोसाईंटिस और साइनस इन्फेक्शन की मेन दवा है और पंचकर्म में नस्य के लिए इसे प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है, इसके इस्तेमाल से न सिर्फ साइनस दूर होता है बल्कि नाक के दुसरे सभी रोग, सर्द दर्द, बालों का गिरना, गंजापन और नज़र की कमजोरी में भी फ़ायदा है. तो आईये अब जानते हैं इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी जानकारी

षडबिंदु तेल के कम्पोजीशन की बात करें तो या तिल तेल के बेस पर बना आयुर्वेदिक तेल है जिसे कई तरह की जड़ी-बूटियाँ मिलाकर पकाया जाता है. इसमें काला तिल तेल के अलावा बकरी का दूध, भृंगराज का जूस प्रत्येक चार भाग, एरंड मूल, तगर, सौंफ़, जीवंती, रास्ना, दालचीनी, विडंग, मुलेठी, सोंठ और सेंधा नमक प्रत्येक एक भाग के मिश्रण से बनाया जाता है

षडबिंदु तेल बनाने की विधि यह है कि तिल तेल, बकरी का दूध और भृंगराज के रस को मिक्स कर लोहे की कड़ाही में डालकर आंच पर चढ़ा दें, और बाकि दूसरी जड़ी-बूटियों को पिस कर पेस्ट बनाकर मिला लेना है. धीमी आंच पर तेल पकाया जाता है, जब सिर्फ तेल बच जाये तो ठण्डा होने पर छान कर रख लिया जाता है

षडबिंदु तेल के गुण - अगर इसके गुणों की बात करें तो यह एंटी इंफ्लेमेटरी या सुजन दूर करने वाला, एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है


षडबिंदु तेल के फ़ायदे- 

इसके इस्तेमाल से साइनस की प्रॉब्लम या सायनोसाईंटिस, नाक के मस्से, नाक के अन्दर की सुजन, बार-बार सर्दी जुकाम होना, पुराना ज़ुकाम, सर दर्द, आधा सीसी का दर्द, माईग्रेन, बालों का गिरना, गंजापन, नज़र की कमज़ोरी और दाँतों का ढीलापन जैसे रोग दूर होते हैं

षडबिंदु तेल का डोज़ और प्रयोग विधि- 


चित्त लेटकर दो से छह बूंद किसी ड्रॉपर से नाक में डालना चाहिए दिन में दो बार तक. इसे डालने के बाद नाक में जलन और छिंक भी आ सकती है तो इस से घबराना नहीं चाहिए. बैद्यनाथ, डाबर, पतंजलि जैसी कई सारी कंपनियों का यह आयुर्वेदिक दवा दुकान में मिल जाता है, या फिर ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं



17 April 2017

Sciatica Treatment Sciatica Herbal Remedy | साइटिका का प्रभावी आयुर्वेदिक नुस्खा


वैसे तो पहले तो मैं साइटिका के लिए 2-3 नुस्खे बता चूका हूँ जो असरदार हैं पर कुछ लोगों के लिए वो बनाना आसान नहीं होता है. आज जो नुस्खा मैं बता रहा हूँ इसे थोड़ी कोशिश करने पर बनाया जा सकता है और सबसे बड़ी बात की इसे लॉन्ग टाइम तक यूज़ कर सकते हैं बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के.

तो आईये अब जानते हैं कि इसके लिए क्या चीज़ चाहिए और कैसे बनाना है?

इसके लिए आपको चाहिए होगा महा योगराज गुग्गुल 100 ग्राम, गाय के घी में भुनी हुयी असली हींग 25 ग्राम और एरंड या रेड़ी की मींगी छिल्का निकाली हुयी 25 ग्राम
सभी को अच्छी तरह मिक्स कर रास्नादी क्वाथ में 6 घंटा तक खरल करने के बाद 500 mg या मटर के बराबर की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लेना है

रसतंत्रसार व सिद्ध प्रयोग संग्रह का यह नुस्खा 'गृध्रसीहर गुटिका' के नाम से जाना जाता है

इसे 1 से 2 गोली दिन में 2 बार लेना है पानी से या फिर रास्नादी क्वाथ से. इसे लगातार प्रयोग करते रहने से साइटिका जड़ से ठीक हो जाता है, रोगी को अगर कब्ज़ हो तो एरण्ड तेल का भी इस्तेमाल करना चाहिए. इस नुस्खे का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है, कोई भी इसे यूज़ कर सकता है. दर्द अधीक हो तो कुछ दिनों तक 'विषतुन्दक वटी' का इस्तेमाल करना चाहिए जैसा कि मैंने एक दुसरे विडियो में बताया है



15 April 2017

शुक्रमातृका वटी के गुण और उपयोग | Shukramatrika Vati Benefits & Use Review


शुक्रमातृका वटी भैषज्य रत्नावली का आयुर्वेदिक योग है जो किडनी और वीर्य वाहिनी नाड़ियों पर असर करती है

तो आईये जानते हैं इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी जानकारी -

शुक्रमातृका वटी के कम्पोजीशन की बात करें तो इसे गोखरू, त्रिफला, तेजपत, छोटी इलायची बीज, रसोत, धनियाँ, चव्य, जीरा, तालीसपत्र, सुहागे की खिल और अनारदाना प्रत्येक 20 ग्राम, शुद्ध गुग्गुल 10 ग्राम, शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, अभ्रक भस्म और लौह भस्म प्रत्येक 40-40 ग्राम के मिश्रण से बनाया जाता है. बनाने की विधि यह होती है कि सबसे पहले पारा-गंधक को खरलकर कज्जली बनाकर जड़ी-बूटियों का चूर्ण, गुग्गुल और भस्म में थोड़ा पानी मिलाकर खरलकर गोलियाँ बनायी जाती हैं और धुप में सुखाकर रखा जाता है. यही शुक्रमातृका वटी कहलाती है


शुक्रमातृका वटी की मात्रा और सेवन विधि-

1 - 1 गोली सुबह शाम अनार का रस, बकरी का दूध या पानी से लेना चाहिए

अब जानते हैं शुक्रमातृका वटी के फ़ायदे- 

शुक्रमातृका वटी वीर्य वाहिनी नाड़ी, वात वाहिनी नाड़ी, किडनी और मूत्र संस्थान पर सबसे ज़्यादा असर करती है और इनमे होने वाले रोगों को दूर करती है

इसके इस्तेमाल से वीर्यस्राव या धात गिरने की प्रॉब्लम दूर होती है, पेशाब के पहले या बाद वीर्य निकल जाने में लाभ होता है और हर तरह के प्रमेह को दूर करती है

नौजवानों की बहुत ही कॉमन बीमारी स्वप्नदोष चाहे कैसा भी हो, वातज, पित्तज या कफज इसके इस्तेमाल से दूर होता है. यह वीर्य दोष को दूर कर वीर्य को गाढ़ा बनाती है, शीघ्रपतन और जल्द डिस्चार्ज होने जैसी प्रॉब्लम में भी इस से फ़ायदा होता है


शुक्रमातृका वटी के प्रयोग से पेशाब की जलन, पत्थरी और पेशाब के इन्फेक्शन में भी फ़ायदा होता है

यह खून की कमी को दूर करती है, मसल्स को ताक़त देती है और पाचन शक्ति ठीक कर भूख बढ़ाने में मदद करती है

इसके इस्तेमाल से मानसिक शक्ति बढ़ती है, टेंशन दूर होता है और अच्छी नींद लाने में मदद करती है

इसे आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं, बैद्यनाथ और व्यास जैसी कंपनियों की यह दवा मिल जाती है. 40 टेबलेट की क़ीमत 90 रुपया के क़रीब है. घर बैठे ऑनलाइन ख़रीदें निचे दिए लिंक से -


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14 April 2017

Khadirarishta Benefits and Use in Hindi | खदिरारिष्ट स्किन डिजीज की आयुर्वेदिक औषधि


खदिरारिष्ट एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जो त्वचा रोगों के लिए प्रमुखता से प्रयोग की जाती है, यह एक बेहतरीन रक्तशोधक यानि ब्लड प्यूरीफ़ायर है. इसके इस्तेमाल से हर तरह की स्किन प्रॉब्लम जैसे किल-मुहांसे, खुजली, एक्जिमा, दाद, सफ़ेद दाग, पस वाले फोड़े-फुंसी, कुष्ठ, सोरायसिस, स्किन एलर्जी के अलावा पेट के कीड़े, तिल्ली बढ़ जाना, दिल की बीमारी, खांसी-दमा, बदहज़मी और ट्यूमर जैसे रोगों में भी फ़ायदा होता है

खदिरारिष्ट का मुख्य घटक खदिर और देवदार होता है, तो आईये सबसे पहले जान लेते हैं इसका कम्पोजीशन-

इसे खदिर, देवदार, बाकुची, दारुहल्दी, हर्रे, बहेड़ा, आँवला के क्वाथ में शहद और गुड़ के अलावा प्रक्षेप द्रव्य के रूप में धातकी, कंकोल, नागकेशर, जायफल, लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपात और पिप्पली मिलाकर असाव अरिष्ट विधि से रिष्ट बनाया है. यह रिष्ट यानि सिरप के रूप में होता है

खदिरारिष्ट के गुण- 

खदिरारिष्ट के गुणों की बात करें तो  यह कफ़, वात और आम नाशक, रक्त शोधक, कृमिनाशक, विरेचक, एंटी बैक्टीरियल और पाचक या Digestive गुणों से भरपूर होता है

खदिरारिष्ट के फ़ायदे - 

जैसा कि पहले ही बता चूका हूँ यह स्किन डिजीज के लिए बेहतरीन दवा है. हर तरह की स्किन प्रॉब्लम में इस्तेमाल किया जा सकता है.

शरीर में पस वाले दाने, फोड़े या कोई भी ज़ख्म जिस से पास आता हो तो इसका इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए, इसके साथ त्रिफला गुग्गुल लेने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है
सफ़ेद दाग, सोरायसिस, कुष्ठरोग,  एक्जिमा और ट्यूमर के इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है

पेट के कीड़े को दूर करता है, स्प्लीन बढ़ जाने, जौंडिस और एनीमिया, खांसी-दमा में भी लाभकारी है

वातरक्त या गठिया, सुजन में फ़ायदेमंद है, शरीर से टोक्सिंस को निकालता है. कुल मिलाकर देखा जाये तो रक्त विकारों या स्किन डिजीज के एक बेहतरीन आयुर्वेदिक दवा है जो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के काम करती है

खदिरारिष्ट का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका- 

15 से 30 ML तक दिन में दो बार बराबर मात्रा में पानी मिलाकर भोजन के बाद लेना चाहिए. बच्चे बड़े सभी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, प्रेगनेंसी में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. बैद्यनाथ, डाबर, पतंजलि जैसी कई सारी कंपनियां इसे बनाती हैं.


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13 April 2017

Swarnmakshik Bhasma Benefits and Use | स्वर्णमाक्षिक भस्म के गुण और उपयोग - Lakhaipur.com


स्वर्णमाक्षिक भस्म को सुवर्णमाक्षिक और सोनमाखी भस्म के नाम से भी जाना जाता है, इसका मुख्य घटक स्वर्णमाक्षिक है, यहाँ बता दूं कि इसमें किसी तरह कोई सोना नहीं होता है बल्कि सोने की तरह दिखने के कारन इसे स्वर्णमाक्षिक कहा जाता है

स्वर्णमाक्षिक भस्म एनीमिया, जौंडिस, नींद नहीं आने, पुराना बुखार, आँखों की जलन, सीने की जलन, पेशाब की जलन, खुनी बवासीर, उल्टी, चक्कर, सर दर्द, ल्यूकोरिया और पेट के रोगों को दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता है

स्वर्णमाक्षिक क्या है और इसकी भस्म कैसे बनती है?

यह एक तरह का खनिज है, इसमें कॉपर, आयरन और सल्फ़र पाया जाता है. स्वर्णमाक्षिक को अंग्रेजी में कॉपर आयरन सल्फाइड कहा जाता है

भस्म बनाने के लिए इसे कुल्थी, एरण्ड तेल और छाछ में शुद्ध करने के बाद अग्नि देकर भस्म बनाया जाता है. इसका भस्म लाल रंग का होता है

स्वर्णमाक्षिक भस्म के गुणों की बात करें तो यह रेड ब्लड सेल और हीमोग्लोबिन को बढ़ाने वाला, Antacid, एंटी इंफ्लेमेटरी, वमन नाशक और तनाव, चिंता दूर करने वाले गुणों से भरपूर होता है


स्वर्णमाक्षिक भस्म के फ़ायदे- 

आयरन और कॉपर होने से खून की कमी या एनीमिया को दूर करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है

हाई ब्लड प्रेशर, नींद नहीं आना, चिंता, डिप्रेशन, सर्द दर्द में इसका इस्तेमाल करना चाहिए

पेट के रोगों के लिए भी असरदार है, हाइपर एसिडिटी, मुंह का स्वाद ख़राब होना, गैस्ट्रिक, जौंडिस, हेपेटाइटिस, माउथ अलसर, उल्टी, पेप्टिक अल्सर, Ulcerate Colitis में आयुर्वेदिक डॉक्टर इसका प्रयोग करते हैं

पुरुषों के रोग स्वप्नदोष और महिला रोग ल्यूकोरिया और पीरियड की प्रॉब्लम में ही यह फायदेमंद है

इसके अलावा, पेशाब की जलन, खुनी बवासीर, पुरानी बुखार जैसे रोगों में भी दूसरी दवाओं के साथ इसका इस्तेमाल किया जाता है

स्वर्णमाक्षिक भस्म का डोज़- 


इसकी मात्रा रोग और रोगी के अनुसार तय की जाती है, व्यस्क व्यक्ति को 125 mg से 250 mg या अधीक भी दिया जा सकता है. बच्चों को कम मात्रा में देना चाहिए. इसे शहद के साथ या फिर रोगानुसार अनुपान के साथ लेना चाहिए, या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से.

यह एक सेफ दवा है, सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई भी नुकसान नहीं होता है. डाबर, बैद्यनाथ, पतंजलि जैसी कई सारी कंपनी का आयुर्वेदिक दवा दुकान से ले सकते हैं या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं



12 April 2017

लाक्षादी गुग्गुल के चमत्कारी गुण एवम् प्रयोग | Lakshadi Guggulu Benefits and Use Review By Lakhaipur.com


लाक्षादी गुग्गुल शास्त्रीय आयुवेदिक औषधि है जिसे न सिर्फ बोन फ्रैक्चर या टूटी हड्डियों को जोड़ने में इस्तेमाल किया जाता है बल्कि इसके इसके इस्तेमाल से हड्डियों के दुसरे रोग जैसे Osteoporosis, Osteoarthritis, हड्डियों की कमज़ोरी, जॉइंट और मसल्स की कमज़ोरी, चोट, मोच, दर्द और सुजन को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. बॉन डेंसिटी बढ़ाने और हड्डियों को मज़बूत करने की यह एक अच्छी दवा है.

इसे लाक्षादी गुग्गुल, लाक्षा गुगुल और लाक्षादी गुग्गुलु के नाम से भी जाना जाता है. लाक्षादी गुग्गुल का मुख्य घटक लाक्षा या लाख होता है, तो आईये एक नज़र डालते हैं इसके कम्पोजीशन पर- 

इसे लाक्षा, हडजोड, अर्जुन, अश्वगंधा, नागबला और शुद्ध गुग्गुल के मिश्रण से बनाया जाता है

इसमें मिलायी जाने वाली जड़ी-बुटियों की बात करें तो लाक्षा या लाख एक तरह का गोंद है जो फ्रैक्चर को ठीक करने और हड्डियों को मज़बूत बनाने के काम आती है

हडजोड नाम की औषधि जैसा कि इसका नाम है हड्डी को जोड़ने के लिए बहुत ही असरदार है, कैल्शियम और दुसरे विटामिन्स से भरपूर होती है

अर्जुन ह्रदय को बल देने वाली जानी-मानी दवा है, नागबला मसल्स को ताक़त देती है. जबकि अश्वगंधा के गुण तो आप जानते ही होंगे. और शुद्ध गुग्गुल जो है दर्द, सुजन दूर करने वाला और हीलिंग गुणों के लिए जाना जाता है

लाक्षादी गुग्गुल के गुणों की बात करें तो दर्द, सुजन कम करने वाली, टूटी हड्डी को जोड़ने वाली, बोन डेंसिटी बढ़ाने वाली, और उचित पोषण देकर हड्डियों को मज़बूत बनाने वाले गुणों से भरपूर है


आईये अब जानते हैं लाक्षादी गुग्गुल के फ़ायदे- 

हड्डियों को पोषण देने और हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है

हड्डी का कैसा भी फ्रैक्चर हो, चोट हो, मोच हो तो इसका इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आपको पुरानी चोट हो और उसकी वजह से दर्द होता हो तो  लाक्षादी गुग्गुल का इस्तेमाल करना चाहिए. यह दर्द और सुजन को कम कर हड्डी जोड़ने में मदद करती है

हड्डियों की कमज़ोरी और इसके कारन से होने वाला दर्द,  Osteoporosis, Osteoarthritis, जोड़ों का दर्द, बोन डेंसिटी कम होना जैसी प्रॉब्लम इसके इस्तेमाल से अच्छा फ़ायदा होता है. यह BMD या बोन मिनरल डेंसिटी को बढ़ाता है

रीढ़ की हड्डी का दर्द, Spondylitis जैसे रोगों में भी दूसरी दवाओं के साथ इसे लिया जा सकता है. कुल मिलाकर देखा जाये तो फ्रैक्चर और हड्डी की कमज़ोरी को दूर करने के लिए यह एक बेस्ट दवा है


लाक्षादी गुग्गुल का डोज़ - 

2 गोली दिन में 2 से 3  बार तक पानी से भोजन के बाद लेना चाहिए, या फिर रोग और रोगी के अनुसार डॉक्टर इसका डोज़ फिक्स करते हैं. यह बिलकुल सेफ़ दवा है किसी तरह को साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है, लॉन्ग टाइम तक यूज़ कर सकते हैं

बेस्ट क्वालिटी का लाक्षादि गुग्गुल सही क़ीमत में ऑनलाइन ख़रीदें हमारे स्टोर lakhaipur.in से - लाक्षादि गुग्गुल 100 ग्राम 


उम्मीद है कि आज की जानकारी आपके किसी काम आयेगी और इस विडियो से आपकी आयुर्वेदिक नॉलेज बढ़ेगी



11 April 2017

Himalaya Talekt Review in Hindi | हिमालया टेलेक्ट चर्मरोगों की आयुर्वेदिक दवा


हिमालया हर्बल की टेलेक्ट नाम ही यह दवा स्किन की हर तरह की प्रॉब्लम के लिए असरदार आयुर्वेदिक दवा है, यह स्किन की एलर्जी और इम्पुरिटी को दूर करती है, हल्दी और नीम जैसी नेचुरल जड़ी-बूटियों से बनी यह दवा कील-मुहांसों से लेकर दाद, खाज-खुजली, एक्जिमा और सोरायसिस जैसे रोगों में इस्तेमाल की जाती है

तो आईये जानते हैं हिमालया टेलेक्ट के कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल

हिमालया टेलेक्ट कैप्सूल और सिरप दोनों रूप में मिलता है, टेलेक्ट के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें हल्दी, नीम, अमलतास, त्रिफला, गुडूची, कालमेघ, विडंग और भृंगराज का मिश्रण होता है. टेलेक्ट सिरप का कम्पोजीशन भी ऑलमोस्ट सेम होता है

हिमालया टेलेक्ट के फ़ायदे-


इसके इस्तेमाल से खुजली और स्किन एलर्जी दूर होती है, किल-मुहाँसे, फोड़े-फुंसी को दूर करता है

यह एक नेचुरल रक्त शोधक यानि खून साफ़ करने वाला है, इसके इस्तेमाल से ब्लड इम्पुरिटी से होने वाली लगभग हर बीमारी में फ़ायदा होता है

दाद- एक्जिमा और फ़ंगल इन्फेक्शन को दूर करता है और सोरायसिस में भी फायदेमंद है
चेहरा लाल होना, नाक, गाल और माथे में सुजन होना जैसी प्रॉब्लम दूर होती है, गर्मी में होने वाली घमौरी में भी फ़ायदेमंद है. कुल मिलाकर देखा जाये तो स्किन प्रॉब्लम के लिए सिंपल पर असरदार दवा है


अब जानते हैं हिमालया टेलेक्ट का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका-

एक से दो कैप्सूल दिन में दो बार पानी से खाना खाने के बाद लेना चाहिए. इसका सिरप लेना हो तो 2 चम्मच दिन में दो बार. या डॉक्टर की सलाह के अनुसार डोज़ लेना चाहिए. बच्चों के लिए सिरप यूज़ करना अच्छा रहेगा. ऑनलाइन खरीदिये यहाँ निचे दिए गए लिंक से -


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10 April 2017

Majun Mughalliz Jawahar Wali Review in Hindi | माजून मुगल्लिज़ जवाहर वाली, वीर्य गाढ़ा करने की यूनानी दवा


आज आप जानेंगे वीर्य को मलाई की तरह गाढ़ा करने और शीघ्रपतन दूर करने की यूनानी दवा माजून मुगल्लिज़ जवाहर वाली के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में

यह माजून या हलवे की तरह की दवा है जिसे पुरुष रोगों में हकीम लोग इस्तेमाल करते हैं. आईये सबसे पहले जान लेते हैं इसका कम्पोजीशन- 

इसे तुख्म सुदाब, तुख्म काहू, गुल सुर्ख, ज़मुर्द मह्लूल, शक्कर सफ़ेद, अस्ल-ऊस-सूस मुक़स्सर, यशब महलूल, लेमू सत, वर्क नुकरा, कुश्ता कलई, सदफ़ सादिक महलूल और गुलनार जैसी दवाओं के मिश्रण से बनाया जाता है


माजून मुगल्लिज़ जवाहर वाली के फ़ायदे- 

पुरुष रोगों के लिए यह जानी-मानी यूनानी दवा है, इसके इस्तेमाल से पुरुषों के लगभग हर तरह के यौनरोग दूर होते हैं

इसके इस्तेमाल से वीर्य गाढ़ा होता है यानि सीमेन को थिक बनाती है, जिस से शीघ्रपतन और जल्द डिस्चार्ज होने में फ़ायदा होता है और टाइमिंग को बढ़ाता है

यौनेक्षा की कमी, वीर्य स्राव, स्वप्नदोष जैसे प्रॉब्लम में भी इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है.

कुल मिलाकर देखा जाये तो वीर्य को गाढ़ा करने और पुरुष रोगों के लिए यह एक अच्छी दवा है.


माजून मुगल्लिज़ जवाहर वाली का डोज़ इस्तेमाल करने का तरीका-

7 से 10 ग्राम तक दिन में दो बार दूध के साथ खाना खाने के बाद लेना चाहिए.

हमदर्द कंपनी की यह दवा यूनानी दवा दुकान से या फिर घर बैठे ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें

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ताम्र भस्म के फ़ायदे और नुकसान | Tamra Bhasma Benefits & Use Review By Lakhaipur.com


ताम्र भस्म जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है ताम्र या ताम्बे से बनायी जाने वाली आयुर्वेदिक दवा है, इसे कई तरह के रोगों में इस्तेमाल किया जाता है, इसे ट्यूमर, कैंसर, लीवर के रोग, अनेमिया, मोटापा, गालस्टोन, लीवर-स्प्लीन बढ़ जाने, हिचकी, एसिडिटी, पेट की प्रॉब्लम और पाचन सम्बन्धी रोगों में इस्तेमाल किया जाता है

ताम्र यानि ताम्बा को शोधन-मारण जैसे आयुर्वेदिक प्रोसेस से गुजारने के बाद हाई टेम्परेचर में भस्म बनाया जाता है. बना हुवा ताम्र भस्म काले रंग का फाइन पाउडर होता है

ताम्र भस्म के गुणों की बात करें यह बिलीरुबिन कम करने वाली, पाचन सुधारने वाली, मेदहर यानि मोटापा दूर करने वाले गुणों से भरपूर होती है

ताम्र भस्म को दूसरी सहायक दवाओं के साथ कई तरह के रोगों में इस्तेमाल किया जाता है, तो आईये जानते हैं किन बीमारियों में इसे किस चीज़ के साथ यूज़ करना चाहिए-

लीवर-स्प्लीन बढ़ जाने पर - इसे आरोग्यवर्धिनी वटी और सूतशेखर रस के साथ लेना चाहिए. पुनर्नवारिष्ट, रोहितकारिष्ट या फिर पुनर्नवा क्वाथ के साथ लेना चाहिए

गालस्टोन में - करेले के जूस के साथ लेना चाहिए

हिचकी आने पर - निम्बू का रस और पीपल के साथ लेना चाहिए

पेट में गुड़गुडाहत और आंव होने पर- सोंठ का चूर्ण और शहद के साथ

आँव वाले दस्त होने पर - सोंठ चूर्ण और छाछ के साथ लेना चाहिए


लीवर की प्रॉब्लम में - अनार के जूस के साथ

भूख नहीं लगने पर - पीपल, अद्रक का रस और शहद के साथ

एसिडिटी और इनडाईजेशन में - गुड़, शहद और द्राक्षा के साथ लिया जा सकता है

शरीर में पित्ती होने पर - हल्दी के चूर्ण के साथ लेना चाहिए


ताम्र भस्म का डोज़- 

2 mg से 5 mg तक दिन में 2 बार. ताम्र भस्म बिल्कुल सही डोज़ में लेना चाहिए, ज़्यादा डोज़ होने पर साइड इफ़ेक्ट हो सकता है. इसे लगातार 45 दिनों से ज़्यादा लगातार यूज़ नहीं करना चाहिए

डॉक्टर की सलाह बिना इसका इस्तेमाल न करें, साइड इफ़ेक्ट की बात करें तो नाक से खून बहना, BP हाई होना, माउथ अल्सर, चक्कर, उल्टी जैसी प्रॉब्लम हो सकती है. तो दोस्तों, ये थी आज की जानकारी ताम्र भस्म के फ़ायदे और नुकसान के बारे में. ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें



09 April 2017

झंडू नित्यम चूर्ण, कब्ज़ की आयुर्वेदिक दवा | Zandu Nityam Churna Review - Lakhaipur.com


नित्यम चूर्ण का नाम आपने ज़रूर सुना होगा, यह कब्ज़ को दूर करने की पोपुलर आयुर्वेदिक दवाओं में से एक है

नित्यम चूर्ण नयी पुरानी कब्ज़ और इसकी वजह से होने वाली प्रॉब्लम जैसे गैस, पेट फूलना, उल्टी, खट्टी डकार आना और एसिडिटी में फ़ायदा होता है. नित्यम चूर्ण सात तरह की जड़ी बूटियों के मिश्रण से बनाया गया है, तो आईये सबसे पहले जान लेते हैं इसका कम्पोजीशन -

सनाय पत्ती इसका मुख्य घटक है, इसके अलावा इसमें छोटी हर्रे, मुलेठी, सौंफ़, त्रिफला और कालानमक के अलावा एरण्ड तेल भी मिला होता है

इसमें मिलायी गयी सारी जड़ी-बूटियाँ पाचक और रेचक गुणों से भरपूर और एरण्ड तेल बेहतरीन Laxative और आँतों को चिकना बनाकर मल को ढीला करता है

कब्ज़ और कब्ज़ की वजह से होने वाली हर तरह की प्रॉब्लम को दूर करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है

नित्यम चूर्ण का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका- 


5 से 10 ग्राम तक इस चूर्ण को सोने से पहले गुनगुने पानी से लेना चाहिए. बच्चों को कम मात्रा में देना चाहिए. इस से किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है, गर्भावस्था में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. सनाय पत्ती मिला होने से लॉन्ग टाइम यूज़ न करें नहीं तो इसकी आदत पड़ सकती है. अयुर्वेदिक दवा दुकान में यह हर जगह मिल जाता है, ऑनलाइन खरीदने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें





08 April 2017

मोती पिष्टी/मोती भस्म के चमत्कारी फ़ायदे | Moti Pishti/Moti Bhasma Benefits- Lakhaipur.com


मोती पिष्टी और मोती भस्म पर्ल या मोती से बनायी जाने वाली आयुर्वेदिक औषधि है जिसे आयुर्वेद के साथ यूनानी चिकित्सा पद्धति में भी इस्तेमाल किया जाता है

मोती का आयुर्वेद में का बड़ा महत्त्व है इसके चमत्कारी गुणों के कारन. मोती एक बेहतरीन Antacid और नेचुरल कैल्शियम का बेस्ट सोर्स है, पित्त को शांत करना और कुलिंग एक्शन इसका मेन काम है

मुक्ता पिष्टी या मुक्त भस्म के इस्तेमाल से कई सारे रोग दूर होते हैं, इसके इस्तेमाल से कैल्शियम की कमी, हर तरह की कमज़ोरी, नर्वसनेस, पुराना बुखार, खाँसी, अस्थमा, हिस्टीरिया, ह्रदय रोग, ब्लड प्रेशर, रक्तपित्त, पाचन की प्रॉब्लम, वीर्य विकार, रिकेट्स, डायबिटीज, प्रमेह, एसिडिटी, अल्सर, पेप्टिक अल्सर, आँखों की प्रॉब्लम और शारीरिक कमज़ोरी जैसे कई तरह के रोग दूर होता है

आईये सबसे पहले जान लेते हैं कि मोती पिष्टी और मोती भस्म क्या चीज़ होती है और कैसे बनती है?

मोती पिष्टी और मोती भस्म दोनों फाइन क्लास की मोती से बनाया जाता है, मोती पिष्टी कैसे बनती है?

मोती पिष्टी बनाने के लिए मोती चूरे को गुलाब जल में रोज़ 21 दिनों तक घोटकर फाइन पाउडर बनाया जाता है, यही मोती पिष्टी या मुक्ता पिष्टी के नाम से जानी जाती है

मोती भस्म बनाने के  लिए मोती को शोधन-मारण जैसे प्रोसेस से गुज़ारने के बाद गुलाब जल में खरल कर टिकिया बनाकर सुखाने के बाद उपलों की तिव्र अग्नि देकर भस्म बनाया जाता है

मोती भस्म से ज़्यादा कूल मोती पिष्टी होती है इसीलिए मोती पिष्टी का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है

मोती पिष्टी या मोती भस्म के गुणों की बात करें तो यह दाह या शरीर के अन्दर-बाहर हर तरह की गर्मी और जलन को दूर करने वाली, पाचन शक्ति ठीक करने वाली, ज्वरनाशक, कफ़नाशक, खाँसी-अस्थमा दूर करने वाली, दीमाग को ताकत देने वाली, यादाश्त और बुद्धि बढ़ाने वाली, त्वचा में निखार लाने वाली, वीर्य वर्धक, वीर्य विकार नाशक, ज़हर का असर कम करने वाली और कैल्शियम का बेहतरीन सोर्स है

आईये अब जानते हैं मोती पिष्टी या मोती भस्म के फ़ायदे - 


शरीर में कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए मोती पिष्टी या मोती भस्म आयुर्वेद की सबसे हाई क्लास मेडिसिन है, इसमें हाई क्लास कैल्शियम होता है जो हड्डियों, मसल्स और दांतों को मज़बूत बनता है. यह बॉडी में पूरी तरह से अब्ज़ोरब होती है. अगर आपको अंग्रेज़ी दवा का कैल्शियम बॉडी में अब्ज़ोरब नहीं होता तो मोती पिष्टी का इस्तेमाल करना चाहिए

शीतल प्रकृति या कुलिंग नेचर होने से यह बॉडी की हर तरह  की गर्मी और जलन को दूर करती है

पित्त की अधिकता को दूर करती है एसिडिटी, हाइपर एसिडिटी, अल्सर, गैस्ट्रिक, अधीक प्यास लगना, हाथ-पैर और आँख की जलन, नाक-मुंह से खून आना जैसी प्रॉब्लम दूर होती है

इसके इस्तेमाल से नर्वस सिस्टम को ताक़त मिलती है सर दर्द, एपिलेप्सी, दिमागी दौरा पड़ना, स्ट्रेस, चिंता, तनाव, मानसिक विकार, दीमाग की ख़राबी, पागलपन इत्यादि में इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है

मोती पिष्टी हार्ट को ताक़त देती है, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कम करती है, हार्ट की कमज़ोरी और ह्रदयरोगों में इसका इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए

पुरुष रोगों के लिए सफलतापूर्वक इसका इस्तेमाल होता है, यह वीर्य विकार को दूर करती है, सीमेन क्वालिटी और क्वांटिटी को बढ़ाती है, भरपूर जोश और तनाव लाती है, यौनेक्षा की कमी और Impotency को दूर करती है. इसके इस्तेमाल से मूत्र रोग भी दूर होते हैं

महिला रोगों के लिए भी यह बेहतरीन टॉनिक और दवा है हर तरह की पीरियड्स की प्रॉब्लम, ल्यूकोरिया, मेनोपौज़ और गर्भाशय की प्रॉब्लम को दूर करती है

बच्चों से लेकर बड़े-बूढों और प्रेग्नेंट महिलायें भी इसका इस्तेमाल कर सकती हैं


मोती पिष्टी या मोती भस्म का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका- 

60 mg से 125 mg तक शहद, घी या  गुलकंद के साथ लिया जा सकता है. या फिर रोगानुसार दूसरी सहायक औषधियों के साथ डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए. पूरी तरह से सुरक्षित दवा है किसी तरह कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. बैद्यनाथ मोती पिष्टी यहाँ से खरीदें -

 बैद्यनाथ, डाबर जैसी कई सारी कंपनियों की यह दवा आयुर्वेदिक दवा दुकान में मिल जाती है. तो दोस्तों ये थी आज की जानकारी मोती पिष्टी और मोती भस्म के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में


07 April 2017

Indulekha Hair Oil Review in Hindi | इन्दुलेखा भृंगा हेयर आयल के फ़ायदे और नुकसान - Lakhaipur.com


बालों के हर तरह की प्रॉब्लम के लिए यह एक पोपुलर तेल है, इसके इस्तेमाल से बालों का गिरना, बालों का टाइम से पहले सफ़ेद होना, Dandruff  जैसी प्रॉब्लम दूर होती है. यहाँ बालों को काला, घना, लम्बा और मज़बूत बनाता है. जड़ी बूटियों के मिश्रण से नारियल तेल के बेस पर बना पूरी तरह से सुरक्षित आयुर्वेदिक तेल है

सबसे पहले जान लेते हैं इसका कम्पोजीशन- 

इसे कई सारी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया गया है जैसे कोकोनट मिल्क आयल, घृतकुमारी, द्राक्षा, सफ़ेद कुटज के पत्ते, भृंगराज, आँवला, गिलोय, बादाम, करी पत्ता, मुलेठी, नीम पत्ता, ब्राह्मी, कपूर, क्षीर और नारियल तेल

इन्दुलेखा भृंगा हेयर आयल के फ़ायदे- 


यह तेल बालों की हर तरह की प्रॉब्लम के लिए असरदार है, बालों का गिरना रोकता है, बालों को काला, घना और मज़बूत  बनाता है

बालों को सफ़ेद होने से रोकता है और बालों को मुलायम बनाता है, गंजे हो रहे लोगों के लिए फ़ायदेमंद है, इसके इस्तेमाल से रुसी या Dandruff में भी फ़ायदा होता है

इन्दुलेखा भृंगा हेयर आयल की बोतल में कंघी जैसा एप्लीकेटर भी लगा होता है जिस से आप आसानी से बालों की जड़ों में तेल लगा सकते हैं. कंघी जैसा एप्लीकेटर से तेल बर्बाद नहीं होता और लगाने में आसानी होती है

घर बैठे इस इस तेल को मंगाने के लिए दिए गए लिंक पर क्लीक कर ऑनलाइन खरीद सकते हैं.



06 April 2017

Shabab-e-azam for Premature Ejaculation | शबाब-ए-आज़म, शीघ्रपतन की बेजोड़ दवा- Lakhaipurtv


आज आप जानेंगे शीघ्रपतन और दुसरे पुरुष रोगों की असरदार यूनानी दवा शबाब-ए-आज़म के फ़ायदे के बारे में

हर्बल दवा कंपनी रेक्स रेमेडीज की यह एक ब्रांडेड दवा है पुरुष रोगों के लिए, यह यूनानी फ़ार्मूले से बनायी गयी हर्बल दवा है जिसके इस्तेमाल से शीघ्रपतन, इरेक्शन की प्रॉब्लम, Premature Ejaculation, मेल ऑर्गन का ढीलापन और वीर्य विकार जैसे हर तरह के पुरुष रोग दूर होते हैं

शबाब-ए-आज़म जड़ी-बूटियों और भस्मों के मिश्रण से बनी एक यूनानी दवा है जो माजून या हलवे की तरह होती है ठीक वैसी ही जैसा की च्यवनप्राश होता है, तो आईये अब जानते हैं इसके फ़ायदे- 



यह इरेक्शन पॉवर को इम्प्रूव करती है, शीघ्रपतन को दूर करती है और जल्द डिस्चार्ज नहीं होने देती 

इसके इस्तेमाल से मेल ऑर्गन के मसल्स को ताक़त मिलती है और भरपूर तनाव और कड़ापन लाने में मदद करती है 

भरपूर ओर्गाज्म और टाइमिंग को बढ़ाती है, वीर्य विकार दूर कर वीर्य को गाढ़ा बनाती है 

इसके इस्तेमाल से वीर्य की मात्रा बढ़ती है, सीमेन मोटिलिटी और क्वालिटी को इम्प्रूव करती है जिस से मेल इनफर्टिलिटी में फ़ायदा होता है 

यौनेक्षा को बढ़ाती है जिस से नपुंसकता या Impotency में भी फ़ायदा होता है. 

कुल मिलाकर देखा जाये तो पुरुषों की यौन कमज़ोरी दूर करने और हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए यह एक अच्छी दवा है जो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के काम करती है 



शबाब-ए-आज़म का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका- 

5 ग्राम दिन में 2 बार दूध के साथ लेना चाहिए खाना खाने के बाद. नार्मल आदमी वन आवर बीफोर बेड भी ले सकता है 

रेक्स रेमेडीज की शबाब-ए-आज़म आयुर्वेदिक-यूनानी दवा दुकान में हर जगह मिल जाती है, इसे ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें



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Swarnprashan Benefits for Children | स्वर्णप्राशन क्या है? बच्चों को सोना खिलाने के चमत्कारी फ़ायदे


आज आप जानेंगे बच्चों का दीमाग तेज़ करने और बीमारियों से बचाने की आयुर्वेदिक वैक्सीन स्वर्णप्राशन के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में

आयुर्वेदिक वैक्सीन!!! शायेद आपने नहीं सुना होगा, यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक प्रोसेस है जो मॉडर्न वैक्सीन की तरह ही काम करता है इस लिए मैं इसे आयुर्वेदिक वैक्सीन कह रहा हूँ. स्वर्णप्राशन एक आयुर्वेदिक संस्कार है जिसे जन्म से लेकर 15 साल तक के बच्चों को यूज़ कराया जा सकता है

आईये सबसे पहले जानते हैं कि स्वर्णप्राशन है क्या चीज़?

स्वर्णप्राशन यानि सोना को बच्चे को चटाना. डायरेक्ट सोना तो नहीं चटाया जाता है इसके लिए स्वर्ण भस्म को कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर शहद और घी में मिक्स कर खिलाया जाता है, इसे ही स्वर्णप्राशन या सुवर्णप्राशन के नाम से जाना जाता है
स्वर्णप्राशन कैसे करते हैं?

इसके लिए आपको चाहिए होता है स्वर्ण भस्म और कुछ जड़ी-बूटियां जैसे ब्राह्मी, शंखपुष्पी, बच, अमला, यष्टिमधु और बहेड़ा 

सभी जड़ी-बूटियां बराबर वज़न में लेकर बारीक पाउडर बना लेना है, 10 ग्राम इस पाउडर में 250mg शुद्ध स्वर्ण भस्म अच्छी तरह मिक्स कर लें. इसे विषम भाग घी और शहद में मिलाकर बच्चों को उनकी आयु के अनुसार चटाया जाता है 

जड़ी-बूटियों का चूर्ण बनाना और स्वर्ण भस्म की सही मात्रा मिक्स करना सबके लिए आसान काम नहीं होता है, इसलिए मैं यहाँ स्वर्णप्राशन का एक आसान प्रोसेस बता रहा हूँ 

इसके लिए आपको लेना है शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि 'कुमारकल्याण रस' स्वर्णयुक्त. बैद्यनाथ, डाबर कंपनी की यह टेबलेट के रूप में आती है. इसकी टेबलेट 125 mg की होती है. एक से तिन साल तक के बच्चे को एक टेबलेट की चार खुराक बनाकर शहद से रोज़ एक बार चटाना चाहिए. बड़े बच्चों को आधा से एक टेबलेट तक रोज़ देना चाहिए. 

स्वर्ण भस्म और दुसरे जड़ी-बूटियों से बनी यह दवा स्वर्णप्राशन के लिए सबसे आसान प्रोसेस है, न सिर्फ स्वर्णप्राशन बल्कि दूसरी बीमारियों को भी दूर करने में इसका इस्तेमाल किया जाता है 



आईये अब जानते हैं स्वर्णप्राशन के फ़ायदे- 

रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी पॉवर को बढ़ाता है - 
स्वर्णप्राशन से बच्चों की इम्युनिटी पॉवर बढ़ती है, रोगों से बचाता है, जिस से बच्चे जल्दी बीमार नहीं पड़ते हैं. दांत निकलने के टाइम होने वाली प्रॉब्लम से बचाता है 

बुद्धि बढ़ाता है और दीमाग तेज़ करता है - 
स्वर्णप्राशन बच्चों के ब्रेन Development में मदद करता है, दिमाग तेज़ बनाता है और बुद्धि को तेज़ करता है, इस से बच्चों की मेमोरी पॉवर बढ़ती है. बच्चे पढ़ाई में तेज़ बनते हैं 

शक्ति और स्टैमिना को बढ़ाता है - 
बच्चों की शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है, स्टैमिना बढ़ाता है और अन्दर से मज़बूत बनाता है 

पाचन शक्ति को ठीक करता है - 
जिन बच्चों की कमज़ोर रहती है, उनकी पाचन शक्ति को ठीक करता है और भूख बढ़ाता है, जिस बच्चों की खाने में रूचि बढ़ती है और बच्चे चाव से खाने लगते हैं 

रंग रूप में निखार लाता है - 
स्वर्णप्राशन से बच्चों के रंग-रूप में भी निखार आता है और स्किन का रंग निखरता है. बच्चों को गोरा बनाता है 

एलर्जी से बचाता है - 
बच्चों में होने वाली एलर्जी से बचाता है, सर्दी-खाँसी, कफ़, अस्थमा, स्किन इन्फेक्शन, खुजली जैसी प्रॉब्लम से बचाता है 



आईये अब जानते हैं स्वर्णप्राशन के दौरान ध्यान रखने वाली कुछ बातें- 

स्वर्णप्राशन सूर्योदय से पहले सुबह ख़ाली पेट कराना चाहिए, स्वर्णप्राशन के आधा घंटा पहले और बाद कुछ नहीं खाना चाहिए 

स्वर्णप्राशन एक से तीन महिना तक लगातार कराया जा सकता है. बच्चा अगर बीमार हो तो स्वर्णप्राशन नहीं कराना चाहिए 

स्वर्णप्राशन के लिए कुमारकल्याण रस को हिमालया बोनिसान सिरप या ड्रॉप्स में भी घोलकर दिया जा सकता है. कुमारकल्याण रस  या स्वर्ण भस्म आप आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीद  सकते हैं 



05 April 2017

Nityanand Ras- फाइलेरिया या हाथी पाँव की आयुर्वेदिक दवा | Herbal Medicine for Filariasis- Lakhaipurtv


फाइलेरिया को आयुर्वेद में फीलपाँव, श्लीपद और हाथी पाँव के नाम से जाना जाता है जो की वात-कफ़ जनित रोग होता है, इसमें रोगी का पैर फूलकर मोटा हो जाता है और हाथी के पैर के जैसा दीखता है इसीलिए इसे हाथी पाँव भी कहा जाता है. इस रोग को दूर करने के लिए नित्यानन्द  रस एक असरदार शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है

आईये अब जानते हैं नित्यानन्द रस के कम्पोजीशन को- 

इसे कई सारी जड़ी-बूटियों, खनिज लवण और भस्मों के मिश्रण से बनाया जाता है, इसके घटक के नाम  कुछ इस तरह से हैं- शुद्ध हिंगुल, शुद्ध गंधक, ताम्र भस्म, काँस्य भस्म, वंग भस्म, शुद्ध हरताल, शुद्ध तूतिया, शंख भस्म, लौह भस्म, विदारीकन्द, सोंठ,मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आंवला, विडंग,विड नमक, समुद्र नमक, सेंधा नमक, सौवर्च लवण, चव्य, पिपरामुल, हपुषा, बच, पाठा, देवदार, इलायची, विधारा, त्रिवृत, चित्रक, दन्ती मूल और शठी में हरीतकी के क्वाथ की भावना देकर गोलियाँ बनायीं जाती हैं

नित्यानन्द  रस के गुणों की बात करें तो यह पित्त स्राव को बढ़ाकर भूख बढ़ाने वाली, वात-कफ़ नाशक, मेदनाशक, कीटाणुनाशक, दीपक और योगवाही रसायन है


नित्यानन्द रस के फ़ायदे- 

यह फाइलेरिया या हाथी पाँव के जानी-मानी आयुर्वेदिक दवा है जिसे सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है

हल्का बुखार, सुजन दर्द वाले फाइलेरिया को दूर करती है, कफ़ और वात दोष को बैलेंस करने का काम करती है

यह एंटी बायोटिक और एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है, बॉडी के एक्स्ट्रा वाटर को सुखाती है

कफ़ दोष को दूर करने वाली यह दवा मोटापा को भी कम करती है

नित्यानन्द रस के इस्तेमाल से हर तरह के ट्यूमर, गण्डमाला, गिल्टी, फाईब्राइड जैसे रोगों में भी फ़ायदा होता है

यह गठिया और वात रोगों में भी असरदार है, इसके इस्तेमाल से पाचन शक्ति ठीक होती है

कुल मिलाकर देखा जाये तो फाइलेरिया और इस से रिलेटेड रोगों को दूर करने के लिए यह एक अच्छी दवा है


नित्यानन्द रस की मात्रा और सेवन विधि - 

1 से 2 गोली दिन में दो बार भोजन के बाद पानी या गौमूत्र से लेना चाहिए, इसे डॉक्टर की सलाह से लेना ठीक रहता है. पुराना और भयंकर फाइलेरिया में इसके साथ अग्नि दग्ध चिकित्सा या जलौकावचारण जैसी आयुर्वेदिक विधि अपनाने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है. या फिर साथ में फ़ाइलेरियल कैप्सूल का भी सेवन करें.

बेस्ट क्वालिटी का नित्यानंद रस ऑनलाइन खरीदें हमारे स्टोर lakhaipur.in से - नित्यानंद रस 100 ग्राम 


बैद्यनाथ कंपनी की यह दवा आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें