भारत की सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक हिन्दी वेबसाइट लखैपुर डॉट कॉम पर आपका स्वागत है

30 नवंबर 2023

Avipattikar Churna Ke Fayde | अविपत्तिकर चूर्ण कैसे यूज़ करें?

avipattikar churna benefits in hindi

अविपत्तिकर चूर्ण एसिडिटी और पित्त विकारों के लिए यूज़ किया जाता है, यह आप सभी जानते हैं. कई लोगों को इस से एसिडिटी में फ़ायदा नहीं होता है. फ़ायदा क्यूँ नहीं होता है? यह भी मैं बताऊंगा.

अविपत्तिकर चूर्ण का कम्पोजीशन क्या है? 

इसे बनाने का तरीका क्या है?

इसका डोज़? 

इसके फ़ायदे क्या हैं? क्या इसके कुछ नुकसान या साइड इफेक्ट्स भी हैं? 

और यदि आपने इसका सेवन किया तो लाभ क्यूँ नहीं हुआ? इसका दूसरा विकल्प क्या है? 

तो आईये इन सभी चीजों के बारे में विस्तार से जानते हैं - 

अविपत्तिकर चूर्ण के घटक या कम्पोजीशन 

आयुर्वेदिक ग्रन्थ भैषज्य रत्नावली का योग है. इसके घटक या कम्पोजीशन की बात करूँ तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है सोंठ, काली मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आँवला, नागरमोथा, विडनमक, वायविडंग, छोटी इलायची और तेजपात प्रत्येक एक-एक तोला, लौंग 11 तोला, निशोथ 44 तोला और मिश्री 66 तोला. 

इन्ही जड़ी-बूटियों को पीसकर बनाया गया पाउडर है अविपत्तिकर चूर्ण. अनेकों ब्राण्ड का मार्केट में यह बना हुआ मिल जाता है, बेस्ट क्वालिटी वाले का लिंक दे रहा हूँ. 

अविपत्तिकर चूर्ण ऑनलाइन ख़रीदें 

निशोथ को ही त्रिवृत, विधारा जैसे नामों से भी जाना जाता है. इसलिए कंफ्यूज न हों, क्यूंकि कोई कम्पनी इसके कम्पोजीशन में निशोथ लिखेगी, कोई विधारा लिखेगी तो कोई त्रिवृत लिखेगी. सभी एक ही चीज़ है. 

ग्रन्थ का मूल श्लोक आप पढ़ सकते हैं, जिसमे इसकी निर्माण विधि और फ़ायदे के बारे में श्लोक में बताया गया है.

avipattikar churna ingredients

अविपत्तिकर चूर्ण का डोज़ यानी की मात्रा और सेवन विधि 

तीन से छह ग्राम सुबह-शाम ठन्डे पानी, नारियल पानी या धारोष्ण दूध के साथ. 

अविपत्तिकर चूर्ण के गुण या प्रॉपर्टीज 

यह पित्त शामक है, पित्त और वात को बैलेंस करता है. 

अविपत्तिकर चूर्ण के फ़ायदे 

यह पैत्तिक विकारों यानी पित्त की विकृति से उत्पन्न समस्याओं को दूर करता है. 

एसिडिटी, पेट दर्द, क़ब्ज़, भूख की कमी इत्यादि में इसके सेवन से लाभ होता है. 

प्रमेह रोग में भी इसके सेवन से लाभ होता है. यानी यूरिनरी सिस्टम में भी इसका असर होता है.

काफ़ी मात्रा में निशोथ मिला होने से यह क़ब्ज़ को भी दूर कर देता है. 


अविपत्तिकर चूर्ण के साइड इफेक्ट्स 

वैसे तो यह सुरक्षित औषधि है पर कई लोगों को यह सूट नहीं करती है. कुछ लोगों को इस से पतले दस्त, पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्या भी हो सकती है. 

लॉन्ग की काफ़ी मात्रा होने से यह कुछ लोगों को सूट नहीं करती है. बच्चों को और प्रेगनेंसी में इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

शुगर, BP, अल्सरेटिव कोलाइटिस, दस्त, और Sensitive Stomach वाले लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

आपने इसका सेवन किया तो लाभ क्यूँ नहीं हुआ? 

अगर आप इस यूज़ कर चुके हैं और फ़ायदा नहीं हुआ तो इसका कारण हो सकता है इसका आपको सूट नहीं करना. यदि एसिडिटी के साथ गैस भी समस्या हो तो इसमें शंख भस्म मिलाकर लेना चाहिए. 

साथ में सूतशेखर रस, कपर्दक भस्म जैसी औषधि मिक्स कर उचित अनुपान से लेने से ही लाभ होता है. 

इसका दूसरा विकल्प क्या है? 

इसका दूसरा विकल्प है 'अम्लपित्तान्तक चूर्ण', विकल्प नहीं बल्कि इस से ज़्यादा असरदार और सभी को सूट भी करता है. 

अम्लपित्तान्तक चूर्ण एसिडिटी और हाइपर एसिडिटी के लिए चीप एंड बेस्ट मेडिसिन है. 





25 नवंबर 2023

Gokshuradi guggul ke fayde | गोक्षुरादि गुग्गुल की सम्पूर्ण जानकारी

gokshuradi gugul ke fayde

गोक्षुरादि गुग्गुल के बारे में आज कुछ ऐसी जानकारी देने वाला हूँ जिसे कोई नहीं बताएगा. 

इसके गुण या प्रॉपर्टीज क्या हैं? 

इसके क्या क्या फ़ायदे हैं? किन बीमारियों को यह दूर करता है?

गोक्षुरादि गुग्गुल का डोज़ क्या है? इसे कैसे यूज़ करें? 

और क्या इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी है? 

तो आईये इन सभी के बारे में सबकुछ विस्तार से जानते हैं - 

गोक्षुरादि गुग्गुल 


जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है गोक्षुर या गोखुरू नाम की बूटी ही इसका मुख्य घटक यानि की मेन इनग्रीडेंट है.

इसके अलावा गुग्गुल और दूसरी जड़ी-बूटियाँ भी इसमें होती हैं. 

गोक्षुरादि गुग्गुल के घटक या कम्पोजीशन 

इसके कम्पोजीशन की बात करूँ तो आयुर्वेदिक ग्रन्थ शारंगधर संहिता के अनुसार इसे गोक्षुर पँचांग, शुद्ध गुग्गुल, त्रिकटु, त्रिफला, नागरमोथा और घी या एरण्ड तेल के मिश्रण से बनाया जाता है. 
gokhsurad guggul ingredients

यह मार्केट में कई सारे ब्राण्ड का मिल जाता है. बेस्ट क्वालिटी का होम मेड गोक्षुरादि गुग्गुल का लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रहा हूँ, जहाँ से आप ऑनलाइन खरीद सकते हैं. आज की तारीख में 100 ग्राम का प्राइस है सिर्फ़ 430 रुपया. यदि किन्ही को गोक्षुरादि गुग्गुल किलो के रेट में चाहिए तो भी मिल जायेगा. 


गोक्षुरादि गुग्गुल के गुण या प्रॉपर्टीज 

आयुर्वेदानुसार यह वात दोष को शांत करता है, इसमें रसायन गुण भी हैं. 
गोक्षुरादि गुग्गुल का डोज़ 
दो गोली रोज़ दो से तीन बार तक पानी से. या गोक्षुर क्वाथ, उशिरासव या रोगानुसार उचित अनुपान से लेना चाहिए

किन बीमारियों को यह दूर करता है?

यूरिनरी सिस्टम के कोई भी रोग, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, प्रमेह, रुक-रुक कर पेशाब होना, पथरी, पेशाब रुक जाना, महिलाओं का प्रदर रोग, पुरुषों का शुक्र रोग और वीर्य विकार, वातरक्त और मधुमेह जैसे रोगों में लाभकारी है. इस दवा का असर मूत्राशय, मूत्र नली और वीर्यवाहिनी शिराओं पर अधीक होता है. 

आईये अब आसान भाषा में इसके फ़ायदे जानते हैं- 

पेशाब की जलन हो, पेशाब का पीलापन हो, रुक-रुक कर पेशाब आता हो, खुलकर पेशाब नहीं होता हो, UTI हो, सुज़ाक हो, बून्द-बून्द पेशाब आता हो, पेशाब करने में बहुत तकलीफ़ होती हो,बहुत दर्द होता हो तो इसका यूज़ करना चाहिए.

 यानी यह समझ लीजिये कि किसी भी वजह से पेशाब की प्रॉब्लम हो तो इसका प्रयोग करें. यह खुलकर पेशाब लाने वाली जानी-मानी दवा है.

किडनी की पत्थरी हो, ब्लैडर की पत्थरी हो, किडनी का दर्द हो, पेडू का दर्द हो, पेडू फूल जाये तो गोक्षुरादि गुग्गुल यूज़ करने की सलाह दी जाती है.

महिलाओं के प्रदर यानी लिकोरिया की समस्या हो, हैवी पीरियड होता हो तो भी दूसरी दवाओं के साथ इसका प्रयोग किया जाता है.

पुरुषों के प्रमेह रोग, धात गिरना, वीर्य विकार, स्पर्म काउंट की कमी जैसी प्रॉब्लम में भी इसका प्रयोग करने से प्रॉब्लम दूर होकर बॉडी स्ट्रोंग हो जाती है. 

जोड़ों का दर्द, गठिया, अर्थराइटिस में भी इसे सहायक औषधि के रूप में प्रयोग कराया जाता है.

गोक्षुरादि गुग्गुल के साइड इफेक्ट्स 

यह सुरक्षित दवा है, इसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता है. अगर पहले से आप कोई अंग्रेज़ी लेते हैं इसे कम से कम 30 मिनट के गैप के बाद ही यूज़ करें, या फिर अपने डॉक्टर से सलाह लेकर यूज़ करें.

होम्योपैथिक दवा लेते हुए भी इसका सेवन कर सकते हैं, यह किसी तरह का इंटरेक्शन नहीं करती. 




18 नवंबर 2023

yograj guggul ke fayde | योगराज गुग्गुल | yograj guggul benefits

 

yograj guggul benefits

योगराज गुग्गुल को आप जानते ही हैं, यह आयुर्वेद की बहुत ही प्रसिद्ध दवाओं में से एक है. आज मैं योगराज गुगुल के बारे में कुछ ऐसे सीक्रेट और ऐसे-ऐसे यूज़ बताने वाला हूँ जिसके अक्सर वैद्यगण छुपाते हैं. तो आईये जानते हैं कि योगराज गुग्गुल क्या है? इसका कम्पोजीशन, इसे बनाने का तरीका और गुण उपयोग के बारे में सबकुछ विस्तार से - 

योगराज गुग्गुल 

मतलब योगो का राजा, या दुसरे शब्दों में कहूँ तो King of the Ayurvedic Medicine 

यह वाकई में किंग है राजा है, बहुत सारी बीमारीओं में आँख मूँद कर यूज़ कर सकते हैं. और लम्बे समय तक भी यूज़ कर सकते हैं, छह महिना से दो-चार साल तक लगातार यूज़ करने से भी कोई प्रॉब्लम नहीं होती बल्कि रोग समूल नष्ट होते हैं.

सबसे जानते हैं योगराज गुग्गुल के घटक या कम्पोजीशन -

इसे टोटल 28 तरह की चीज़ें मिलाकर बनाया जाता है. इसके कम्पोजीशन की बात करूँ तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है-

चित्रकमूल, पीपरामूल, अजवायन, काला जीरा, विडंग, अजमोद, सफ़ेद जीरा, देवदार, चव्य, छोटी इलायची, सेंधा नमक, कूठ, रास्ना, गोखरू, धनियाँ, हर्रे, बहेड़ा, आँवला, नागरमोथा, सोंठ, मिर्च, पीपल, दालचीनी, खस, यवक्षार, तालीसपत्र और तेजपत्र प्रत्येक एक-एक तोला या 10 ग्राम. त्रिफला और गिलोय क्वाथ से शुद्ध किया हुआ शोधित गुग्गुल 270 ग्राम और थोड़ी मात्रा में देशी गाय का घी. 

योगराज गुग्गुल निर्माण विधि- 

सभी जड़ी-बूटियों का बारीक कपड़छन चूर्ण बना लें, इसके बाद शोधित गुग्गुल में चूर्ण मिलाकर इमामदस्ते में डालकर चिपके नहीं इसके लिए थोड़ा-थोड़ा घी मिक्स करते हुए इतना कुटाई करें की गोली बनाने योग्य हो जाये. इसके बाद 500mg की इसकी गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यही योगराज गुग्गुल है. पुरे विधि विधान से सही तरीके से शुद्ध किये गए गुग्गुल में प्रोसेस होने से इसकी गोलियां बिल्कुल काले रंग की और सोन्धी खुशबु वाली बनती हैं, जो की असरदार होती हैं. सस्ता बेचने के चक्कर में कुछ कम्पनी सही विधि से नहीं बनाती है और सही रिजल्ट भी नहीं मिलता. 

योगराज गुग्गुल ऑनलाइन ख़रीदें 

योगराज गुग्गुल की मात्रा और सेवन विधि -

दो से छह गोली रोज़ दो-तीन बार तक आप इसे ले सकते हैं, उचित अनुपान के साथ. बच्चों को कम डोज़ में लेना चाहिए, इसे बच्चे, बड़े,बूढ़े सभी लोग यूज़ कर सकते हैं.

योगराज गुग्गुल के गुण या प्रॉपर्टीज 

यह वात नाशक है, वातरोग के लिए इसे सभी लोग जानते हैं. पर असल में यह सभी तरह के रोगों को दूर करता है, क्यूंकि यह त्रिदोष नाशक है. विशेस रूप से वात और आम दोष को नष्ट करता है. 

योगवाही है यानी जिस भी दवा के साथ यूज़ करेंगे यह उसकी पॉवर को बढ़ा देता है. रसायन  है और धातुओं का पोषण करता है. 

योगराज गुग्गुल के फ़ायदे 

अगर मैं सीधे तौर पर और आसान भाषा कहूँ तो आपको कोई भी रोग क्यूँ न हो, आप इसका सेवन कर सकते हैं. 

इसे हर घर में होना चाहिए, घरेलु दवा के तरह आप इसे यूज़ कर सकते हैं. कहाँ, कब और कैसे इसे यूज़ कर सकते हैं यही सब आगे बताने वाला हूँ - 

जोड़ों का दर्द, गठिया, आमवात, कमर दर्द जैसे रोगों के लिए इसे सभी लोग यूज़ करते हैं.

आपको अगर बदन दर्द हो जाये, मसल्स में दर्द हो जाये, थकावट हो जाये तो भी इसे गर्म पानी से ले सकते हैं. 

कहीं पर इन्फ्लामेशन हो जाये, सुजन हो जाये तो योगराज गुग्गुल को गर्म पानी से लिजिए.

सर्दी-जुकाम, हो जाये, गला ख़राब हो जाये, ठण्ड लग जाये तो भी योगराज गुग्गुल का सेवन कर सकते हैं. 

पेट में गैस बनती हो, गोला बनता हो तो योगराज गुग्गुल का इस्तेमाल किजिए

खाँसी हो तो भी इसे यूज़ करना चाहिए, यह अंग्रेज़ी एन्टी बायोटिक की तरह काम करती है वह भी बिना साइड इफ़ेक्ट के.

महिला पुरुष के Reproductive सिस्टम की कोई भी प्रॉब्लम हो तो इसे यूज़ कर सकते हैं. महिलाओं के पीरियड की प्रॉब्लम, पुरुषों के स्पर्म काउंट की प्रॉब्लम सभी में इसे यूज़ कर सकते हैं. किसी भी कारन से महिलाओं को बाँझपन हो तो उसमे भी यह असरदार है.

क़ब्ज़ या Constipation की समस्या हो तो यूज़ कर सकते हैं.

बवासीर, भगंदर में भी इसे यूज़ करना चाहिए.

पेट के कीड़ों को भी योगराज गुग्गुल दूर करता है.

यह बॉडी से टोक्सिंस या विषैले तत्वों को दूर करता है और शरीर को उचित पोषण भी देता है. 

योगराज गुग्गुल बॉडी के एक्स्ट्रा फैट को दूर करता है, मोटापा में इसे अवश्य  यूज़ करना चाहिए. 

यह आपके मेटाबोलिज्म को सही करता है, इम्युनिटी को बढ़ाता है. 

अगर आपके एरिया में वायरल फ्लू, वायरल बुखार चल रहा है तो इस से बचने के लिए भी योगराज गुग्गुल को गुनगुने पानी से यूज़ कर सकते हैं.

ब्रेन के लिए भी अच्छा है, यह ब्रेन के टिशुज़ को ताक़त देता है, नर्व को ताक़त देता है, मेमोरी पॉवर भी दुरुस्त करता है. इसे एक अच्छा Nervine टॉनिक भी कह सकते हैं. 

दमा या अस्थमा के रोगियों को भी योगराज गुग्गुल का सेवन करना चाहिए.

बहुमूत्र या बार-बार पेशाब आने की समस्या में भी असरदार है. 

यह रस-रक्तादि सभी धातुओं को पुष्टि करता है और शरीर में जमे हुए सभी दोषों को दूर कर देता है. 

अब आप समझ गए होंगे कि यह कितने काम की दवा है, ऐसे ही नहीं इसे योगराज यानी योगों का राजा कहा गया है. 

किसी भी रोग में, कोई भी बीमारी क्यूँ न हो आप इसे यूज़ कर सकते हैं उचित अनुपान से. 

उचित अनुपान क्या है? 

उचित अनुपान वह औषधि है जो उस रोग को दूर करने में सहायता करती है. जैसे पित्त विकारों में गिलोय, धनियाँ का काढ़ा, एलो वेरा जूस के साथ. कफ के रोगों में अदरक का रस, तुलसी क्वाथ के साथ. इसी तरह से वात रोगों में लेना है तो दशमूल क्वाथ, रास्ना क्वाथ के साथ. 

योगराज गुग्गुल के साइड इफ़ेक्ट 

इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है, मैंने एक साल तक रेगुलर लोगों को खिलाकर देखा है, कोई प्रॉब्लम नहीं होती है. इसे दो चार साल तक भी यूज़ कर सकते हैं. पित्त प्रकृति और बहुत गर्म तासीर के लोगों को इसे गिलोय के रस, धनियाँ क्वाथ, एलो वेरा जूस, दूध या अमृतारिष्ट इत्यादि के साथ लेना चाहिए.