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31 July 2016

बवासीर या पाइल्स का घरेलू उपचार | Bavaseer ka gharelu ilaj | Home remedies for piles



आज मैं आपको बताऊंगा पाइल्स या बवासीर ठीक करने के घरेलू उपाय, आयुर्वेदिक फार्मूले और शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में. 

पाइल्स या बवासीर की समस्या हर उस व्यक्ति को हो सकती है जिनको कब्ज़ या Constipation की समस्या हो. कब्ज़ का दूसरा नाम ही बवासीर है. जब कब्ज़ होगा तो ही बवासीर होगा. कब्ज़ नहीं तो बवासीर नहीं. 
कब्ज़ की समस्या कई बिमारियों का कारण होती है इसलिए हमें स्वस्थ रहने के लिए ऐसा भोजन और आहार-विहार करना चाहिए जिस से कब्ज़ न हो. 

दो प्रकार के बवासीर तो आप सभी जानते हैं ही, एक ख़ूनी और दूसरा बादी. ख़ूनी बवासीर में शौच के समय ब्लीडिंग होती है और बादी में मस्से की वजह से दर्द और मल त्याग में समस्या होती है.

यहाँ पर एक महत्वपूर्ण बात बताना चाहूँगा कि ऑपरेशन को लोग बवासीर का ईलाज मानते हैं और आज के अलोपथिक डॉक्टर लोग भी तुरंत ऑपरेशन कर देते हैं. 


यक़ीन मानिये ऑपरेशन तो इसका परमानेंट समाधान है ही नहीं. मैंने अपने चिकित्सकिय जीवन में ऐसे कई मरीज़ देखे हैं जो 2-2 बार ऑपरेशन कराने  के बाद भी ईलाज के लिए आते हैं  क्योंकि बवासीर उन्हें दुबारा हो जाता है. 

इसलिए बवासीर के लिए ऑपरेशन तो कराना ही नहीं चाहिए. एक दम विकट परिस्थिति में जब कोई दूसरा विकल्प न हो तब ही ऑपरेशन कराएँ. 

कब्ज़ की आयुर्वेदिक दवा "पंचसकार चूर्ण"

आईये सबसे पहले जानते हैं कुछ घरेलू उपाय के बारे में जिनका इस्तेमाल कर बवासीर से छूटकारा पाया जा सकता है. ये सारे प्रयोग अनुभूत हैं जो आज आप जानेंगे. कोई सुनी सुनाई बात नहीं है. क्योंकि जो जानकारी हम यहाँ प्रस्तुत करते हैं इसे हमारे यहाँ रोगियों पर सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा चूका होता है. 

महानिम्ब छाल का प्रयोग - 

50 ग्राम महानिम्ब की छाल को जौकुट कर लें मतलब मोटा कूट लें और एक ग्लास पानी में डाल कर रात भर पड़ा रहने दें.  सुबह इसे मसलकर छान लें और ख़ाली पेट पी जाएँ. इसके इस्तेमाल से सिर्फ 3 दिनों में ख़ूनी बवासीर ठीक हो जाता है. और कुछ दिनों के लगातार इस्तेमाल से बादी बवासीर में भी फ़ायदा होता है. 

महानिम्ब एक जंगली वृक्ष है जो की गाँव देहात में भी पाया जाता है जिसके पत्ते निम के पत्ते जैसे ही होते हैं पर साइज़ में बड़े होते हैं. अगर आपके आस पास यह मिले तो इसकी छाल निकाल सकते हैं. इसकी सुखी छाल जड़ी बूटी बेचने वाले के यहाँ मिल सकती है. 

नारियल जटा भस्म का प्रयोग -




ख़ूनी बवासीर के लिए नारियल जटा भस्म भी कारगर दवा है. इसे एक छोटा चम्मच एक ग्लास ताज़े छाछ में घोलकर पीना चाहिए. नारियल जटा की भस्म बनाने के लिए सूखे नारियल का उपरी भाग जो रेशेदार होता है और जिसकी रस्सी भी बनती है. उसे लेकर जलाकर राख कर लें और फिर पिस कर रख लीजिये. यही नारियल जटा भस्म है. 

बड़ी हर्रे चूर्ण का प्रयोग - 

बड़ी हर्रे का चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह शाम गुनगुने पानी से लेने से दोनों तरह की बवासीर में फ़ायदा होता है, खासकर बादी बवासीर में. कब्ज़ को दूर कर यह बवासीर के मूल कारण हो मिटाता है. 

इसके लिए बड़ी हर्रे को तोड़कर इसका छिल्का निकाल लें, इस की जो गुठली होती है इसे अलग कर दें, गुठली का इस्तेमाल नहीं करते. 

इस हर्रे की छाल को एरंड तेल में हल्का भून लेने के बाद चूर्ण बना कर रख लें और इस्तेमाल करें. एरंड तेल को कास्टर आयल के नाम से भी जाना जाता है. 

सफगोल भूसी का प्रयोग- 

दो चम्मच सफगोल भूसी में एक चम्मच त्रिफला चूर्ण मिलकर रोज़ रात को सोते समय हलके गुनगुने पानी से लेने से दोनों तरह की बवासीर में फ़ायदा होता है और इसका मूल कारण कब्ज़ दूर हो जाता है. 
बवासीर के लिए शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधियों में अभयारिष्ट, कंकायण वटी, त्रिफला चूर्ण,  त्रिफला गुग्गुलु, अर्श कुठार रस इत्यादि प्रमुख हैं जिनका इस्तेमाल चिकित्सकगण सफलता पूर्वक करते हैं. 

बवासीर होने पर कुछ परहेज़ भी बहुत आवश्यक है - 

तली हुयी चीजें, मैदे की बनी चीजें, मिर्च, और आचार खटाई का इस्तेमाल बिलकुल भी नहीं करना चाहिए. नॉन वेज का इस्तेमाल न करना बेहतर है.

फाइबर वाले फल, सब्ज़ी और अनाज का सेवन करें  और छाछ का इस्तेमाल करें. रोज़ रात को सोते समय 1-2 अंजीर चबा चबा कर खाएं. 

बवासीर से बचने के लिए ऐसा भोजन करें जिस से कब्ज़ न हो, कब्ज़ नहीं होगा तो बवासीर कभी नहीं हो सकता. 

फाइबर या रेशेदार चीज़ों को अपने नियमित भोजन का हिस्सा बना लें जैसे चोकर मिला हुवा आटा, पालक साग, दुसरे साग सब्जी, गाजर-मुली, संतरा इत्यादि. 

तो दोस्तों, आज आप ने जाना बवासीर के ईलाज के बारे में और इस से बचने के घरेलू उपाय के बारे में.

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29 July 2016

लहसुन के फ़ायदे, बढ़ाएं सेक्स पॉवर | Health benefits of garlic | Lahsun ke fayde



हलो एंड वेलकम दोस्तों,

लहसुन को तो हम सभी जानते हैं. रसोई में प्रयोग किया जाने वाला यह आइटम किसी परिचय का मोहताज नहीं जिसे अंग्रेज़ी में गार्लिक(Garlic) कहा जाता है. पूरी दुनियां में इस्तेमाल किया जाने वाला यह कंद मूल बहुत सारे औषधीय गुणों से भरपूर है. 

लहसुन फास्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसके इस्तेमाल से कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, पाचन तंत्र के रोग, सर्दी-खांसी, सेक्स समस्या, जोड़ों के दर्द इत्यादि में फ़ायदा होता है. 

लहसुन का इतना महत्त्व है कि इसका इस्तेमाल आयुर्वेद की शास्त्रीय औषधियों में भी होता है. क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन लशुनादी वटी में लहसुन मुख्य घटक है. 


तरबूज़ के फ़ायदे 

जिस लहसुन का बाहरी छिल्का हलके लाल रंग का होता है वह ज़्यादा प्रभावी है और इसी का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाओं में होता है. सफ़ेद रंग वाला लहसुन उतना गुणकारी नहीं है. 


तो आईये अब जानते हैं लहसुन के कुछ घरेलू प्रयोग - 

कोलेस्ट्रोल ब्लड प्रेशर कम करने के लिए - 

रोज़ सुबह 2-3 लहसुन की कली ख़ाली पेट चबा कर खाने से कोलेस्ट्रोल कम जाता है और ब्लड प्रेशर को भी नार्मल कर देता है. 

खांसी और दमा में - 

स्वसन तंत्र या रेस्पिरेटरी सिस्टम के लिए भी लहसुन बहुत ही लाभकारी है. लहसुन और अदरक का पेस्ट बना लें और इसे घी में हल्का भूनकर शहद मिलाकर खाने से खांसी और दमा या अस्थमा में फ़ायदा होता है.

हार्ट अटैक और हार्ट के रोगों से बचने के लिए - 

हृदय की बिमारियों से बचने के लिए रोज़ कम से कम एक कली लहसुन खाना चाहिए. यह हार्ट डिजीज को दूर रखता है जो की आजकल बहुत कॉमन बीमारी है.

सेक्स पॉवर बढ़ाने के लिए - 

आपके वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने में लहसुन का सेवन मदद करता है. इसके लिए आप सौ ग्राम लहसुन का पेस्ट बना लीजिये और पचास ग्राम देसी गाय के घी में हलकी आंच पर भून लीजिये. जब ठंडा हो जाये तो इसमें एक सौ ग्राम शहद मिलाकर रख लीजिये. इसे एक चम्मच सुबह शाम दूध के साथ लीजिये और कुछ ही दिनों में इसका चमत्कार देखिये. आप बिस्तर पर धमाल मचा सकेंगे और अपने पार्टनर को संतुष्ट कर सकेंगे. 


सेक्स पॉवर बढ़ाने वाले फल 

गठिया, आर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द और कमर दर्द के लिए- 

इसके लिए आप इसका तेल बना कर मालिश करें तो ज़्यादा फ़ायदा होता है. इसके लिए 50 ग्राम लहसुन को छीलकर मोटा-मोटा कूट लीजिये. 250 ग्राम पीले सरसों का तेल में इसे लोहे की कड़ाही में डाल कर मंद-मंद आंच पर तेल पकाएं. जब लहसुन पूरा जल कर काला हो जाये तो ठंडा होने छान कर रख लें. 

इस तेल की मालिश करने से कमर दर्द, गठिया, जोड़ों के दर्द में फ़ायदा होता है. सुजन और चोट लगने पर भी इस तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है. 

तो दोस्तों, आज आप ने जाना लहसुन के कुछ घरेलू प्रयोग जिनका इस्तेमाल करने से इन रोगों में फ़ायदा होता है. 

प्याज़ के 25 फ़ायदे , अलसी के फ़ायदे , हल्दी के चमत्कारी  फ़ायदे 

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28 July 2016

हल्दी के फ़ायदे, हल्दी से कैंसर को भगाएं | Haldi ke fayde | Health benefits of turmeric




नमस्कार दोस्तों,

लखैपुर डॉट कॉम  पर आपका बहुत बहुत स्वागत है. आज आप जानेंगे हल्दी से कैंसर जैसी बीमारी से छूटकारा पाने का तरीका और हल्दी के दुसरे फ़ायदे.




हल्दी हमारे किचन का एक महत्वपूर्ण पदार्थ है जिसका इस्तेमाल मसाले के तौर पर  रोज़ होता है. खाना बनाने में तो इसका इस्तेमाल होता ही है. पर इसके इस्तेमाल से कई सारी बिमारियों से भी छूटकारा पाया जा सकता है. 

सोंठ के घरेलू उपयोग 

हल्दी प्रकृति का एक वरदान है. हल्दी हमारे भोजन का अंग होने के साथ साथ एक कारगर दवा भी है. 

हल्दी एक तरह की नेचुरल एंटी बायोटिक है जो कैंसर जैसे ख़तरनाक रोग के अलावा, त्वचा के रोग, एलर्जी, खांसी, अस्थमा, arthritis या जोड़ों का दर्द वगैरह में असरदार है. 

तो आईये अब जानते हैं हल्दी के कुछ घरेलू प्रयोग के बारे में - 

हल्दी कैंसर जैसी बीमारी से बचाती तो है ही, अगर कैंसर हो जाये तो इसके इस्तेमाल से ठीक हो सकता है. 

कैंसर के रोगी को एक चम्मच हल्दी पाउडर सुबह शाम गौमूत्र के साथ लेना चाहिए. कैसा भी कैंसर हो उसमे यह फ़ायदा करता है और रोग ठीक हो सकता है. अगर किमोथेरापी न की गयी हो तो इसके इस्तेमाल से रोग ठीक हो जाता है. 

त्वचा के लिए हल्दी का प्रयोग - 

एक चम्मच हल्दी पाउडर में एक चम्मच बेसन मिलाकर उसमे थोड़ा दूध मिला लें और पेस्ट बना कर चेहरे पर लगाने से त्वचा में निखार आता है और दाग, धब्बे, किल-मुहांसे दूर होते हैं. 

हल्दी पाउडर एक-एक चम्मच सुबह शाम खाने से चर्मरोग दूर होते हैं. 

गठिया आर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द में -

जोड़ों में दर्द होने पर हल्दी और मेथी दोनों बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना कर एक एक चम्मच दिन में तीन बार हलके गर्म पानी से खाने से फ़ायदा होता है. 


डिप्रेशन और तनाव होने पर-

एक चम्मच हल्दी पाउडर को दूध में मिलाकर सोते समय रोज़ खाना चाहिए. इस से तनाव और डिप्रेशन में फ़ायदा होता है. 

चोट लगने पर - 

हल्दी के एंटी इन्फ्लामेट्री गुण के कारण ही चोट लगने पर इसकी पट्टी बाँधी जाती है, जो की सभी लोग जानते हैं और यह काफी प्रचलित है. 

खांसी में -

खांसी होने पर थोड़ी से हल्दी लेकर चुसना चाहिए. इस से खांसी में फ़ायदा होता है. हल्दी पाउडर को घी में हल्का भूनकर एक-एक चम्मच सुबह शाम खाने से भी फ़ायदा होता है. 

इम्युनिटी के लिए -

हल्दी एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है, हल्दी के इस्तेमाल से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिसके कारण बिमारियों से बचाव होता है. 


दांतों के लिए - 

हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर मंजन करने से पायरिया दूर होता हैं. दांत और मसूड़े भी मजबूत होते हैं.

हड्डियों की मज़बूती के लिए-

दूध में हल्दी मिलाकर पिने से शरीर की हड्डियों को मज़बूती मिलती है. एक ग्लास दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पियें. 

यहाँ एक बात बता दूं कि अगर आप मार्केट से अच्छी हल्दी लाकर ख़ुद इसका पाउडर बनायेंगे तो ज़्यादा अच्छा है. और किसी तरह के मिलावट की शंका न रहेगी. 

प्याज़ के 25 फ़ायदे 

तो दोस्तों आज आपने जाना हल्दी के कुछ घरेलू उपयोग जिनका इस्तेमाल कर बिमारियों में फ़ायदा लिया जा सकता है. 

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तरबूज़ के फ़ायदे 

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26 July 2016

पित्ताशय की पथरी के घरेलू उपचार | Pitt ki patthri ki gharelu dawa



गालस्टोन या पित्ताशय की पत्थरी आज कल बहुत कॉमन बीमारी हो गयी है. अगर आप अपने आस पास नज़र दौड़ाएं और दोस्तों रिश्तेदारों में पता करें तो किसी न किसी को ये बीमारी हुयी होगी.

गालस्टोन या पित्ताशय की पत्थरी पाचन तंत्र से सम्बन्धित बीमारी है. पित्त की थैली में धीरे-धीरे सॉलिड जम कर हार्ड हो जाते हैं और पत्थर का रूप ले लेते हैं. जब तक कोई तकलीफ़ नहीं होती तब तक इस बीमारी का पता नहीं चलता है. 

उलटी, पेट में दर्द होने पर जब रोगी डॉक्टर के पास जाता है तब पता चलता है कि पित्त की थैली में पत्थरी है. यह एक साइलेंट रोग है, पित्त की थैली में पत्थरी पड़ी रहती है और पता नहीं चलता. जब पत्थरी पित्त की नली में फंस जाती है तो बहुत तेज़ दर्द होता है और उल्टी भी हो सकती है.

गालस्टोन मुख्यतः दो तरह की होती है. कोलेस्ट्रोल स्टोन और पिगमेंट स्टोन. 

एक्स रे और अल्ट्रासाउंड से इसका निदान होता है. सब से सही जांच अल्ट्रा साउंड से ही होता है, क्योंकि इस से पत्थरी की संख्या और साइज़ का पता चलता है. तो आईये इसके कारण और लक्षण पर ज़्यादा चर्चा न कर जानते हैं इस से छूटकारा पाने के उपाय के बारे में. 

किडनी और मूत्राशय की पत्थरी का ईलाज 

अगर किसी को पित्त की पत्थरी का पता चला है इस आयुर्वेदिक घरेलू उपाय का ज़रूर अपनाना चाहिए. 

छोटी साइज़ की मल्टीपल स्टोन तो दवाओं से आसानी निकल जाती है. बड़ी स्टोन में ज़्यादा टाइम लगता है. अगर स्टोन पित्त नली में फंस जाये तो बहुत अधिक दर्द होता है और ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है. 

अलोपथिक डॉक्टर लोग ऑपरेशन से पत्थरी निकाल देते हैं. असल में वो सिर्फ पत्थरी ही नहीं बल्कि पूरा गाल ब्लैडर ही निकल देते हैं. गाल ब्लैडर निकलने पर आपको लाइफ टाइम के लिए पाचन सम्बन्धी समस्या भी हो सकती है. इस बात को न भूलें. 

ऑपरेशन के अलावा दूसरी आधुनिक तकनीक है लिथोट्रिपसी, पर यह ज़्यादा महँगी होती है. 

इन सब से पहले आयुर्वेदिक उपाय अपनाना चाहिए, ऑपरेशन वगैरह लास्ट आप्शन है. पित्त की पत्थरी साधारणतः इस से घुल का निकल जाती है. कुछ लोग और एलोपैथिक डॉक्टर भी नहीं मानते की गालस्टोन दवा से निकल सकती है. पर यह मेरा अनुभव है और सही दवा के इस्तेमाल से पत्थरी निकल जाती है. हाँ कुछ रोगियों की नहीं निकती तो उसके दुसरे विकल्प हैं ही.

तो आईये जानते हैं एप्पल जूस ट्रीटमेंट के बारे में - 

इसके लिए आपको चाहिए होगा 

सेब का जूस (हरे सेब का जूस ज़्यादा असरदार है )

ओलिव आयल 

Epsom साल्ट 

और निम्बू का रस 




इन सब का इस्तेमाल कैसे करना है?


सबसे पहले तो पांच दिनों तक दिन में चार बार एक एक ग्लास सेब का जूस पीना है. सुबह नाश्ते में, दिन के खाने के बाद, रात के खाने के बाद और सोने से पहले भी एक ग्लास. सेब का ताज़ा जूस बनाकर पीना बेहतर है.

सेब का जूस पित्त की पत्थरी को नर्म और मुलायम करता है. इन पांच दिनों में आप सेब के जूस के साथ नार्मल खाना खाएं जैसा खाते हैं. पर इन दिनों मीठी चीजें या चीनी का इस्तेमाल न करें.

पांच दिनों के बाद छठे दिन एक छोटा चम्मच एप्सम साल्ट एक ग्लास हलके गर्म पानी से लीजिये शाम छह बहे और रात का खाना न खाएं. रात को सोते टाइम भी एक छोटा चम्मच इसे ले लीजिये. 

यहाँ आपको बता दूं की एप्सम साल्ट दस्तावर दवा है, जिस से आपको लूज़ मोशन होगा. यह पित्त की नली को खोलता है और पित्त की थैली में जमे सॉलिड को बाहर निकालता है. अपनी क्षमता के अनुसार इसकी मात्र कम या ज़्यादा कर सकते हैं.

उसी रात दस बजे आधा ग्लास ओलिव आयल लगभग सौ मिलीलीटर में आधा गिलास निम्बू का जूस मिलकर पी जाएँ. 

ओलिव आयल गालस्टोन को चिकनाई देता है और निकलने में मदद करता है और निम्बू का जूस गाल ब्लैडर की सफाई करने में मदद करता है. 

कुछ घंटों बाद या सुबह तक आपको लूज़ मोशन यानी पतले दस्त होंगे. दो - चार दस्त होने पर यह ख़ुद रुक जाता है, घबराने की कोई बात नहीं होती. पित्त की पत्थरी दस्त के साथ निकल जाती है. हरे रंग का दस्त आप देख सकते हैं.

छोटी-छोटी पथरियां या Multiple stones तो एक बार के प्रयोग में ही निकल जाती हैं. बड़े साइज़ की पत्थरी हो तो यही प्रोसेस कुछ दिनों के अंतराल पर करते रहना चाहिए. 

ये उपाय आप डॉक्टर की देख रेख में करें. चाहें तो दिन में भी कर सकते हैं. 

एप्सम साल्ट को मैग्नीशियम सलफेट भी कहते हैं. मेडिकल स्टोर पर यह मैग सल्फ़ के नाम से हमारे देश में हर जगह मिल जाता है. 


आज की जानकारी के बारे में कोई सवाल हो तो कमेंट से पूछिये, आपके सवालों का स्वागत है. 

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 थैंक यू एंड बाय बाय.
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25 July 2016

अलसी के फ़ायदे | Alsi seed ke fayde | Health benefits of flax seed


दोस्तों, अलसी के बिज को तो आप जानते ही हैं, यह एक प्रकार की तेलहन फसल है जिसका तेल निकाला जाता है और साथ ही साथ इसके बीजों का भी इस्तेमाल किया जाता है. अलसी को अंग्रेज़ी में Flax Seed कहते हैं.

आज आप जानेंगे कि इसका इस्तेमाल कर किन-किन बिमारियों में फायदा लिया जा सकता है. 

कैंसर से बचाव- अलसी का बीज कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाता है. नयी रिसर्च ने साबित कर दिया है कि अलसी का बिज ब्रेस्ट कैंसर, कोलन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर से बचाने में मदद करता है. 

डायबिटीज़ या शुगर की बीमारी में - जिन्हें डायबिटीज़ हो उन्हें अलसी के बीजों का इस्तेमाल रोज़ करना चाहिए. 

अस्थमा में - एक चम्मच अलसी के बिज को एक ग्लास पानी में डाल कर आठ दस घंटे पड़ा रहने दें और फिर इसे छान कर पिने से अस्थमा के रोगी को बहुत फायदा होता है. इसे सुबह शाम प्रयोग करना चाहिए. 

कब्ज़ या Constipation होने पर - अलसी का बिज फाइबर से भरपूर होता है, कब्ज़ होने पर इसका इस्तेमाल करने से बहुत फ़ायदा होता है. 


हार्ट डिज़िज़  - अलसी का बीज ओमेगा थ्री जैसे पोषक तत्व से भरपूर होता है, जिसके कारण यह ह्रदय गति को सामान्य और सुचारू करता है. ह्रदय की धमनियों को मजबूती देता है. अगर संक्षेप में कहा जाये तो अलसी का बीज ह्रदय के लिए बहुत ही लाभकारी है. 

कोलेस्ट्रोल कम करने के लिए- अलसी के बीजों के इस्तेमाल से बैड cholesterol कम होता है. और ह्रदय की धमनियों को सख्त और मोटा होने से बचाता है. जिनका cholesterol लेवल बढ़ा हो उन्हें इसका इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए. 

हड्डियों की मज़बूती के लिए- अलसी के बीजों का इस्तेमाल शरीर की हड्डियों को मज़बूत करता है. बोन डेंसिटी को बढ़ाता है जिस से यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों में लाभकारी है. 

अलसी का बिज मोटापा कम करने में भी मदद करता है. 

अलसी के बीजों का इस्तेमाल आप जैसे चाहें कर सकते हैं. इसको थोड़ा भून कर पाउडर बना लें और रोज़ एक चम्मच इस्तेमाल करें. कई लोग इसका इस्तेमाल खाने में मिला कर भी करते हैं. अलसी से कुछ नमकीन और मीठे व्यंजन भी बनाये जाते हैं. 

कुल मिलाकर देखा जाए तो अलसी हमारे स्वस्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी है. कम से कम एक चम्मच इसका इस्तेमाल रोज़ करना चाहिए. 

तो दोस्तों आज आपने जाना अलसी बिज के फ़ायदे के बारे में. यह जानकारी अच्छी लगी तो लाइक और शेयर कीजिये. 

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अलसी के बारे में को सवाल हो या कोई हेल्थ प्रॉब्लम हो तो कमेंट से हम से पूछिये. आपके प्रश्नों का स्वागत है. 

आज की इस जानकारी को सुनने के लिए निचे की विडियो पर क्लिक करें. आज के लिए इतना ही. शुक्रिया, थैंक्यू धन्यवाद् 

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24 July 2016

तम्बाकू गुटखा से छूटकारा (नशा मुक्ति) पाने का उपाय | Tambaku Gutkha Ki Adat Door Karne Ka Herbal Formula




तम्बाकू और गुटखा के इस्तेमाल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है जिसे हम सभी जानते हैं. अगर इरादे मज़बूत हों तो आप इनसे छूटकारा पा सकते हैं. पर यह एक ऐसी आदत है जिस से जल्दी मुक्ति नहीं मिलती है. 

तो आईये जानते हैं ऐसा फ़ार्मूला जिसका इस्तेमाल कर आप गुटखा और तम्बाकू की आदत से छूटकारा पा सकते हैं -

इसके लिए आपको चाहिए सौंफ़ और अजवाइन 50-50 ग्राम, काला नमक - 25 ग्राम और 2-3 रसदार निम्बू 

सौंफ़, अजवाइन और काला नमक को कूट पिस कर चूर्ण बना लीजिये और इसमें निम्बू गार कर रस मिला लीजिये. अच्छी तरह मिलाने के बाद इसे स्टील की प्लेट में फैलाकर रख दीजिये  और इसे खुले आसमान के निचे चांदनी रात में रात भर पड़ा रहने दें. 

सुबह इसे तवे में या पैन में डालकर धीमी आंच पर भून लें. इसे पूरी तरह सूखने तक भूनें. ठंडा होने पर किसी डब्बे में रख लीजिये. बस दवा तैयार है !

जब भी तम्बाकू और गुटखा खाने की तलब हो तो इसे तम्बाकू-गुटखे की तरह लीजिए और धीरे - धीरे चूसिये. 

कुछ ही दिनों में तम्बाकू-गुटखे की आदत छूट जाती है और साथ ही साथ पाचन शक्ति मज़बूत होती है. तम्बाकू-गुटखा से फेफड़ों पर होने वाले साइड इफ़ेक्ट को भी दूर कर देता है यह फ़ार्मूला. 

इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है, सैंकड़ों लोगों पर आजमाया गया है. 
इस जानकारी को ज़रूर शेयर कीजिये. जानकारी अच्छी लगी तो लाइक कीजिये. इस जानकारी को सुनने के लिए निचे दी गयी विडियो पर क्लीक कीजिये. 

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स्तन को सुन्दर और सुडौल बनाने के घरेलू उपाय | breast size badhane ke gharelu upay | Home remedies to increase breast size



हेलो एंड वेलकम दोस्तों,

आज मैं बताने जा रही हूँ ब्रेस्ट यानी स्तनों को सुन्दर और सुडौल बनाने के घरेलू  उपाय के बारे में.

महिलाओं की सुन्दरता को बनायें रखने और पुरुषों को उनकी तरफ आकर्षित करने में स्त्री स्तन एक महत्वपूर्ण अंग है.

 इसलिए स्त्रियाँ अपने वक्ष स्थल का बहुत ध्यान रखती है और उन्हें पूर्ण रूप से विकसित रखने की कोशिश करती है. ये ना सिर्फ इनकी बाहरी सुन्दरता को बढ़ता है बल्कि इनके अंदर के आत्मविश्वास को भी बढ़ता है.


अगर किसी स्त्री के छोटे स्तन होते है तो इससे उनमे हीन भावना उत्पन्न हो जाती है. महिलाओं के स्तनों का बेडौल होने का कारण बच्चे का स्तनपान या कोई रोग हो सकता है.

इसीलिए महिलायें इन्हें सुडौल बनाने के लिए अनेक तरह के उपायों और क्रीम का इस्तेमाल करती है किन्तु क्रीम में मिलने वाले रासायन आपके स्तनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

ल्यूकोरिया या सफ़ेद पानी की घरेलू दवा, मोटापा कम करने का घरेलू उपाय 

 तो आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बता रही हूँ जिसका इस्तेमाल कर आप सुन्दर और सुडौल स्तन पा सकती हैं.

अनार का छिल्का पीसकर ब्रेस्ट पर लेप करने से ब्रेस्ट में कसाव आता है और ब्रेस्ट सुडौल बनता है.

जैतून का तेल यानी ओलिव आयल और बादाम का तेल मतलब almond oil दोनों को मिलाकर दोनों स्तनों पर गोलाई में हथेली घुमाते हुवे मालिश करने से स्तन सुन्दर और सुडौल हो जाते हैं.



एक अंडा फेट कर उसमे एक निम्बू का रस और दो चम्मच बेसन मिलाकर पेस्ट बना लें और स्तनों पर लगा कर सूखने दें. इस से स्तनों की ढीली पड़ी मांसपेशियां तन जाती हैं और स्तन सुडौल हो जाते हैं.

स्तनों को बड़ा और सुडौल बनाने के लिए रोज़ तेल की मालिश करना ज़रूरी है, सरसों तेल की मालिश से भी फ़ायदा होता है. ओलिव आयल में एक चम्मच सिरका या विनेगार मिलाकर निचे से ऊपर गोलाई में हथेली से मालिश करें तो स्तन टाइट और सुडौल हो जाते हैं.

बालों का गिरना रोकने के घरेलू उपचार 

प्याज़  का उपयोग स्तनों को चुस्त, नर्म और उन्नत रखने के लिए किया जाता है. अगर प्याज़  के रस में थोड़ा शहद और हल्दी मिलाकर स्तनों पर मालिश करें तो इससे ढीले और लटके हुए स्तनों में भी कसावट आ जाती है और वो भी आकर्षक दिखने लगते है. ये उपाय शादीशुदा औरतों और उन औरतों के लिए बहुत लाभदायी है जिन्होंने अपने बच्चे को breast feeding या स्तनपान कराया हो.



 तो दोस्तों आज आपने जाना स्तनों को सुन्दर, बड़ा और सुडौल बनाने के घरेलू आयुर्वेदिक उपाय के बारे में.

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23 July 2016

बिच्छू काटने पर क्या करें ? Bichhoo katne ka ilaj | Treatment of scorpion bite

bichhoo


बिच्छू काटने पर कितना दर्द और पीड़ा होती है यह तो वही जानता है जिसे कभी बिच्छू ने काटा हो. 

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तो आईये सबसे पहले जानते हैं कि क्या करना चाहिए अगर बिच्छू काट ले. बिच्छू अगर पैर या हाँथ में काटा है तो डंक वाली जगह से थोड़ा ऊपर पतली रस्सी से टाइट बांधना चाहिए. ऐसा करने से दर्द ऊपर की तरफ नहीं बढ़ता है. 

जहाँ पर बिच्छू काटता है वहां पर वो अपना डंक चुभा देता है, ये डंक छोटे कांटे की तरह होता है, अगर यह दीखता है तो इसे आप सुई से निकाल दीजिये. इसका डंक निकल जाने पर दर्द नहीं होगा क्योंकि सारा ज़हर इस डंक में ही होता है. 

इसे भी जानिए - साँप काटने पर ईलाज कैसे करें?

बिच्छू काटने पर असहनीय दर्द होता है इसे तुरंत दूर करने का सबसे बढ़िया तरीका है इंजेक्शन देना जहाँ पर बिच्छू ने काटा है. 

जी हाँ दोस्तों, इस अलोपथिक इंजेक्शन का नाम है 'ज़ाईलोकेन' (Xylocaine) - 2 % या  5 % कोई भी ले सकते हैं. एक नयी डिस्पोजेबल सिरिंज लेकर इसे एक से दो मिलिलीटर खींचिए और जहाँ पर बिच्छू ने काटा है वहां पर चमड़ी उठा कर इंजेक्शन दे दीजिये. 




इंजेक्शन देते ही रोता हुवा व्यक्ति हंसने लगता है, तुरंत ही दर्द काफ़ूर हो जाता है. यह इंजेक्शन अपने देश में हर जगह आसानी से मेडिकल शॉप पर मिल जाता है. इसे लेकर घर में रखना चाहिए क्या पता कब किसी के काम आ जाए. ये एक तरह का लोकल अनास्थेसिया का काम करता है. पर बिच्छू काटने पर वरदान है. (बिल्कुल नयी सिरिंज का ही इस्तेमाल करें, यूज़ की हुयी सिरिंज का भूल कर भी उपयोग न करें, संक्रामक रोग फैलने का खतरा हो सकता है)


बिच्छू काटने पर अगर खाने की दवा की बात की जाये तो इसके लिए एक होम्योपैथिक दवा बहुत ही कारगर है, जिसका नाम है साइलिशिया - 200 ( Silicea - 200) इसे रोगी की जुबान पर दो बूंद दीजिये दस मिनट के अंतराल पर सिर्फ तीन बार. 

इस दवा को देने से बिच्छू का डंक ख़ुद बाहर आ जाता है. 

किल चुभने, काँटा लगने, सुई चुभने, मधुमक्खी काटने इत्यादि में भी यह दवा बहुत कारगर है. इसे घर में आधा औंस रखना चाहिए बड़े ही काम की दवा है. किसी भी होम्योपैथिक मेडिकल स्टोर से आप इसे ले सकते हैं. 

बिच्छू काटे स्थान को गर्म पानी में रखने या गर्म पानी में रुमाल भीगा कर सेंकने से भी आराम मिलता है. 


तो दोस्तों, आज आपने जाना  बिच्छू काटने पर घरेलू उपचार के बारे में. इसके बारे में कोई सवाल हो तो कमेंट से पूछिये. 

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खुश रहिये, healthy रहिये यही हमारी कामना है. 









21 July 2016

जौंडिस या पीलिया का चमत्कारी ईलाज | Get rid from jaundice in 3 days



नमस्कार दोस्तों, हमारी वेबसाइट पर आपका बहुत-बहुत स्वागत है. आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ जौंडिस के घरेलू ईलाज के बारे में. ऐसा ईलाज जिस से आप सिर्फ तीन ख़ुराक में जौंडिस से छूटकारा पा सकते हैं.

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पीलिया या जौंडिस बहुत ही कॉमन बीमारी है जो लीवर से सम्बंधित है.  यह एक प्रकार के वायरस से होती है. शुरू में तो बीमारी का पता नहीं चलता पर कुछ दिनों बाद जब लक्षण प्रकट होते हैं तो बीमारी का पता चलता है.
 पेशाब का रंग पिला होना, बॉडी का रंग पिला होना और आँखें भी पिली हो जाती हैं इस रोग के होने पर. पाचन शक्ति कमज़ोर हो जाती है और  शरीर कमज़ोर होने लगता है. एलोपैथिक दवाओं के साइड इफ़ेक्ट से भी लीवर को नुकसान पहुँचता है और जौंडिस के लक्षण दिखाई देते हैं.

जौंडिस का ईलाज जितना जल्दी किया जाय उतना बेहतर होता है, रोग बढ़ने पर ख़तरनाक हो सकता है. हेपेटाइटिस A, B, C और लीवर सिरोसिस इत्यादि इसके ही दुसरे रूप हैं जिनके जीवन को ख़तरा हो जाता है. जौंडिस के कारण और लक्षण तो आप जानते ही हैं.

आईये अब जानते हैं इसका आसान घरेलू ईलाज -


इसके लिए आपको 'लाल फिटकिरी' लेना है 75 ग्राम. लाल फिटकिरी को आयुर्वेद में  'रक्त स्फटिक ' कहते हैं. यहाँ आपको बता दूं की फिटकिरी दो तरह की होती है. एक सफ़ेद और दूसरी लाल. तो आपको यहाँ लाल फिटकिरी लेना है जो की पंसारी या जड़ी-बूटी बेचने वाले के यहाँ से मिल जाएगी.

75 ग्राम लाल फिटकिरी को खरल में डालकर पाउडर बना लीजिये. खरल न तो हो सिल पर भी पिस सकते हैं या ग्राइंडर में.

पिसने के बाद इसके 3 ख़ुराक बना लीजिये, मतलब हर ख़ुराक 25 ग्राम की होगी.

लाल फिटकिरी (रक्त स्फटिक)


25 ग्राम इस लाल फिटकिरी के पाउडर को 250 ग्राम ताज़ा दही में मिलाकर सुबह-सुबह ख़ाली पेट पी जाना है. इसके पिने के एक घंटा बाद ही कुछ खाएं और पियें. बस तीन दिन ऐसे ही इसका इस्तेमाल कीजिये और जौंडिस में छूटकारा पाईये.

यह एक व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है, कम उम्र के लोगों पर सावधानी पूर्वक प्रयोग करें.

जौंडिस होने पर कुछ परहेज़ भी बहुत ज़रूरी है. कोई भी वज़नदार चीज़ न उठायें. तेल और तली हुयी चीज़ों का इस्तेमाल न करें. नमक का इस्तेमाल भी कम से कम करें.

आसानी से पचने वाले तरल पदार्थ का इस्तेमाल करें. नारियल पानी, गन्ने का जूस, मुली, उबली हुयी सब्जी का इस्तेमाल करने से फायदा होता है.

तो दोस्तों आज आपने जाना जौंडिस के आसान से घरेलू ईलाज के बारे में. ऐसी ही दूसरी जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट सब्सक्राइब करना न भूलें. आज की जानकारी अच्छी लगी तो इस पोस्ट को लाइक कीजिये और शेयर कीजिये. इसके बारे में कोई भी सवाल हो तो कमेंट से मुझसे पूछिये, आपके सवालों का स्वागत है.  Thankyou and bye bye.






20 July 2016

सेक्स पॉवर बढ़ाने वाले फल | Power booster fruits


दोस्तों, स्वस्थ रहने के लिए रोज़ फलों का इस्तेमाल करना चाहिए, यह तो हम सभी जानते हैं. पर क्या आप जानते हैं कि कुछ फलों का इस्तेमाल कर आप अपने जीवन में सेक्स का भरपूर आनंद ले सकते हैं? 

आज आप जानेंगे ऐसे ही फलों के बारे में जिसके इस्तेमाल से सेक्स पॉवर को बढ़ा सकते हैं. 


तरबूज़ - तरबूज़ मिनरल्स और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर फल है. इसका इस्तेमाल शरीर को ताज़गी और स्फूर्ति देता है. तरबूज़ में पाया जाना वाला लाइकोपेन रक्त वाहनियों को नार्मल करता है और ब्लड फ्लो को बढ़ाता है. तरबूज़ का सेवन आप बिस्तर पर धमाल मचा सकते हैं. इसका जूस अगर सुबह शाम पिया जाये तो वियाग्रा की तरह काम कर सकता है. 


अनार - अनार का जूस एंटी ऑक्सीडेंट का काम करता है और रक्त प्रवाह को बढ़ाता है. अनार का जूस आपके सेक्स पॉवर को बढ़ाने में मदद करता है. 




अंगूर - विटामिन और मिनरल से भरपूर अंगूर शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है और इसका इस्तेमाल करने से सेक्स पॉवर इम्प्रूव होता है.


केला - पोटैशियम जैसे मिनरल से भरपूर यह फल अपने गुणों के लिए जाना जाता है. केला खाकर केशर और मिश्री मिला हुवा दूध पियें और फिर चमत्कार देखें. आप सेक्स ड्राइव का भरपूर आनंद ले सकते हैं.

सोंठ के घरेलू उपयोग 



डेट्स या खजूर - खजूर स्वास्थ्यप्रद गुणों से भरपूर फल है. आपको यह अन्दर से स्टैमिना देता है. नेचुरल ग्लूकोज़ से भरपूर यह फल शरीर को तुरंत एनर्जी देता है. इसे ऐसे ही खाएं या खजूर और दूध का मिल्क शेक बना कर पीना चाहिए. सेक्स पॉवर बढ़ाने में बहुत ही लाभकारी है खजूर का प्रयोग. 

प्याज़ के 25 फ़ायदे 

तो दोस्तों आज आपने जाना सेक्स पॉवर बढ़ाने वाले इन पांच फलों के बारे में. इनका इस्तेमाल कीजिये और ज़िन्दगी में सेक्स का मज़ा लीजिये. 


यहाँ विडियो में भी आप इसे देख-सुन सकते हैं 




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19 July 2016

प्याज़ के 25 फ़ायदे और चमत्कारी गुण | Pyaz Ke 25 fayde | Health benefits of onion




प्याज़ किसी परिचय का मोहताज नहीं है, यह हमारे किचन का अभिन्न अंग है. और इसका इस्तेमाल खाने में हर रोज़ होता है.

पर प्याज़ का इस्तेमाल आप खाना बनाने के अलावा कुछ बिमारियों में भी कर सकते हैं और इसका फायदा ले सकते हैं.

तो आईये जानते हैं प्याज़ के कुछ उपयोग जिसका इस्तेमाल बीमारी दूर करने में मदद करता है -


1. प्याज़ का रस किसी कपड़े में डालकर सूंघने से बंद नाक खुल जाती है

2. प्याज़ के रस को पानी में मिलाकर  लगाने से किल मुहांसों में फायदा होता है

3. बालों की जड़ों में प्याज़ का रस लगाने से बाल काले और मुलायम होते हैं और बालों का झाड़ना भी कम होता है

4. प्याज़ वीर्य की स्तम्भन छमता को बढ़ाता है, प्याज़ के रस में शहद मिलाकर खाने से वीर्य जल्दी निकलने से रोकता है.

5. खाने में प्याज़ का सलाद का इस्तेमाल करने से शीघ्रपतन में लाभ होता है और काम-शक्ति बढती है

6. दो चम्मच प्याज़ के रस में एक चम्मच शहद और एक चम्मच घी मिलाकर रोज़ रात में खाने से आप बिस्तर पर धमाल मचा सकते हैं

7. अगर पैरों में काँटा चुभ जाये तो प्याज़ का रस लगाकर पट्टी बाँधने से काँटा निकल जाता है

8. प्याज़ के रस में मिश्री मिलाकर चाटने से कफ़ की समस्या से जल्द निजात मिलता है

9. अगर पेशाब ठीक से नहीं आ रहा है तो पेट पर प्याज़ के रस की हल्की मालिश करने से फायदा मिलता है

10. दो चम्मच प्याज़ के रस में एक चम्मच शहद मिलकर पिने से सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार में आराम मिलता है


11. सुबह ख़ाली पेट दो चम्मच प्याज़ का रस पीने से पत्थरी की बीमारी में फायदा होता है

12. गठिया या जोड़ों के दर्द में प्याज़ के रस को सरसों के तेल में मिलकर मालिश करने से आराम मिलता है

13. प्याज़ के रस में बैक्टीरिया नाशक गुण होने की वजह से घाव पर लगाने से इन्फेक्शन से बचाता है

14. रुमाल में प्याज़ का रस डालकर सूंघने से नाक से खून आना या नकसीर बंद होता है

15. अगर मधुमक्खी काट ले तो प्याज़ का रस लगाने से जलन और दर्द से राहत मिलती है

16. प्याज़ में कैलोरी की मात्र कम होने से वज़न कम करने में लाभदायक है

17. हरे प्याज़ में एंटी inflamatory गुण होते हैं जिस से यह गठिया और अस्थमा को दूर करने में मदद करता है

18. कच्चा प्याज़ खाने से इन्सुलिन बनता है, इसलिए प्याज़ का सलाद डायबिटीज में फायदेमंद है

19. प्याज़ में पानी की मात्रा ज़्यादा होती है, इसलिए लू  लगने पर प्याज़ का रस पिने से फायदा होता है

20. प्याज़ में फाइबर अधिक होने से, इसे रोज़ कच्चा खाने पर digestive सिस्टम इम्प्रूव होता है मतलब पाचन तंत्र मजबूत बनता है

21. पाइल्स या बवासीर में सफ़ेद प्याज़ कच्चा खाने से फायदा होता है

22. कच्चे प्याज़ में मिथाइल सल्फाइड और एमिनो एसिड भी होते हैं जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल करने में मददगार है

23. प्याज़ में मौजूद फाइटोकेमिकल्स नींद को बढ़ाने में मददगार है. जिन्हें नींद न आती हो उन्हें रात में प्याज़ खाना चाहिए

24. प्याज़ को पानी में उबाल कर इसका पानी पिने से पेशाब की बीमारी दूर होती है

25. कच्चे प्याज़ में मौजूद विटामिन सी रिंकल्स को रोकने में मददगार है

तो दोस्तों आपने आज जाना प्याज़ के फ़ायदे. दूसरी और जानकारी के लिए, बिमारियों से छूटकारा पाने के घरेलू उपाय, आयुर्वेदिक फ़ॉर्मूले जानते रहने के लिए इस चैनल को सब्सक्राइब कीजिये 

18 July 2016

आँखों की गुहेरी दूर करने का टोटका और घरेलू ईलाज | How to get rid of eye stye



आंखों की पलकों के किनारों पर बालों की जड़ों में जो छोटी फुंसि निकलती है, उसे ही गुहेरी, अन्जन्हारी और अंग्रेजी में  Stye (स्टाई)  कहा जाता है।

गुहेरी होने पर आँखों में दर्द और परेशानी होती है। गुहेरी या अंजनहारी इन्फेक्शन के कारण फैलता है। इसे होने पर आंख में खुजली व जलन होती है जो बाद में मवाद भरे दानों का रूप ले लेती है।

 वैसे तो गुहेरी विटामिन A और D की कमी से निकलती है। लेकिन कभी-कभी कब्ज की वजह से  भी यह निकल सकती है या किसी और वजह से भी । लेकिन परेशान न हो क्‍योंकि कुछ घरेलू उपायों द्वारा इसका इलाज किया जा सकता है।

सबसे पहले जानते हैं इसे दूर करने का प्रभावी टोटका - 

जी हाँ दोस्तों इसे साधारण बोल चाल में टोटका कहते हैं पर असल में यह एक्यु पंक्चर टाइप की वैज्ञानिक पद्धति है.

किडनी और मूत्राशय की पत्थरी का घरेलू ईलाज 

इसके लिए आप एक नयी डिस्पोसेबल नीडल ले लीजिये, सिरिंज वाली निडिल जो इंजेक्शन देने के काम आती है.
अपने पैर के अंगूठे में आगे की तरह प्रिक कर एक दो बूंद ब्लड निकल लीजिये और फिर स्प्रिट लगाकर ब्लीडिंग बंद कर दीजिये.



यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है की अगर आपकी बायीं आँख में गुहेरी है तो दायें पैर के अंगूठे में प्रिक करना है. और अगर दायीं आँख में हो तो बाएं पैर में प्रिक करें.

और अगर दोनों आँखों में गुहेरी हो तो क्या?

तो फिर दोनों पैर के अंगूठे में प्रिक करना है.

बस इसे सुबह के टाइम एक बार ही ऐसा करना है. ऐसा करने से आप इस प्रॉब्लम से हमेशा के लिए छूटकारा पा लेंगे. दुबारा कभी गुहेरी, अन्जन्हारी या stye नहीं होगा. यक़ीन मानिये, मैंने कई लोगों पर इसका प्रयोग किया है और देखा है.


इसके अलावा आप कुछ घरेलू उपाय का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो इस प्रकार है -

अमरूद के पत्‍ते स्‍टाई के लिए बहुत अच्‍छे घरेलू उपाय माने जाते हैं। पत्‍तों में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पलक की सूजन और लाली को कम करने में मदद करते हैं।

 आँखों की गुहेरी होने पर गर्म पानी से दो या तीन अमरूद के पत्‍तों को धो लें। फिर साफ कपड़े को इस पानी में डूबोकर, अतिरिक्‍त पानी निचोड़ लें। फिर अमरूद के पत्‍तों को गर्म कपड़े में रखकर अच्‍छी तरह से लपेट लें। इसे हल्‍का ठंडा होने दें, और फिर उसमें से एक पत्‍ता बाहर निकाल लें और प्रभावित हिस्‍से पर लगा लें। और पांच मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। अन्‍य पत्तियों के साथ भी ऐसे ही करें। तीन से चार दिन के लिए दिन में दो बार इस उपाय को करें।

कैस्‍टर ऑयल

कैस्टर ऑयल में रिसिनोलेइक नामक एसिड पाया जाता है, जो एक एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में काम करता है। इन्‍हीं गुणों के कारण कैस्‍टर ऑयल बहुत प्रभावी ढंग से दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है।
 समस्‍या होने पर प्रभावित आंख के हिस्‍से को बेबी शैम्‍पू और गुनगुने पानी से धो लें। फिर पांच मिनट के लिए प्रभावित पलक पर गर्म सेक करें। अब पलक को उठाकर कैस्‍टर ऑयल को कॉटन की मदद से लगा लें। कुछ दिनो के लिए इस उपाय को नियमित रूप से दिन में दो बार दोहराये।

सेक्स पॉवर बढ़ाने का नुस्खा 

तो दोस्तों आपने जाना गुहेरी या Stye से हमेशा के लिए छुटकारा पाने का टोटका और घरेलू उपाय.

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आज के लिए इतना ही, दूसरी नयी जानकारी के साथ फिर मिलूँगा, तब तक हमारा चैनल देखते रहिये, सीखते रहिये और स्वस्थ रहिये.





17 July 2016

मोटापा कम करने का उपाय | How to reduce weight | Motapa kam karne ki dawa



आज आप जानेंगे मोटापा या ओबेसिटी दूर करने का शत प्रतिशत सफल आयुर्वेदिक योग, जिस से आप पेट कम कर मोटापा दूर कर सकते हैं और पतले और छरहरे बन सकते हैं.

मोटापा एक विश्वव्यापी समस्या है जिस से लगभग हर उम्र के लोग परेशान होते हैं. शरीर में फैट या चर्बी बढ़ने की वजह से मोटापा होता है.

आज की लाइफ स्टाइल और खान-पान मोटापा को बढ़ाने का मुख्य कारण है. शारीरिक कार्य कम करना, फ़ास्ट फ़ूड और जंक फ़ूड का इस्तेमाल मोटापा को बढाता है. ज़्यादा मोटा होना मतलब, बिमारियों को बुलावा देना.
शरीर में चर्बी बढ़ने से सबसे पहले तो पेट निकलता है और कमर का साइज़ बढ़ जाता है. बॉडी सुन्दर नहीं दिखती और देखने में भद्दा लगता है. मोटे लोगों को चलने फिरने के साथ रोज़मर्रा के काम में भी परेशानी होती है.

पत्थरी का घरेलू ईलाज 

मोटे लोगों को कुछ लोग कई तरह के उप नामों से भी पुकारते हैं, जो की ग़लत बात है.
अगर आप एक्सरसाइज करते हैं, योगा करते है तो मोटापे से बच सकते हैं. साथ ही साथ खान-पान पर नियंत्रण रखना चाहिए.

आईये अब जानते हैं मोटापा दूर करने का कारगर घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय-

आपने यू ट्यूब और इन्टरनेट पर मोटापा दूर करने, पेट कम करने के तरह तरह के उपाय देखे होंगे. लोग तरह - तरह के दावे करते हैं कि पांच दिन में इतना kg वज़न कम होगा, पंद्रह दिन में इतना kg वज़न कम होगा वगैरह-वगैरह.

 पर सच्चाई कुछ और होती है. सच तो ये है कि मोतापा दूर करना सबसे मुश्किल काम है. अगर सही उपाय और आयुर्वेदिक शास्त्रीय औषधियों का प्रयोग किया जाये तो कुछ दिनों में मोटापा दूर किया जा सकता है .

साइटिका का ईलाज 

  आज जो मैं यहाँ आयुर्वेदिक योग बताऊंगा वो बड़ा ही कारगर है और परीक्षित है. आपने अजवाइन के बारे में सुना ही होगा. अजवाइन का पानी मोटापा दूर करने में मदद करता है.

रोज़ सुबह ख़ाली पेट अजवाइन का पानी एक ग्लास और इसमें एक चम्मच शहद मिलकर पिने से लाभ होता है. पचास ग्राम अजवाइन को एक गिलास पानी में भिगो दें और सुबह छान कर शहद मिला कर पी जाएँ. ये तो अजवाइन का पानी इस्तेमाल करने का नार्मल तरीका है.


पर मैं जो लोगों को सलाह देता हूँ वो इस प्रकार है - 

एक बाड़ा जार लीजिये जिसमे कम से कम तीन लीटर पानी आ जाये या इतना पानी आ जाये जितना की आप एक दिन में पीते हैं. इसमें एक सौ ग्राम साफ़ की हुयी अजवाइन डाल दीजिये और रात भर पड़ा रहने दें, अगले दिन सुबह से इसी पानी को पीना है. मतलब जब भी प्यास लगे और जब भी पानी पीने की ज़रूरत हो इस पानी को ही पियें.



रात भर भीगा रहने पर अजवाइन ख़ुद जार के तले में बैठी रहती है, छानने की ज़रूरत नहीं होती. सौ ग्राम अजवाइन का इस्तेमाल दो दिन तक ही करें. अगले दिन फिर नया अजवाइन डालना चाहिए. ये तो हो गया साधारण प्रयोग और आसान सा घरेलू उपाय.

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अब जानते हैं आयुर्वेदिक योग या फार्मूला जिसे थोड़ी मेहनत से बनाया जा सकता है -

इसके लिए आपको चाहिए -

गिलोय, वायविडंग, मुलहठी, बहेड़ा छिल्का और आमला 25-25 ग्राम
बड़ी इलायची और इन्द्र जौ - 10-10 ग्राम

बड़ी हर्रे छिल्का - 50 ग्राम और शुद्ध गुगुल - 200 ग्राम



इन सभी को कूट पिस कर चूर्ण बना लीजिये और एक से डेढ़ ग्राम की मात्रा में सुबह शाम शहद में मिलाकर चाट लें और ऊपर से गर्म पानी पियें.

इसके इस्तेमाल से मोटापा दूर होता है, पेट कम होता है और शरीर की एक्स्ट्रा चर्बी घट जाती है. किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता. बड़ा ही कारगर फार्मूला है.

(शुद्ध गुगुल या शोधित गुगुल मार्केट में मिल सकता है, जड़ी-बूटी विक्रेता के यहाँ साधारणतः जो गुगुल मिलता है वो शोधित नहीं होता. खाने के लिए शुद्ध गुगुल का ही प्रयोग होता है, अशोधित गुगुल जलाने या हवन करने के काम अत है. गुगुल शुद्ध करने की एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया होती है. त्रिफला और गिलोय के क्वाथ में गुगुल को उबाल कर शुद्ध किया जाता है, इसकी पूरी जानकारी के लिए हम से पूछ सकते हैं. बहेड़ा छिल्का और हर्रे छिल्का जो बताया है इसका मतलब बहेड़ा और हर्रे को तोड़ कर इसकी गुठली निकल देना है और फल का मांसल भाग ही इस्तेमाल करना है )

अगर इसे आप नहीं बना सकते तो दुसरे शास्त्रीय योग का इस्तेमाल कीजिये जो मैं आगे बताने जा रहा हूँ .

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अब मैं आपको बताने जा रहा हूँ शास्त्रीय आयुर्वेदिक योग. शास्त्रीय योग वो होते हैं जिनका वर्णन आयुर्वेद की महान किताबों जैसे चरक संहिता, शुश्रुत संहिता, शारंगधर संहिता इत्यादि में ऋषि, महर्षियों ने कीया है. शास्त्रीय योग या फार्मूले कभी फ़ेल नहीं होते, टेस्टेड होते हैं. हज़ारों साल पहले तब भी काम करते थे और और आज भी काम करते हैं.

तो आईये जानते हैं -

इसके लिए आपको इन तीन दवाओं को लेना है.

योगराज गुग्गुल  

त्रिफला गुग्गुल 

और मेदोहर गुग्गुल 

तीनों दो-दो गोली सुबह, दोपहर और शाम गर्म पानी से लेना है. ये जो तीनों गोली है इसे दांत से थोड़ा दबाकर निगलना चाहिए. इसका इस्तेमाल आप लगातार लम्बे समय तक भी कर सकते हैं.

इसका इस्तेमाल तब तक कीजिये जब तक की आपका वज़न नार्मल न हो जाये. बिलकुल सेफ और हानिरहित योग है, कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता और शत-प्रतिशत कारगर है. इसके साथ अगर अजवाइन का पानी भी पियें जल्दी फायदा दिखेगा.

इस आयुर्वेदिक योग के इस्तेमाल से मोटापा तो दूर होता ही है और साथ में शरीर के दुसरे रोग भी दूर हो जाते हैं. ये तीनों गुग्गुल बने बनाये मार्केट में मिल जाते हैं, आयुर्वेदिक कंपनियां इसे बनाती हैं.

तो दोस्तों, अब चिंता न करें. अगर आपको, आपके फॅमिली में किसी को या दोस्तों रिश्तेदारों में किसी को मोटापे की समस्या है तो इसका इस्तेमाल कीजिये.

इसके बारे में कोई भी सवाल हो तो कमेंट से पूछिये.

 किसी और बीमारी के बारे में घरेलू उपाय और दवा की जानकारी चाहिए तो इस वेबसाइट को सब्सक्राइब कीजिये और हमसे पूछिये.

जानकारी अच्छी लगी तो इस पोस्ट को लाइक कीजिये और शेयर कीजिये.

आज के लिए इतना ही, दूसरी नयी जानकारी के साथ फिर मिलूँगा. तब तक के लिए बाय - बाय.



परहेज़ :-

दवा के साथ-साथ परहेज़ भी करना चाहिए, तब ही मोटापे की समस्या से जल्दी मुक्ति मिलती है. इन बातों का ख्याल रखें -

 चावल, आलू, आलू चिप्स, शक्कर, फ़ास्ट फ़ूड, जंक फ़ूड, और ऑइली फ़ूड न खाए. रोटी का ही इस्तेमाल करें, और भूक से कम खाएं. खाने के तुरंत बाद पानी न पियें. आधा-एक घंटा बाद पानी पी सकते हैं. सॉफ्ट ड्रिंक्स का भी इस्तेमाल न करें.



13 July 2016

चश्मा छुड़ाने का असरदार घरेलू उपाय | how to improve eyesight naturally? Chashma Chhorane Ka Gharelu Upaay



वेलकम मित्रों,

आज आप जानेंगे आँखों की रौशनी तेज़ करने और चश्मा छुड़ाने का असरदार घरेलू उपाय.

उम्र के एक पड़ाव पर शरीर के कई अंग पूरी तरह से काम नहीं करते हैं, यह हम सभी जानते हैं पर अगर कम उम्र में ही ऐसा होता है तो ज्यादा परेशानी होती है. बड़े तो बड़े आपने देखा होगा कि काफी कम उम्र के छोटे बच्चे भी मोटे - मोटे चश्मे लगा कर स्कूल जाते हुवे दिखाई देते हैं. आँखों की रौशनी में कमी कई कारण से हो सकती है. सही खान पान और सही ईलाज से इसे ठीक किया जा सकता है.

इसे भी देखें- पाचन शक्ति कैसे ठीक करें?

तो आईये जानते हैं कुछ घरेलू उपाय जिस से आप आँखों की रौशनी को तेज़ कर सकते हैं और चश्मा से छूटकारा पा सकते हैं. सबसे पहले जानते हैं आँखों में डालने के लिए ड्राप जिसका नाम हमने दिया है 'चश्मा उतार लोशन'  

आप इसे ख़ुद घर पर बना सकते हैं और इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आपको चाहिए ये सब -
पीले सरसों का तेल , सफ़ेद प्याज़ का रस  और शहद  तीनों को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह मिक्स कर शीशी में ड्रॉपर लगा कर रख लीजिये. यहाँ पर ध्यान देने वाली बात ये है कि सरसों का तेल बिलकुल प्योर होना चाहिए और छना हुवा, सफ़ेद प्याज़ का रस ख़ुद बना लें जूसर से और अच्छे से फ़िल्टर कर  लें. शहद भी प्योर होना चाहिए.

 तीनों लिक्विड है पर इसे नाप कर नहीं बल्कि वज़न से लेना है वो इसलिए कि इस सब की डेंसिटी अलग-अलग है. दस मिलीलीटर सरसों तेल के वज़न से ज़्यादा वज़न होता है दस मिलीलीटर शहद का. एक बार में अधिक मात्र में न बनायें. पांच-पांच ग्राम लेकर इसका कॉम्बिनेशन बनाईये, फिर खत्म हो जाये तो दुबारा बनायें.

अच्छे से फ़िल्टर किये हुवे इस आई ड्राप को दो-दो बूंद आखों में सुबह शाम डालिए और फिर चमत्कार देखिये. इस ड्राप को आँखों में डालने से थोड़ी देर तक आँखों में काफी जलन होती है, लगातार डालते रहने से कुछ दिनों में धीरे-धीरे जलन कम होती है. बच्चों पर इसका इस्तेमाल बड़ा ही सावधानीपूर्वक करें.

एक महिना तक लगातार इस्तेमाल करने से फायदा दिखने लगता है और लगातार कुछ महीनो के इस्तेमाल से चश्मा की ज़रूरत नहीं रहती. बड़ा ही कारगर फार्मूला है, अगर आपकी नज़र कमज़ोर है और चश्मा से छूटकारा चाहते हैं तो इसका इस्तेमाल कीजिये. इसके साथ अगर कुछ खाने की दवा भी ली जाये तो फायदा जल्दी मिलेगा.

तो आईये अब जानते हैं आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिए खाने की दवा- 

 इसके लिए आप एक साधारण सा घरेलू  कॉम्बिनेशन बना लीजिये और रोज़ इसका इस्तेमाल कीजिये. सौंफ़, बादाम और मिश्री तीनों बराबर मात्रा में लेकर कूट पिस कर पाउडर बना लीजिये और रोज़ एक चम्मच एक बार या सुबह शाम दूध के साथ लीजिये. इसका लगातार इस्तेमाल आँखों की रौशनी को तेज़ करता है और साथ ही साथ आपके हेल्थ को ठीक करता है. यादाश्त या मेमोरी पॉवर को बढ़ता है, दिमाग को ताक़त देता है .

ये सब  तो हो गया घरेलू उपाय, अगर आप आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इसके लिए आयुर्वेद की क्लासिकल दवाओं में सब से ऊपर नाम आता है - सप्तामृत लौह और त्रिफला घृत का. कई सारी नामी कम्पनियाँ इसे बनाती हैं, आप इसे बना बनाया मार्केट से खरीद सकते हैं.

सप्तामृत लौह एक-एक टेबलेट सुबह शाम शहद से लीजिये और त्रिफला घृत एक-एक चम्मच सुबह शाम. चश्मा उतार लोशन के साथ-साथ अगर बादाम वाला घरेलू नुस्खा और ये दो आयुर्वेदिक दवा का इस्तेमाल किया जाय तो बहुत जल्द फायदा होता है, फायदा ऐसा होगा की आप ख़ुद हैरान रह जायेंगे.

इसके इस्तेमाल से पहले आँखों का चेक अप करा कर पता कर लें कि चश्मे का नंबर कितना है और  फिर दो-तिन महिना इन दवाओं का इस्तेमाल करने के बाद दुबारा चेक करा कर रिजल्ट देख सकते हैं.

इसे भी देखें- एसिडिटी की आयुर्वेदिक दवा 

तो दोस्तों आज आपने जाना चश्मा उतारने का उपाय, इसके बारे में कोई भी सवाल हो तो कमेंट से पूछिये. किसी और बीमारी के बारे में घरेलू उपाय और दवा की जानकारी चाहिए तो इस चैनल को सब्सक्राइब कीजिये और हमसे पूछिये.

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