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23 February 2020

Anti Snoring Drops | एन्टी स्नोरिंग ड्रॉप्स - खर्राटा बन्द करने की दवा


वैद्य जी की डायरी में आज मैं स्नोरिंग या खर्राटे की समस्या का समाधान लेकर आया हूँ. जी हाँ दोस्तों, खर्राटा लेने वाला आदमी तो गहरी नीन्द में सोया रहता है परन्तु उसके पास सोने वाले आदमी की नीन्द हराम हो जाती है. खर्राटा या स्नोरिंग की समस्या आजकल कुछ ज़्यादा ही है. अगर पति-पत्नी में से किसी को खर्राटे की समस्या हो तो फिर बहुत ज़्यादा प्रॉब्लम हो जाती है. इस प्रॉब्लम को दूर करने के लिए बहुत ही असरदार और चीप एंड बेस्ट दवा एंटी स्नोरिंग ड्रॉप्स है, तो आईये इसके बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं - 

आप मानें या न मानें आयुर्वेद में हर बीमारी का ईलाज है, बस ज़रूरत है तो ग्रन्थों का गहन अध्यन करने और रिसर्च करने की. मैंने इसके लिए बहुत अध्यन किया पर कोई आसान सा और सटीक उपाय नहीं मिल रहा था. लास्ट टाइम जब मैं इंडिया गया था तो आयुर्वेद के अपने गुरु से इस समस्या के बारे में चर्चा किया था और अपना आईडिया बताया था. तब जाकर यह योग Finalize हुआ, हालाँकि यह भी कोई आसान योग नहीं पर यूज़ करने के लिए इजी  है. 

इसका नाम मैं रखा हूँ - एन्टी स्नोरिंग ड्रॉप्स 

सोने से पहले नाक के दोनों छिद्रों में दो- तीन ड्रॉप्स तक डालना होता है. कुछ ही दिनों में आवाज़ कम होने लगती है और समस्या से मुक्ति मिलती है. एक पैक की प्राइस है सिर्फ़ 600 रुपया, जो ऑनलाइन अवेलेबल है lakhaipur.in पर जिसका लिंक निचे दिया जा रहा है, सिमित मात्रा में अभी उपलब्ध है. 



एंटी स्नोरिंग ड्रॉप्स के घटक और निर्माण विधि -

यह पूरी तरह से आयुर्वेदिक और आर्गेनिक दवा जो 100% सुरक्षित है. आम आदमी के लिए इसे बनाना सम्भव नहीं है. इसके लिए औषधि निर्माण में दक्ष चिकित्सक बन्धु मुझसे संपर्क कर सकते हैं. 

मुझे खर्राटा नहीं आता है, अगर मेरे पास सोने वाला कोई आदमी खर्राटा लेने लगे तो मेरी नींद उड़ जाती है. मैं इसका बड़ा भुक्तहोगी हूँ, आपके पास सोने वाला कोई खर्राटा ले तो कितनी परेशानी होती है, मैं बेहतर समझ सकता हूँ. 

तो मेरे भाईयों और बहनों, अगर आपकी भी नींद किसी के खर्राटे से ख़राब होती है तो एंटी स्नोरिंग ड्रॉप्स का प्रयोग कराईये और चैन की नीन्द सोयिये. 

कई लोगों पर इसका टेस्ट करा चूका हूँ, बड़ा ही उत्साहजनक परिणाम मिला है. दस में से साथ-आठ लोगों को इसी से लाभ हो जाता है. एंटी स्नोरिंग ड्रॉप्स से जिनको कोई फ़र्क नहीं पड़ता है उनको खाने वाली औषधि सेवन करनी होती है, जो कि वैद्य जी की डायरी के एक दुसरे पोस्ट में बताया हूँ. 





14 February 2020

Amir Ras Benefits in Hindi | अमीर रस एक बेजोड़ औषधि


आज की जानकारी है शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि अमीर रस के बारे में. आप जो सोच रहे वैसा अमीर-ग़रीब वाला अमीर नहीं बल्कि इस दवा का नाम ही कुछ ऐसा है सबसे अलग. आयुर्वेदानुसार यह सुज़ाक और आतशक की  बेजोड़ औषधि है, तो आईये इसके बारे में थोड़ा-बहुत जानते हैं - 

अमीर रस जैसा कि इसके नाम में ही रस जुड़ा हुआ है, यह एक रसायन औषधि है जो बहुत तेज़ी से असर करती है. 

रस कपूर, दार चिकना, सिंगरफ, चाँदी, सफ़ेद संखिया और सेंधा नमक जैसी चीज़ें इसका मुख्य घटक हैं. इसके निर्माण विधि पर चर्चा न कर आईये इसके गुणों की बात करते हैं. 

अमीर रस के गुण या प्रॉपर्टीज - 

आयुर्वेदानुसार यह कीटाणु नाशक, तीव्र रक्तशोधक यानि तेज़ी से खून साफ़ करने वाला, बिल्कुल किसी अंग्रेज़ी इंजेक्शन की तरह, वात और कफ़ नाशक है. 

अमीर रस के फ़ायदे 

सुज़ाक और आतशक यानि Gonorrohea और Syphillis या गर्मी की बीमारी की यह बेजोड़ दवा है. ग्रन्थों में इसे इन बीमारियों की 'रामबाण' औषधि कहा गया है. 
सुज़ाक और सिफलिस की वजह से होने वाले जोड़ों के दर्द, गठिया और वात रोगों में भी इस से अच्छा लाभ होता है. यह रक्त वाहिनी और वात वाहिनी नाड़ियों के विक्षोभ को दूर कर अर्धांग वात और सन्धिगत वात को दूर कर देता है. 

अमीर रस की मात्रा और सेवन विधि - 

125 mg से 250 mg तक सुबह-शाम सिर्फ़ दस दिनों तक. पुराने रोगों में इसे इक्कीस दिन तक सेवन करने का प्रावधान है रोगी के बलाबल अनुसार. 

इसे मुनक्का के अन्दर निगलकर खाने का नियम है ताकि दांत में टच न हो. पर बेस्ट यह है कि इसे कैप्सूल में भरकर यूज़ किया जाये. दांत में टच होने से दाँत ख़राब हो जाते हैं. 

मुझे एक घटना याद आती है- मेरे एरिया के एक नौसिखिये वैद्य जी ने रोगी को इसे मुनक्के में तो दिया था पर रोगी ने इसे निगलने की बजे चबा दिया था और इसकी वजह से उसके दाँतों की कंडीशन ख़राब हो गयी थी. बहरहाल, इसे विधि पूर्वक ही सेवन करना चाहिए, और वैद्य की जी देख रेख में यूज़ करना चाहिए. 

विडियो देखने वाले सभी दर्शकों से अनुरोध है कि इस औषधि को कभी भी अपने मन से यूज़ न करें, नहीं तो सीरियस नुकसान भी हो सकता है. 




04 February 2020

Corona Virus Ayurvedic Treatment | कोरोना वायरस का आयुर्वेदिक उपचार


कोरोना वायरस के बारे में आपने न्यूज़ में सुना ही होगा, चीन से शुरू होने वाली यह  बीमारी दुनिया के कई मुल्कों तक फैल चुकी है. हमारे देश भारत में इसके कुछ मामले सामने आये हैं और यहाँ दुबई में भी इसकी एंट्री हो चुकी है. हजारों लोग इस से संक्रमित हो चुके हैं और सैंकड़ों लोगों की मौत भी हो चुकी है. विश्व स्वास्थ संगठन इसे वैश्विक संकट घोषित कर चूका है. एलोपैथ वालों का कहना है कि इस बीमारी का अब तक कोई इलाज नहीं है. आयुर्वेद इसके बारे में क्या कहता है? क्या आयुर्वेद में इसकी कोई दवा है? आईये यही सब के बारे में विस्तार से जानते हैं - 

चूँकि यह नए टाइप का वायरस है जो पहले कभी नहीं पाया गया, इसलिए वैज्ञानिक इसका इसका इलाज ढूंढने में दिन-रात लगे हैं. 

सबसे पहले समाज लीजिये इसके लक्षण -

इसका संक्रमण होने पर जुकाम, सर दर्द, खांसी, गले में खराश, बुखार, छिंक आना, थकान, न्युमोनिया, फेफड़े में सुजन, साँस लेने में तकलीफ़ जैसे लक्षण पाए जाते हैं. 

इस तरह की बीमारी के लिए आयुर्वेद क्या कहता है? 

हर साल कुछ न कुछ नयी बीमारी आती है और आने वाले समय में भी इस तरह का नया वायरस आयेगा इसमें कोई शक नहीं. पर आयुर्वेद में आज से हजारों साल पहले इस तरह की बीमारी का ईलाज बताया गया है. इसके लिए आयुर्वेद के मुख्य सिद्धांत को ध्यान में रखना होगा. 

इस तरह कि बीमारी का नाम आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में भले ही न मिले, पर इस तरह के संक्रमण का उपचार बताया ज़रूर गया है. 

तो सवाल यह उठता है कि इस तरह के संक्रमण और लक्षण में कौन सी दवा का प्रयोग किया जाये? 

तो जवाब बड़ा ही सिंपल है- लक्षण के अनुसार औषधि का सेवन कराना चाहिए 
आयुर्वेदिक औषधि की बात की जाये तो मेरे दिमाग में दो दवा का नाम आता है - त्रैलोक्य चिन्तामणि रस और त्रिभुवनकीर्ति रस 

दोनों में से एक-एक रत्ती शहद के साथ सेवन कर यष्टि मधु और वासा क्वाथ दिया जाये तो कोरोना वायरस के लक्षणों का शमन हो सकता है. 

कैसे?

त्रैलोक्य चिन्तामणि रस स्वर्ण युक्त बहुमूल्य औषधि है. इसके घटकों पर आप नज़र डालेंगे तो पाएंगे कि यह कीटाणु, वायरस नाशक, फेफड़ों और ह्रदय को बल देने वाला, और वात शामक जैसे अनेको गुणों से भरपूर है. स्वर्ण भस्म एक बेजोड़ एन्टी वायरल और एंटी बायोटिक है.

इसी तरह से त्रिभुवनकीर्ति रस बुखार, फ्लू और सांस की तकलीफ़ जैसे लक्षणों को दूर करने में बेजोड़ है. 

 तो ये है मेरी राय कोरोना वायरस के लक्षणों में प्रयोग करने लायक आयुर्वेदिक औषधि के बारे में. इसके बारे में आपके क्या विचार है, कमेन्ट कर ज़रूर बताएं. 

कोरोना वायरस के संक्रमण से कैसे बचें?

जैसा की सभी जानते हैं Prevention is better than Cure तो इसके संक्रमण से बचने के लिए 

अगर घर से बाहर कहीं पब्लिक एरिया में जाते हैं तो मास्क लगायें, बिना ज़रूरत के बाहर निकलने से बचें, हाथों की अच्छी तरह से साबुन और पानी से सफाई करें. 
छींकते समय नाक और मुँह ढकें. सर्दी जुकाम से पीड़ित लोगों के पास जाने से बचें. मेड इन चाइना वाले किसी भी सामान को न तो छुएँ और न ही घर लायें. 

आजकल यह बात तेज़ी से फैल रही है कि Chinese सामान को छूने से भी इसका इन्फेक्शन हो सकता है. हालाँकि अब तक इसका कोई पुख्ता सुबूत नहीं है पर संभव हो सकता है. 

तो यह सब उपाय हैं इस से बचने के, पर सबसे बड़ी बात आपको बता दूँ कि सारा उपाय एक तरफ़ और आपकी  रोग प्रतिरोधक क्षमता दूसरी तरफ़ है. अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं, कोई भी वायरस अटैक नहीं करेगा. इसके लिए तुलसी का पत्ता, गिलोय का रस और आँवला जैसी चीजों का सेवन किजिए.