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31 March 2018

Charak Stop IBS Tablet Review | स्टॉप आई बी एस टेबलेट


स्टॉप आई बी एस टेबलेट आयुर्वेदिक कंपनी चरक फार्मा का पेटेंट ब्रांड है जो IBS और इसके लक्षणों को दूर करने में असरदार है. इसके इस्तेमाल से IBS, डायरिया, स्ट्रेस, बैक्टीरियल इन्फेक्शन, फंगल इन्फेक्शन और पेट के कीड़े जैसी बीमारियाँ दूर होती हैं, तो आईये जानते हैं चरक स्टॉप आई बी एस टेबलेट का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

चरक स्टॉप आई बी एस टेबलेट का कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे कुटज की छाल, सोंठ, मोथा, बिल्व मज्जा, अतिविषा और ब्रह्मी के मिश्रण से बनाया गया है.

कुटज की छाल, मोथा, बिल्व मज्जा या कच्चे बेल की गिरी दस्त रोकने और IBS की जानी-मानी औषधि है जिस शास्त्रीय आयुर्वेदिक दवाओं में प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है जैसे कुटजघन वटी, कुटजारिष्ट, बिल्वादि चूर्ण और गंगाधर चूर्ण वगैरह.

अतीविषा जो एंटी डायरियल और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे गुणों से भरपूर है. जबकि ब्रह्मी का मिश्रण पेट को शीतलता देने, स्ट्रेस, चिंता और तनाव को दूर कर दिमागी शांति देने में मदद करता है. 

चरक स्टॉप आई बी एस टेबलेट के गुण- 

एंटी डायरियल, एंटी Spasmodic, एंटी बैक्टीरियल, एंटी स्ट्रेस और Digestive गुणों से भरपूर है. 

चरक स्टॉप आई बी एस टेबलेट के फ़ायदे-


  • जैसा कि इसका नाम है वैसा ही इसका काम है, IBS और इस से रिलेटेड प्रॉब्लम को दूर करता है. 



  1. बार-बार दस्त आना, कब्ज़ और पेट दर्द को दूर करता है.



  • Bowel Movement को सही करता है, पेट की सुजन को कम करता है और बैक्टीरिया ग्रोथ को ख़त्म करता है.



  • स्ट्रेस, चिंता, तनाव और डिप्रेशन को दूर करने में मदद करता है. 


चरक स्टॉप आई बी एस टेबलेट का डोज़ -

एक से दो टेबलेट रोज़ दो से तीन बार तक खाना खाने के बाद पानी से लेना चाहिए. या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से.

परहेज़ - 

जैसा कि आप सभी जानते ही होंगे IBS की प्रॉब्लम में कुछ परहेज़ भी करना चाहिए. तेल, मसाला वाले फ़ूड और गैस बनाने वाले भोजन न करें. तम्बाकू, गुटखा और अल्कोहल जैसी चीज़ों से परहेज़ रखें.

हल्का और आसानी से डाइजेस्ट होने वाला खाना खाएं टाइम से. एक बार में ज़्यादा खाने की बजाये थोड़ा ही खाना खाएं. तरल पदार्थों का सेवन करें, पानी खूब पियें. 

चरक स्टॉप आई बी एस के 30 टेबलेट की क़ीमत 230 रुपया जिसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से- 



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28 March 2018

स्वर्णभूपति रस के गुण और प्रयोग | Swarnbhupati Ras Benefits & Use


स्वर्णभूपति रस क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो कई तरह के रोगों को दूर करता है. इसके इस्तेमाल से क्षय रोग, सन्निपात, आम वात, धनुर्वात, कफवात, कमर दर्द, प्रमेह, पत्थरी, कुष्ठ, भगंदर जैसे कई सारे रोग नष्ट होते हैं, तो आईये जानते हैं स्वर्णभूपति रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

स्वर्णभूपति रस का घटक या कम्पोजीशन- 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक एक-एक भाग, ताम्र भस्म दो भाग, अभ्रक भस्म, लौह भस्म, कान्त लौह भस्म, स्वर्ण भस्म या सोने का वर्क, चाँदी भस्म या चाँदी का वर्क और शुद्ध बच्छनाग प्रत्येक एक-एक भाग. 

स्वर्णभूपति रस निर्माण विधि-

यह कुपिपक्व रसायन औषधि है जिसे हर किसी के लिए बनाना आसान नहीं होता. इसे बनाने के लिए सबसे पहले पारा-गंधक को खरलकर कज्जली बना लें उसके बाद दूसरी चीज़ों को मिक्स कर 'हँसराज' के रस में एक दिन खरलकर छोटी-छोटी गोलियाँ बनाकर सुखाकर, इसको आतशी शीशी में डालकर बालुका यंत्र में तीन प्रहर तक मंद अग्नि देने के बाद पूरी तरह से ठंडा होने पर निकालकर पीसकर रख लें. यही स्वर्णभूपति रस है. 

स्वर्णभूपति रस के गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह त्रिदोष नाशक है जिसकी वजह से हर तरह की बीमारियों को दूर करने की शक्ति है इसमें. 

स्वर्णभूपति रस के फ़ायदे- 

यह सन्निपात और क्षय रोग या T.B. में बेहद असरदार है. टी. बी. की सेकंड स्टेज में भी इसका इस्तेमाल करने से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं. 

आयुर्वेदिक डॉक्टर हर तरह के वात रोगों में इसका इस्तेमाल करते हैं, इसके इस्तेमाल से आमवात, धनुर्वात, शृंखलावात, आढ्य्वात, पंगुता, कफवात, कमर दर्द, अग्निमान्ध, पेट दर्द, पेट में गोले बनना, प्रमेह, पाचन विकार, पत्थरी, एक्जिमा, कुष्ठ, खाँसी, अस्थमा, बुखार जैसी कई तरह की बीमारियों में अनुपान भेद से इसका प्रयोग किया जाता है. 

ताम्र भस्म की मात्रा मिला होने से यह लीवर-स्प्लीन और किडनी के फंक्शन को सही करता है और विषाक्त तत्वों या Toxins को बाहर निकालता है. 

चाँदी भस्म मिला होने से शरीर को ताक़त देता है, दिमाग को पोषण देता है, यादाश्त बढ़ाता है और त्वचा को नर्म मुलायम बनाता है. 

वात वाहिनी नाड़ियों पर इसका असर होने से झटके पड़ना, लंगड़ाना और बॉडी के हर तरह के दर्द को दूर करता है. 

कुल मिलाकर देखा जाये तो त्रिदोषनाशक होने से यह दवा कई तरह की बीमारियों को दूर कर देती है. 

स्वर्णभूपति रस की मात्रा और सेवन विधि - 

60 से 125 mg तक शहद, अदरक के रस, पिप्पली चूर्ण या फिर रोगानुसार उचित अनुपान से आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए. इसे डॉक्टर की सलाह से सही डोज़ में ही लेना चाहिए, नहीं तो सीरियस नुकसान भी हो सकता है. इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीदा जा सकता है. बैद्यनाथ के 10 टेबलेट की क़ीमत क़रीब 700 रुपया है. 

Virya Stambhan Vati Benefits & Use | वीर्यस्तम्भन वटी के गुण और प्रयोग


वीर्यस्तम्भन वटी क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो पुरुषों की यौन समस्या जैसे शीघ्रपतन और वीर्य का पतलापन दूर कर पॉवर-स्टैमिना को बढ़ाती है और पाचन क्रिया को सुधारती है. तो आईये जानते हैं वीर्यस्तम्भन वटी का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल -


वीर्यस्तम्भन वटी जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है वीर्य का स्तम्भन करने वाली, स्तम्भन का मतलब होता है रोकना. वीर्यस्तम्भन वटी यानी वीर्य को जल्दी निकलने से रोकने वाली टेबलेट.

वीर्यस्तम्भन वटी के घटक या कम्पोजीशन और निर्माण विधि - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसके लिए चाहिए होता है- सिद्ध मकरध्वज- 1 ग्राम, जुन्दबेदस्तर - 8 ग्राम, केसर, लोबान के फुल, जावित्री, अकरकरा, लौंग और भीमसेनी कपूर प्रत्येक दो-दो ग्राम. 

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पहले जड़ी-बूटियों का बारीक चूर्ण बना लें, उसके बाद सिद्ध मकरध्वज को खरल कर चूर्ण मिक्स करें और बांग्ला पान के रस में मर्दन कर अंत में कपूर मिक्स कर अच्छी तरह घुटाई करने के बाद एक-एक रत्ती या 125 mg की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यही वीर्यस्तम्भन वटी कहलाती है. खरल करते हुवे थोड़ा शहद भी मिलाने का प्रावधान है, पर यदि शहद ज़्यादा मिल जाये तो गोली बनाने में दिक्कत होती है. 

वीर्यस्तम्भन वटी के फ़ायदे -


  •  यह स्तम्भन शक्ति बढ़ाने वाली असरदार दवा है, इसके इस्तेमाल से वीर्य विकार दूर होते हैं, वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन दूर होता है.



  • यह पाचन शक्ति को ठीक करती है, पॉवर-स्टैमिना को बढ़ाती है. 



  • कमजोरी दूर कर चुस्ती-फुर्ती देती है. चिंता-तनाव को दूर कर नया जोश और उमंग जगाती है. 



  • मधुमेह की वजह से होने वाली यौनकमज़ोरी में भी दूसरी सहायक औषधियों के साथ लेने से अच्छा फ़ायदा होता है.



  • सर्दी-जुकाम, खाँसी और अस्थमा में भी इस से फ़ायदा होता है. यह एक योगवाही रसायन औषधि है जिस से कई तरह की बीमारियाँ दूर होती हैं सहायक औषधियों के साथ लेने से. 



वीर्यस्तम्भन वटी की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो गोली तक सुबह शाम दूध के साथ लेना चाहिए भोजन के एक घंटा बाद. या आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से उचित अनुपान से लेना चाहिए. इसे मीठे पान के पत्तों के साथ भी चबा-चबा कर खा सकते हैं. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही प्रयोग करना चाहिए. व्यास फार्मा के दो ग्राम के पैक की क़ीमत 270 रुपया है जिसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं.


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27 March 2018

Prasarini Tel Benefits & Use | प्रसारणी तेल के फ़ायदे - Lakhaipur.com


प्रसारणी तेल क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो हर तरह के वात रोगों में असरदार है. इसके इस्तेमाल से हाथ-पैर और गले की जकड़न, लॉक जा या जबड़ों का अटक जाना, फेसिअल पैरालिसिस, अर्थराइटिस, साइटिका, लकवा और जोड़ों के दर्द जैसे रोगों में फ़ायदा होता है, तो आईये जानते हैं प्रसारणी तेल का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

प्रसारणी तेल का घटक या कम्पोजीशन - 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मेन इनग्रीडेंट प्रसारणी या गंधप्रसारणी नाम की बूटी होती है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे कई तरह की जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया जाता है जैसे - 

यष्टिमधु, पिपरामूल, चित्रक, सेंधा नमक, बच, प्रसारिणी, देवदार, रास्ना, गजपीपल, भल्लातक, शतपुष्पा, जटामांसी प्रत्येक 32-32 ग्राम लेना है कल्क या चटनी बनाने के लिए.

प्रसारणी 5 किलो लेकर 15 लीटर पानी में काढ़ा बनाना होता है, जब पांच लीटर पानी बचे तो छान लें और इसमें तिल का तेल, दही और कांजी प्रत्येक तिन-तीन किलो तथा  दूध 12 लीटर मिक्स कर एक कड़ाही में डाल लें. इसके बाद कल्क द्रव्यों को मिक्स कर तेल-पाक विधि से तेल सिद्ध कर लें. यही प्रसारणी तेल कहलाता है. 

प्रसारणी तेल के गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह वात और कफ़ दोष को बैलेंस करता है. यह दर्द, सुजन और जकड़न नाशक गुणों से भरपूर होता है. 

प्रसारणी तेल के फ़ायदे - 


  • जबड़ों की जकड़न या लॉक जा, फेसिअल पैरालिसिस, लकवा, गर्दन, हाथ-पैर या बॉडी की जकड़न, जोड़ों का दर्द और साइटिका जैसे रोगों में इसकी मालिश करनी चाहिए. 



  • हड्डी टूटने, मृगी और पागलपन में भी इसकी मालिश से फ़ायदा होता है. 



  • जो लोग तेज़ नहीं चल सकते उनकी नसों में ब्लड फ़्लो बढ़ाकर फुर्ती देता है. लंगडाकर चलने वाले लोग इसकी लगातार मालिश से ठीक हो जाते हैं. 



  • हर तरह के दर्द में दर्दनाशक तेल की तरह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. 



  • पुरुष-महिला इस तेल से प्रजनन अंगों पर भी मालिश कर सकते हैं.



  • वैरिकोस वेन में भी इसकी मालिश से फ़ायदा होता है. 



  • प्रसारणी तेल को पंचकर्म के अभ्यंग या मसाज थेरेपी, कटी बस्ती और एनिमा जैसे प्रोसेस में भी इस्तेमाल किया जाता है. 



  • वैसे तो यह बाहरी प्रयोग के लिए मसाज का तेल है पर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से इसे नस्य या Nasal Drops के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं. 


प्रसारणी तेल के बारे में एक और बात बता दूं कि यह पालतू पशुओं के लिए भी असरदार है, चोट-दर्द, सुजन में इसका प्रयोग कर सकते हैं. 

प्रसारणी तेल की प्रयोग विधि - 

दर्द-सुजन और जकड़न वाली जगह पर इस तेल से रोज़ दो-तिन बार मालिश करनी चाहिए. यह बिल्कुल सेफ़ दवा है, किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. लॉन्ग टाइम तक यूज़ कर सकते हैं. इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं निचे दिए गए लिंक से -




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24 March 2018

Charak Manoll Review- General Tonic | चरक मैनोल माल्ट के फ़ायदे


चरक मैनोल जो है काफी पुराना और Trusted हर्बल ब्राण्ड है जो अपने गुणों के कारण प्रचलित है. यह खून की कमी और कमज़ोरी को दूर करता है. पाचन शक्ति को इम्प्रूव करता है और चुस्ती-फुर्ती लाने में मदद करता है. यह एक बेहतरीन हर्बल फॅमिली टॉनिक है. तो आईये जानते हैं चरक मैनोल का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

चरक मैनोल का कम्पोजीशन - 

इसका मेन इनग्रीडेंट आँवला है, इसके अलावा इसमें अश्वगंधा, गुडूची, गोक्षुर, सोंठ, चुकन्दर, पालक, पिप्पली, मंडूर भस्म और शहद का मिश्रण होता है. यह हनी बेस पर माल्ट के तरह की दवा है. 

चरक मैनोल के फ़ायदे- 


  • यह एक बेहतरीन टॉनिक है जो बॉडी के टिश्यु को नवयौवन और शक्ति देता है. आँवला का मिश्रण होने से बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी एजिंग और इम्युनिटी बूस्टर है. 



  • चिंता-तनाव और स्ट्रेस को दूर करता है, मानसिक शांति देता है. 



  • पाचन शक्ति को ठीक करता है और कब्ज़ नहीं होने देता. 



  • खून की कमी, बीमारी के बाद होने वाली कमज़ोरी को दूर कर, जल्द रिकवर होने में मदद करता है. 



  • प्रेगनेंसी और ब्रेस्ट फीडिंग में भी फ़ायदेमंद है. बच्चे-बड़े सभी यूज़ कर सकते हैं, फॅमिली टॉनिक की तरह. 



  • टेस्टी होने की वजह से बच्चे भी इसे बड़े चाव से खाते हैं. 


चरक मैनोल माल्ट का डोज़ -

एक से दो चम्मच सुबह शाम खाना के बाद. बच्चों को कम डोज़ में देना चाहिए. शहद मिला होने से शुगर वाले इसका कैप्सूल यूज़ कर सकते हैं. लगातार इसका सेवन करते रहने से भी किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. 

चरक मैनोल माल्ट के बारे में मेरी राय - 

मैं इसे ख़ुद यूज़ कर चूका हूँ, स्टूडेंट लाइफ़ में अक्सर इसे खाया करता था. यह एक बेहतरीन जनरल हेल्थ टॉनिक है. इसके 400 ग्राम के पैक की क़ीमत 146 रुपया है, इसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए गए लिंक से - 



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Mahavat Vidhwansan Ras | महा वातविध्वंसन रस वात रोगों की आयुर्वेदिक औषधि


महा वातविध्वंसन रस क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो हर तरह के वात रोगों को दूर करती है. इसके इस्तेमाल से मसल्स और नाड़ियों का दर्द, जोड़ों का दर्द, पेट का दर्द, पैरालिसिस और मिर्गी जैसे रोगों में फ़ायदा होता है. तो आईये जानते हैं महा वातविध्वंसन रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

महा वातविध्वंसन रस का मतलब होता है वात रोगों का विध्वंस या नष्ट करने वाली रसायण औषधी. जिसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए. 

महा वातविध्वंसन रस का कम्पोजीशन-

यह रसतंत्रसार व् सिद्ध प्रयोग संग्रह या योग है. इसमें पारा गंधक के अलावा जड़ी-बुटियों का मिश्रण होता है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो बनाने के लिए शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, नाग भस्म, वंग भस्म, लौह भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, टंकण भस्म, सोंठ, मिर्च और पीपल एक-एक भाग और शुद्ध वत्सनाभ चार भाग लेना होता है. 

बनाने का तरीका यह होता है कि सबसे पहले पारा-गंधक की कज्जली बनाकर दूसरी जड़ी-बूटियों का बारीक चूर्ण मिक्स कर त्रिकटु, त्रिफला, चित्रकमूल, भृंगराज, कुठ, निर्गुन्डी और आँवला के क्वाथ की एक-एक भावना दें. निम्बू के रस और अर्कक्षीर की भी एक-एक भावना देकर अच्छी तरह से खरलकर 125 mg की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. 

महा वातविध्वंसन रस के गुण -

यह मुख्यतः वातनाशक है, वात दोष को बैलेंस करता है. Analgesic, Anti-inflammatory, Anti-colic जैसे गुणों से भरपूर होता है.

महा वातविध्वंसन रस के फ़ायदे-

वात रोगों की यह जानी-मानी दवा है, आमवात जोड़ों का दर्द, नसों का दर्द, मसल्स का दर्द, बदन दर्द, लकवा, पेट दर्द जैसी तकलीफ़ों में आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से इसका इस्तेमाल करना चाहिए. 

जोड़ों का सुजन, शरीर की सुजन में भी असरदार है.

यह पाचन शक्ति को ठीक करता है और भूख बढ़ाने में मदद करता है.

महा वातविध्वंसन रस की मात्रा और सेवन विधि - 

एक से दो गोली सुबह शाम शहद, अदरक के रस या फिर रोगानुसार उचित अनुपन के साथ लेना चाहिए. इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही यूज़ करें नहीं तो नुकसान भी हो सकता है. 


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22 March 2018

वैद्य जी की डायरी # 5 How to Get Rid from Mucus in Stool? | आँव(आम) दूर करने का आयुर्वेदिक योग


अगर आपको आँव आने की प्रॉब्लम है और तरह-तरह की दवा खाने के बाद भी फ़ायदा नहीं हो रहा है तो इस नुस्खे को आज़मा सकते हैं. तो आईये जानते हैं आँव को दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे की पूरी डिटेल - 

आँव को आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं, Mango वाला आम नहीं बल्कि Mucus को आम कहा जाता है. 

आम(आँव) नाशक योग - 

इसके लिए आपको चाहिए होगा - सौंफ़, सोंठ, इंद्रजौ, तज कलमी, अलसी बीज, इसबगोल की भूसी, घी और चीनी सभी बराबर वज़न में. 

घी के अलावा सभी चीज़ों को कूट-पीसकर चूर्ण बना लेना और कड़ाही में घी डालकर चूर्ण को हल्का भून लें. बस दवा तैयार है. 

मात्रा और सेवन विधि- 

3 ग्राम इस चूर्ण को एक ग्लास पानी से लेना है रोज़ तीन से चार बार तक. 

इस चूर्ण का इस्तेमाल करने से हर तरह की आँव, पेट का दर्द, ऐंठन, बार-बार दस्त लगना जैसी प्रॉब्लम दूर होती है. यह पेट की जमा आँव को निकालकर रोग से मुक्ति देता है. 

यह हमारा पर्सनल नुस्खा है, बना बनाया नहीं मिलता. थोड़ी मेहनत कर खुद बना सकते हैं या फिर स्थानीय वैद्य जी से बनवाकर यूज़ करें. 

वैद्य जी की डायरी के कुछ उपयोगी पन्ने - 

सफ़ेद पानी या ल्यूकोरिया का 100% इफेक्टिव योग 






20 March 2018

Ushirasava Benefits and Usage | उशीरासव के फ़ायदे


उशीरासव क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो हर तरह की ब्लीडिंग को रोकती है. इसके अलावा पेशाब की इन्फेक्शन, बॉडी की गर्मी, जलन और खून की ख़राबी को भी दूर करती है. तो आईये जानते हैं उशीरासव का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

उशीरासव जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है इसका मुख्य घटक उशीर नाम की जड़ी होती है, यह आसव या सिरप के रूप में होता है.

उशीरासव का कम्पोजीशन-

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें कई तरह की जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं जैसे- 

उशीर, नेत्रबला, नील कमल, लाल कमल, सफ़ेद कमल, प्रियंगु, गम्भारी, लोध्र, पद्माख, मंजीठ, धमासा, पाठा, चिरायता, बरगद, उदम्बर, कांचनार, जामुन, पित्तपापड़ा, कचूर, पटोलपत्र, मोचरस प्रत्येक 50-50 ग्राम, मुनक्का 1 किलो, धातकी 750 ग्राम, चीनी 5 किलो, शहद ढाई किलो और पानी 25 लीटर का मिश्रण होता है. जिसे आसव निर्माण विधि से इसका सिरप बनाया जाता है. 

उशीरासव के गुण -

आयुर्वेदानुसार यह रक्तपित्त नाशक है, तासीर में ठंडा, खून का बहना रोकने वाला(Hemostatic) पेशाब साफ़ लाने वाला, बॉडी की गर्मी और जलन दूर करने वाला और रक्तशोधक जैसे गुणों से भरपुर होता है. 

उशीरासव के फ़ायदे- 

बॉडी में कहीं से भी होने वाली ब्लीडिंग को रोकने की यह असरदार दवा है. नाक-मुँह से ब्लीडिंग होना, ख़ूनी बवासीर, रक्त प्रदर, पीरियड की हैवी ब्लीडिंग और दूसरी हर तरह की ब्लीडिंग में इसका इस्तेमाल किया जाता है. 

रक्तपित्त या बॉडी में गर्मी बढ़ जाने, हाथ-पैर या बॉडी में जलन होने में यह फ़ायदा करती है. 

पेशाब की जलन, पेशाब की इन्फेक्शन, बॉडी की सुजन और पेट के कीड़ों को भी दूर करती है. 

पित्त बढ़ने या गर्मी की वजह से होने वाले स्वप्नदोष में भी असरदार है. 

रक्तशोधक गुण होने से यह खून को साफ़ कर ब्लड इम्पुरिटी को दूर करती है. 

उशीरासव की मात्रा और सेवनविधि -

15 से 30 ML सुबह शाम बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर लेना चाहिए भोजन के बाद. बच्चों को कम डोज़ में देना चाहिए. यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, सही डोज़ में लेने से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. डाबर के 450 ML के बोतल की किमत 160 रुपया है, इसे आयुर्वेदिक दवा दुकान से या फिर ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं.

इसे भी जानिए - 






18 March 2018

Stay On Capsule Review in Hindi - Lakhaipur.com


स्टेऑन कैप्सूल मारुती हर्बल नाम की कम्पनी का पेटेंट ब्रांड है जो पुरुषों की कामशक्ति, पॉवर और स्टैमिना बढ़ाने का दावा करती है. तो आईये जानते हैं क्या यह वाक़ई असरदार है? और जानेंगे इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

स्टे ऑन कैप्सूल का कम्पोजीशन-

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे सफ़ेद मुसली, जायफल, अश्वगंधा, गोखुरू, लौंग, तालमखाना, बीजबंद, सालम पंजा, विदारीकन्द, अकरकरा, पीपल, कौंच बीज, शतावर, उटंगन, शिलाजीत, बंग भस्म, मकरध्वज और जिनसेंग के मिश्रण से बनाया गया है. 

यौनशक्तिवर्धक जड़ी-बूटियों के मिश्रण के हिसाब से इसका कम्पोजीशन ठीक ही लगता है. जिनसेंग का मिश्रण इसे थोड़ा यूनिक बनाता है क्यूंकि अधिकतर आयुर्वेदिक प्रोडक्ट में जिनसेंग शायेद  ही मिलाया जाता है. 

स्टे ऑन कैप्सूल के फ़ायदे - 

यौन कमज़ोरी को दूर करने वाली जड़ी-बूटियों का मिश्रण होने से यह एक यौनशक्ति वर्धक दवा है जो पॉवर और स्टैमिना को बढ़ाकर मर्दाना कमज़ोरी को दूर करने में मदद करती है. 

पुरुषों की बहुत की कॉमन बीमारी शीघ्रपतन में इस से फ़ायदा होता है. 

जनरल हेल्थ सप्लीमेंट के रूप में भी इसे ले सकते हैं, शारीरिक कमज़ोरी और धातुक्षीणता होने पर इस से बहुत ज़्यादा फ़ायदा नहीं होने वाला. कुछ लोग बहुत बढ़ा-चढ़ाकर इसके बारे में यूट्यूब में जानकारी देते हैं, वैसा नहीं है. 

स्टे ऑन कैप्सूल का डोज़-

एक कैप्सूल सुबह शाम या फिर दो कैप्सूल रोज़ एक बार एक ग्लास दूध से खाना के एक घंटा बाद भी ले सकते हैं. इसके 30 कैप्सूल की क़ीमत क़रीब 510 रुपया है. 


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17 March 2018

Chandrakala Ras Benefits, Use & Ingredients | चन्द्रकला रस के फ़ायदे


चन्द्रकला रस क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो हर तरह के पित्त रोगों को दूर करती है. इसके इस्तेमाल से बॉडी की गर्मी, हाथ-पैर की जलन, नकसीर, चक्कर, बेहोशी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारीयों में फ़ायदे होता है. तो आईये जानते हैं चन्द्रकला रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

चन्द्रकला रस आयुर्वेदिक रसायन औषधि है जिसमे पारा-गंधक के अलावा दूसरी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं. 

इसका घटक या कम्पोजीशन बताने से पहले एक हैरान करने वाली बात बताना चाहूँगा कि आज की डेट में इन्टरनेट पर इसकी जो भी जानकारी है वो बिल्कुल ग़लत है ख़ासकर इसके कम्पोजीशन के बारे में. ख़ुद को BAMS और MD कहने वाले तथाकथित डॉक्टर लोग भी इसकी ग़लत जानकारी दे रहे हैं. ऐसे ही लोगों से आयुर्वेद का नाम बदनाम होता है. भाई अगर मालूम नहीं है तो ग़लत कम्पोजीशन क्यूँ बता रहे हैं? जिनको आयुर्वेद का ABC भी मालूम नहीं है वो लोग भी आजकल यु ट्यूब पर डॉक्टर बन बैठे हैं.  

चलिए अब मैं बताता हूँ सिद्ध योग संग्रह में बताया गया इसका सही कम्पोजीशन और निर्माण विधि-

चन्द्रकला रस का कम्पोजीशन - 

शुद्ध पारा, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, कुटकी, गिलोय सत्व, पित्तपापड़ा, खस, छोटी पीपल, सफ़ेद चन्दन, अनन्तमूल, बंशलोचन, कपूर प्रत्येक 10-10 ग्राम, शुद्ध गंधक और मोती पिष्टी 20-20 ग्राम

निर्माण विधि - 

सबसे पहले पारा और गंधक की कज्जली बना लें. उसके बाद भस्म और जड़ी-बूटियों का बारीक चूर्ण मिक्स करें. 

इसके बाद नागर मोथा, मीठा अनार, दूध, केवड़ा, कमल, सहदेई, शतावर और पित्तपापड़ा की रोज़ एक-एक भावना देना है. उसके बाद मुनक्का के काढ़े की सात भावना देकर सबसे आखिर में 10 ग्राम कपूर मिक्स कर चने के बराबर की गोलियाँ बना कर सुखाकर रख लें. 

चन्द्रकला रस के गुण -

यह मुख्यतः पित्तनाशक है और वात-पित्त को भी दूर करता है. तासीर में ठंडा, खून के थक्के जमाकर ब्लीडिंग रोकने वाला और मूत्रल या Diuretic जैसे गुणों से भरपूर होता है. यह बॉडी के अन्दर और बाहर की गर्मी को दूर करता है. ठंडी और गर्मी के मौसम में बेहद असरदार है. 

चन्द्रकला रस के फ़ायदे- 

चन्द्रकला रस जो है हर तरह के पित्तज और वात-पित्तज रोगों की बेहतरीन दवा है. बॉडी के अन्दर और बाहर होने वाली जलन और गर्मी को दूर कर देती है. 

बॉडी का तापमान बहुत ज़्यादा होना, बहुत ज़्यादा प्यास लगना, बहुत ज़्यादा पसीना आना, ब्लड प्रेशर बढ़ जाना, पेशाब की जलन होना जैसी प्रॉब्लम में इसका प्रयोग करना चाहिए.

गर्मी की वजह से चक्कर आना, बेहोश हो जाना, आँखों के आगे अँधेरा छाना जैसी प्रॉब्लम में असरदार है. 

नाक-मुँह से ब्लीडिंग होना और रक्त प्रदर में भी असरदार है. 

कुल मिलाकर पित्त और गर्मी वाली बीमारियों के लिए यह एक बेहद असरदार औषधि है जिसे उचित अनुपान और रोगानुसार दूसरी सहायक औषधियों के साथ लेने से कई तरह की बीमारियाँ दूर होती हैं. 

चन्द्रकला रस की मात्रा और सेवनविधि- 

एक-एक गोली सुबह शाम ठंडा पानी, अनार का जूस, उशिरासव, दाड़ीमाअवलेह या फिर पेठे के रस के साथ लेना चाहिए. चूँकि यह रसायन औषधि है इसलिए आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही यूज़ करें.

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15 March 2018

Typhoid Herbal Treatment | टाइफाइड की आयुर्वेदिक चिकित्सा - Vaidya Ji Ki Diary- Lakhaipur.com


टाइफाइड में कौन-कौन सी आयुर्वेदिक दवा किस तरह से लेना चाहिए, इसके बारे में आईये जानते हैं  पूरी डिटेल - 

टाइफाइड एक ऐसी बीमारी है जो जल्दी जाती नहीं है. अंग्रेज़ी दवाओं से कुछ दिन के आप ठीक तो हो जाते हैं पर कुछ हफ्ते या फिर कुछ महीने बाद फिर से बुखार आने लगता है. जब तक ब्लड टेस्ट में पूरी तरह से नेगेटिव नहीं हो जाता, टाइफाइड नहीं जाता है. अगर आप अंग्रेज़ी दवाएँ खाकर निराश हो चुके हों तो भी कोई बात नहीं, मेरा बताया योग प्रयोग कर टाइफाइड से मुक्ति पा सकते हैं -

टाइफाइड के लिए आयुर्वेदिक योग -

इसके लिए आपको चाहिए होगा संजीवनी वटी, लक्ष्मीविलास रस(नारदीय), मोती भस्म, प्रवाल पिष्टी-प्रत्येक 5-5 ग्राम और गिलोय सत्व - 20 ग्राम 

सभी को अच्छी तरह से खरलकर 40 पुड़िया बना लें, बस दवा तैयार है. 

सेवन विधि-

एक-एक पुड़िया सुबह-दोपहर-शाम खाना के बाद शहद में मिक्स कर लेना है. इसके साथ में 'अमृतारिष्ट' भी दो-दो चम्मच सुबह शाम खाना के बाद लेना चाहिए. 

बताया गया योग कम से कम 21 दिनों तक लेना चाहिए. ब्लड टेस्ट में टाइफाइड नेगेटिव आने पर ही दवा बंद करें. स्थानीय वैद्य जी की देख रेख में बताया गया योग यूज़ करना अच्छा रहता है. 



12 March 2018

Himalaya VigorCare for Men Review in Hindi



हिमालया विगोरकेयर कैप्सूल जो है हिमालया हर्बल का एक पेटेंट ब्रांड है जो पुरुषों की यौनशक्ति को बढ़ाता है और हेल्थ सप्लीमेंट की तरह काम करता है. तो आईये जानते हैं हिमालया विगोरकेयर कैप्सूल का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

हिमालया विगोरकेयर कैप्सूल का कम्पोजीशन-

यह पूरी तरह से नॉन हार्मोनल और जड़ी-बूटियों से बना है, इसके कम्पोजीशन की बात करें तो यह तालमखाना, बादाम, केसर, पान, लौंग और कौंच बीज और अश्वगंधा जैसी चीज़ों के मिश्रण से बना होता है.

हिमालया विगोरकेयर कैप्सूल के फ़ायदे-


  • यह मेल हॉर्मोन को बढ़ाकर यौनेक्षा और कामशक्ति को बढ़ाता है. शारीरिक शक्ति, ताक़त और स्टैमिना को बढ़ाता है.



  • चिंता, तनाव और थकान को दूर कर भरपूर एनर्जी देने में मदद करता है. 



  • मर्दाना कमज़ोरी दूर करने और लॉन्ग टाइम तक यूज़ करने की यह अच्छी दवा और हेल्थ सप्लीमेंट है.


हिमालया विगोरकेयर कैप्सूल का डोज़ - 

दो कैप्सूल रोज़ एक बार सोने से एक घंटा पहले लेना चाहिए. इसे लॉन्ग टाइम तक भी यूज़ कर सकते हैं बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के. थोड़ा महँगा है पर हिमालया का क्वालिटी प्रोडक्ट है. इसके 60 कैप्सूल की क़ीमत 3175 रुपया है जिसे आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं निचे दिए लिंक से - 


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त्रिभुवनकीर्ति रस | Tribhuvan Kirti Ras - Benefits, Dosage, Ingredients & Side Effects


त्रिभुवनकीर्ति  रस क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो सर्दी, खाँसी, इन्फ्लुएंजा, नयी पुरानी- बुखार, एलर्जी, अस्थमा जैसे कफ़-वात वाले रोगों में प्रयोग की जाती है. तो आईये जानते हैं त्रिभुवनकीर्ति  रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

त्रिभुवनकीर्ति  रस जो एक फ़ास्ट एक्टिंग रसायन औषधि है जिसे आयुर्वेदिक डॉक्टर की देख रेख में ही लिया जाना चाहिए. 

त्रिभुवनकीर्ति  रस का घटक या कम्पोजीशन-

इसे बनाने के लिए शुद्ध हिंगुल, शुद्ध बछनाग, सोंठ, मिर्च, पीपल, पिपलामुल और टंकण भस्म सभी बराबर मात्रा में लेकर बारीक कपड़छन चूर्ण या फाइन पाउडर बनाने के बाद धतुरा, तुलसी और निर्गुन्डी के रस की एक-एक भावना देकर अच्छी तरह से खरल कर एक-एक रत्ती की गोलियाँ बनाकर सुखा कर रख लिया जाता है. कुछ आयुर्वेदिक कम्पनी इसका टेबलेट न बनाकर पाउडर फॉर्म में ही रखती हैं.

त्रिभुवनकीर्ति  रस के गुण -

यह कफ़ और वात नाशक, ज्वरघ्न यानि बुखार दूर करने वाली(यह पसीना लाकर बुखार कम करती है), दर्द दूर करने वाली यानि Analgesic जैसे गुणों से भरपूर होती है.

त्रिभुवनकीर्ति  रस के फ़ायदे- 

फ्लू, इन्फ्लुएंजा, सर्दी-खाँसी, बुखार वाली कंडीशन में ही इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है. 

बार-बार छींक आना, एलर्जी, एलर्जिक राईनाईटिस, टॉन्सिल्स, गले की ख़राश जैसे रोगों में असरदार है.

चिकेन पॉक्स और मीज़ल्स जैसी बीमारियों में भी आयुर्वेदिक डॉक्टर इसका इस्तेमाल कराते हैं. 

त्रिभुवनकीर्ति  रस की मात्रा और सेवन विधि -

60 से 125 mg सुबह शाम शहद, तुलसी के रस या अदरक के रस के साथ या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना चाहिए. पित्त बढ़ा होने या पित्त प्रकृति वाले लोगों को प्रवाल पिष्टी और सत्व गिलोय के साथ लेना चाहिए. 

त्रिभुवनकीर्ति  रस के साइड इफेक्ट्स- 

इसे डॉक्टर की सलाह से और डॉक्टर की देख रेख में ही यूज़ करें नहीं तो सीरियस नुकसान हो सकता है. ज्यादा डोज़ होने से दिल बैठने लगता है और हार्ट बीट कम कर देता है, इसीलिए डॉक्टर की सलाह के बिना यूज़ न करें. 

08 March 2018

Angoorasava Benefits and Use | अंगूरासव के फ़ायदे


अंगूरासव क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो भूख बढ़ाने, कमज़ोरी दूर कर शरीर को ताक़त और स्टैमिना देने, सुखी खाँसी, नीन्द की कमी और पित्त बढ़ने जैसी प्रॉब्लम में फ़ायदेमंद है. तो आईये जानते हैं अंगूरासव का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

अंगूरासव का कम्पोजीशन-

अंगूरासव का मुख्य घटक या मेन इनग्रीडेंट अंगूर होता है, इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

मीठे अंगूर का रस - 10 किलो चीनी- 5 किलो धाय के फूल- 1/2 किलो चिकनी सुपारी- 25 ग्राम लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपात, सोंठ, मिर्च, पीपल, नागकेशर, अकरकरा, कमलकन्द, कूठ और बबूल की छाल प्रत्येक 20-20 ग्राम लेना होता है. 

जिसे आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव निर्माण विधि से इसका आसव या सिरप बनाया जाता है. 

अंगूरासव के गुण - 

आयुर्वेदानुसार यह पित्त नाशक है, पाचक या digestive, भूख बढ़ाने वाला, बल-ओज और वीर्य वर्धक, पौष्टिक, एंटी ऑक्सीडेंट और कार्डियो प्रोटेक्टिव जैसे गुणों से भरपूर होता है.

अंगूरासव के फ़ायदे- 

भूख की कमी, शारीरिक कमज़ोरी, मन खिन्न रहना, नीन्द की कमी, पित्त बढ़ने से होने वाला सर दर्द और चक्कर, और सुखी खाँसी जैसे लक्षण होने पर इसका इस्तेमाल करना चाहिए. 

यह सौम्य विरेचक या माइल्ड Laxative है जिस से कब्ज़ दूर होता है. 

यह एक तरह का आयुर्वेदिक टॉनिक है जो कमज़ोरी और थकान दूर कर पॉवर और स्टैमिना को बढ़ाता है. 

अंगूरासव की मात्रा और सेवन विधि - 

15 से 30 ML तक सुबह शाम खाना खाने के बाद बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर लेना चाहिए. बच्चों को 5 से 10 ML तक देना चाहिए. बच्चे-बड़े सभी यूज़ कर सकते हैं बिल्कुल सेफ़ दवा है. चीनी की मात्रा होने से डायबिटीज वालों को नहीं लेना चाहिए. इसे लगातार दो-तीन महिना तक लिया जा सकता है. 

पुंसवन कर्म- मनचाही संतान बेटा या बेटी कैसे प्राप्त करें? जानिए महर्षि सुश्रुत ने क्या कहा था?


मनचाही संतान लड़का या लड़की पाने के लिए आचार्य सुश्रुत के बताये पुंसवन कर्म के बारे में आज के इस विडियो में बताने वाला हूँ. तो आईये जानते हैं पुंसवन कर्म की पूरी डिटेल - 

आज का मॉडर्न साइंस भले ही यह नहीं मानता हो पर यह सच है और हज़ारों बार यह साबित भी हो चूका है कि कुछ उपाय करने से आप मनचाही संतान पा सकते हैं. जिन लोगों को आयुर्वेद और आयुर्वेदिक प्रोसेस में भरोसा है वो लोग इसे ट्राई कर सकते हैं.

आचार्य सुश्रुत ने सदियों पहले पुंसवन के लिए जो कर्म बताया था वो कुछ इस तरह से है - 

सुश्रुत के अनुसार पुष्य नक्षत्र में लक्ष्मणा, बटशुंगा, सहदेवी और विश्वदेवी में से कोई जड़ी का पूरा पौधा लेकर गाय के दूध के साथ पीसकर चटनी की तरह बना लें और फिर इसे कपड़े के एक टुकड़े में डालकर निचोड़कर रस निकाल लें. 

अब इस रस को एक ड्रॉपर से स्त्री को नाक में डालना है दो-तीन बूंद तक. नाक के दायें छेद में डालने से लड़का और बाएँ छेद में डालने से लड़की का जन्म होता है. 

लेटकर ही नाक में इसका रस डालना चाहिए और अगर रस गले में आ जाये तो पी लेना चाहिए, थूकना नहीं है. ध्यान रहे इसे पुष्य नक्षत्र में ही करना है और प्रेगनेंसी का पता लगते ही जितना जल्दी हो करना चाहिए. 

सुश्रुत के मुताबिक़ पहली प्रेगनेंसी में ही इसका प्रयोग करने से सफ़लता मिलती है. 

एक दूसरा प्रयोग- 

सोना या चाँदी की एक पुरुषाकृति या पुतला बनवा लें. अब इसे आग में लाल होने तक तपायें और फिर इसे दूध या पानी में बुझाकर उस दूध या पानी को पीने से पुत्र प्राप्त होता है. इस काम को भी पुष्य नक्षत्र में करना चाहिए. 

पुष्य नक्षत्र कब होता है इसकी सही जानकारी स्थानीय पंडित जी या ज्योतिष से ले सकते हैं. 

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06 March 2018

Mrit Sanjeevani Sura | मृत संजीवनी सूरा के फ़ायदे और नुकसान


मृत संजीवनी सूरा जो है क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो सूरा या शराब की तरह तो है पर शराब की तरह नुकसान देने वाली नहीं बल्कि कई बीमारियों को दूर कर जान बचाने वाली होती है. तो आईये जानते हैं मृत संजीवनी सूरा का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

मृत संजीवनी सूरा जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है मरे हुवे को जीवन या संजीवनी देने वाली शराब. शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि मरते हुवे आदमी को भी इसे पिलाने से कुछ टाइम तक ज़िन्दा रहता है इसीलिए इसे मृत संजीवनी नाम दिया गया है. सूरा या शराब इसलिए कहा गया है कि इसमें सेल्फ़ जनरेटेड अल्कोहल 15% से ज्यादा रहता है जबकि दुसरे आसव और आरिष्ट में 5% तक ही होता है. 

मृत संजीवनी सूरा का कम्पोजीशन- 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें पुराना गुड़ और पानी के अलावा कई तरह की जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है. इसमें बबूल की छाल, अनार, वसाका, मोचरस, लज्जालु, अतीस, अश्वगंधा, देवदार, बिल्व, श्योनका, पटाला, शालपर्णी, प्रिश्नपर्णी, वृहती, कंटकारी, गोक्षुर, इन्द्रवरुणी, कोला, एरण्ड, पुनर्नवा, धतुरा, लौंग, इलायची, दालचीनी, पद्माख, उशीर, लाल चन्दन, सफ़ेद चन्दन, सौंफ़, यमानी, सोंठ, मिर्च, पीपल, साठी, जायफल, नागरमोथा, मेथी जैसी चीज़ों का मिश्रण होता है. 

मृत संजीवनी सूरा के फ़ायदे- 

मृत संजीवनी सूरा को कई तरह के लक्षणों में इस्तेमाल किया जाता है जैसे- 


  • शारीरिक कमज़ोरी और ताक़त की कमी में, यह पॉवर और स्टैमिना को बढ़ाती है.
  • ठंडे के मौसम में बॉडी को गर्मी देने के लिए.
  • पुरुषों में यौन शक्ति की कमी और स्वप्नदोष में.
  • तेज़ बुखार में, तेज़ बुखार की वजह से होने वाली बेचैनी में.
  • डायरीया और कॉलरा में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.
  • पाचन शक्ति की कमज़ोरी, बुख़ार के बाद वाली कमज़ोरी में इसका इस्तेमाल किया जाता है. 
  • खाँसी में और अस्थमा के अटैक के बाद भी इसे यूज़ किया जाता है.
मृत संजीवनी सूरा की मात्रा और सेवन विधि- 

15 से 20 ड्रॉप्स तक रोज़ तीन बार तक पानी मिलाकर लेना चाहिए. ज़्यादा डोज़ में शराब की तरह लेने से नुकसान हो सकता है. 

मृत संजीवनी सूरा के साइड इफेक्ट्स- 

सही डोज़ नहीं होने से इसके कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं जैसे पतले दस्त, चक्कर, पेट की खराबी और सर दर्द वगैरह. इसीलिए डॉक्टर की सलाह से ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए. डाबर, बैद्यनाथ जैसी आयुर्वेदिक कम्पनियों का यह मिल जाता है. 


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05 March 2018

SBL Tonsilat Tablets for Tonsillitis, Sore Throat and Pharyngitis


टोंसीलेट टेबलेट जो है जानी-मानी होम्यो कंपनी SBL का ब्रांड है जो टॉन्सिल्स, गले की ख़राश और Pharyngitis जैसे रोगों में बेहद असरदार है. तो आईये जानते हैं टोंसीलेट का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

टोंसीलेट का कम्पोजीशन- 

टोंसीलेट में असरदार होम्योपैथिक दवाओं का मिश्रण है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें - 

Mercurius Biniodatus

Belladonna

Kali Muriaticum

Ferrum Phosphoricum

Baryta Carbonica जैसी दवाओं का मिश्रण होता है. 

टोंसीलेट के फ़ायदे- 

टॉन्सिल्स की सुजन, टॉन्सिल्स का इन्फेक्शन, गले की ख़राश जैसी Tonsillitis और इस से रिलेटेड प्रॉब्लम के लिए यह बेहद असरदार दवा है. 

यह टॉन्सिल्स के दर्द और सुजन को कम कर राहत देती है और लगातार इस्तेमाल से बीमारी दूर करती है. 

टोंसीलेट को मैंने कई लोगों पर इस्तेमाल कराकर असरदार पाया है, इसीलिए इसके बारे में यहाँ बता रहा हूँ. 

टोंसीलेट का डोज़-

एक टेबलेट हर तीन घंटे पर लेना चाहिए ज़्यादा तकलीफ़ वाली कंडीशन में. नार्मल कंडीशन में एक टेबलेट रोज़ तीन बार लेना चाहिए. 

यह बिलकुल सेफ़ दवा है किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. बच्चे-बड़े सभी यूज़ कर सकते हैं. 25 ग्राम के पैक की क़ीमत 125 रुपया है. 

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02 March 2018

चन्द्रामृत रस के फ़ायदे - Lakhaipur


चन्द्रामृत रस क्लासिकल आयुर्वेदिक रसायन औषधि है जो सर्दी, खाँसी, बुखार, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों में इस्तेमाल की जाती है, तो आईये जानते हैं चन्द्रामृत रस का कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल - 

चन्द्रामृत रस आयुर्वेद में रसायन औषधि को रस भी कहते हैं जिनमे पारा और गंधक का मिश्रण होता है. चन्द्रामृत रस में भी पारा और गंधक के अलावा दूसरी जड़ी-बूटियों और भस्मों का मिश्रण होता है. 

चन्द्रामृत रस का कम्पोजीशन - 

इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे सोंठ, मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आँवला, चव्य, जीरा, धनिया, सेंधा नमक, शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, लौह भस्म, अभ्रक भस्म प्रत्येक एक-एक भाग और टंकण भस्म चार भाग का मिश्रण होता है. जिसे वासा स्वरस की भावना देकर गोली या टेबलेट बनाया जाता है. 

चन्द्रामृत रस के गुण - 

यह कफ़ और वात दोष को बैलेंस करती है. यह Antitussive, Expectorant, Antibiotic, Anti inflammatory और एंटी एलर्जिक जैसे गुणों से भरपूर होती है. 

चन्द्रामृत रस के फ़ायदे- 

जैसा कि शुरू में ही बताया गया है यह सर्दी, खाँसी, बुखार, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों में बेहद असरदार दवा है.

खाँसी सुखी हो या गीली इसे सितोपलादि चूर्ण के साथ मिक्स कर लेने से बेहतरीन फ़ायदा मिलता है. जब सारे अंग्रेज़ी कफ़ सिरप फेल हो जाएं तो भी यह काम कर जाती है. 

साइनस और एलर्जिक राईनाईटिस में इस से फ़ायदा होता है. 

चन्द्रामृत रस की मात्रा और सेवन विधि-

एक-एक गोली सुबह शाम शहद, अदरक के रस, सितोपलादि चूर्ण या फिर आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से उचित अनुपान के साथ लेना चाहिए. बच्चों को कम डोज़ में दिया जाता है. इसे डॉक्टर की सलाह से ही यूज़ करें नहीं तो नुकसान भी हो सकता है, क्यूंकि यह रसायन औषधि है और पारा-गंधक जैसे हैवी मेटल मिले हैं. 

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