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10 July 2019

Shringarabhra Ras | श्रृंगाराभ्र रस के गुण, उपयोग एवम प्रयोग विधि


आज की जानकारी है क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन श्रृंगाराभ्र रस के बारे में जिसमे आप जानेंगे इसके घटक या कम्पोजीशन, निर्माण विधि और गुण-उपयोग की पूरी जानकारी - 

सबसे पहले नज़र डालते हैं इसके कम्पोजीशन या घटक पर- अभ्रक भस्म इसका मुख्य घटक होता है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है कृष्णाभ्रक भस्म 80 ग्राम, लौंग, दालचीनी, नागकेशर, तेजपात, कपूर, जावित्री, नेत्रवाला, गजपीपल, जटामांसी, तालिसपत्र, कूठ, धायफुल प्रत्येक 3-3 ग्राम, सोंठ, मिर्च, पीपल, आँवला, बहेड़ा प्रत्येक डेढ़-डेढ़ ग्राम, छोटी इलायची के बीज और जायफल 6-6 ग्राम, शुद्ध गंधक 10 ग्राम और शुद्ध पारा 6 ग्राम

श्रृंगाराभ्र रस निर्माण विधि - 

बनाने का तरीका यह है कि सबसे पहले शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक को खरलकर कज्जली बना लें और इसके बाद जड़ी-बूटियों का बारीक चूर्ण मिक्स कर, अंत में अभ्रक भस्म मिलाकर अच्छी तरह घुटाई कर पानी के संयोग से मटर के आकार की गोलियाँ बनाकर छाया में सुखाकर रख लिया जाता है. यही श्रृंगाराभ्र रस है. 

श्रृंगाराभ्र रस के गुण -

इसके गुणों या प्रॉपर्टीज की बात करें तो यह Anti tussive, Expectorant, Anti biotic, Anti allergic, Anti inflammatory, टॉनिक और रसायन जैसे कई तरह के गुणों से भरपूर है. वात, पित्त और कफ़ तीनों दोषों पर इसका असर होने से यह त्रिदोष नाशक है.

श्रृंगाराभ्र रस के फ़ायदे- 

इसके फायदों की बात करें तो इसका सबसे ज़्यादा असर फेफड़े और श्वसन तंत्र पर ही होता है. खाँसी और अस्थमा की यह पॉपुलर दवाओं में से एक है.

खाँसी, बलगम, अस्थमा, कफ़ जमा होना, सफ़ेद चिकना कफ़ निकलना, सीने या पसली में दर्द होना, सर भरी होना, साँस लेने में तकलीफ़ होना, कमज़ोरी इत्यादि में उचित अनुपान से लेने अच्छा लाभ होता है.

श्रृंगाराभ्र रस की मात्रा और सेवन विधि -

एक-एक गोली सुबह-शाम अदरक के रस और शहद के साथ या फिर रोगानुसार उचित अनुपान के साथ लेना चाहिए. रसायन औषधि है तो डॉक्टर की देख रेख में लेना ही समझदारी है. आयुर्वेदिक कंपनियों का यह मिल जाता है, ऑनलाइन ख़रीदने का लिंक दिया गया है. 


इसे भी जानिए - 





06 July 2019

Jatiphaladi Vati(Stambhak) | जातिफलादि वटी (स्तंभक)


आज की जानकारी है जातिफलादि वटी(स्तंभक) के बारे जो वीर्यस्तम्भन करने वाली औषधि है. तो आईये जानते हैं इसके बारे में विस्तार से - 

आपमें से कई लोग जानते होंगे कि जातिफलादि वटी दो तरह की होती है. एक जातिफलादि वटी ग्राही या संग्रहणी वाली और दूसरी जातिफलादि वटी(स्तंभक) तो आज की जानकारी है जातिफलादि वटी(स्तंभक) के बारे में, सबसे पहले जानते हैं -

जातिफलादि वटी(स्तंभक) के घटक या कम्पोजीशन - 

यह अफीम प्रधान औषधि है, इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे  बनाने के लिए चाहिए होता है जायफल, अकरकरा, सोंठ, शीतल चीनी, केशर, लौंग और सफ़ेद चन्दन प्रत्येक एक-एक भाग और शोधित अफ़ीम चार भाग

बनाने का तरीका यह होता है कि जड़ी-बूटियों का बारीक कपड़छन चूर्ण कर लें, केशर को खरल में डालकर पिस लें, इसके बाद शुद्ध अफ़ीम और जड़ी-बूटियों का चूर्ण अच्छी तरह मिक्स कर थोड़ा पानी मिक्स कर अच्छी तरह घुटाई कर दो-दो रत्ती या 250mg की गोलियाँ बनाकर छाया में सुखाकर रख लें.

जातिफलादि वटी(स्तंभक) के गुण 

आयुर्वेदानुसार यह स्तम्भक और संकोचक है, वात वाहिनी और शुक्रवाहिनी नाड़ियों पर इसका सबसे ज़्यादा असर होता है. 

जातिफलादि वटी(स्तंभक) के फ़ायदे 

स्तम्भन शक्ति बढ़ाने के लिए ही इसका प्रयोग किया जाता है. यह शीघ्रपतन नहीं होने देती.

जल्द डिस्चार्ज नहीं होने और शीघ्रपतन दूर करने के लिए वैद्यगन इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक कराते हैं. 

इसके सेवन से पहले वीर्यवर्धक और पौष्टिक औषधियों का सेवन अवश्य करना चाहिए. 

जातिफलादि वटी(स्तंभक) की मात्रा और सेवन विधि - 

एक गोली सोने से एक घंटा पहले दूध, शहद या घी के साथ लेना चाहिए. यह अफ़ीम वाली दवा है तो इसका ज़्यादा इस्तेमाल नुकसान करता है और लेने के देने भी पड़ सकते हैं. 

इसका इस्तेमाल करते हुए और इस्तेमाल के बाद भी दूध, घी, मक्खन-मलाई का ज़्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. इसे हफ्ता में एक से दो बार ही यूज़ करें. 

इसके साइड इफ़ेक्ट की बात करें तो शरीर की गर्मी बढ़ जाना, कमज़ोरी, चक्कर आना, किसी काम में मन नहीं लगना, चिडचिडापन जैसी प्रॉब्लम हो सकती है. इसे ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 








03 July 2019

Asthma Treatment | अस्थमा का चमत्कारी नुस्खा - वैद्य जी की डायरी 15


वैद्य जी की डायरी में आज अस्थमा या दमा के लिए बहुत ही सिम्पल और आसान सा योग बताने वाला हूँ जिसका इस्तेमाल हर कोई आसानी से कर सकता है, तो आईये इसके बारे में पूरी डिटेल्स जानते हैं- 

लोग कहते हैं कि दमा दम के साथ जाता है, कुछ हद तक यह सही भी है पर यदि सही ट्रीटमेंट मिले तो यह बीमारी ठीक भी हो जाती है. इसके लिए आयुर्वेद में कई तरह की शास्त्रीय औषधियाँ हैं जो बीमारी को दूर करने में सक्षम होती हैं. इसके अलावा कई तरह के अनुभूत योग भी हैं जिसे वैद्य लोग रोगियों पर प्रयोग करते हैं, ऐसा ही एक योग है जिसे मैं बताने वाला हूँ जिसका नाम है श्वास नाशक योग 

इसके लिए सिर्फ दो चीज़ें चाहिए - देसी गेहूं और हल्दी दोनों आर्गेनिक हो तो अत्ति उत्तम. गेहूं 200 ग्राम तो हल्दी 100 ग्राम

श्वास नाशक योग निर्माण विधि -

इसे बनाने का तरीका बहुत आसान है, मिट्टी के बर्तन गेहूं को चूल्हे पर रखकर जलाना है, कोयला होने तक. इसी तरह हल्दी को भी जला लें. यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात यह है कि इसे जलाकर राख नहीं करना है बल्कि कोयला होने तक ही जलाना है. ठण्डा होने पर कूट-पीसकर बारीक पाउडर बनाकर रख लें, बस श्वास नाशक योग तैयार है. 

श्वास नाशक योग की मात्रा और सेवन विधि -

इसे कल्प विधि कुल 51 दिन प्रयोग करना होता है विशेष विधि से. पहले दिन इसे 5 ग्राम सुबह ख़ाली पेट पानी से लेना है रोज़ एक बार. इसी तरह से रोज़ एक ग्राम का डोज़  बढ़ाते हुए पच्चीसवें दिन 30 ग्राम का डोज़ हो जायेगा, इसके बाद रोज़ एक ग्राम डोज़ कम करते हुए जब 5 ग्राम पर डोज़ आने पर बंद कर दें. 

यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है. कल्प विधि से 51 दिनों तक प्रयोग करने से अस्थमा और कफ़ वाली खाँसी से मुक्ति मिल जाती है. 

वैद्य जी की डायरी में आज इतना ही, इसके बारे में  कोई सवाल हो तो कमेंट कर पूछिये. जानकारी अच्छी लगी तो लाइक और शेयर ज़रूर कीजिये.


28 June 2019

Panchamrit Lauh Guggul | पंचामृत लौह गुग्गुल - एक रसायन औषधि


पंचामृत लौह गुग्गुल आयुर्वेद में अपने कैटगरी की स्पेशल दवा है अपने यूनिक कम्पोजीशन की वजह से. यह गुग्गुल होते हुए भी बेजोड़ रसायन औषधि है. 

पंचामृत लौह गुग्गुल के घटक या कम्पोजीशन - 

इसे शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, रौप्य भस्म, अभ्रक भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म प्रत्येक एक-एक भाग, लौह भस्म दो भाग और त्रिफला और गिलोय द्वारा शोधित शुद्ध गुग्गुल छह भाग के मिश्रण से बनाया जाता है. 

पंचामृत लौह गुग्गुल के फ़ायदे- 

यह हर तरह के वात रोग जैसे जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, साइटिका, जकड़न इत्यादि को दूर करता है.

नर्व और नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी, दिमाग की कमज़ोरी और इसकी वजह से होने वाले सर दर्द, नीन्द की कमी इत्यादि में लाभकारी है.

पेट की बीमारी जैसे गैस, लिवर-स्प्लीन की बीमारी, भूख की कमी, खून की कमी जैसी प्रॉब्लम को दूर कर हेल्थ इम्प्रूव करता है और ताक़त लाता है.

कुल मिलाकर देखा जाये तो चाँदी, अभ्रक, स्वर्णमाक्षिक और लौह भस्मों का सारा फ़ायदा इस एक दवा से मिल जाता है. 

पंचामृत लौह गुग्गुल की मात्रा और सेवन विधि - 

एक-एक गोली सुबह शाम दूध या रोगानुसार उचित अनुपान के साथ देना चाहिए. इसके आभाव में महायोगराज गुग्गुल का प्रयोग किया जा सकता है उचित अनुपान के साथ. यह ज़्यादा प्रचलित नहीं है, इसलिए सभी कंपनियाँ से नहीं बनाती. 
ऑनलाइन ख़रीदने का लिंक दिया गया है. 


25 June 2019

How to improve eyesight? | आँखों की रौशनी बढ़ाने की औषधि - नेत्रज्योतिवर्धक सुरमा


आँखों की रौशनी कम हो या फिर आँखों की कोई भी प्रॉब्लम से अगर आप परेशान हैं तो आज की जानकारी आपके लिए है, क्यूंकि आज मैं आँखों की रौशनी  बढ़ाने वाले एक बेजोड़ आयुर्वेदिक योग के बारे में बताने वाला हूँ जिसके प्रयोग से न सिर्फ़ आँखों की रौशनी बढ़ेगी बल्कि आप चश्मा से भी छुटकारा पा सकते हैं, तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं- 

सुरमा का नाम आपने सुना ही होगा, अक्सर लोग आँखों की सुन्दरता बढ़ाने के लिए इसे लगाते हैं. पर आज जो सुरमा मैं बता रहा हूँ यह न सिर्फ़ आँखों की सुन्दरता हो बढ़ाता है बल्कि आखोँ की बीमारियों को दूर कर रौशनी इतनी तेज़ कर देता है कि फिर चश्मे की ज़रूरत ही नहीं रहती है. 

आयुर्वेद का यह वरदान है, प्राचीन समय में राजा-महाराजा लोग इस सुरमे का प्रयोग करते थे आँखों की रौशनी बनाये रखने के लिए. इसका नाम रखा गया है नेत्रज्योतिवर्धक सुरमा 

नेत्रज्योतिवर्धक सुरमा के फ़ायदे - 


  • इसे लगाने से नज़र साफ़ होती है,आँखों की रौशनी बढ़ती है और चश्मा धीरे-धीरे छूट जाता है.



  • आँखों में धुन्ध और जाला पड़ गया हो, ख़ासकर उम्र बढ़ने पर तो इसके इस्तेमाल से बेजोड़ लाभ होता है. 



  • मोतियाबिन्द की शुरुआत में इसके प्रयोग से लाभ होता है. 



  • आँखों की रौशनी बनाये रखने के लिए भी इसका प्रयोग करते रहना चाहिए. 


सुरमा की प्रयोग विधि - 

जैसा नार्मल सुरमा लगाते हैं, वैसे लगाया जाता है. काँच की सलाई दी गयी है साथ में इसी से सुबह और रात में सोने से पहले लगाना चाहिए. इसे लगाने के साथ अगर खाने की दवा 'चक्षुष्य कैप्सूल' भी एक-एक सुबह-शाम लिया जाये तो जल्दी फ़ायदा मिलेगा. 

इस सुरमा को तीन साल से बड़े बच्चों को भी लगा सकते हैं. इसे लगाने के बाद थोड़ी देर आँख में जलन होगी और पानी आयेगा तो घबराना नहीं चाहिए. इसके बारे में  कुछ सवाल-जवाब आप पढ़ सकते हैं, जिसका लिंक दिया गया है. 

इसका 2.5 ग्राम का दो पैक दिया जा रहा है सिर्फ 150 रूपये में जिसका लिंक निचे दिया गया है -


'चक्षुष्य कैप्सूल' ऑनलाइन खरीदें 

तो दोस्तों, अगर आँखों की रौशनी बढ़ाकर चश्मा से मुक्ति पाना चाहते हैं यह सुरमा और खाने की दवा दोनों का इस्तेमाल करें, आपकी आँखों की रौशनी बढ़ जाएगी यही तो आयुर्वेद की गारन्टी है. 



22 June 2019

Gomutradi Ghan Capsule | गौमूत्रादि घन कैप्सूल - सौ रोगों की एक दवा


गौमूत्र का आयुर्वेद में व्यापक प्रयोग होता है इसके गुणों के कारन, अनेकों शास्त्रीय औषधियों में इसका प्रयोग किया जाता है. इसी के बेस पर बना गौमूत्रादि घन कैप्सूल कई तरह की बीमारियों को दूर करने में रामबाण है, तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं - 

गौमूत्रादि घन कैप्सूल जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है गौमूत्र के घनसत्व के अलावा दूसरी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बना कवच या कैप्सूल

कैप्सूल में होने से न इसका टेस्ट पता चलता है और न ही कोई गंध, इसके सेवन में कोई दिक्कत नहीं होती है. 

गौमूत्रादि घन कैप्सूल के घटक या कम्पोजीशन - 

इसका कम्पोजीशन बेजोड़ है. कई लोग गौमूत्र अर्क, आसव और क्षार इत्यादि लेते हैं पर सभी लोगों के उनका प्रयोग आसान नहीं होता है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे गौमूत्रघनसत्व, त्रिफला घनसत्व, कालीजीरी घनसत्व, पुनर्नवा घनसत्व, नागरमोथा घनसत्व और कुटकी घनसत्व के मिश्रण से बनाया गया है. 

गौमूत्रादि घन कैप्सूल के फ़ायदे- 

यह विभिन्न उदर विकारों के लिए रामबाण है. मतलब पेट की कैसी भी कोई भी बीमारी हो तो इसका सेवन कर सकते हैं. 

अजीर्ण, अग्निमान्ध, उदावर्त, गुल्म, अर्श, यकृत प्लीहा वृद्धि, पांडू, कामला, कृमि, मलावरोध, आमवृद्धिजन्य विकार, शोथ, मेदवृद्धि और श्लीपद आदि विकारों में विशेष उपयोगी है. 

आसान और सीधे शब्दों में कहा जाये तो इसे इन बीमारियों में लेना चाहिए जैसे - 

अपच, बदहज़मी, गैस ऊपर को चढ़ना, गोला बनना, कब्ज़, पेट में कीड़े होना. 
लिवर-स्प्लीन का बढ़ जाना, फैटी लिवर, कोलेस्ट्रॉल, खून की कमी, जौंडिस, शरीर में कहीं भी सुजन होना. मोटापा, बवासीर, आँव आना, फ़ाइलेरिया इत्यादि. 

हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर, पेट का कैंसर, ब्लड कैंसर इत्यादि में भी इसे सहायक औषधि के रूप में प्रयोग कर सकते हैं. 

यह एक ऐसी दवा है जो अकेले आरोग्यवर्धिनी वटी, पुनर्नवादि मंडूर, यकृतहर लौह और लोकनाथ रस जैसी शास्त्रीय औषधि से अच्छा काम करती है, तो इसी बात से आप इसका महत्त्व समझ सकते हैं. 

गौमूत्रादि घन कैप्सूल की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो कैप्सूल तक सुबह-शाम पानी से लेना चाहिए. 

इसके 60 कैप्सूल की क़ीमत है सिर्फ़ 170 रुपया जो अवेलेबल है lakhaipur.in पर जिसका लिंक  दिया गया है. 


18 June 2019

Lodhrasava Benefits in Hindi | लोध्रासव के फ़ायदे


यह एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जो मूत्ररोग, किडनी और गर्भाशय विकारों में प्रयोग की जाती है, तो आईये जानते हैं इसके कम्पोजीशन और फ़ायदे के बारे में विस्तार से - 

लोध्र पठानी इसका पहला घटक है और इसी पर लोध्रासव इसका नाम दिया गया है. 

लोध्रासव के घटक या कम्पोजीशन - 

इसे लोध्र पठानी, कचूर, फूल प्रियंगु, पोहकरमूल, बड़ी इलायची, मूर्वा, विडंग, त्रिफला, अजवायन, चव्य, सुपारी, इन्द्रायणमूल, चिरायता, कुटकी,  भारंगी, तगर, चित्रकमूल, पीपलामूल, कूठ, अतीस, पाठा, इन्द्रजौ, नागकेशर, नखी, तेजपात, काली मिर्च और मोथा जैसी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से शहद और पानी के साथ सन्धान या फ़रमेनटेशन प्रोसेस से इसका आसव बनाया जाता है. 

लोध्रासव के फ़ायदे- 

इसके फ़ायदों की बात करें तो किडनी, मूत्राशय, गर्भाशय और लिवर पर इसका ज़्यादा असर होता है.

यह पेशाब की जलन को दूर करता है, बार-बार अधीक पेशाब होना, बून्द-बून्द या कम पेशाब होना, पेशाब के समय तकलीफ़ होना, पेशाब नली की सुजन और इन्फेक्शन में इस से फ़ायदा होता है.

कब्ज़, अरुचि, संग्रहणी, खून की कमी और जौंडिस में भी इसे सहायक औषधि के रूप में लेने से लाभ होता है. 

स्वप्नदोष, धातुस्राव, महिलाओं के गर्भाशय रोग जैसे ल्यूकोरिया और पीरियड रिलेटेड प्रॉब्लम में इस से अच्छा लाभ होता है. 

लोध्रासव की मात्रा और सेवन विधि - 

15 से 30 ML तक सुबह-शाम भोजन के बाद बराबर मात्रा में पानी मिक्स लेना चाहिए. रोगानुसार मुख्य औषधियों के साथ इसे सहायक औषधि के रूप में ही लेना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है इसके सेवन से. आयुर्वेदिक कंपनियों की यह मिल जाती है, इसे ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं जिसका लिंक दिया जा रहा है. 








13 June 2019

How to Remove Pimples and get fair skin? | कील-मुहाँसे दूर कर रूप निखारने की आयुर्वेदिक औषधि


हर लोग सुन्दर दिखना चाहते हैं ख़ासकर हमारी यंग जनरेशन चाहे वह लड़का हों या लड़की. पिम्पल्स या कील-मुहाँसे और दाग-धब्बे अगर चेहरे पर हो जाएँ तो हर लोग इस से जल्दी छुटकारा पाना चाहते हैं और इसके लिए तरह-तरह की क्रीम ट्राई करते हैं. अगर आपमें से भी किसी को पिम्पल्स हो, दाग-धब्बे हों और अपना रंग निखार कर गोरा दिखना चाहते हों आज की जानकारी आपके काम की है, आईये पूरी डिटेल्स जानते हैं - 

पिम्पल्स के लिए हर लोग कोई न कोई क्रीम ज़रूर ट्राई करते हैं यह बात सौ फीसदी सच है, अगर आपको भी कभी पिम्पल्स हुआ होगा तो आपने भी कुछ लगाया ही होगा. 

तो क्या सिर्फ़ किसी क्रीम से पिम्पल्स जा सकता है? तो जवाब है नहीं

आयुर्वेद का सिधान्त कहता है कि कील-मुहांसे और दाग धब्बों के लिए सिर्फ़ लगाने की दवा से नहीं होगा बल्कि खाने वाली दवा भी लेनी होगी. 

पिम्पल्स और दाग-धब्बों को दूर कर रूप निखारने वाली औषधि यौवनपीड़ीकान्तक टेबलेट और रूपसी उबटन के बारे में आज बताने वाला हूँ. इसमें एक खाने की दवा है तो दूसरी लगाने की.

यौवनपीड़ीकान्तक टेबलेट कील-मुहाँसों के मूलकारन को दूर कर खून साफ़ करती है और रूप निखारती है. 


रूपसी उबटन को फेसपैक की तरह चेहरे पर लगाना होता है दूध या गुलाब जल में पेस्ट बनाकर. 

बेहतरीन जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनी शत प्रतिशत शुद्ध आयुर्वेदिक औषधि है यह जो न सिर्फ़ पिम्पल्स को जड़ से दूर कर देती है बल्कि रूप निखारकर गोरा बना देती है. 

यह दोनों ऑनलाइन अवेलेबल है जिसका लिंक दिया जा रहा है- 





05 June 2019

Panduhari Capsule | पाण्डुहारी कैप्सूल- जौंडिस और खून की कमी की औषधि


खून की कमी, जौंडिस, पीलिया और लिवर बढ़ने जैसी बीमारियों का सबसे बेस्ट ट्रीटमेंट आयुर्वेद में ही है. इन्ही रोगों को दूर करने वाली औषधि पाण्डुहारी कैप्सूल के बारे में आज बताने वाला हूँ, तो आईये जानते हैं पाण्डुहारी कैप्सूल के गुण, उपयोग और प्रयोगविधि के बारे में विस्तार से - 

पाण्डुहारी कैप्सूल जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है पाण्डु को हराने वाला कैप्सूल. शरीर में खून की कमी होने को ही आयुर्वेद में पाण्डु कहा जाता है. 

किसी भी कारण से शरीर में  खून की कमी होना, लम्बी बीमारी के बाद खून की कमी होना, जौंडिस होना, जौंडिस के कारण शरीर का पीला पड़ जाना, अवरोधक कामला या Obstructive Jaundice, भूख की कमी, लिवर का बढ़ जाना, सुजन, पेशाब का पीलापन इत्यादि समस्या होने पर इसके से आशानुरूप लाभ होता है. 

बस मोटे तौर पर यह समझ लीजिये कि खून की कमी, जौंडिस, शरीर के  पीलापन और पेशाब  पीला होने पर इसे आप आँख मूंदकर प्रयोग कर सकते हैं. 

हर तरह का हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस, लिवर कैन्सर और ब्लड कैंसर इत्यादि में भी इसे सहायक औषधि के रूप में ले सकते हैं.

पाण्डुहारी कैप्सूल के घटक या कम्पोजीशन - 

सबसे पहले आपको बता दूँ कि इसमें गोमूत्र की भावना दी गयी है, जो लोग गोमूत्र से बनी औषधि नहीं लेना चाहें वो 'लिवट्रीट' टेबलेट प्रयोग कर सकते हैं.

पाण्डुहारी कैप्सूल के इनग्रीडेंट की बात करें तो इसे लौह भस्म, मंडूर भस्म, त्रिफला घनसत्व, चिरायता घनसत्व, गिलोय घनसत्व, पुनर्नवा घनसत्व, निम्ब घनसत्व और कुटकी घनसत्व के मिश्रण में गोमूत्र और गिलोय स्वरस की भावना देकर बनाया गया है. इसका कॉम्बिनेशन अपने आप में बेजोड़ है. कई लोग पतंजलि की नीम वटी, गुडूचीघन वटी त्रिफला चूर्ण इत्यादि पचीस तरह की दवा लेते हैं. पर उन सब से अच्छा है कि सिर्फ पाण्डुहारी कैप्सूल लीजिये और फिर चमत्कार देखिए

पाण्डुहारी कैप्सूल की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो कैप्सूल तक सुबह-शाम पानी से. इसका सेवन करते हुवे भोजन के बाद अगर दो-दो स्पून कुमार्यासव + रोहित्कारिष्ट + पुनर्नवारिष्ट लिया जाये तो तेज़ी से लाभ होता है, और जहाँ अंग्रेज़ी दवा फेल हो गई हो वैसे रोगी भी स्वस्थ हो जाते हैं.

इसके 60 कैप्सूल की क़ीमत है सिर्फ़ 180 रुपया जो मिलेगा ऑनलाइन lakhaipur.in पर जिस लिंक दिया गया है - 


02 June 2019

Arshantak Capsule & Arshhar Vati for Piles | बवासीर की रामबाण औषधि


अर्शान्तक कैप्सूल और अर्शहर वटी ख़ूनी और बादी दोनों तरह की बवासीर को निर्मूल करने वाली आयुर्वेदिक औषधि है.

ख़ूनी बवासीर में शौच के बाद रक्तस्राव होता है, इसे ब्लीडिंग पाइल्स भी कहा जाता है. जबकि बादी बवासीर में ब्लीडिंग नहीं होती है, पर इसमें ज़्यादा कष्ट होता है. मस्से दोनों तरह की बवासीर में हो सकते हैं. इन सब के बारे में ज़्यादा बताने की ज़रूरत नहीं, आप सभी इसके बारे में जानते ही हैं. 

अर्शान्तक कैप्सूल और अर्शहर वटी पाइल्स या बवासीर से मुक्ति दिलाने में सक्षम है. पाइल्स को आयुर्वेद में अर्श के नाम से जाना जाता है. ख़ूनी बवासीर को रक्तार्श और बादी बवासीर को वातार्श

दोनों तरह की बवासीर में अर्शान्तक कैप्सूल और अर्शहर वटी में से एक-एक सुबह-शाम गर्म पानी से लेना चाहिए.

इन दोनों के इस्तेमाल से ब्लीडिंग बंद हो जाती है और मस्से धीरे-धीरे सुख जाते हैं. यह मल ढीला करती है और कब्ज़ियत दूर करती है. 

अर्शान्तक कैप्सूल और अर्शहर वटी के कम्पोजीशन की डिटेल्स आप दिए गए लिंक ओपन कर पढ़ सकते हैं. दोनों का कॉम्बिनेशन बेजोड़ है, इतनी असरदार दवा कोई और नहीं. 

यह दोनों दवा ऑनलाइन अवेलेबल है lakhaipur.in पर जिसका लिंक दिया गया है. अर्शान्तक कैप्सूल की कीमत है सिर्फ 180 रुपया और अर्शहर वटी सिर्फ 135 रुपया में उपलब्ध है. 


30 May 2019

Punswan Capsule | पुंसवन कैप्सूल – पुत्र प्राप्ति की आयुर्वेदिक औषधि


आज मैं बताने वाला हूँ पुत्र प्राप्ति में मदद करने वाली आयुर्वेदिक औषधि पुंसवन कैप्सूल के बारे में. तो आईये इसके बारे में डिटेल्स जानते हैं - 

अगर कोई दम्पति चाहते हैं कि उनकी आने वाली संतान पुत्र या बेटा हो तो इस दवा इस्तेमाल करना चाहिए. यह औषधि आयुर्वेद के पुंसवन कर्म पर आधारित है जिसके प्रयोग से पुत्र प्राप्ति होती है. यह गर्भ में पल रहे शिशु का सम्यक पोषण करने में भी सहायक है. इसे कैप्सूल के रूप में प्रस्तुत किया गया जिसे हर किसी को लेने में आसानी होती है.

मात्रा और प्रयोग विधि –

 Pregnancy का पता लगते ही यानी जब Pregnancy कन्फर्म हो जाये तो इसे एक-एक कैप्सूल सुबह-शाम गाय के दूध से लगातार तीन महीने तक लेना चाहिए. 

बस ध्यान रखें की दवा उल्टी न हो, अगर खाने के बाद किसी टाइम उल्टी हो जाये तो फिर एक कैप्सूल खा लेना चाहिए.

परहेज़- महिला को सुपाच्य आहार या आसानी से पचने वाले भोजन देना चाहिए. तले हुवे पदार्थ, खट्टी चीज़ें, अधीक मिर्च मसाला वाले भोजन से परहेज़ रखना चाहिए.

सैंकड़ों महिलाओं पर इसका प्रयोग कराकर अच्छी सफ़लता पायी गयी है, विश्वास के साथ प्रयोग करें. 

पुंसवन कैप्सूल के एक पैक की कीमत है सिर्फ 300 रुपया, एक पैक में 60 कैप्सूल हैं जो पुरे एक महीने के लिए हैं. इसे लगातार तीन महीने तक यूज़ करना है, तो एक साथ 3 पैक आर्डर कर लें. यह ऑनलाइन अवेलेबल है हमारे स्टोर www.lakhaipur.in पर जिसका लिंक दिया गया है. 



तो दोस्तों, अगर आप अपनी अगली संतान पुत्र के रूप में चाहते हैं तो पुंसवन कैप्सूल का प्रयोग अवश्य करें. आपको पुत्र रत्न की प्राप्ति ज़रूर होगी, यह आयुर्वेद का वरदान है. 

पुंसवन कर्म- मनचाही संतान बेटा या बेटी कैसे प्राप्त करें 

शिवलिंगी बीज, बेटा प्राप्त करने की बूटी 



28 May 2019

Kalmeghasava Benefits in Hindi | कालमेघासव के फ़ायदे


कालमेघासव आयुर्वेदिक औषधि है जो हर तरह के मलेरिया बुखार में प्रयोग की जाती है, यह लिवर और स्प्लीन बढ़ने में भी असरदार है तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं - 

कालमेघासव जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कालमेघ से बना हुवा आसव या एक तरह का सिरप. इसमें सिर्फ़ कालमेघ नहीं होता, बल्कि कालमेघ इसका मुख्य घटक है और इसमें कई तरह की दूसरी जड़ी-बूटियाँ भी होती हैं, तो सबसे पहले जानते हैं- 

कालमेघासव के घटक या कम्पोजीशन - 

इसे कालमेघ, गिलोय, सप्तपर्ण, कुटकी, करंज पञ्चांग, कुटज छाल, गुड़, धाय के फूल, लौह चूर्ण, रक्तरोहिड़ा त्वक, त्रिकटु, त्रिजात, एलुआ, हर्रे, बहेड़ा और बबूल की छाल के मिश्रण से आसव निर्माण विधि से सन्धान या Fermentation होने के बाद इसे बनाया जाता है. 

कालमेघासव के गुण - 

इसके गुणों की बात करें तो यह विषम ज्वर नाशक, Anti Malarial, Liver protective, Digestive, रक्त प्रसादक या Heamatemic जैसे कई तरह के गुणों से भरपूर होता है.

कालमेघासव के फ़ायदे - 


  • इसके इस्तेमाल से हर तरह की मलेरिया बुखार और ठण्ड लगकर आने वाली बुखार दूर होती है. 
  • मलेरिया पुराना होने पर लिवर-स्प्लीन बढ़ जाती है, अंग्रेज़ी दवाओं के साइड इफ़ेक्ट से खून की कमी, जौंडिस और भूख की कमी जैसी प्रॉब्लम भी हो जाती है, वैसी अवस्था में इसके सेवन से लाभ होता है. 
  • इसके सेवन से भूख बढ़ती है, खून की कमी दूर होती है. रस-रक्तादि धातुओं का शोधन कर यह बुखार हमेशा के लिए दूर कर देता है. 

कालमेघासव की मात्रा और सेवन विधि - 

15 से 30 ML तक रोज़ दो से तीन बार तक भोजन के बाद बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर लेना चाहिए. इसके साथ दुसरे ज्वरनाशक योग लेने से अच्छा लाभ मिलता है. 


24 May 2019

प्रदरान्तक कैप्सूल/टेबलेट ल्यूकोरिया/सफ़ेद पानी की कारगर दवा | Leucorrhea Ayurvedic Medicines


महिलाओं की बीमारी ल्यूकोरिया को लोग कई तरह के नामों से जानते हैं जैसे सफ़ेद पानी आना, धात गिरना, श्वेत प्रदर/रक्त प्रदर इत्यादि. यह ऐसी बीमारी है जो शरीर में घुन की तरह लग जाता है जिस से महिलाओं का स्वास्थ ख़राब हो जाता है. इस बीमारी को जड़ से दूर करने के लिए कम से तीन तरह की दवाओं को साथ लेना चाहिए जिसे आज बता रहा हूँ – प्रदरान्तक कैप्सूल, प्रदरान्तक टेबलेट और पुष्यानुग चूर्ण. तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं – 

सबसे पहेल जानते हैं प्रदरान्तक कैप्सूल के बारे में. जैसा कि इसका नाम है प्रदर यानि ल्यूकोरिया का अंत करने वाला

प्रदरान्तक कैप्सूल का कम्पोजीशन – 

अशोक घनसत्व, उदम्बर घनसत्व, लोध्र घनसत्व, चौलाई घनसत्व, खरैटी घनसत्व, संगजराहत भस्म और स्फटिक भस्म जैसी बेजोड़ और असरदार औषधियों के मिश्रण से इसे  बनाया गया है. 

अब जानते हैं प्रदरान्तक टेबलेट के बारे में –

प्रदरान्तक टेबलेट के घटक या कम्पोजीशन –

इसके घटक भी ऑलमोस्ट सेम हैं प्रदरान्तक कैप्सूल जैसे. ल्यूकोरिया के लिए हिमालया लुकोल के बारे में मैंने बताया है जिस से अनेकों लोगों को फ़ायदा हुआ है, पुराने ल्यूकोरिया में अगर उस से फ़ायदा न हुआ हो तो यहाँ बताई दवाओं का प्रयोग करना चाहिए.

पुष्यानुग चूर्ण – 

यह एक पोपुलर क्लासिक मेडिसिन है जिसकी डिटेल यहाँ पढ़ सकते हैं. 

आईये अब जानते हैं इन औषधियों के फ़ायदे- 

सफ़ेद पानी या ल्यूकोरिया और लाल पानी में यह विशेष उपयोगी है. ल्यूकोरिया की वजह से होने वाले कमर दर्द, पीठ दर्द, हाथ-पैरों की जलन, लगातार रहने वाला सर दर्द, कमज़ोरी, खून की कमी, भूख की कमी इत्यादि रोग दूर होते हैं. 

इन दवाओं के सेवन से ल्यूकोरिया की बीमारी दूर होकर महिलाओं का स्वास्थ ठीक हो जाता है. 

नयी पुरानी हर तरह की बीमारी में इन दवाओं को साथ में लेना चाहिए.

अब जानते हैं इसकी मात्रा और प्रयोग विधि – 

प्रदरान्तक कैप्सूल एक-एक सुबह शाम पानी से. प्रदरान्तक टेबलेट एक-एक सुबह-शाम पानी से. पुष्यानुग चूर्ण एक स्पून शहद या चावल के धोवन से लेना चाहिए. भोजन के बाद चार स्पून पत्रांगासव भी लिया जाये तो अति उत्तम. 

ल्यूकोरिया के लिए तरह-तरह की दवा खाकर थक गए हों तो भी इन दवाओं के इस्तेमाल से बीमारी दूर हो जाती है. 

इन औषधियों का सेवन करते हुवे तेज़ मिर्च-मसाला, खटाई और गरिष्ठ भोजन का त्याग करना चाहिए. 

प्रदरान्तक कैप्सूल, प्रदरान्तक टेबलेट और पुष्यानुग चूर्ण तीनों दवा ऑनलाइन अवेलेबल है उचित मूल्य में हमारे स्टोर lakhaipur.in पर जिसका लिंक दिया गया है. 

प्रदरान्तक कैप्सूल(180 rupya)

प्रदरान्तक टेबलेट(160 सिर्फ़ 160 रुपया)

पुष्यानुग चूर्ण 100 ग्राम(सिर्फ़ 146 रुपया)


20 May 2019

Tarang Gold Massage Oil | तरंग गोल्ड मसाज आयल- पुरुषों के लिए



कई नवयुवक अप्राकृतिक कर्मों या फिर दूसरी वजह से नसों की कमजोरी, लिंग का ढीलापन, साइज़ का छोटापन और शीघ्रपतन जैसी कई तरह की प्रॉब्लम के शिकार हो जाते हैं और इसके लिए कई तरह के तेल और तिला का प्रयोग करते रहते हैं. अगर आपको किसी अच्छे और इफेक्टिव तेल की ज़रूरत है तो आज की जानकारी आपके लिए. जी हाँ दोस्तों, आज मैं  बताने वाला हूँ तरंग गोल्ड मसाज आयल के बारे में जो न सिर्फ़, नसों की कमज़ोरी और ढीलापन दूर करता है बल्कि साइज़ को भी बढ़ाने में मदद करता है, तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं –

तरंग गोल्ड मसाज आयल मालिश के लिए बेहतरीन तेल है जो अपने क्वालिटी के हिसाब से चीप एंड बेस्ट है. इस से कमज़ोर कम्पोजीशन वाले तेल तो मार्केट में हज़ार रूपये में लुटने वाली कंपनियाँ बेच रही हैं.

इसे विशुद्ध आयुर्वेदिक प्रोसेस से तिल तेल के बेस पर मालकांगनी, अकरकरा, असगन्ध, जायफल, लौंग, कूठ, कुचला और दालचीनी जैसी असरदार औषधियों के मिश्रण से बनाया गया है.

तरंग गोल्ड मसाज आयल के फ़ायदे –

नसों की कमज़ोरी, ढीलापन, शीघ्रपतन, साइज़ का छोटापन और तनाव की कमी जैसी प्रॉब्लम में इस तेल की मालिश से स्थायी लाभ होता है.

समागम से दस मिनट पहले मालिश करने से पूर्ण आनन्द की प्राप्ति होती है.

तरंग गोल्ड मसाज आयल की प्रयोग विधि –

शिश्न के मणिभाग या ग्लान्स पेनिस को छोड़कर दो-तीन मिनट तक हल्की मालिश करनी चाहिए. मैरिड/अनमैरिड सभी लोग इसका प्रयोग कर सकते हैं. 

साइज़ का छोटापन और ढीलापन वाले युवकों को सुबह-शाम इसकी मालिश करनी चाहिए. पुरे फ़ायदे के लिए लगातार दो-तीन महीने तक प्रयोग करें. यह बिल्कुल सेफ़ होता है, किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है.

25 ML का दो पैक सिर्फ़ 175 रुपया में ऑनलाइन अवेलेबल है जिसका लिंक दिया गया है-







16 May 2019

Heart Disease Treatment | ह्रदयरोगों की असरदार औषधि- हृदयरोगान्तक कैप्सूल/चूर्ण



दिल की बीमारी या हार्ट डिजीज, यह सुनकर ही कुछ लोग घबरा जाते हैं. पर आप घबराएँ नहीं, इसकी चीप एंड बेस्ट दवा बताने वाला हूँ.

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल और ह्रदयरोगान्तक चूर्ण. यह तरह की हार्ट की प्रॉब्लम के लिए बेजोड़ है, चाहे दिल की कमजोरी हो, धड़कन बढ़ती हो, ब्लॉकेज हो या फिर ब्लड प्रेशर. तो आईये इन दोनों दवाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं –

हार्ट की बीमारी को लोग अक्सर महँगी बीमारी समझते हैं और ऐसा है भी. पर इसके कुछ सस्ते उपाय भी हैं जो आज बता रहा हूँ. आम आदमी के लिए महँगा ट्रीटमेंट आसान नहीं है, पर आयुर्वेद में इसका भी उपाय है. अर्जुन हृदय रोगों की प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है और इसी का योग है ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल और ह्रदय रोगान्तक चूर्ण. तो सबसे पहले जानते हैं -

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल के घटक या कम्पोजीशन – 

इसे अर्जुनत्वक घनसत्व, अर्जुनत्वक चूर्ण, मुक्ता पिष्टी और अकीक पिष्टी के मिश्रण से बनाया गया है.

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल के फ़ायदे-

हार्ट की हर तरह की बीमारी में बेहद असरदार है. हार्टबीट या धड़कन बढ़ना, घबराहट होना, हार्ट में दर्द होना, हार्ट की कमज़ोरी, वाल्व की कमज़ोरी और हार्ट की ब्लॉकेज में इस से फ़ायदा होता है. यह ब्लड प्रेशर को नार्मल करता है, BP लो होने या BP हाई होने में भी असरदार है.

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल की  मात्रा और सेवन विधि – एक से दो कैप्सूल सुबह-शाम अर्जुनारिष्ट या अर्क गावज़बाँ से लेना चाहिए.

ह्रदयरोगान्तक चूर्ण              

इसका कम्पोजीशन सिंपल पर बेजोड़ है. से अर्जुन की छाल, असगंध और पोहकरमूल के मिश्रण से  बनाया गया है.

ह्रदयरोगान्तक चूर्ण के फ़ायदे- 

यह चूर्ण ह्रदयरोग या हार्ट की हर तरह की बीमारी में बेहद असरदार है. हार्टबीट या धड़कन बढ़ना, घबराहट होना, हार्ट में दर्द होना, हार्ट की कमज़ोरी और हार्ट की ब्लॉकेज में इस से फ़ायदा होता है. यह हाई ब्लड प्रेशर को भी कण्ट्रोल करता है.

ह्रदयरोगान्तक चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि – 

एक से दो स्पून तक सुबह-शाम भोजन के बाद लेना चाहिए. या फिर विशेष लाभ के लिए क्षीरपाक विधि से लें. इसके लिए 250 ML दूध में 100 ML पानी और दो स्पून ह्रदयरोगान्तक चूर्ण मिक्स कर उबालें और जब सिर्फ 200 ML दूध बचे तो छानकर रोज़ एक-दो बार पीना चाहिए.

ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल और ह्रदयरोगान्तक चूर्ण दोनों ऑनलाइन अवेलेबल हैं हमारे स्टोर पर जिसका लिंक दिया गया है-



ह्रदयरोगान्तक कैप्सूल के 60 कैप्सूल की क़ीमत है सिर्फ 180 रुपया और चूर्ण की क़ीमत है 165 रुपया.

तो दोस्तों हार्ट की बीमारी में आप इन दोनों दवाओं का इस्तेमाल कीजिये और फिर देखिये इसके फ़ायदे.

15 May 2019

Gandhak Rasayan for Skin Disease & Blood Impurities | गंधक रसायन चर्मरोगों की महौषधि - Lakhaipur.com


गंधक रसायन चर्मरोगों या स्किन डिजीज को दूर करने वाली क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है. इसके इस्तेमाल से खाज-खुजली, एक्जिमा, फोड़े-फुंसी, चकत्ते, छाजन और सफ़ेद दाग से लेकर कुष्ठव्याधि तक नए-पुराने हर तरह के चर्मरोग दूर हो जाते हैं. तो आईये जानते हैं गंधक रसायन का कम्पोजीशन, बनाने का तरीका, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

गंधक रसायन का घटक या कम्पोजीशन - 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक शुद्ध गंधक होता है. गंधक को अंग्रेज़ी में Sulphur कहा जाता है. इसे बनाने के लिए चाहिए होता है शुद्ध गंधक के अलावा भावना देने के लिए चातुर्जात क्वाथ, त्रिफला क्वाथ, गिलोय का रस और अदरक का रस 

बनाने का तरीका यह होता है कि शुद्ध गंधक को चूर्ण बना लें और फिर इसमें चातुर्जात क्वाथ, त्रिफला क्वाथ, गिलोय का रस और अदरक के रस की कम से कम आठ-आठ भावना देकर सुखाकर पीसकर रख लिया जाता है. 

शास्त्रानुसार इसे टोटल चौसठ भावना देकर बनाने का प्रावधान है. इसमें आधा भाग मिश्री पाउडर भी मिला सकते हैं. कुछ कंपनीयाँ इसे पाउडर फॉर्म मे तो कुछ इसका टेबलेट भी बनाती हैं. 

विधिवत बनाया गया गंधक रसायन हल्का काले रंग का बनता है, यह मेरा एक्सपीरियंस है. मार्केट में मिलने वाला गंधक रसायन ऐसा नहीं होता, जिस से साबित होता है कि विधि-विधान से नहीं बना होता. 

यहाँ पर दो बात और बता दूँ पहली यह की चातुर्जात में चार चीजें होती हैं इलायची, दालचीनी, तेजपात और नागकेशर सभी बराबर मात्रा में. 

और दूसरी बात शुद्ध गंधक या गंधक को शोधित करने का तरीका. गंधक रसायन बनाने के लिए आँवलासार गंधक लेना होता है जो की पीले रंग का होता है. 

गंधक शुद्ध करने की विधि -

गंधक शुद्ध करने का तरीका यह होता है कि एक कड़ाही में थोड़ा गाय का घी डालकर गर्म करें और उसमे आँवलासार गंधक को डालकर हल्की आँच में गर्म करने से गंधक पिघल जाता है. अब एक चौड़े मुँह के बर्तन में गाय का दूध डालें और ऊपर से कपड़ा बाँध दें. 

अब पिघले हुवे गर्म गंधक को कपड़े में डालने से गंधक छनकर दूध में गिरेगा. ध्यान रहे दूध नार्मल या ठंडा होना चाहिए. अब दूध में पड़े गंधक को पानी से अच्छी तरह से धो लेना है. इसी तरह से गर्म गंधक को कम से कम सात बार दूध में बुझाने से गंधक शुद्ध हो जाता है. 

ध्यान रहे हर बार नया दूध लेना है, और गंधक बुझा हुवा दूध को फेक दें क्यूंकि यह विषैला हो जाता है. तो यह है गंधक शुद्ध करने का तरीका. आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में थोड़ा झमेला तो है, पर यदि सही से विधिपूर्वक बनाया जाये तो 100% इफेक्टिव बनती हैं.

गंधक रसायन के औषधिय गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह तासीर में गर्म, पित्तशामक, कुष्ठाघ्न यानी हर तरह के चर्म रोगों को दूर करने वाला, विषघ्न या विष को दूर करने वाला, जीवाणु-विषाणु नाशक रसायन है. यह Antibacterial, Antiviral, Antibiotic, Antimicrobial, Anti-inflammatory, Anti Leprosy और Blood Purifier जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

गंधक रसायन के फ़ायदे -


  • दाद, खाज-खुजली, एक्जिमा, सोरायसिस, कुष्ठ, सफ़ेद दाग़, फोड़े-फुंसी, फंगल इन्फेक्शन, बालों का गिरना, बालों में रुसी या Dandruff होना जैसी प्रॉब्लम में बेहद असरदार है. 



  • स्किन में चकत्ते होना, पित्ती उछलना(Urticaria) और कील-मुहाँसों में भी असरदार है. 



  • रक्तशोधक गुण होने से खून साफ़ करता है और वातरक्त या गठिया रोग में भी फ़ायदेमंद है. 



  • कुल मिलाकर बस समझ लीजिये कि चर्मरोगों और खून साफ़ करने की यह आयुर्वेद की बेस्ट दवाओं में से एक है. 


गंधक रसायन की मात्रा और सेवन विधि - 

बीमारी और रोगी की कंडीशन के अनुसार ही इसका सही डोज़ फिक्स होता है. वैसे 250mg या एक टेबलेट रोज़ दो से तीन बार तक लिया जा सकता है. इसे रोगानुसार उचित अनुपान के साथ लेना चाहिए. हर तरह के चर्मरोगों में इसके साथ रस माणिक्य का भी प्रयोग किया जाता है. 

पुराने चर्मरोगों में इसके साथ कैशोर गुग्गुल, निम्बादी चूर्ण, खदिरारिष्ट, मजिष्ठारिष्ट जैसी दवा लेनी चाहिए. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से सही डोज़ में लेना ठीक रहता है. 

बेस्ट क्वालिटी का गंधक रसायन उचित मूल्य में ऑनलाइन ख़रीदें हमारे स्टोर lakhaipur.in से - गंधक रसायन 100 ग्राम 

डाबर/बैद्यनाथ जैसी कम्पनियों का यह मिल जाता है. डाबर के 40 टेबलेट की क़ीमत 128 रुपया है जिसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 




इसे भी जानिए - 






14 May 2019

Gokshuradi Churna | गोक्षुरादि चूर्ण के चमत्कारी फ़ायदे


गोक्षुरादि चूर्ण ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जिसका कम्पोजीशन साधारण होते हुवे भी असरदार है. यह मर्दाना कमज़ोरी दूर कर बल-वीर्य और कामोत्तेजना को बढ़ाती है. तो आईये जानते हैं गोक्षुरादि चूर्ण का कम्पोजीशन, इसके फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में विस्तार से -

गोक्षुरादि चूर्ण के घटक या कम्पोजीशन -

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें गोखरू के अलावा पांच चीजें होती हैं. गोखरू, तालमखाना, शतावर, कौंच बीज, नागबला और अतिबला. 

बनाने का तरीका बहुत आसान है, सभी को बराबर वज़न में लेकर कूटपीसकर चूर्ण बना लिया जाता है. यह योगतरंगिणी नामक ग्रन्थ का नुस्खा है. गोक्षुरादि चूर्ण का दूसरा नुस्खा भी है जो महिलारोगों में प्रयोग किया जाता है, इस से बिल्कुल अलग होता है जो की भैषज्य रत्नावली का योग होता है. उसकी जानकारी फिर कभी दी जाएगी.

गोक्षुरादि चूर्ण के गुण -

यह मूत्रल यानि पेशाब साफ़ लाने वाला, बल-वीर्य बढ़ाने वाला, कामोत्तेजक, वीर्य गाढ़ा करने वाला, मेल हार्मोन Testosterone बढ़ाने वाला और बाजीकरण जैसे गुणों से भरपूर होता है.

गोक्षुरादि चूर्ण के फ़ायदे- 

यौनेक्षा की कमी, वीर्य का पतलापन और शीघ्रपतन जैसे पुरुष यौन रोगों में इसका प्रयोग करने से अच्छा लाभ मिलता है. 

अधीक मैथुन के कारन वीर्य का नाश का कर चुके व्यक्तियों को धैर्यपूर्वक इसका सेवन करना चाहिए. 

यह स्ट्रेस को कम कर कामोत्तेजना और आनन्द बढ़ाता है. 

गोक्षुरादि चूर्ण की मात्रा और सेवन विधि -

2.5 से 5 ग्राम तक सोने से एक घंटा पहले मिश्री मिले दूध से लेना चाहिए. वीर्य का नाश कर चुके युवकों को इसे सुबह-शाम कुछ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुवे लेना चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. 

बेस्ट क्वालिटी का गोक्षुरादि गुग्गुल ऑनलाइन ख़रीदें हमारे स्टोर lakhaipur.in से - गोक्षुरादि गुग्गुल 100 ग्राम 

इसके 100 ग्राम की क़ीमत क़रीब 310 रुपया है जिसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 




इसे भी जानिए -







13 May 2019

Krimikuthar Ras Benefits in Hindi | कृमिकुठार रस पेट के कीड़ों की आयुर्वेदिक औषधि



कृमिकुठार रस क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो हर तरह के पेट के कीड़ों को दूर करने में बेजोड़ है. बल्कि यह कहें कि सिर्फ़ पेट के कीड़े ही नहीं बल्कि शरीर के हर तरह के कीड़े या वर्म्स को दूर कर देता है. तो आईये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं –

कृमिकुठार रस जैसा कि इसका नाम है कृमि यानि वर्म्स पर कुठार या कुल्हाड़ी की तरह वार कर नष्ट कर देने वाली रसायन औषधि.

रसायन औषधि होने से यह तेज़ी से असर करती है, इसमें शुद्ध पारा और शुद्ध गन्धक का  योग होता है.

कृमिकुठार रस के घटक या कम्पोजीशन –

इसे शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, वायविडंग, शुद्ध हींग, इन्द्रजौ, बच, कमीला, करंजबीज मज्जा, पलाश के बीज, अनार मूल छाल, सुपारी, डिकामली, लहसुन, सोंचर नमक, अजवायन सत्व जैसी औषधियों के मिश्रण से ग्वारपाठा की तीन भावना देकर गोलियाँ या टेबलेट बनायी जाती है.

कृमिकुठार रस के फ़ायदे-

आयुर्वेदानुसार यह बीसों प्रकार के कृमि को नष्ट कर देती है. यानी यह हर तरह के कीड़ों को दूर करने की क्षमता रखती है.

छोटे बच्चों को अक्सर पेट में कीड़े हो जाते हैं. अगर बच्चों में कीड़े के लक्षण हों जैसे – आलस, मुँह से लार गिरना, पेट दर्द, कब्ज़, मलद्वार में  खुजली होना, नीन्द नहीं आना, नीन्द में अचानक चौंक जाना, नीन्द में दांत पिसना या दांत किटकीट करना तो कृमिकुठार रस का सेवन कराना चाहिए.

बच्चे-बड़े सभी के लिए पेट के कीड़े होने पर इसका प्रयोग करना चाहिए.

कई बार बच्चों में पेट के कीड़े होने पर दौरे भी पड़ते हैं जिसे लोग आसानी से मिर्गी की बीमारी समझ लेते हैं, पर या मिर्गी न होकर इसका मूल कारन पेट के कीड़े होते हैं. तो ऐसी अवस्था में अगर जाँच में पेट के कीड़े निकले तो कृमिकुठार रस का सेवन कराना चाहिए.

अंग्रेज़ी डॉक्टर पेट के कीड़ों के लिए Mebendazole, Albendazole जैसी दवाईयाँ देते हैं, पर उनसे स्थायी लाभ नहीं होता है. जहाँ अंग्रेजी दवा फेल हो गयी हो वहां भी कृमिकुठार रस के उचित सेवन से लाभ हो जाता है.

और एक पते की बात बता दूँ कि पुराने फ़ाइलेरिया में मैं नित्यानन्द रस, फ़ाइलेरियल कैप्सूल जैसी दवाओं के साथ कृमिकुठार रस का भी प्रयोग कराता हूँ, इससे कृमिजन्य फ़ाइलेरिया नष्ट होता है.

कृमिकुठार रस की मात्रा और सेवन विधि –

दो से चार गोली तक सुबह-शाम विडंगारिष्ट के साथ देना चाहिए यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है. बच्चों को एक-एक गोली सुबह-शाम शहद के साथ देना चाहिए.

अगर कब्ज़ भी हो तो पंचसकार चूर्ण या एरण्ड तेल का भी प्रयोग करते रहना चाहिए ताकि पेट के कीड़े मरकर आसानी से बाहर निकल सकें.

अगर कब्ज़ नहीं हो और पेट साफ़ होता हो तो 7 से 11 दिनों में ही पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं. अन्यथा 21 से 41 दिनों तक विशेष अवस्था में इसका सेवन कराना चाहिए.

उच्च गुणवत्ता वाली औषधि कृमिकुठार रस बिल्कुल सही क़ीमत में ऑनलाइन अवेलेबल है हमारे स्टोर लखैपुर डॉट इन पर जिसका लिंक दिया गया है-