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31 March 2017

Rajat Bhasma(Chandi Bhasma, Silver Ash) Review | रजत भस्म(चाँदी भस्म) के फ़ायदे और इस्तेमाल


सबसे पहले मैं बता देना चाहूँगा कि इसे कई नामों से जाना जाता है, रजत भस्म को रौप्य भस्म, चाँदी भस्म, कुश्ता चाँदी और अंग्रेज़ी में सिल्वर ऐश के नाम से जाना जाता है

यह प्योर चाँदी या सिल्वर से बनायी जाती है, यह एक पावरफुल दवा है इसके इस्तेमाल से कई तरह के रोग दूर होते हैं

रजत भस्म का मुख्य घटक रजत या चाँदी है जिसे शोधन-मारण जैसे आयुर्वेदिक प्रोसेस के बाद तीव्र अग्नि देकर भस्म बनाया जाता है, चूँकि इसका भस्म बनाना एक जटिल प्रक्रिया है तो इसकी चर्चा न कर आईये जानते हैं इसके गुण और उपयोग के बारे में - 

रजत भस्म के गुणों की बात करें तो यह वात, पित्त और कफ़ नाशक है, बल-ओज वर्धक, कान्ति वर्धक यानि स्किन का ग्लो बढ़ाने वाली, यादाश्त बढ़ाने वाली, एंटी एजिंग और रसायन औषधि है 

यह एक बेतरीन एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी एजिंग और शरीर के लिए बेस्ट टॉनिक है
इसके इस्तेमाल से कई तरह के रोग दूर होते हैं, किडनी, ब्रेन, नर्वस सिस्टम, पित्त रोग, प्रमेह और हर तरह के मूत्र रोग, लीवर, स्प्लीन की बीमारी और धातु की कमजोरी या पुरुष रोगों में फ़ायदा होता है 

पित्त की अधिकता के कारण होने वाले रोगों में इसके इस्तेमाल से अच्छा फ़ायदा होता है 

ब्रेन की प्रॉब्लम, नींद नहीं आना, मेमोरी लोस, चक्कर आना, हिस्टीरिया, पागलपन, दीमाग की कमज़ोरी, सिजोफ्रेनिया, और मिर्गी जैसे रोगों में इसका इस्तेमाल करना चाहिए 

पारालाइसिस, जॉइंट पेन, टीबी, खाँसी, पेट की प्रॉब्लम, लीवर-स्प्लीन की प्रॉब्लम में इसका इस्तेमाल करना चाहिए 



रजत भस्म के इस्तेमाल से कई तरह के रोग दूर होते हैं, आईये डिटेल में एक नज़र इन पर डाल लेते हैं - 

इसके इस्तेमाल से न्यूरोलॉजिकल रोग दूर होते हैं जैसे- नया सर दर्द, माईग्रेन, ब्रेन सेंसर सही से काम नहीं करना, भूलने की प्रॉब्लम, अल्झाइमर, पार्किन्संस, वर्टिगो जैसे रोग 

साईंक्लोजिकल या मानसिक रोग जैसे - चिंता, तनाव, नींद नहीं आना, डिप्रेशन, चिडचिडापन, फ़ोबिया, सिजोफ्रेनिया, चिंता की वजह से भूख नहीं लगना, उदासी या ग़मगीन रहना, मेनिया, हिस्टीरिया, तनाव के कारन हिंसक हो जाना जैसे रोगों में इसका इस्तेमाल करना चाहिए 

रजत भस्म के इस्तेमाल से पेट के रोग दूर होते हैं जैसे- भूक की कमी, लीवर-स्प्लीन बढ़ जाना, फैटी लीवर, सिने की जलन, एसिडिटी, पेप्टिक अल्सर इत्यादि 

किडनी और ब्लैडर के रोग जैसे - किडनी का डिसफंक्शन, UTI, यह मूत्र संक्रमण के लिए एंटी बायोटिक की तरह काम करती है, पेशाब में क्रिस्टल, एल्ब्यूमिन, यूरिया आने में फ़ायदेमंद है 

स्वसन तंत्र या रेस्पिरेटरी सिस्टम के रोगों जैसे सुखी खांसी, टीबी और हरे पीले कफ़ निकलने में फायदेमंद है 

हार्ट के रोगों में हार्ट की कमजोरी, अथेरेस्क्लेरोसिस(Atherosclerosis) और हाई कोलेस्ट्रॉल में फ़ायदेमंद है 

स्किन  डिजीज में स्किन इन्फेक्शन और गैंगरिन जैसे रोगों में फ़ायदा होता है 

पुरुष रोगों में भी यह बहुत असरदार है, यौन शक्ति की कमी में इसका इस्तेमाल किया जाता है. वीर्य विकार, शुक्राणुओं की संख्या कम होना और नपुंसकता में भी फ़ायदा होता है 
महिला रोगों की बात करें तो महिलाओं के पीरियड और मेनोपॉज़ में लाभकारी है 



रजत भस्म का डोज़- 

60 mg से 125 mg तक दिन में 2 बार रोगानुसार अनुपान से या फिर रोगानुसार सहायक औषधियों के साथ लेना चाहिए 

रजत भस्म सुरक्षित दवा है किसी भी तरह कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है, कुल मिलाकर देखा  जाये तो यह एक अच्छी दवा है जो पूरी बॉडी के लिए फ़ायदेमंद है और कई रोंगों को दूर करती है, बस सही दवा के साथ मिलाकर लेना चाहिए. बैद्यनाथ, पतंजलि या डाबर जैसी कंपनियों का आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें-




Rohitkarishta Benefits & Review | रोहितकारिष्ट बढ़े स्प्लीन की आयुर्वेदिक दवा - Lakhaipurtv


बढ़े हुवे स्प्लीन या तिल्ली के लिए रोहितकारिष्ट एक जानी-मानी शास्त्रीय आयुर्वेदिक दवा है जिसे सदियों से प्रयोग किया जा रहा है

इसके इस्तेमाल से न सिर्फ़ बढ़ा हुवा स्प्लीन ठीक होता है बल्कि बढ़ा हुआ लीवर, जौंडिस, हेपेटाइटिस, कोलाइटिस, हार्ट की प्रॉब्लम ब्लड इन्फेक्शन, वायरल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन में भी फ़ायदा होता है

सबसे पहले जान लेते हैं रोहितकारिष्ट का कम्पोजीशन- 

रोहितकारिष्ट जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक रोहितक नाम के पेड़ की छाल होती है, इसमें रक्त रोहितक या लाल रंग के रोहितक के छाल का इस्तेमाल किया जाता है. रोहितक की छाल के काढ़े मे गुड़ मिलाकर संधान प्रक्रिया से रिष्ट बनाया जाता है और प्रक्षेप द्रव्य के रूप में धातकी, पिप्पली, पिपरामुल, चव्य, चित्रक, सोंठ, दालचीनी, इलायची, तेजपात और हर्रे, बहेड़ा, आँवला मिलाया जाता है. यह रिष्ट यानि  सिरप या लिक्विड के रूप में होता है 



रोहितकारिष्ट के फ़ायदे- 

जैसा की पहले बताया हूँ स्प्लीन Enlargement या बढ़े हुवे तिल्ली के लिए यह एक बेहतरीन दवा है, किसी भी कारण से बढ़े हुवे स्प्लीन और लीवर नार्मल कर इनके फंक्शन को सही करता है 

Digestion की प्रॉब्लम, भूख नहीं लगना, गैस, पेट फूलना, खून की कमी और कब्ज़ की प्रॉब्लम को दूर कर पेट साफ़ करने में मदद करता है 

पित्त स्राव को बढ़ाता है जिस से खाना सही से हज़म होता है, इसके अलावा, दिल की बीमारी, खून साफ़ करने, कोलाइटिस, कैंसर और बवासीर जैसे रोगों में भी फ़ायदेमंद है 

रोहितकारिष्ट का डोज़-

15 से 30 ML तक दिन में 2 बार आधा कप पानी मिलाकर भोजन के बाद लेना चाहिए, बच्चों को कम डोज़ में देना चाहिए, 100 % सुरक्षित आयुर्वेदिक दावा है किसी तरह का कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. 

बैद्यनाथ, डाबर, पतंजलि जैसी कई सारी आयुर्वेदिक कंपनियों का आयुर्वेदिक दवा दुकान में मिल जाता है, या फिर ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं.




30 March 2017

Divya Chitrakadi Vati Review | चित्रकादी वटी गैस और पेट की प्रॉब्लम की आयुर्वेदिक दवा


चित्रकादी वटी एक शास्त्रीय दवा है जिसके इस्तेमाल से Digestion की प्रॉब्लम, पेट की आँव, गैस, पेट का दर्द, भूख की कमी और कब्ज़ जैसी बीमारियाँ दूर होती हैं

चित्रकादी वटी के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें चित्रक, अजमोद, काली मिर्च, चव्य, हिंग, पिप्पली, पिपरामुल, सांभर नमक, समुद्र नमक, कला नमक, सेंधा नमक, सज्जी क्षार, सोंठ, विड नमक और जौ क्षार सभी को बराबर वज़न में लेकर चूर्ण बनाकर निम्बू के रस या अनार के रस में खरल कर मटर के बराबर की गोलियां बनाकर सुखाकर रखा जाता है

चित्रकादी वटी के फ़ायदे-

अगर चित्रकादी वटी के गुण की बात करें तो यह आमपाचक, एंटी Spasmodic और Digestive Stimulant है

चित्रकादी वटी के इस्तेमाल से भूख नहीं लगना, गैस, कब्ज़, पेट का भारीपन, पेट फूलना जैसी प्रॉब्लम दूर होती है

पेट की आँव या म्यूकस को दूर करती है और किसी भी कारन से म्यूकस बनने को रोकती है, पेचिस में भी फ़ायदेमंद है

मुँह का स्वाद ठीक नहीं लगना, ज़बान पर सफ़ेद कोटिंग होना, खाने की इच्छा नहीं होना जैसी प्रॉब्लम में इसका इस्तेमाल करना चाहिए

यह पेट में अम्ल स्राव और पित्त स्राव को बढ़ाकर पाचन ठीक करने में मदद करती है


चित्रकादी वटी की मात्रा और सेवन विधि- 

1 से 2 गोली दिन में 2-3 बार खाना खाने के बाद लेना चाहिए. इसे लोजेंस की मुँह में रखकर चूस भी सकते हैं

नोर्मल्ली या सेफ़ दवा है किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. पित्त बढ़ा हुवा, एसिडिटी या हाइपर एसिडिटी में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए

पतंजलि की दिव्य फ़ार्मेसी, बैद्यनाथ, डाबर जैसी कई सारी कंपनियां इसे बनाती है, आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर ऑनलाइन ख़रीदें, घर बैठे निचे दिए लिंक से -




हेमपुष्पा पीरियड्स की प्रॉब्लम की आयुर्वेदिक दवा | Hempushpa Benefit & Use Review by - Lakhaipurtv


हेमपुष्पा का नाम आपने सुना ही होगा, यह महिलाओं के इर्रेगुलर पीरियड, चिडचिडापन, कमर दर्द, हाथ-पैर की जलन और कमज़ोरी के लिए जानी मानी आयुर्वेदिक दवा है. यह गर्भाशय की प्रॉब्लम को दूर महिलाओं के पुरे स्वास्थ को ठीक करती है

हेमपुष्पा के कम्पोजीशन की बात करें तो इसे कई सारी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया गया है इसमें लोध्र, मंजीठ, अनंतमूल, बला, गोखुरू, शंखपुष्पी, मुसली, पुनर्नवा, अश्वगंधा, बच, धायफूल, दारुहल्दी, गंभारी, नागरमोथा और शतावरी का मिश्रण होता है

आईये अब जानते हैं हेमपुष्पा के फ़ायदे-

हेमपुष्पा महिलाओं के लिए एक बेहतरीन हर्बल टॉनिक है. यह पीरियड की हर तरह की प्रॉब्लम को दूर करती है और खून भी साफ़ करती है जिस से त्वचा में निखार भी आता है

इर्रेगुलर पीरियड्स, समय पर पीरियड नहीं होना, कम-ज्यादा पीरियड होना, पीरियड में दर्द होना जैसी हर तरह की पीरियड की प्रॉब्लम दूर होती है, पीरियड के दिनों में हाथ-पैर की जलन, पेडू कर दर्द, उल्टी इत्यादि में फ़ायदा होता है

हार्मोनल इमबैलेंस, सुजन, पेट का इन्फेक्शन और मेनोपॉज में फ़ायदेमंद है

Digestion को ठीक करती है भूख बढ़ाती है, नया खून बनाती है और खून की कमी को दूर करती है. थकान कमज़ोरी, किसी काम में मन नहीं लगना, चिडचिडापन इत्यादि दूर करती है


हेमपुष्पा का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका- 

7 ML दिन में दो बार सुबह और शाम खाना खाने के बाद लेना चाहिए

डॉक्टर की सलाह से पीरियड और प्रेगनेंसी में भी लिया जा सकता है, पूरी तरह से सुरक्षित आयुर्वेदिक दवा है. हेमपुष्पा के साथ में हेमटैब नाम की टेबलेट भी इस्तेमाल किया जा सकता है. पीरियड्स की प्रॉब्लम के लिए इसके साथ में योगराज गुग्गुल और रजः प्रवर्तिनी वटी भी यूज़ किया जा सकता है. इसे ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें. Buy from Amazon-




इसे भी जानिए - 









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29 March 2017

Khamira Gaozaban Ambari Jawaharwala Review | खमीरा गावज़बाँ अम्बरी जवाहरवाला दिमागी टॉनिक - Lakhaipurtv


आज मैं बता रहा हूँ दिमाग के लिए बहुत ही पोपुलर यूनानी दवा खमीरा गावज़बाँ अम्बरी जवाहरवाला के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में

यह दीमाग और दिल के लिए एक बेहतरीन टॉनिक है, दीमाग को ताक़त देती है और दीमाग को मज़बूत बनाती है

ख़मीरा गावज़बाँ अम्बरी जवाहरवाला के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें अम्बर, वर्क नुकरा, मरवारीद महलुल, याकूत महलुल, ज़हरमोहरा महलुल, आबेरेशम, बहमन सफ़ेद, गुले गावज़बान, किश्निज़ ख़ुश्क, सन्दल सफ़ेद, तुख्म बलंगो, तुख्म रेयहान, बर्ग गावज़बान और कंद सफ़ेद मिलाकर बनाया जाता है. यह ख़मीर या एक तरह का हलवा की तरह का होता है 

ख़मीरा गावज़बाँ अम्बरी जवाहरवाला के फ़ायदे- 



यह दीमाग और हार्ट के लिए बेहतरीन टॉनिक है, इसके इस्तेमाल से दीमाग मज़बूत होता है, यादाश्त या मेमोरी पॉवर बढ़ती है 

चिंता, तनाव, डिप्रेशन और मानसिक तनाव को दूर कर मानसिक शान्ति या दिमागी सुकून देता है 

नींद की कमी को दूर करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है, बहुत ज़्यादा दिमागी मेहनत करने वालों के लिए बेहतरीन दवा है  

इसके लगातार इस्तेमाल से हार्ट बीट नार्मल होती है और आँखों की रौशनी को भी तेज़ करता है, कुल मिलाकर देखा जाये तो यह न सिर्फ़ दीमाग के लिए बल्कि पुरे बॉडी के लिए अच्छी दवा है जो हेल्थ को इम्प्रूव करती है 



ख़मीरा गावज़बाँ अम्बरी जवाहरवाला का डोज़- 

5 से 10 ग्राम सुबह ख़ाली पेट या दिन में 2 बार भी लिया जा सकता है. पूरी तरह से सेफ दवा है किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है, ज्यादा डोज़ लेने पर ज़्यादा नींद आ सकती है 

हमदर्द जैसी कई सारी यूनानी कम्पनी इसे बनाती है, यूनानी मेडिकल से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं. ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें.



Punarnavarishta Review in Hindi | पुनर्नवारिष्ट के गुण और उपयोग - लखैपुर टीवी


पुनर्नवारिष्ट लीवर, किडनी और स्प्लीन के रोगों और शरीर के सुजन को कम करने की जानी-मानी औषधि है, इसके इस्तेमाल से लीवर स्प्लीन बढ़ जाना, जौंडिस, किडनी Failure, ह्रदय रोग, सुजन, खून की कमी, पेट के रोगों के अलावा भी कई दुसरे रोग दूर होते हैं

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक पुनर्नवा नाम की जड़ी होती है, जिसे गदहपूर्णा और गदहपोड़वा के नाम से भी जाना जाता है

पुनर्नवारिष्ट के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें सफ़ेद पुनर्नवा, लाल पुनर्नवा, बला, अतिबला, पाठा, वासा, गिलोय, चित्रक, कंटकारी का क्वाथ बनाकर पुराना गुड़ और शहद मिलाकर संधान प्रक्रिया से रिष्ट बनाया जाता है और प्रक्षेप द्रव्य के रूप में नागकेशर, दालचीनी, इलायची, कालीमिर्च, अम्बु और तेजपात मिलाया जाता है, यह रिष्ट या सिरप के रूप में होता है


आईये अब जानते हैं पुनर्नवारिष्ट के फ़ायदे- 

यह लीवर, किडनी, स्प्लीन की बीमारी और शरीर की सुजन को दूर करने की एक बेहतरीन दवा और टॉनिक है

हाथ-पैर की सुजन, चेहरे की सुजन या शरीर में कहीं भी सुजन हो तो इसका इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए

पुनर्नवारिष्ट के इस्तेमाल से बढ़ा हुवा लीवर, बढ़ा हुवा स्प्लीन, पीलिया, हेपेटाइटिस, लीवर सिरोसिस, खून की कमी, पेट दर्द, भूख नहीं लगना, पाचन की प्रॉब्लम जैसे रोग दूर होते हैं

अल्कोहलिक और नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर में इसे आरोग्यवर्धिनी वटी के साथ इस्तेमाल करने से फ़ायदा होता है

किडनी का सही काम नहीं करना, पेशाब की जलन, बार-बार पेशाब होना, पेशाब में अल्बूमिन, क्रिस्टल आना, खून में यूरिक एसिड बढ़ा होना और गठिया में इसका इस्तेमाल करना चाहिए

SGPT और SGOT में भी इसके इस्तेमाल से फायदा होता है, इसके साथ में आरोग्यवर्धिनी वटी लेना चाहिए

इसके अलावा जोड़ों का दर्द, हार्ट कंजेशन में भी दूसरी दवाओं के साथ इस्तेमाल करने से फ़ायदा मिलता है


पुनर्नवारिष्ट की मात्रा और सेवन विधि - 

15 से 30 ML तक आधा कप पानी मिलाकर दिन में 2 से 3 बार तक भोजन के बाद लेना चाहिए, बच्चों को कम मात्रा में 10 ML तक ही देना चाहिए

पूरी तरह से सुरक्षित दवा है लॉन्ग टाइम तक भी यूज़ किया जा सकता है, शुगर रोगी को इसकी जगह पर पुनर्नवादी मंडूर या पुनर्नवा कवाथ का इस्तेमाल करना चाहिए

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, बैद्यनाथ, डाबर, पतंजलि जैसी कई सारी कंपनियों का यह आयुर्वेदिक मेडिकल में मिल जाता है. घर बैठे ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें.



28 March 2017

Hamdard Jawarish Kamuni Review in Hindi | हमदर्द ज्वारिश कमुनी पेट के रोगों की यूनानी दवा


आज आप जानेंगे Digestion पॉवर बढ़ाने और पेट के रोगों को दूर करने की बेहद असरदार यूनानी दवा जवारिश कमुनि के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में

जवारिश कमुनि के इस्तेमाल से पेट के रोग जैसे गैस, कब्ज़, एसिडिटी, सीने की जलन और बदहज़मी जैसे हर तरह के रोग दूर होते हैं

आईये सबसे पहले एक नज़र डालते हैं इसके नुस्खे या कम्पोजीशन पर, इसमें दालचीनी, बुरा सुर्ख, फिल्फिल सफ़ेद, फिल्फिल स्याह, सूदब खुश्क, मुरब्बा सोंठ और जीरा किरमानी मुदब्बर मिलाया जाता है 

जवारिश कमुनि के फ़ायदे-

इसके इस्तेमाल से Digestive सिस्टम ठीक होता है, पेट और आँतों को ताक़त देता है,पेट की बीमारियाँ दूर होती हैं 



सीने की जलन, मितली जैसा लगना, उल्टी और गैस को दूर करता है, डायरिया में भी फ़ायदेमंद है 

जवारिश कमुनि कब्ज़ को दूर करती है और पेट साफ़ करने में मदद करती है 

पेट में गैस बनना, पेट का दर्द और पेट फूलने में भी फ़ायदेमंद है


जवारिश कमुनि का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका-

5 से 10 ग्राम तक दिन में 2 बार खाना खाने के बाद पानी से लेना चाहिए, पूरी तरह से सुरक्षित हर्बल यूनानी दवा है, किसी तरह का नुकसान नहीं होता है.यूनानी दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं. ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें.



Divya Medha Vati Benefits & Review | दिव्या मेधा वटी के फ़ायदे- Lakhaipurtv


जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है पतंजलि की दिव्य मेधा वटी आयुर्वेदिक दवा है जो आपके दिमाग के लिए बहुत ही असरदार है, सर दर्द, घबराहट, नींद नहीं आना, यादाश्त की कमजोरी, चिंता, मानसिक तनाव, माईग्रेन, डिप्रेशन, मिर्गी या इपिलेप्सी जैसे रोगों को दूर कर दीमाग को तेज़ बनाती है

दिव्य मेधा वटी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और भस्मों के मिश्रण से बनी एक बेहतरीन दवा  है, अगर इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें ब्राह्मी, शंखपुष्पी, बच, उस्तखुद्दुस, गावज़बाँ, मालकांगनी, जटामांसी, सौंफ़, अश्वगंधा, प्रवाल पिष्टी, जहरमोहरा पिष्टी, मोती पिष्टी के अलावा ब्राह्मी, ज्योतिष्मती, बच और शंखपुष्पी का सत्व भी होता है

दीमाग को ताक़त देनी वाली जानी-मानी जड़ी बूटियों के अलावा कीमती मोती पिष्टी इस दवा को बेहद असरदार बना देती है

दिव्य मेधा वटी के गुण की बात करें तो यह निद्राकारक यानि नींद लाने वाली, मेध्य यानि बुद्धि और यादाश्त बढ़ाने वाली, सुजन कम करने वाली, आवाज़ ठीक करने वाली और पाचन शक्ति ठीक कर भूख बढ़ाने वाले गुणों से भरपूर है

आईये अब जानते हैं मेधा वटी के फ़ायदे- 

यह यादाश्त को बढ़ाती है,दिमाग के लिए यह टॉनिक के सामान है,तनाव को दूर करने में भी सहायक है

अनिद्रा, सिर में होने वाला दर्द, माईग्रेन, मिर्गी आदि में भी बहुत ही लाभदायक है, बहुत ज़्यादा सपना आने में भी फायदेमंद है

जो लोग नींद आने के लिए अंग्रेज़ी दवा लेते हैं उनको मेधा वटी लेने से अंग्रेजी दवा लेने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी

अल्जाइमर और बार-बार भूलने के बीमारी में भी फ़ायदेमंद है, इसके इस्तेमाल से पाचन शक्ति ठीक होती है और भूख भी बढ़ती है

सर में चोट लग जाने और दीमाग के हर तरह के रोगों में इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है

पढाई करने वाले बच्चे भी मेमोरी पॉवर बढ़ने और दीमाग मज़बूत बनाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं

बच्चे, बड़े-बूढ़े सभी उम्र के लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं

दिव्य मेधा वटी का डोज़- 

बच्चों को 1 गोली और बड़े लोग 2 गोली दिन में 2 बार भोजन के बाद दूध या गुनगुने पानी से लेना चाहिए

पूरी तरह से सुरक्षित दवा है किसी तरह कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है,पतंजलि स्टोर से या फिर ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं, ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें




27 March 2017

Hamdard Dynamol Cream Review in Hindi | हमदर्द डायनामोल क्रीम लिंग का ढीलापन दूर करे


डायनामोल क्रीम पुरुषों की प्रॉब्लम की यूनानी दवा है इसके इस्तेमाल से मेल ऑर्गन का ढीलापन, कमज़ोरी, तनाव की कमी और इरेक्शन की प्रॉब्लम में फ़ायदा होता है

मास्टरबेसन या हस्तमैथुन से के कारन बेजान हुवे मेल ऑर्गन को शक्तिशाली बनाने के लिए यह एक असरदार दवा है

डायनामोल क्रीम असरदार जड़ी-बूटियों के मिश्रण बनायी गयी है, अगर इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें बीर बहूटी तेल, अकरकरा, जावित्री, जायफल, मालकांगनी, नागकेशर मुश्कदाना, मगज़ जमालगोटा, इस्पंद,कबाब-ए-खन्दन, तुख्म प्याज़, करनफ़ल, रोग़न ख़ुसिया-ए-बुज़, अम्बर, रोग़न बैज़ा-ए-मुर्ग और रोग़न कनेर के मिश्रण से बनाया गया है 

हमदर्द डायनामोल क्रीम के फ़ायदे- 

डायनामोल क्रीम के फ़ायदे की बात करें तो यह मेल ऑर्गन के हर तरह की कमज़ोरी को दूर कर स्ट्रोंग बनाने की एक अच्छी क्रीम है 

हस्तमैथुन या मुस्तजानी की वजह से बेजान हुवे मेल ऑर्गन को दुबारा नार्मल बनाने में मदद करती है 

मेल ऑर्गन के टिश्यू और मसल्स को ताक़त देती है और स्ट्रोंग बनाती है, ढीलापन, टेढ़ापन और नसों की कमज़ोरी दूर कर साइज़ को इम्प्रूव करने में मदद करती है 

यौनेक्षा की कमी, इरेक्शन की प्रॉब्लम और जल्द डिस्चार्ज होना या शीघ्रपतन में भी इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है 



डायनामोल क्रीम को इस्तेमाल करने का तरीका-

प्रयाप्त मात्रा में क्रीम लेकर तब तक मालिश करें जब की क्रीम सुख न जाये, अगले हिस्से को छोड़ कर मालिश करें. रोज़ एक से दो बार तक इसकी मालिश कर सकते हैं 

पूरी तरह से सुरक्षित क्रीम है, किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. इसका इस्तेमाल करते हुवे मास्टरबेसन नहीं करना चाहिए 

हमदर्द डायनामोल क्रीम यूनानी दवा दुकान से या फिर यहाँ निचे दिए गए लिंक से ऑनलाइन खरीद सकते हैं. यहाँ क्लिक करें 




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26 March 2017

पतंजलि तुलसी पंचाग जूस के फ़ायदे | Patanjali Tulsi Panchang Juice Benefits & Review - Lakhaipurtv


जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मेन इनग्रीडेंट तुलसी है. तुलसी का इम्पोर्टेंस आप जानते ही हैं, तुलसी जो है सर्दी-खांसी, कफ़, बुखार जैसे कई तरह के रोगों को दूर करने वाले गुणों से भरपूर होती है

पतंजलि तुलसी पंचांग सर्दी और कफ़ रोगों के अलावा बुखार, अस्थमा, फेफड़ों की समस्या, चिंता-तनाव और हार्ट के लिए असरदार है

तुलसी पंचांग के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें 99.7 % तुलसी का रस होता है, तुलसी के पुरे पौधे या पंचांग का रस होता है पंचांग का मतलब पांचो अंग जिसमे पत्ते, फुल, बीज, तना और जड़ सभी आ जाते हैं 

पतंजलि तुलसी पंचांग स्वरस के फ़ायदे - 

यह इम्युनिटी पॉवर बढ़ाने वाली और एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है तुलसी पंचांग में प्रोटीन, विटामिन E, नियासिन और Riboflavin पाए जाते हैं, इसके इस्तेमाल से आप वायरल इन्फेक्शन और मौसमी सर्दी-खाँसी और जुकाम से बच सकते हैं 

कफ़, कोल्ड या सर्दी जुकाम के लिए तुलसी एक जानी-मानी औषधि है, इसके लिए अक्सर लोग तुलसी के ताज़े पत्ते का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ तुलसी नहीं मिल पाती है उनके लिए तुलसी पंचांग जूस अच्छा आप्शन है 

फ्लू, बुखार, सोर थ्रोट या गले की ख़राश, मुँह का इन्फेक्शन, मुँह से बदबू आने में इसका इस्तेमाल करना चाहिए 

इसके इस्तेमाल से बदन दर्द, मसल्स का दर्द, सर दर्द, पेट दर्द जैसी प्रॉब्लम में भी आराम मिलता है 

यह कब्ज़ को दूर करती है और फेफड़ों को मजबूत बनाती है, अस्थमा के रोगियों के लिए फायदेमंद है 



तुलसी पंचांग जूस का डोज़-

5 से 10 ML तक दिन में 2-3 बार गुनगुना पानी मिलाकर भोजन के बाद लेना चाहिए 

इसे पतंजलि स्टोर से या फिर ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं, 500 ML के बोतल की क़ीमत 90 रुपया है. निचे दिए गए लिंक से ऑनलाइन खरीद सकते हैं-




हिमालया आयुर स्लिम, मोटापा दूर करने की आयुर्वेदिक दवा | Himalaya AyurSlim Review - Lakhaipurtv


जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है हिमालया हर्बल की यह दवा वज़न कम करने या मोटापा दूर कर स्लिम बनाने और लिपिड प्रोफाइल को ठीक करने में मदद करती है

हिमालया हर्बल अपने क्वालिटी प्रोडक्ट्स के लिए दुनियाभर में जानी जाती है और आयुर स्लिम कैप्सूल इसी का एक प्रोडक्ट है

आयुर स्लिम मार्केट में मिलने वाले दुसरे हर्बल प्रोडक्ट से थोड़ा अलग है अपने यूनिक कम्पोजीशन के कारन, इसका मुख्य घटक गार्सिनिया है

आयुर स्लिम कैप्सूल के कम्पोजीशन और घटक की बात करें तो इसमें गार्सिनिया, हरीतकी, मेथी, गुड़मार पत्ती और शुद्ध गुग्गुल का मिश्रण होता है

गार्सिनिया इंडोनेशिया का एक फल है जो मसालों के कटेगरी में आता है, इसे बॉडी फैट प्रोडक्शन कम करने वाला माना जाता है, शरीर में फैट बनने नहीं देता है और फैट स्टोर भी नहीं होने देता 

हरीतकी या हर्रे पेट साफ करने वाली और बॉडी की टोक्सिंस को बाहर निकालती है 

मेथी दाना के गुण तो आप सब जानते ही हैं, शुगर को कण्ट्रोल करती है, Digestion इम्प्रूव करती है 

गुड़मार शरीर में इन्सुलिन का प्रोडक्शन बढ़ाती है और शुगर कण्ट्रोल करती है जबकि गुगुल वज़न कम करने के लिए जानी-मानी औषधि है, सुजन, दर्द, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल को कम करना इसका मेन काम है 

सिर्फ़ 5 चीजों का यूनिक और बैलेंस कम्पोजीशन आयुर स्लिम कैप्सूल दूसरी दवाओं से अलग है 


आयुर स्लिम कैप्सूल के फ़ायदे- 

इसके इस्तेमाल से वज़न कम होता है और मोटापा दूर होता है 

कोलेस्ट्रॉल और लिपिड प्रोफाइल को कम करता है, शरीर में फैट स्टोर नहीं होने देता 
मीठी चीज़ खाने और ज़्यादा खाना खाने की इच्छा को कम करता है
हार्ट को हेल्दी रखता है और हार्ट की बीमारीओं से बचाता है 

कुल मिलाकर देखा जाये तो मोटापा दूर करने की यह एक अच्छी दवा है 


आयुर स्लिम कैप्सूल का डोज़-

1 से 2 कैप्सूल दिन में दो बार भोजन के बाद पानी से लेना चाहिए, या फिर डॉक्टर की सलाह के अनुसार 

कम से कम 40 दिनों के इस्तेमाल के बाद ही इसका असर दीखता है, 6 महिना या इस से ज़्यादा टाइम तक भी यूज़ किया जा सकता है

मोटापा दूर करने की शर्तिया औषधि 

सावधानी- प्रेगनेंसी, ब्रैस्टफीडिंग कराने वाली माताएं, किडनी-लीवर की प्रॉब्लम में इसका इस्तेमाल न करें, शुगर और हार्ट रोगी डॉक्टर की सलाह से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं 
हिमालया आयुर स्लिम कैप्सूल आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं, 60 कैप्सूल का पैक क़रीब 225 रुपया में मिलता है. ऑनलाइन निचे दिए गए लिंक से  ख़रीद सकते हैं

वज़न कम करने के लिए डाइट पर कण्ट्रोल के साथ-साथ एक्सरसाइज भी ज़रूर करना चाहिए तभी सही लाभ मिल सकता है


गोक्षुरादि गुग्गुल मूत्र रोगों की आयुर्वेदिक औषधि | Divya Gokshuradi Guggulu Benefits & Review - Lakhaipurtv


गोक्षुरादि गुग्गुल एक जानी-मानी दवा है जिसका इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है, इसके इस्तेमाल से किडनी का डिसफंक्शन, किडनी ब्लैडर की पत्थरी, पेशाब की प्रॉब्लम, UTI, सुजन और प्रोस्टेट जैसी प्रॉब्लम दूर होती है

गोक्षुरादि गुग्गुल के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें गोक्षुर, शुद्ध गुग्गुल के अलावा सोंठ, मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आँवला और मोथा का मिश्रण होता है, यह टेबलेट या गोली के रूप में बनायी जाती है

आईये अब जानते हैं गोक्षुरादि गुग्गुल के फ़ायदे-


गोक्षुरादि गुग्गुल के गुण की बात करें तो यह त्रिदोष नाशक,मूत्रल या डाई युरेटिक, एंटी इंफ्लेमेटरी और Analgesic दर्द कम करने वाले गुण भी पाए जाते हैं

इसका इस्तेमाल ख़ासकर पेशाब की प्रॉब्लम और पत्थरी के लिए किया जाता है

पेशाब कम होना, पेशाब में जलन होना, पेशाब को रोक नहीं पाना, पेशाब का इन्फेक्शन और प्रोस्टेट बढ़ जाने में इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है

किडनी और ब्लैडर की पत्थरी या स्टोन में इसका इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए, यह पत्थरी के दर्द को कम करने में मदद करती है और पत्थरी घुल-घुलकर निकल जाती है. पत्थरी के लिए इसके साथ में हिमालया सीसटोन या हजरुल यहूद पिष्टी का भी इस्तेमाल करना चाहिए

 यह किडनी के फंक्शन को ठीक करती है. प्रजनन अंग, मूत्राशय और मूत्रमार्ग या Urethra को हेल्दी बनाती है

यह पित्त को कम करती है, पाचन शक्ति सुधारकर भूख भी बढ़ाती है और कब्ज़ दूर करती है

गोक्षुरादि गुग्गुल के इस्तेमाल से गठिया, ओस्टियोआर्थराइटिस, यूरिक एसिड, ब्लड प्रेशर, हार्ट के रोग, महिला रोग, वीर्य विकार, शीघ्रपतन, वातरक्त, कोलेस्ट्रॉल में भी फ़ायदा होता है


गोक्षुरादि गुग्गुल का डोज़-

2 गोली दिन में 2 से तीन बार तक पानी के साथ लेना चाहिए

पूरी तरह से सुरक्षित आयुर्वेदिक दवा है, इसके इस्तेमाल से पेशाब बढ़ता है, पेशाब में यूरिया, क्रियेटनिन, प्रोटीन आने या दुसरे मूत्र रोगों में इसके साथ में चंद्रप्रभा वटी लेना चाहिए

इसे लॉन्ग टाइम तक यूज़ कर सकते हैं, ओस्टियोआर्थराइटिस जैसी प्रॉब्लम में इसे एक साल तक भी लेने से भी किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है

हर उम्र के लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, सिर्फ़ प्रेगनेंसी में इसे नहीं लेना चाहिए
बैद्यनाथ, डाबर, पतंजलि जैसी कई सारी आयुर्वेदिक कंपनियां इसे बनाती हैं, आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं, निचे दिए लिंक से -

बेस्ट क्वालिटी का गोक्षुरादि गुग्गुल ऑनलाइन ख़रीदें हमारे स्टोर lakhaipur.in से - गोक्षुरादि गुग्गुल 100 ग्राम 





25 March 2017

सफ़ेद पानी या ल्यूकोरिया की होम्योपैथिक दवा | Homeopathic Medicine for Leucorrhoea


कई लोगों ने जानना चाहा था ल्यूकोरिया की होम्योपैथिक दवा के बारे में, इसलिए मैं बता रहा हूँ महिलाओं की बीमारी धात गिरना, ल्यूकोरिया या सफ़ेद पानी की होम्योपैथिक मेडिसिन बायो कॉम्बिनेशन 13 के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में

यह एक होमियो बायोकेमीक दवा है जो बायोकेमीक साल्ट के मिश्रण से बनी होती है, पूरी तरह से सुरक्षित दवा है जो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के हर तरह के ल्यूकोरिया को जड़ से ठीक कर देने की क्षमता रखती है

बायो कॉम्बिनेशन 13 के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें चार तरह के बायोकेमीक साल्ट होते हैं - Kali Phos, Natrum Mur, Kali sulf और Calcaria Phos 

इसकी सफ़ेद रंग की, छोटी-छोटी टेबलेट होती है जो स्वाद में मीठी होती है 

बायो कॉम्बिनेशन 13 के फ़ायदे की बात करें तो यह हर तरह ल्यूकोरिया या वैजीनल डिस्चार्ज के लिए फ़ायदेमंद दवा है 


नया पुराना कैसा भी ल्यूकोरिया हो इस से ठीक हो जाता है, कम उम्र वाली महिला से लेकर जयादा उम्र वाली महिला सभी के लिए असरदार है 



बायो कॉम्बिनेशन 13 का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका- 

4 टेबलेट हर 3 घंटे पर, या दिन में चार बार गुनगुने पानी से 

लॉन्ग टाइम तक यूज़ करने पर ही सही फ़ायदा मिलता है, प्रेगनेंसी में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है 

हमारे देश की नामी होमियो कंपनी SBL के 25 ग्राम के पैक की क़ीमत 75 रुपया है, जर्मन मेड किसी कंपनी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं 




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24 March 2017

Dabur Lipistat for Cholesterol | डाबर लिपिस्तात कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल करे, हार्ट स्वस्थ रखे


कोलेस्ट्रॉल आज के टाइम की एक बहुत ही कॉमन बीमारी हो गयी है, जिसके बढ़ जाने से हार्ट की प्रॉब्लम हो जाना आम बात  है

कोलेस्ट्रॉल को कम करने की जो भी अंग्रेज़ी दवा होती है उनका कुछ न कुछ साइड इफ़ेक्ट होता है, एक तरफ़ फ़ायदा तो दूसरी तरफ़ नुकसान

जबकि डाबर लिपिस्तात आयुर्वेदिक दवा है जो पूरी तरह सुरक्षित है, इसके इस्तेमाल से किसी भी तरह का कोई नुकसान या साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है

लिपिस्तात नार्मल LDL और HDL लेवल और ट्राईग्लिसराइड मैंटेन करने में मदद करता है, हार्ट को हेल्दी रखता है, ब्लड फ़्लो को बढ़ाता है और दिल को मज़बूत बनाता है

डाबर लिपिस्तात का कम्पोजीशन बड़ा ही सिंपल पर इफेक्टिव है, इसमें अर्जुन, गुग्गुल और पुष्करमूल का मिश्रण होता है जो कि कैप्सूल के रूप में होता है 

अर्जुन या अर्जुना हार्ट के रोगों के लिए एक जानी-मानी औषधि है, पुष्करमूल भी ह्रदय रोगों में इस्तेमाल की जाती है जबकि गुग्गुल न सिर्फ़ हार्ट बल्कि पुरे शरीर को निरोगी बनाने और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली महान औषधि है 



आईये अब जानते हैं डाबर लिपिस्तात के फ़ायदे- 

जैसा की शुरू में ही मैंने बताया यह कोलेस्ट्रॉल को नार्मल करने की एक बेहतरीन दवा है, इसके इस्तेमाल से LDL, HDL, लिपिड लेवल और ट्राईग्लिसराइड नार्मल रेंज में रहता है 
डाबर लिपिस्तात हार्ट के मसल्स को ताक़त देता है, हार्ट को मज़बूत बनाता है और हार्ट बीट को नार्मल रखता है 


इसके इस्तेमाल से ब्लड फ्लो नार्मल रहता है और हार्ट को प्रोटेक्ट करता है, यह एक बेहतरीन कार्डियो प्रोटेक्टिव मेडिसिन है 

एनजाइना, ब्लॉकेज, दिल का दर्द, आर्टरीस्क्लेरोसिस जैसी हार्ट की हर तरह की बीमारीओं को दूर करने में मदद करता है 

कुल मिलाकर देखा जाये तो यह एक उम्दा दवा है कोलेस्ट्रॉल और हार्ट के रोगों के लिए



डाबर लिपिस्तात का डोज़-

1 कैप्सूल दिन में दो बार भोजन के बाद लेना चाहिए 

100 परसेंट सेफ मेडिसिन है, किसी भी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है, लॉन्ग टाइम तक इस्तेमाल कर सकते हैं, इसे आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर निचे दिए गए लिंक से ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं-





23 March 2017

राजवैद्य रसायन वटी, शीघ्रपतन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए | Rajvaidya Rasayan Vati Review - Lakhaipurtv


रसायन वटी एक पोपुलर आयुर्वेदिक दवा है जो पुरुष रोगों के लिए यूज़ की जाती है, इसके इस्तेमाल से शीघ्रपतन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन और इरेक्शन की प्रॉब्लम दूर होती है

इसके अलावा शारीरिक कमज़ोरी, थकान, चिंता, डीप्रेषण, नींद की कमी और नर्वसनेस जैसी प्रॉब्लम में भी फ़ायदा होता है

राजवैद्य रसायन वटी के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें कई सारी जड़ी-बूटी और भस्मों का मिश्रण होता है 

इसमें लौह भस्म, यशद भस्म, मुक्त पिष्टी, जायफल, बंग भस्म, असगंध, दालचीनी, जावित्री, गोक्षुर, कौंच बीज, शुद्ध शिलाजीत, सोंठ, मिर्च, पीपल, आँवला, पिप्पली, केसर, मंजीठ, अनन्तमूल, ब्राह्मी, धाय का फूल, मुसली, शतावर, लता कस्तूरी और स्वर्णवंग का मिश्रण होता है, यह टेबलेट या गोली के रूप में होती है 



रसायन वटी के फ़ायदे- 

यह पुरुषों की यौन कमजोरी के लिए एक बेहतरीन दवा और टॉनिक है, इसके इस्तेमाल से ऑलमोस्ट हर तरह की सेक्सुअल प्रॉब्लम दूर होती है, मानसिक तनाव और स्ट्रेस को दूर कर कॉन्फिडेंस बढ़ाती है  

मेल ऑर्गन के मसल्स को ताक़त देती है, नसों की कमज़ोरी दूर कर पावरफुल इरेक्शन में मदद करती है 

रसायन वटी, बाजीकारक और स्तम्भन गुणों से भरपूर है, जल्द डिस्चार्ज नहीं होने देती लॉन्ग लास्टिंग इरेक्शन में मदद करती है 

प्रजनन अंगों और यूरिनरी सिस्टम पर अच्छा प्रभाव दिखाती है, मूत्रल या Diuretic है, पेशाब साफ़ लाती है, किडनी और ब्लैडर को इन्फेक्शन फ्री रखती है 

रसायन वटी का कम्पोजीशन ऐसा है जिस से वीर्य की गुणवत्ता में सुधार होता है, स्पर्म क्वालिटी और क्वांटिटी को बढ़ाती है 

शारीर की सामान्य कमज़ोरी को दूर करती है, नर्वस सिस्टम को ताक़त देती है
नींद की कमी, भूख नहीं लगना, खून की कमी, कमज़ोर पाचन शक्ति और समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण को दूर करती है 

कुल मिलाकर देखा जाये तो यह 40 प्लस लोगों के लिए बेहतरीन दवा है 



रसायन वटी का डोज़- 

2 गोली सुबह नाश्ते के बाद और रात के खाने के बाद दूध के साथ लेना चाहिए, पानी के साथ भी लिया जा सकता है. इसे भोजन के बाद ही लें, ख़ाली पेट नहीं लेना चाहिए 

रसायन वटी आयुर्वेदिक मेडिकल से या फिर  घर बैठे निचे दिए गए लिंक से ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं-

  




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22 March 2017

Hamdard Tila Azam Review | हमदर्द तिला आज़म कमज़ोर,ढीले लिंग को मोटा और फ़ौलादी बनाने का तेल


तिला आज़म एक यूनानी तेल है जिसे खासकर मर्दों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, इसके इस्तेमाल से लिंग या नफ्स की कमज़ोरी, ढीलापन, नसों की कमजोरी, तनाव की कमी जैसी हर तरह की लिंग की प्रॉब्लम दूर होती है

हमदर्द तिला आज़म को खुरासानी अजवाइन, बुरादा कुचला मुद्दबर खास, बीर बहूटी, बीज स्याह, पोस्ट कनेर सफ़ेद, प्याज़ नरगिसी, जावित्री, जायफल, जुन्द बेदस्तर, खरातीन मुसफ्फा, सुहागा चोकिया, शिंगरफ रूमी, अकरकरा, फ़रफियुन, क़रन्फल, लहसुन, मालकांगनी, मगज़ जमालगोटा, हींग, रोग़न मालकांगनी, मोम ज़र्द, काफूर भीमसैनी, रोग़न भिलावा और रोग़न लौंग के मिश्रण से बनाया जाता है

तिला आज़म के फ़ायदे की बात करें तो यह मेल ऑर्गन के हर तरह की कमज़ोरी को दूर करने के लिए असरदार तेल है

टेढ़ापन, ढीलापन, नसों की कमजोरी, हार्डनेस की कमी, इरेक्शन प्रॉब्लम, शीघ्रपतन जैसी कोई भी प्रॉब्लम हो तो इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है


तिला आज़म को यूज़ करने का तरीका-

सोने से पहले प्रयाप्त मात्रा में तेल लेकर लिंग की मालिश करें और उसके बाद पान का पत्ता लपेट कर सो जाना है

इसके इस्तेमाल के बाद ठंडा पानी का यूज़ नहीं करें, साफ़ करने के लिए टिश्यु पेपर या गुनगुने पानी का इस्तेमाल का सकते हैं


सावधानी- इस तेल के इस्तेमाल से कुछ लोगों को दाने या फफोले जैसे भी हो सकते हैं, ऐसा होने पर इसे यूज़ करना बंद करें और नारियल तेल का इस्तेमाल करें, ठीक होने के बाद दुबारा यूज़ करना चाहिए. तिला आज़म यूनानी दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें.

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Patanjali Lauki Amla Juice Review | पतंजलि लौकी आँवला जूस के फ़ायदे- Lakhaipurtv


लौकी आँवला जूस के वही फ़ायदे हैं जो लौकी और आँवला के होते हैं, लौकी एक सब्ज़ी होने के साथ असरदार औषधि भी है जबकि आँवला तो अपने गुणों के कारण दुनियाभर में जाना जाता है

पतंजलि लौकी आँवला जूस के इस्तेमाल से कब्ज़, कमज़ोरी, खून की कमी, ओलिगुरिया, भूख कम लगना और वीर्य दोष जैसे कई सारे रोग दूर होते हैं

पतंजलि लौकी आँवला जूस के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें आँवला का जूस 50 परसेंट, लौकी का जूस 49.5 % होता है, 0.5 परसेंट में पुदीना और तुलसी का एक्सट्रेक्ट और कुछ प्रीज़रवेटिव मिले होते हैं, ताकि जूस ख़राब न हो 

लौकी आँवला जूस के फ़ायदे- 

एंटी एजिंग और एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है, इसके इस्तेमाल से इम्युनिटी पॉवर बढ़ती है 

पेट के रोगों के लिए बहुत ही असरदार है, कब्ज़, भूख की कमी, एसिडिटी, Digestion की प्रॉब्लम को दूर करता है 

खून की कमी या एनीमिया को दूर करता है, हाथ-पैर काम्पने और शारीरिक कमज़ोरी में फ़ायदा होता है 



लौकी आँवला जूस कई तरह की बीमारियों से बचाता है जैसे- डायबिटीज, अल्सर, जौंडिस, अस्थमा और फेफड़ों के रोग 

आँवला मिला होने से विटामिन C से भरपूर होता है, बालों का गिरना रोकता है और हेयर ग्रोथ में मदद करता है 

धातु दोष, वीर्य विकार, वीर्य का पतलापन और स्वप्नदोष या नाईटफॉल में इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है 

पेशाब साफ़ नहीं होना या पेशाब कम होने की प्रॉब्लम में भी इसका इस्तेमाल करना चाहिए

इसके अलावा हार्ट डिजीज, स्किन प्रॉब्लम, गले की ख़राश, आँखों की रौशनी, हड्डियों की कमज़ोरी, मोटापा, लीवर की सुजन, नींद नहीं आना जैसी प्रॉब्लम में फ़ायदा करता है 

आईये अब जानते हैं पतंजलि लौकी आँवला जूस का डोज़-

15 से 25 ML तक एक कप गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में दो बार खाना खाने के बाद लेना चाहिए

पतंजलि स्टोर से या फिर ऑनलाइन खरीद सकते हैं, एक लीटर की क़ीमत 90 रुपया है, इसके जगह पर फ्रेश लौकी आँवला जूस घर पर बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. घर बैठे ऑनलाइन खरीदें, निचे दिए लिंक से -




21 March 2017

Sanjivani Vati Benefits & Review | पतंजलि दिव्य संजीवनी वटी के फ़ायदे


संजीवनी वटी एक ऐसी दवा है जिसके इस्तेमाल से फ्लू, सर्दी, खाँसी, जुकाम, बुखार, टाइफाइड, पेट दर्द, पेट के कीड़े के अलावा भी कई दुसरे रोगों में इस्तेमाल की जाती है

संजीवनी वटी से मिलता जुलता नाम आपने सुना होगा 'संजीवनी बूटी' का, तो यहाँ मैं बता देना चाहूँगा कि इस दवा में किसी तरह की संजीवनी बूटी नहीं होती है. संजीवनी वटी के कई सारे काम हैं, रोगों को दूर कर जीवन देती है, इसे साँप काटने पर भी इस्तेमाल किया जाता है इसीलिए इसका नाम संजीवनी वटी रखा गया है

संजीवनी वटी के कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें गिलोय, सोंठ, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आँवला, बच, शुद्ध भिलावा और शुद्ध बछनाग के मिश्रण में गौमूत्र की भावना देकर खरलकर बनाया जाता है 

संजीवनी वटी के फ़ायदे- 

त्रिदोष पर इसका प्रभाव होता है, यह वात और पित्त को बैलेंस करती है 

फ्लू, सर्दी-खांसी और जुकाम में इसके इस्तेमाल से फायदा होता है 

नयी पुरानी बुखार, टाइफाइड में इसका इस्तेमाल किया जाता है 

पाचन शक्ति की प्रॉब्लम, गैस, पेट दर्द को दूर करती है, पेट के कीड़े या वर्म्स को भी दूर करने के गुण इसमें पाए जाते हैं 

साँप काटने या स्नेक बाईट और किसी दुसरे ज़हरीले जानवर के काटने पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है 



संजीवनी वटी का डोज़ - 

1 से 2 गोली तक अदरक का रस या गर्म पानी से लेना चाहिए. अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर इसे अलग अलग अनुपान के साथ कई तरह की बीमारियों में इस्तेमाल करते हैं

संजीवनी वटी को डॉक्टर की सलाह के बिना यूज़ नहीं करना चाहिए, खुद से दवा लेना या ज़्यादा डोज़ लेने पर गंभीर नुकसान भी हो सकते हैं

पतंजलि, बैद्यनाथ और डाबर की यह हर जगह मिल जाती है, इसे ऑनलाइन भी ख़रीदा जा सकता है. ऑनलाइन ख़रीदने के लिए यहाँ क्लिक करें  




Qurs Kushta Faulad Review in Hindi | क़ुर्स कुश्ता फ़ौलाद 💪 के फ़ायदे और इस्तेमाल


जैसा कि इसके नाम से पता चलता है यह फ़ौलाद यानि लौह भस्म से बनी हुयी दवा है जो खासकर खून की कमी, अनेमिया, हाथ-पैर की झुनझुनी, लीवर डिसफंक्शन, भूख की कमी, पेट की कमजोरी, ताक़त की कमी जैसे रोगों में इस्तेमाल की जाती है

क़ुर्स कुश्ता फ़ौलाद के कम्पोजीशन की अगर बात करें इसके हर टेबलेट में 30 mg कुश्ता फ़ौलाद और 100 mg स्टार्च होता है, इसकी हर टेबलेट 130 mg की होती है 

क़ुर्स कुश्ता फ़ौलाद का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका-

1 से 2 गोली तक रोज़ एक बार दूध के साथ या 5 ग्राम ज्वारिश जालिनुस के साथ 



क़ुर्स कुश्ता फ़ौलाद के फ़ायदे - 

खून की कमी दूर करने के लिए यह एक अच्छी दवा है, इसके इस्तेमाल से RBC का लेवल बढ़ता है, अनेमिया दूर होता है, नया और हेल्दी खून बनने में मदद करती है 

लीवर के फंक्शन को ठीक करती है और भूख बढ़ाती है, जिनको लीवर के डिसफंक्शन से भूख नहीं लगती हो उनके लिए फ़ायदेमंद है 

इसके इस्तेमाल से नया खून बनता है, ब्लड फ्लो को बढ़ाती है जिस से सेक्सुअल वीकनेस में भी फ़ायदा होता है 

शरीर में खून की कमी को दूर को चेहरे पर रौनक लाती है, कुल मिलाकर देखा जाये तो खून की कमी को दूर कर हेल्थ इम्प्रूव करने की अच्छी दवा है 

हमदर्द या दूसरी यूनानी कंपनियों की यह दवा यूनानी दवा दुकान में मिल जाती है, या फिर इसे ऑनलाइन भी ख़रीदा जा सकता है



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20 March 2017

विषतिन्दुक वटी साइटिका दूर करे, नर्वस सिस्टम को शक्ति दे | Vishtinduk Vati Review in Hindi - Lakhaipurtv


विषतिन्दुक वटी एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक दवा है जो साइटिका के दर्द को दूर करने में बेहद असरदार है, यह बिल्कुल इंजेक्शन की तरह काम करती है

इसके अलावा यह नर्वस सिस्टम की प्रॉब्लम के लिए बेहतरीन दवा है, कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, पेट का दर्द, दस्त-डायरिया में इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है

इसे विषतिन्दुक वटी, विषतुन्दक वटी, विषमुष्टयादी वटी जैसे कई नामों से जाना जाता है

विषतुन्दक वटी के घटक या कम्पोजीशन की बात करें तो इसका मुख्य घटक शुद्ध कुचला है जिसे कुपिलू भी कहते हैं. अंग्रेज़ी में इसे Nux Vomica कहा जाता है, यूनानी और होमियोपैथी में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. 

इसकी निर्माण विधि कुछ इस प्रकार है-

शुद्ध कुचला एरण्ड तेल में भुना हुआ और काली मिर्च दोनों बराबर वज़न में लेकर बारीक़ कपड़छन चूर्ण बनाकर इन्द्रायण के फल के रस में 12 घंटे तक खरल कर 1-1 रत्ती की गोलियां बनायीं जाती हैं 



विषतुन्दक वटी का डोज़ - 

1 से 2 गोली तक दिन में 2 से 3 बार तक दूध के साथ लेना चाहिए 

अब आईये जानते हैं विषतुन्दक वटी के फ़ायदे- 

जैसा कि पहले ही बता चूका हूँ की साइटिका का दर्द दूर करने के लिए यह बेहद असरदार दवा है, साइटिका के दर्द में इसका इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए 

कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, मसल्स का दर्द, न्यूरोटिक पेन और इन्फेक्शन में भी इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है 

यह नर्व को ताक़त देती है, ब्लड और ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ाकर नर्व को सही ढंग से काम करने में मदद करती है 

पेट का दर्द चाहे किसी भी कारण से हो, इसके इस्तेमाल से तुरन्त लाभ मिलता है, अपच, पत्थरी, हर्निया, लीवर कंजेशन और पीरियड के दर्द में भी इस से राहत मिलती है पर ध्यान रहे पेट दर्द के सही कारण का निवारण ही सही ईलाज होता है 

इसके अलावा विषतुन्दक वटी के इस्तेमाल से सामान्य यौन कमजोरी, Digestion की प्रॉब्लम, लीवर की प्रॉब्लम, जौंडिस, हेपेटाइटिस, खून की कमी, स्प्लीन का बढ़ जाना, डायरिया और ड्राप्सी जैसे रोगों में भी फ़ायदा होता है 



विषतुन्दक वटी का इस्तेमाल करते हुवे कुछ सावधानी भी चाहिए होती है जैसे- 

जिनका हार्ट कमज़ोर हो या हार्ट की कोई प्रॉब्लम हो इसका इस्तेमाल न करें 

पित्त प्रकृति वाले लोग इसे कम मात्रा में उपयोग करें, इसके साथ गिलोय सत्व, गिलोय का रस या अमृतारिष्ट लेना चाहिए 

नार्मल आदमी को इसे दूध के साथ लेना चाहिए, अगर प्यास लगे तो शहद मिलाकर लेना चाहिए 

और सबसे इम्पोर्टेन्ट बात यह है कि इसे लगातार एक से दो हफ्ता तक ही इस्तेमाल करें, फिर भी ज़रूरत हो तो कुछ दिन गैप के बाद यूज़ करना चाहिए 

पतंजलि का दिव्य विषतिन्दुक वटी, डाबर, बैद्यनाथ और झंडू जैसी कई सारी आयुर्वेदिक कंपनियों की यह दवा आयुर्वेदिक मेडिकल में मिल जाती है, या फिर ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं. ऑनलाइन खरीदें इस लिंक से - यहाँ क्लिक करें