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13 March 2020

Amalki Rasayan Benefits in Hindi | आमलकी रसायन के बेजोड़ फ़ायदे


यह एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जो लिवर, पाचन तंत्र, दिल, दिमाग, स्किन, आँख और बालों की बीमारियों के लिए बेहद असरदार है. तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं - 

आमलकी रसायन जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक आंवला होता है, आयुर्वेद में आमला को आमलकी भी कहा जाता है. आयुर्वेद में आवंला में आयुर्वेद की बहुत प्रशंसा है, इसके बेजोड़ गुणों के कारन ही इसे रसायन औषधि माना जाता है. 

आयुर्वेदिक ग्रन्थ 'रसतंत्र सार व सिद्ध प्रयोग संग्रह' का यह योग है जिसे तीन-चार तरीक़े से  बनाया जाता है. परन्तु सभी की समानता यह है कि सभी का मुख्य घटक आँवला ही है. दुसरे तरीक़ों में आँवला के अलावा पिप्पली, घी और मिश्री जैसे घटक होते हैं, यहाँ पर मैं सबसे ज़्यादा पॉपुलर और इफेक्टिव विधि के बारे में ही बताने वाला हूँ. 

आमलकी रसायन के घटक और निर्माण विधि 

आँवला चूर्ण और आँवला का रस 

गुठली निकालकर आँवला का बारीक चूर्ण बना लें और फिर इसमें आँवले के रस की भावना देकर पत्थर के खरल में घुटाई करें. इसी तरह से 21 भावना देकर छाया में सुखाकर अच्छी तरह से खरलकर रख लेना चाहिए. यही असली और पॉपुलर आमलकी रसायन है. 

आमलकी रसायन के गुण या प्रॉपर्टीज 

विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होने के साथ-साथ इसमें कई तरह के गुण पाए जाते हैं जैसे - एंटी ऑक्सीडेंट, एन्टी एजिंग, Antacid या अम्ल पित्त नाशक, पाचक, लिवर-स्प्लीन को प्रोटेक्ट करने वाली और रसायन जैसे गुणों से भरपूर है. 

यह सौम्य और शीतल या तासीर में ठण्डी औषधि है जो बीमारीओं को दूर कर स्वास्थ की रक्षा करती है. 

आमलकी रसायन के फ़ायदे 

यह दिल, दिमाग, पेट, लिवर-स्प्लीन, आंख, स्किन से लेकर बालों के लिए भी असरदार औषधि है. 

पित्त दोष, शरीर की गर्मी, सीने की जलन, एसिडिटी, हाइपर एसिडिटी, पेप्टिक अल्सर इत्यादि को करती है. अक्सर वैद्यगण दुसरे योगों के साथ इसका सेवन कराते हैं. 

आँखों की बीमारी, बालों का गिरना, समय से पहले सफ़ेद होना, खून की कमी, हीमोग्लोबिन कम होना इत्यादि में भी इसके सेवन से अच्छा लाभ होता है. 

विधि पूर्वक इसका सेवन करने से चुस्ती-फुर्ती आती है और यौवन बना रहता है. 

आमलकी रसायन की मात्रा और सेवन विधि 

एक से तीन ग्राम तक सुबह-शाम गाय का घी, शहद या गर्म पानी से या फिर डॉक्टर की सलाह के अनुसार उचित अनुपान से लेना चाहिए. 

विधि पूर्वक  बने हुए आमलकी रसायन के 50 ग्राम की क़ीमत है सिर्फ़ 155 रुपया जिसका लिंक निचे दिया गया है. 

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29 February 2020

Basant Tilak Ras | बसन्त तिलक रस के फ़ायदे


यह भैषज्य रत्नावली का एक स्वर्णयुक्त योग है जिसे कई तरह के रोगों में  प्रयोग  करने का प्रावधान है परन्तु यह ज़्यादा प्रचलित योग नहीं है, तो आईये इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं - 

बसन्त तिलक रस के घटक या कम्पोजीशन - 

आयुर्वेदिक ग्रन्थ भैषज्य रत्नावली के अनुसार इसके घटक कुछ इस प्रकार से हैं - लौह भस्म, बंग भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, स्वर्ण भस्म,रजत भस्म, अभ्रक भस्म, मोती पिष्टी और प्रवाल पिष्टी प्रत्येक 10-10 ग्राम.

जायफल, जावित्री, दालचीनी, छोटी इलायची के दाने, तेजपात और नागकेशर प्रत्येक 10-10 ग्राम का बारीक कपड़छन चूर्ण 

बसन्त तिलक रस निर्माण विधि - 

इसकी निर्माण विधि बड़ा ही सरल है. सभी भस्मो और दूसरी औषधि के कपड़छन चूर्ण को अच्छी तरह से मिक्स कर त्रिफला के क्वाथ में तीन घन्टे तक घोंटकर एक-एक रत्ती या 125mg की गोलियाँ बनाकर छाया में सुखाकर रख लिया जाता है.

बसन्त तिलक रस के गुण 

इसके गुणों की बात करें तो यह त्रिदोष नाशक, उदर-वात शामक, बाजीकरण, बल-वीर्य वर्द्धक, ह्रदय को बल देना, प्रमेह नाशक और रसायन गुणों से भरपूर होता है. 

बसन्त तिलक रस के फ़ायदे 

प्रमेह, बहुमूत्र, मधुमेह इत्यादि में इसके सेवन से लाभ होता है. 

वात व्याधि, सन्निपात, अपस्मार, उन्माद या पागलपन और हैजा जैसा रोगों की उत्तम औषधि है. 

वीर्य विकार, शुक्रदोष और मूत्र रोगों में इसका अच्छा प्रभाव मिलता है. 
यह दिल और दिमाग को ताक़त देता है और टेंशन दूर कर अच्छी नींद लाने में मदद करता है. 

बसन्त तिलक रस की मात्रा और सेवन विधि 

एक से दो गोली तक सुबह-शाम शहद, गिलोय के रस या शतावर के रस के साथ. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की देख रेख में भी लेना चाहिए. 

बैद्यनाथ के 10 टेबलेट की क़ीमत क़रीब 400 रुपया है, जो आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर से मिल सकता है. 





23 February 2020

Anti Snoring Drops | एन्टी स्नोरिंग ड्रॉप्स - खर्राटा बन्द करने की दवा


वैद्य जी की डायरी में आज मैं स्नोरिंग या खर्राटे की समस्या का समाधान लेकर आया हूँ. जी हाँ दोस्तों, खर्राटा लेने वाला आदमी तो गहरी नीन्द में सोया रहता है परन्तु उसके पास सोने वाले आदमी की नीन्द हराम हो जाती है. खर्राटा या स्नोरिंग की समस्या आजकल कुछ ज़्यादा ही है. अगर पति-पत्नी में से किसी को खर्राटे की समस्या हो तो फिर बहुत ज़्यादा प्रॉब्लम हो जाती है. इस प्रॉब्लम को दूर करने के लिए बहुत ही असरदार और चीप एंड बेस्ट दवा एंटी स्नोरिंग ड्रॉप्स है, तो आईये इसके बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं - 

आप मानें या न मानें आयुर्वेद में हर बीमारी का ईलाज है, बस ज़रूरत है तो ग्रन्थों का गहन अध्यन करने और रिसर्च करने की. मैंने इसके लिए बहुत अध्यन किया पर कोई आसान सा और सटीक उपाय नहीं मिल रहा था. लास्ट टाइम जब मैं इंडिया गया था तो आयुर्वेद के अपने गुरु से इस समस्या के बारे में चर्चा किया था और अपना आईडिया बताया था. तब जाकर यह योग Finalize हुआ, हालाँकि यह भी कोई आसान योग नहीं पर यूज़ करने के लिए इजी  है. 

इसका नाम मैं रखा हूँ - एन्टी स्नोरिंग ड्रॉप्स 

सोने से पहले नाक के दोनों छिद्रों में दो- तीन ड्रॉप्स तक डालना होता है. कुछ ही दिनों में आवाज़ कम होने लगती है और समस्या से मुक्ति मिलती है. एक पैक की प्राइस है सिर्फ़ 600 रुपया, जो ऑनलाइन अवेलेबल है lakhaipur.in पर जिसका लिंक निचे दिया जा रहा है, सिमित मात्रा में अभी उपलब्ध है. 



एंटी स्नोरिंग ड्रॉप्स के घटक और निर्माण विधि -

यह पूरी तरह से आयुर्वेदिक और आर्गेनिक दवा जो 100% सुरक्षित है. आम आदमी के लिए इसे बनाना सम्भव नहीं है. इसके लिए औषधि निर्माण में दक्ष चिकित्सक बन्धु मुझसे संपर्क कर सकते हैं. 

मुझे खर्राटा नहीं आता है, अगर मेरे पास सोने वाला कोई आदमी खर्राटा लेने लगे तो मेरी नींद उड़ जाती है. मैं इसका बड़ा भुक्तहोगी हूँ, आपके पास सोने वाला कोई खर्राटा ले तो कितनी परेशानी होती है, मैं बेहतर समझ सकता हूँ. 

तो मेरे भाईयों और बहनों, अगर आपकी भी नींद किसी के खर्राटे से ख़राब होती है तो एंटी स्नोरिंग ड्रॉप्स का प्रयोग कराईये और चैन की नीन्द सोयिये. 

कई लोगों पर इसका टेस्ट करा चूका हूँ, बड़ा ही उत्साहजनक परिणाम मिला है. दस में से साथ-आठ लोगों को इसी से लाभ हो जाता है. एंटी स्नोरिंग ड्रॉप्स से जिनको कोई फ़र्क नहीं पड़ता है उनको खाने वाली औषधि सेवन करनी होती है, जो कि वैद्य जी की डायरी के एक दुसरे पोस्ट में बताया हूँ. 





14 February 2020

Amir Ras Benefits in Hindi | अमीर रस एक बेजोड़ औषधि


आज की जानकारी है शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि अमीर रस के बारे में. आप जो सोच रहे वैसा अमीर-ग़रीब वाला अमीर नहीं बल्कि इस दवा का नाम ही कुछ ऐसा है सबसे अलग. आयुर्वेदानुसार यह सुज़ाक और आतशक की  बेजोड़ औषधि है, तो आईये इसके बारे में थोड़ा-बहुत जानते हैं - 

अमीर रस जैसा कि इसके नाम में ही रस जुड़ा हुआ है, यह एक रसायन औषधि है जो बहुत तेज़ी से असर करती है. 

रस कपूर, दार चिकना, सिंगरफ, चाँदी, सफ़ेद संखिया और सेंधा नमक जैसी चीज़ें इसका मुख्य घटक हैं. इसके निर्माण विधि पर चर्चा न कर आईये इसके गुणों की बात करते हैं. 

अमीर रस के गुण या प्रॉपर्टीज - 

आयुर्वेदानुसार यह कीटाणु नाशक, तीव्र रक्तशोधक यानि तेज़ी से खून साफ़ करने वाला, बिल्कुल किसी अंग्रेज़ी इंजेक्शन की तरह, वात और कफ़ नाशक है. 

अमीर रस के फ़ायदे 

सुज़ाक और आतशक यानि Gonorrohea और Syphillis या गर्मी की बीमारी की यह बेजोड़ दवा है. ग्रन्थों में इसे इन बीमारियों की 'रामबाण' औषधि कहा गया है. 
सुज़ाक और सिफलिस की वजह से होने वाले जोड़ों के दर्द, गठिया और वात रोगों में भी इस से अच्छा लाभ होता है. यह रक्त वाहिनी और वात वाहिनी नाड़ियों के विक्षोभ को दूर कर अर्धांग वात और सन्धिगत वात को दूर कर देता है. 

अमीर रस की मात्रा और सेवन विधि - 

125 mg से 250 mg तक सुबह-शाम सिर्फ़ दस दिनों तक. पुराने रोगों में इसे इक्कीस दिन तक सेवन करने का प्रावधान है रोगी के बलाबल अनुसार. 

इसे मुनक्का के अन्दर निगलकर खाने का नियम है ताकि दांत में टच न हो. पर बेस्ट यह है कि इसे कैप्सूल में भरकर यूज़ किया जाये. दांत में टच होने से दाँत ख़राब हो जाते हैं. 

मुझे एक घटना याद आती है- मेरे एरिया के एक नौसिखिये वैद्य जी ने रोगी को इसे मुनक्के में तो दिया था पर रोगी ने इसे निगलने की बजे चबा दिया था और इसकी वजह से उसके दाँतों की कंडीशन ख़राब हो गयी थी. बहरहाल, इसे विधि पूर्वक ही सेवन करना चाहिए, और वैद्य की जी देख रेख में यूज़ करना चाहिए. 

विडियो देखने वाले सभी दर्शकों से अनुरोध है कि इस औषधि को कभी भी अपने मन से यूज़ न करें, नहीं तो सीरियस नुकसान भी हो सकता है. 




04 February 2020

Corona Virus Ayurvedic Treatment | कोरोना वायरस का आयुर्वेदिक उपचार


कोरोना वायरस के बारे में आपने न्यूज़ में सुना ही होगा, चीन से शुरू होने वाली यह  बीमारी दुनिया के कई मुल्कों तक फैल चुकी है. हमारे देश भारत में इसके कुछ मामले सामने आये हैं और यहाँ दुबई में भी इसकी एंट्री हो चुकी है. हजारों लोग इस से संक्रमित हो चुके हैं और सैंकड़ों लोगों की मौत भी हो चुकी है. विश्व स्वास्थ संगठन इसे वैश्विक संकट घोषित कर चूका है. एलोपैथ वालों का कहना है कि इस बीमारी का अब तक कोई इलाज नहीं है. आयुर्वेद इसके बारे में क्या कहता है? क्या आयुर्वेद में इसकी कोई दवा है? आईये यही सब के बारे में विस्तार से जानते हैं - 

चूँकि यह नए टाइप का वायरस है जो पहले कभी नहीं पाया गया, इसलिए वैज्ञानिक इसका इसका इलाज ढूंढने में दिन-रात लगे हैं. 

सबसे पहले समाज लीजिये इसके लक्षण -

इसका संक्रमण होने पर जुकाम, सर दर्द, खांसी, गले में खराश, बुखार, छिंक आना, थकान, न्युमोनिया, फेफड़े में सुजन, साँस लेने में तकलीफ़ जैसे लक्षण पाए जाते हैं. 

इस तरह की बीमारी के लिए आयुर्वेद क्या कहता है? 

हर साल कुछ न कुछ नयी बीमारी आती है और आने वाले समय में भी इस तरह का नया वायरस आयेगा इसमें कोई शक नहीं. पर आयुर्वेद में आज से हजारों साल पहले इस तरह की बीमारी का ईलाज बताया गया है. इसके लिए आयुर्वेद के मुख्य सिद्धांत को ध्यान में रखना होगा. 

इस तरह कि बीमारी का नाम आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में भले ही न मिले, पर इस तरह के संक्रमण का उपचार बताया ज़रूर गया है. 

तो सवाल यह उठता है कि इस तरह के संक्रमण और लक्षण में कौन सी दवा का प्रयोग किया जाये? 

तो जवाब बड़ा ही सिंपल है- लक्षण के अनुसार औषधि का सेवन कराना चाहिए 
आयुर्वेदिक औषधि की बात की जाये तो मेरे दिमाग में दो दवा का नाम आता है - त्रैलोक्य चिन्तामणि रस और त्रिभुवनकीर्ति रस 

दोनों में से एक-एक रत्ती शहद के साथ सेवन कर यष्टि मधु और वासा क्वाथ दिया जाये तो कोरोना वायरस के लक्षणों का शमन हो सकता है. 

कैसे?

त्रैलोक्य चिन्तामणि रस स्वर्ण युक्त बहुमूल्य औषधि है. इसके घटकों पर आप नज़र डालेंगे तो पाएंगे कि यह कीटाणु, वायरस नाशक, फेफड़ों और ह्रदय को बल देने वाला, और वात शामक जैसे अनेको गुणों से भरपूर है. स्वर्ण भस्म एक बेजोड़ एन्टी वायरल और एंटी बायोटिक है.

इसी तरह से त्रिभुवनकीर्ति रस बुखार, फ्लू और सांस की तकलीफ़ जैसे लक्षणों को दूर करने में बेजोड़ है. 

 तो ये है मेरी राय कोरोना वायरस के लक्षणों में प्रयोग करने लायक आयुर्वेदिक औषधि के बारे में. इसके बारे में आपके क्या विचार है, कमेन्ट कर ज़रूर बताएं. 

कोरोना वायरस के संक्रमण से कैसे बचें?

जैसा की सभी जानते हैं Prevention is better than Cure तो इसके संक्रमण से बचने के लिए 

अगर घर से बाहर कहीं पब्लिक एरिया में जाते हैं तो मास्क लगायें, बिना ज़रूरत के बाहर निकलने से बचें, हाथों की अच्छी तरह से साबुन और पानी से सफाई करें. 
छींकते समय नाक और मुँह ढकें. सर्दी जुकाम से पीड़ित लोगों के पास जाने से बचें. मेड इन चाइना वाले किसी भी सामान को न तो छुएँ और न ही घर लायें. 

आजकल यह बात तेज़ी से फैल रही है कि Chinese सामान को छूने से भी इसका इन्फेक्शन हो सकता है. हालाँकि अब तक इसका कोई पुख्ता सुबूत नहीं है पर संभव हो सकता है. 

तो यह सब उपाय हैं इस से बचने के, पर सबसे बड़ी बात आपको बता दूँ कि सारा उपाय एक तरफ़ और आपकी  रोग प्रतिरोधक क्षमता दूसरी तरफ़ है. अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं, कोई भी वायरस अटैक नहीं करेगा. इसके लिए तुलसी का पत्ता, गिलोय का रस और आँवला जैसी चीजों का सेवन किजिए. 



26 January 2020

Purushatva Vardhak Set | पुरुषत्व वर्द्धक सेट- मर्दानगी बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधि


पुरुषत्व वर्द्धक यानी मर्दानगी बढ़ाने वाली दवा. इस सेट या किट में तीन तरह की दवा है टेबलेट- स्वर्ण मदन पिल्स, सिरप- पौरुष सुधा और तिला इन्द्रोज 

स्वर्ण मदन पिल्स - सुनहरी टेबलेट है जिसके मुख्य घटक हैं  विदारीकन्द, त्रिफला, कौंच बीज, अर्जुन, शिलाजीत, शुद्ध गुग्गुल, स्वर्ण बंग, लौह भस्म और प्रवाल भस्म 
इसे दो-दो टेबलेट सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद दूध से लेना होता है.

सीरप पौरुष सुधा - इसके मुख्य घटक हैं सफ़ेद मुस्ली, अश्वगंधा, शतावर, बिदारी कन्द, मुनक्का इत्यादि. इसे पांच ML प्रतिदिन दो बार भोजन के बाद लेना है.

तिला इन्द्रोज - यह मालिश का तेल है, इसे तीन-चार बून्द लेकर सोने से पहले इन्द्री पर हल्की मालिश करनी होती है. 

यह पूरा सेट पुरे 20 दिन का है, एक महीने में 20 दिन ही इसका इस्तेमाल करना होता है. 10 दिन के गैप के बाद फिर से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, अगर प्रॉब्लम ज़्यादा हो तो. 

नयी प्रॉब्लम में 20 दिनों में ही फ़ायदा दिखता है, समस्या पुरानी हो तो इसका तीन-चार सेट प्रयोग कर लेना चाहिए. 

पुरुषत्व वर्द्धक या पी. वी. सेट के फ़ायदे- 

यह एक रसायन और बाजीकरण योग है जो वीर्य दोष दूरकर भरपूर मात्रा में निर्दोष और गाढ़े वीर्य का निर्माण करता है. जनरल Weakness, शारीरिक कमज़ोरी, शीघ्रपतन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, लैंगिक दुर्बलता, नसों की कमज़ोरी, ढीलापन, स्वप्नदोष, वीर्य विकार, नामर्दी इत्यादि को दूर कर नयी ऊर्जा और शक्ति का संचार करता है. 

इसमें दी गयी दवाईओं के प्रयोग से रोगी शीघ्र रोगमुक्त होकर स्वस्थ, पुष्ट और रोगमुक्त होकर रति क्रिया का भरपूर आनन्द उठाता है. 

विशुद्ध आयुर्वेदिक औषधि है, इसके सेवन से किसी भी तरह कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. 21 साल से कम उम्र के लोगों का इसका प्रयोग नहीं करना है. 

20 दिन के पुरे एक सेट की कीमत है सिर्फ़ 700 रुपया जिस ऑनलाइन खरीदने का लिंक दिया गया है- Buy Online 


कामशक्ति वर्द्धक सेट स्वर्ण, हीरक और मोती युक्त शीघ्रपतन की औषधि 





09 January 2020

Sangjarahat Bhasma | संगजराहत भस्म, गुण उपयोग, निर्माण और प्रयोग विधि


यह एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जो रक्तपित्त, बॉडी में कहीं से भी ब्लीडिंग होना, ल्यूकोरिया, धात रोग, सुजाक और पायरिया जैसे अनेकों रोगों में प्रयोग की जाती है, तो आईये जानते हैं संगजराहत भस्म क्या है? इसके गुण, उपयोग और निर्माण विधि के बारे में विस्तर से -

संगजराहत भस्म क्या है?

संग का मतलब होता है पत्थर यह एक तरह का खनिज होता है. यह सफ़ेद रंग का चिकना और बड़ा ही मुलायम पत्थर होता है. इसे घीया पाठा भी कहा जाता है. यूनानी में इसे संगजराहत ही कहते हैं जबकि संस्कृत में इसे दुग्ध पाषाण के नाम से जाना जाता है. दुग्ध का मतलब दूध और पाषाण का मतलब पत्थर, दूध की तरह सफ़ेद रंग का होने से इसे संस्कृत में दुग्ध पाषाण कहा गया है.

अंग्रेज़ी में इसे Talc और Soft Stone नाम से जाना जाता है. दन्त मंजन और Talcum Powder में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.

संगजराहत भस्म निर्माण विधि - 

सबसे पहले इसके टुकड़ों को आग में गर्म कर गावज़बाँ के काढ़े में बुझाना चाहिए इसके बाद मिट्टी का एक बर्तन लेकर उसमे पहले घृतकुमारी का गूदा डाला जाता है उसके बाद संगजराहत और फिर ऊपर से घृतकुमारी का गूदा डालकर बर्तन का मूंह बंदकर सम्पुट की अग्नि दी जाती है. ठण्डा होने पर बारीक पीसकर रख लिया जाता है. कुछ वैद्य लोग इसे डायरेक्ट घृतकुमारी के गूदे के साथ भस्म बनाते हैं तो कुछ लोग घृत कुमारी की जगह नीम के पत्तों के साथ इसकी भस्म बनाते हैं. एक आलसी वैद्य जी को बिना भस्म बनाये इसका इस्तेमाल करते हुवे देखा, जो कि बिल्कुल ग़लत है. ऐसे ही लोग आयुर्वेद को बदनाम करते हैं. एक्सटर्नल यूज़ के लिए चलेगा पर इंटरनल यूज़ के लिए विधि पूर्वक भस्म बनाना बहुत ज़रूरी है.

संगजराहत भस्म के गुण या Properties 

इसके गुणों की बात करें तो आयुर्वेद और यूनानी मतानुसार यह तासीर में ठण्डी और पित्तशामक है. यह खून बहना रोकने में बेहद असरदार है. यह रक्त पित्त, ख़ूनी दस्त, ख़ूनी उल्टी, श्वेत प्रदर, रक्तप्रदर, स्वप्नदोष, सुजाक और पायरिया जैसी दांत की बीमारियों में भी असरदार है.

संगजराहत भस्म की मात्रा और सेवन विधि – 500mg से एक ग्राम तक सुबह-शाम शहद, मक्खन, मलाई या रोगानुसार अनुपान से.

आईये अब जानते हैं रोगानुसार संगजराहत भस्म के प्रयोग -

रक्त पित्त(कहीं से भी ब्लीडिंग होने)में - संगजराहत भस्म 5 ग्राम + कामदुधा रस मोती युक्त 1 ग्राम + वल्लभ रसायन 2.5 ग्राम. सभी को मिलाकर 10 ख़ुराक बना लेना है. एक-एक मात्रा सुबह-शाम दूब घास के रस के साथ देना चाहिए. साथ में उशिरासव भी पीना चाहिय.

स्वप्नदोष(स्वप्न प्रमेह, नाईटफॉल) में- संगजराहत भस्म 10 ग्राम + प्रवाल पिष्टी 5 ग्राम + स्फटिक भस्म 5 ग्राम + आमलकी रसायन 20 ग्राम. सभी को मिलाकर 40 डोज़ बना लें. एक-एक डोज़ सुबह-शाम गिलोय के रस से देना चाहिए.

पूयमेह(सुज़ाक) में - संगजराहत भस्म 500mg शहद से सुबह-शाम देना चाहिए और ऊपर से चन्दनासव पीना चाहिए.

दन्तरोग(मसूड़ों से खून आना, दांत हिलना) में - संगजराहत भस्म में स्फटिक भस्म और माजूफल का चूर्ण मिक्स कर मंजन करना चाहिए. हमारे स्टोर पर मिलने वाला दन्त रक्षक पाउडर में संगजराहत मुख्य घटक है और यह दन्त मंजन दाँतों की समस्या के लिए बेजोड़ है. यह सारी जानकारी मेरी पुस्तक 'आधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा' में भी दी गयी है.

कट छिल जाने या किसी तरह की इंजुरी होने पर- किसी धारदार चीज़ से कट छिल जाने पर संगजराहत भस्म को पाउडर की तरह डालकर पट्टी कर देने से न सिर्फ़ ब्लीडिंग बन्द हो जाती है बल्कि इन्फेक्शन होने का भी ख़तरा नहीं रहता है. तो इस तरह से संगजराहत भस्म हर घर में रखने लायक घरेलु औषधि भी है.

संगजराहत भस्म मार्केट बहुत मुश्किल से मिलता है, पर यह अवेलेबल है ऑनलाइन जिसका लिंक  दिया गया है. 50 ग्राम की क़ीमत सिर्फ़ 60 रुपया है.


06 January 2020

Sanda Oil | सांडा तेल - जानिए इसकी सच्चाई


सांडा आयल या सांडे के तेल बारे में लगभग सभी जानते हैं, इसे लोग मर्दाना कमज़ोरी में यूज़ करते हैं. सांडे का तेल है क्या? क्या सच में इसकी मालिश से पुरुषों के यौन अंग की कमज़ोरी दूर होती है? इसके बारे में आयुर्वेद क्या कहता है? क्या इसका प्रयोग करना चाहिए? आईये सबकुछ डिटेल में जानते हैं इसके बारे में- 

सबसे पहले जानते हैं कि सांडा है क्या चीज़?

सांडा एक तरह का रेगिस्तानी छिपकली है जो भारत और पाकिस्तान के रेगिस्तानी इलाक़ो, जंगलों और कई दुसरे देशों में भी पाया जाता है. इसी की वसा या  चर्बी का तेल निकाल कर लोग बेचते हैं. 

फुटपाथ पर बाज़ारों में मजमा लगाकर इसका तेल बेचने वाले लोग अक्सर दिख जायेंगे. कई जगह पर साप्ताहिक बाज़ारों में भी यह लोग दिख जाते हैं. झारखण्ड में तो मैंने अक्सर आदिवासियों को इसे बेचते हुए देखा है. कम पढ़े लिखे और अनपढ़ लोग सुनी-सुनाई बातों में आकर इसे यूज़ करते है और कई लोगों को तो इस से नुकसान भी हो जाता है. 

इसे बेचने वाले कुछ लोग तो असली तेल देने के लिए इसे आपके सामने की चिर-फाड़ कर चर्बी को पिघलाकर तेल बनाकर देते हैं. 

इसे बेचने वाले लोग कभी एक जगह नहीं टिकते और बड़े धूर्त होते हैं, बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. इसकी मालिश से ये हो जायेगा वो जायेगा. 

तो क्या सांडे का तेल असरदार होता है? 

जैसा कि दावा किया जाता है एफ्रोडेसियाक या यौनेक्षा बढ़ाता है, सांडे का तेल इरेक्टाइल डिसफंक्शन और लिंग की कमज़ोरी को दूर कर देता है, यह बिल्कुल ग़लत है. इसके तेल में किसी जानवर में पाई जाने वाली चर्बी के गुण ही हैं. 
आधुनिक डॉक्टर भी इसे नहीं मानते जबकि आयुर्वेद में भी इसका कोई प्रयोग  नहीं बताया गया है. 

आपने देखा होगा इसका तेल बेचने वाले लोग जिन्दा सांडा को रखे रहते हैं जो भागता नहीं है, क्यूंकि इसके कमर के हड्डी को तोड़ दिया जाता है. जब कमर की हड्डी ही टूट गयी हो तो बेचारा मासूम प्राणी हिल भी कैसे सकता है? 

इसी मिथक और अन्धविश्वास के चलते यह बेजुबान जानवर अपनी जान गँवा रहा है और लगभग विलुप्त होने की कगार पर है. 

मिथक और सच्चाई - 

सांडा के बारे में बात बहुत पुराने समय से चली आ रही है कि इस प्राणी में अद्भुत शक्ति पाई जाती है जिसकी वजह से यह रेगिस्तान के तपाने वाली गर्मी में भी ज़िन्दा रहता है, इसलिए इसके तेल को लोग पावरफुल मानते हैं. यह सब बिल्कुल झूठ है, इसमें कोई सच्चाई नहीं, मॉडर्न रिसर्च से भी यह साबित हो चूका है कि इसके तेल में ऐसा कोई गुण नहीं. 

मर्दाना कमज़ोरी के लिए अगर मालिश ही करनी है तो आयुर्वेद में इसके लिए कई तरह के तेल हैं, इनका इस्तेमाल कीजिये. M-Oil और तरंग मसाज आयल का प्रयोग कीजिये और फ़ायदा उठाइए बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के. यह ऑनलाइन अवेलेबल है जिसका लिंक  दिया गया है.