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20 November 2018

Kukkutandtwak Bhasma | कुक्कुटाण्डत्वक भस्म | Kushta Baiza Murgh


आज एक ऐसी चीज़ और ऐसी दवा के बारे में बताने वाला हूँ जिसे अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं पर इसी से बनी यह दवा बेहद असरदार होती है.

जी हाँ दोस्तों, इसका नाम है आयुर्वेद में कुक्कुटाण्डत्वक भस्म जबकि यूनानी में इसे कुश्ता बैज़ा मुर्ग़ के नाम से जाना जाता है जो कि अन्डे के छिल्के से बनायी जाती है. तो आईये इसके बारे में पूरी डिटेल जानते हैं - 

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म- इसका पूरा नाम चार शब्दों के मिश्रण से बना है 
कुक्कुट = मुर्गी, अण्ड = अंडा, त्वक = छिल्का, भस्म = भस्म या राख 

मतलब हुवा मुर्गी के अण्डों के छिल्को से बनी भस्म. देसी मुर्गी जिसे आर्गेनिक आहार खिलाया गया हो उसी के अण्डों के छिल्को से बनी भस्म असरदार होती है. फार्म या पोल्ट्री वाले अण्डों की नहीं. 

तो इसे बनाने के लिए देसी मुर्गी के अंडे के छिल्के चाहिए, ध्यान रहे अन्डे के कवर के अन्दर भी एक पतली झिल्ली होती है उसे हटाकर ऊपर वाला हार्ड कवर ही लिया जाता है. 

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म निर्माण विधि -

बताये गए अण्डों के छिलके 100 ग्राम लेकर मोटा-मोटा कूटकर मिट्टी के छोटे बर्तन में रखकर उसमे चान्गेरी का रस इतन डालें की छिल्का पूरा डूब जाये. अब बर्तन का ढक्कन बन्द कर कपड़मिट्टी कर 10 किलो उपलों के बीच में रखकर गजपुट में फूँक दें. पूरी तरह से ठण्डा होने पर निकालकर पीसकर रख लिया जाता. अगर एक बार में सफ़ेद मुलायम भस्म न बने तो दुबारा उसी तरह से चान्गेरी का रस डालकर पुट देना चाहिए. इसकी भस्म हल्की, सफ़ेद और मुलायम बनती है.

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म के गुण - 

यह कैल्शियम से भरपूर मूत्ररोग नाशक, बाजीकरण और रसायन गुणों से भरपूर होता है.

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म के फ़ायदे -

प्रमेह और मूत्र रोगों में यह बेहद असरदार है, महिला-पुरुष दोनों के लिए सामान रूप से लाभकारी है.

पुरुषों के रोग जैसे प्रमेह, स्वप्नदोष, वीर्य विकार और धातुस्राव जैसे रोगों में दूसरी दवाओं के साथ देने से बेजोड़ लाभ मिलता है. 

महिलाओं के पीरियड रिलेटेड रोग, ल्यूकोरिया, सोमरोग और डिलीवरी के बाद की कमज़ोरी में दूसरी दवाओं के साथ लेने से फ़ायदा होता है.

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म की मात्रा और सेवन विधि -

250mg से 375mg तक सुबह-शाम शहद से देना चाहिए. पुरुष रोगों में वंग भस्म, लौह भस्म और महिलाओं को दशमूल क्वाथ के साथ देना चाहिए. 

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म अपने तरह की एक बेजोड़ औषधि है जिसे आयुर्वेदिक चिकित्सक कई तरह के रोगों में दूसरी दवाओं के साथ प्रयोग करते हैं. इसे किन रोगों में किस तरह से प्रयोग करना चाहिए इसकी पूरी डिटेल आप मेरी आने वाली पुस्तक में पढ़ सकते हैं. इसे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से -




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14 November 2018

Gorakhmundi Arq | गोरखमुण्डी अर्क


यह एक ऐसी बूटी है जिसे आयुर्वेद के साथ-साथ यूनानी में भी इस्तेमाल किया जाता है. गोरखमुण्डी अर्क हर तरह के चर्मरोगों या  स्किन डिजीज में असरदार है. तो आईये जानते हैं गोरखमुण्डी अर्क बनाने का तरीका, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में पूरी डिटेल - 

गोरखमुण्डी को मुण्डी के नाम से भी जाना जाता है जो अभी के मौसम में खेतों में मिल जाएगी. हमारे क्षेत्र में तो यह धान की फसल कटने के बाद खेतों में खुद उग आती है. यह पानी वाली जगहों और नदी, तालाब आदि के किनारे भी पाई जाती है, इसका फोटो देखकर आप समझ सकते हैं. 


इसका अर्क बनाने के लिए इसके फुल या फिर पूरा पंचांग जड़ सहित उखाड़ लें. 500 ग्राम इसके पंचांग को साफकर मोटा-मोटा कूटकर 5 लीटर पानी में शाम को भीगा देना चाहिए और सुबह भबका यंत्र या अर्क निकालने वाली मशीन से क़रीब 2.5 लीटर तक अर्क निकाल लेना चाहिए. 

कई लोग प्रेशर कुकर से भी इसका अर्क निकालते हैं, मैंने भी ट्राई किया है अच्छा निकलता है. इसके लिए कुकर की सिटी वाली जगह से सिटी निकाल कर उसमे एक पतली ताम्बे या प्लास्टिक लगा लिया जाता है और इस पाइप को ठण्डे पानी भरे हुवे गमले से गुज़ारना होता है जिस से भाप ठण्डी हो जाती है और दुसरे बर्तन में अर्क जमा किया जाता है. गमले का पानी समय-समय पर बदलना पड़ता है, स्लो फ्लेम में ही इसे  बनाया जाता है. वैसे गोरखमुण्डी अर्क आयुर्वेदिक और यूनानी दवा दुकान में बना बनाया मिल जाता है.

गोरखमुण्डी अर्क के फ़ायदे - 

यह अर्क खाज-खुजली, फोड़े-फुन्सी से लेकर, चकत्ते पड़ना, एक्जिमा, सोरायसिस और कुष्ठव्याधि तक में असरदार है. 

इसके सेवन से चेहरे और स्किन के काले धब्बे दूर होते हैं और त्वचा में निखार आता है. 

यह रक्तदोष या खून की ख़राबी को दूर कर खून साफ़ कर देता है. इसके सेवन से सुज़ाक और फिरंग जैसे रोगों में भी फ़ायदा होता है. 

गोरखमुण्डी अर्क की मात्रा और सेवन विधि - 

25 से 50ML तक रोज़ तीन चार-बार तक लेना चाहिए. दूसरी रक्तशोधक दवाओं के साथ लेने से ही इस से अच्छा लाभ मिलता है. सिर्फ़ इसका अकेला सेवन करने से भी फ़ायदा मिल सकता है ठीक वैसे जैसे युद्ध में अकेला सैनिक. अर्क न बना सकें या न मिले तो इसका काढ़ा या चूर्ण भी सेवन कर सकते हैं. इसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 




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10 November 2018

Eladi Churna | एलादि चूर्ण के चमत्कारी लाभ


एलादि चूर्ण हर तरह की उल्टी, ज़्यादा प्यास लगना, मुँह सुखना और पित्तज विकारों की प्रसिद्ध औषधि है. तो आईये जानते हैं एलादि चूर्ण का कम्पोजीशन और फ़ायदे के बारे में विस्तार से- 

एलादि चूर्ण का कम्पोजीशन -

आयुर्वेद में इलायची को एला कहा जाता है जो कि दो तरह की होती है लघु एला और दिर्घ एला,  जिसे आम बोलचाल में छोटी इलायची और बड़ी इलायची के नाम से जाना जाता है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें- 

 छोटी इलायची, नागकेशर, दालचीनी, तेजपात, तालीसपत्र, बंशलोचन, मुनक्का बीज निकला हुवा, अनार दाना, धनिया, काला जीरा और सफ़ेद जीरा प्रत्येक दो-दो भाग, पीपल, पिपरामूल, चव्य, चित्रकमूल, सोंठ, कालीमिर्च, अजवायन, तिन्तिड़ीक, अम्लवेत, अजमोद, असगन्ध और कौंच बीज छिल्का निकले हुवे प्रत्येक एक-एक भाग और मिश्री सोलह भाग मिला होता है. 

इसे बनाने का तरीका यह होता है कि सभी जड़ी-बूटियों को बारीक कपड़छन चूर्ण कर पीसी हुयी मिश्री मिलाकर रख लिया जाता है. यह भारतभैषज्यरत्नाकर का योग है. 

एलादि चूर्ण के फ़ायदे - 

उल्टी, उबकाई आना और पित्तरोगों की यह असरदार दवा है. उल्टी किसी भी कारन से हो वातज, पित्तज या कफज इसके सेवन से लाभ होता है. 

पेट में छोभ और उत्तेजना होने से जब कुछ ही खाने-पिने से उल्टी हो जाये तो इसके सेवन से तेज़ी से फ़ायदा होता है.

पित्तदोष बढ़ने से अधीक प्यास लगना, गला सुखना और ज़्यादा गर्मी लगना जैसी प्रॉब्लम में इस से फ़ायदा होता है. 

एलादि चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि - 

तीन से छह ग्राम तक पीसी हुयी मिश्री और शहद में मिलाकर चाटना चाहिए रोज़ तीन-चार बार या आवश्यकतानुसार. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, किसी तरह का कोई नुकसान या साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. जब अंग्रेजी दवाओं से भी उल्टी न रूकती हो तो भी इस से लाभ हो जाता है. इसके 50 ग्राम के पैक की क़ीमत 85 रुपया के क़रीब है जिसे आप ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 






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07 November 2018

Kumarkalyan Ras | कुमारकल्याण रस के चमत्कारी लाभ


कुमारकल्याण रस बच्चों की बीमारीओं के लिए स्वर्णयुक्त बेजोड़ औषधि है. बच्चों की बीमारियों के लिए आयुर्वेद में इसका बड़ा महत्त्व है. यह बच्चों की हर तरह की बीमारी में तेज़ी से असर करती है. तो आईये जानते कुमारकल्याण रस के गुण और उपयोग के बारे में विस्तार से -

कुमारकल्याण रस का कम्पोजीशन - 

यह स्वर्णघटित रसायन औषधि है जिसमे स्वर्ण भस्म के अलावा मोती भस्म, रस सिन्दूर, अभ्रक भस्म, लौह भस्म और स्वर्णमाक्षिक भस्म मिला होता है. 

बनाने का तरीका यह होता है कि सभी भस्मों को बराबर वज़न में लेकर ग्वारपाठे के ताज़े रस में खरलकर मूंग के दाने के बराबर या 60mg की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. कई वैद्य रस सिन्दूर की जगह पर मकरध्वज मिलाकर बनाते हैं और यह ज़्यादा गुणकारी भी होता है. 

कुमारकल्याण रस के फ़ायदे- 

यह एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम मेडिसिन है जो हार्ट, फेफड़े, ब्रेन, लिवर, Digestive System, नर्वस सिस्टम और यूरिनरी सिस्टम सभी पर अच्छा असर करती है. 

यह बच्चों की खाँसी, अस्थमा, न्युमोनिया, उल्टी, दस्त, पेट की ख़राबी, सुखारोग, टी.बी. जैसी हर तरह की छोटी-बड़ी बीमारियों को दूर कर देता है.

इसके इस्तेमाल से लिवर, पेट के रोग, फेफड़ों के रोग जैसे खाँसी, न्युमोनिया, दिल, दिमाग और पेशाब के रोग दूर होते हैं. 

यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है जिस से बच्चे जल्दी बीमार नहीं होते और बच्चों को चेचक, टाइफाइड जैसी बीमारियों से भी बचाता है. 

कुल मिलाकर बस यह समझ लीजिये कि बच्चों के लिए आयुर्वेद की यह टॉप क्लास की मेडिसिन है. 

कुमारकल्याण रस की मात्रा और सेवन विधि -

 आधी से एक गोली तक शहद से सुबह-शाम चटाना चाहिए. या फिर रोगानुसार उचित अनुपन और दूसरी दवाओं के साथ देना चाहिए. चूँकि यह तेज़ी से असर करने वाली रसायन औषधि है इसलिए इसे डॉक्टर की सलाह से ही देना चाहिए. इसके 10 टेबलेट की क़ीमत करीब 1000 रुपया होती है जिसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते निचे दिए लिंक से - 




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04 November 2018

Panchaskar Churna | पंचसकार चूर्ण कब्ज़ की शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि


पंचसकार चूर्ण कब्ज़ की पॉपुलर आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो कब्ज़ को तो दूर करती ही है साथ-साथ भूख बढ़ाती है और पाचन शक्ति को ठीक करती है. तो आईये जानते हैं पंचसकार चूर्ण का कम्पोजीशन, गुण, उपयोग और निर्माण विधि के बारे में विस्तार से - 

पंचसकार चूर्ण का कम्पोजीशन -

इसे पांच तरह की चीजें मिलाकर बनाया जाता है जिसमे सनाय की  पत्ती इसका मेन इनग्रीडेंट होता है. इसे बनाने के लिए चाहिए होता है सनाय की पत्ती चार भाग, सोंठ, सौंफ़, सेंधा नमक एक-एक भाग और छोटी  हर्रे दो भाग. छोटी हर्रे को घी या एरण्ड तेल में भून लेना चाहिए.

बनाने का तरीका यह है कि सभी को कूट-पीसकर चूर्ण बना लिया जाता है. सनाय की पत्ती में इसके फुल, फल और डंठल मिले होते हैं जिसे एक-एक कर चुनकर निकाल लेना चाहिए नहीं तो इसकी वजह से पेट में मरोड़ होती है. कोई भी कमर्शियल कंपनी इसे सही से नहीं बनाती है क्यूंकि इसके फुल, फल और डंठल को हाथ से चुनकर अलग करना होता है. 

आयुर्वेदानुसार यह विरेचक और पाचक गुणों से भरपूर होता है. यह विबन्ध या बद्धकोष्ठनाशक है. 

पंचसकार चूर्ण के फ़ायदे- 

कब्ज़ को दूर करने के लिए ही इसका सबसे ज़्यादा प्रयोग किया जाता है. यह आँतों को गति देकर कब्ज़ को दूर करता है.

यह हाजमा ठीक करता है और भूख भी बढ़ाता है. अगर पेट में कीड़े भी हों तो उसमे भी इस से फ़ायदा होता है.

चर्मरोग या स्किन डिजीज की दवा लेने से पहले और दवा लेते हुवे भी पेट साफ़ करने के लिए इसका प्रयोग करते रहना चाहिए. 

पंचसकार चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि -

तीन से छह ग्राम तक रात में सोने से पहले गर्म पानी या गर्म दूध से लेना चाहिए. अगर प्रॉब्लम ज़्यादा हो तो सुबह-शाम भी लिया जा सकता है. सनाय पत्ती मिला होने से ज़्यादा लॉन्ग टाइम तक यूज़ नहीं करना चाहिए नहीं तो इसकी आदत पड़ सकती है ऐसा लोग कहते हैं, पर इस तरह की बात मेरे अनुभव में नहीं आयी है. इसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 




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