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26 January 2020

Purushatva Vardhak Set | पुरुषत्व वर्द्धक सेट- मर्दानगी बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधि


पुरुषत्व वर्द्धक यानी मर्दानगी बढ़ाने वाली दवा. इस सेट या किट में तीन तरह की दवा है टेबलेट- स्वर्ण मदन पिल्स, सिरप- पौरुष सुधा और तिला इन्द्रोज 

स्वर्ण मदन पिल्स - सुनहरी टेबलेट है जिसके मुख्य घटक हैं  विदारीकन्द, त्रिफला, कौंच बीज, अर्जुन, शिलाजीत, शुद्ध गुग्गुल, स्वर्ण बंग, लौह भस्म और प्रवाल भस्म 
इसे दो-दो टेबलेट सुबह-दोपहर-शाम भोजन के बाद दूध से लेना होता है.

सीरप पौरुष सुधा - इसके मुख्य घटक हैं सफ़ेद मुस्ली, अश्वगंधा, शतावर, बिदारी कन्द, मुनक्का इत्यादि. इसे पांच ML प्रतिदिन दो बार भोजन के बाद लेना है.

तिला इन्द्रोज - यह मालिश का तेल है, इसे तीन-चार बून्द लेकर सोने से पहले इन्द्री पर हल्की मालिश करनी होती है. 

यह पूरा सेट पुरे 20 दिन का है, एक महीने में 20 दिन ही इसका इस्तेमाल करना होता है. 10 दिन के गैप के बाद फिर से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, अगर प्रॉब्लम ज़्यादा हो तो. 

नयी प्रॉब्लम में 20 दिनों में ही फ़ायदा दिखता है, समस्या पुरानी हो तो इसका तीन-चार सेट प्रयोग कर लेना चाहिए. 

पुरुषत्व वर्द्धक या पी. वी. सेट के फ़ायदे- 

यह एक रसायन और बाजीकरण योग है जो वीर्य दोष दूरकर भरपूर मात्रा में निर्दोष और गाढ़े वीर्य का निर्माण करता है. जनरल Weakness, शारीरिक कमज़ोरी, शीघ्रपतन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, लैंगिक दुर्बलता, नसों की कमज़ोरी, ढीलापन, स्वप्नदोष, वीर्य विकार, नामर्दी इत्यादि को दूर कर नयी ऊर्जा और शक्ति का संचार करता है. 

इसमें दी गयी दवाईओं के प्रयोग से रोगी शीघ्र रोगमुक्त होकर स्वस्थ, पुष्ट और रोगमुक्त होकर रति क्रिया का भरपूर आनन्द उठाता है. 

विशुद्ध आयुर्वेदिक औषधि है, इसके सेवन से किसी भी तरह कोई साइड इफ़ेक्ट या नुकसान नहीं होता है. 21 साल से कम उम्र के लोगों का इसका प्रयोग नहीं करना है. 

20 दिन के पुरे एक सेट की कीमत है सिर्फ़ 700 रुपया जिस ऑनलाइन खरीदने का लिंक दिया गया है- Buy Online 


कामशक्ति वर्द्धक सेट स्वर्ण, हीरक और मोती युक्त शीघ्रपतन की औषधि 





09 January 2020

Sangjarahat Bhasma | संगजराहत भस्म, गुण उपयोग, निर्माण और प्रयोग विधि


यह एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है जो रक्तपित्त, बॉडी में कहीं से भी ब्लीडिंग होना, ल्यूकोरिया, धात रोग, सुजाक और पायरिया जैसे अनेकों रोगों में प्रयोग की जाती है, तो आईये जानते हैं संगजराहत भस्म क्या है? इसके गुण, उपयोग और निर्माण विधि के बारे में विस्तर से -

संगजराहत भस्म क्या है?

संग का मतलब होता है पत्थर यह एक तरह का खनिज होता है. यह सफ़ेद रंग का चिकना और बड़ा ही मुलायम पत्थर होता है. इसे घीया पाठा भी कहा जाता है. यूनानी में इसे संगजराहत ही कहते हैं जबकि संस्कृत में इसे दुग्ध पाषाण के नाम से जाना जाता है. दुग्ध का मतलब दूध और पाषाण का मतलब पत्थर, दूध की तरह सफ़ेद रंग का होने से इसे संस्कृत में दुग्ध पाषाण कहा गया है.

अंग्रेज़ी में इसे Talc और Soft Stone नाम से जाना जाता है. दन्त मंजन और Talcum Powder में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.

संगजराहत भस्म निर्माण विधि - 

सबसे पहले इसके टुकड़ों को आग में गर्म कर गावज़बाँ के काढ़े में बुझाना चाहिए इसके बाद मिट्टी का एक बर्तन लेकर उसमे पहले घृतकुमारी का गूदा डाला जाता है उसके बाद संगजराहत और फिर ऊपर से घृतकुमारी का गूदा डालकर बर्तन का मूंह बंदकर सम्पुट की अग्नि दी जाती है. ठण्डा होने पर बारीक पीसकर रख लिया जाता है. कुछ वैद्य लोग इसे डायरेक्ट घृतकुमारी के गूदे के साथ भस्म बनाते हैं तो कुछ लोग घृत कुमारी की जगह नीम के पत्तों के साथ इसकी भस्म बनाते हैं. एक आलसी वैद्य जी को बिना भस्म बनाये इसका इस्तेमाल करते हुवे देखा, जो कि बिल्कुल ग़लत है. ऐसे ही लोग आयुर्वेद को बदनाम करते हैं. एक्सटर्नल यूज़ के लिए चलेगा पर इंटरनल यूज़ के लिए विधि पूर्वक भस्म बनाना बहुत ज़रूरी है.

संगजराहत भस्म के गुण या Properties 

इसके गुणों की बात करें तो आयुर्वेद और यूनानी मतानुसार यह तासीर में ठण्डी और पित्तशामक है. यह खून बहना रोकने में बेहद असरदार है. यह रक्त पित्त, ख़ूनी दस्त, ख़ूनी उल्टी, श्वेत प्रदर, रक्तप्रदर, स्वप्नदोष, सुजाक और पायरिया जैसी दांत की बीमारियों में भी असरदार है.

संगजराहत भस्म की मात्रा और सेवन विधि – 500mg से एक ग्राम तक सुबह-शाम शहद, मक्खन, मलाई या रोगानुसार अनुपान से.

आईये अब जानते हैं रोगानुसार संगजराहत भस्म के प्रयोग -

रक्त पित्त(कहीं से भी ब्लीडिंग होने)में - संगजराहत भस्म 5 ग्राम + कामदुधा रस मोती युक्त 1 ग्राम + वल्लभ रसायन 2.5 ग्राम. सभी को मिलाकर 10 ख़ुराक बना लेना है. एक-एक मात्रा सुबह-शाम दूब घास के रस के साथ देना चाहिए. साथ में उशिरासव भी पीना चाहिय.

स्वप्नदोष(स्वप्न प्रमेह, नाईटफॉल) में- संगजराहत भस्म 10 ग्राम + प्रवाल पिष्टी 5 ग्राम + स्फटिक भस्म 5 ग्राम + आमलकी रसायन 20 ग्राम. सभी को मिलाकर 40 डोज़ बना लें. एक-एक डोज़ सुबह-शाम गिलोय के रस से देना चाहिए.

पूयमेह(सुज़ाक) में - संगजराहत भस्म 500mg शहद से सुबह-शाम देना चाहिए और ऊपर से चन्दनासव पीना चाहिए.

दन्तरोग(मसूड़ों से खून आना, दांत हिलना) में - संगजराहत भस्म में स्फटिक भस्म और माजूफल का चूर्ण मिक्स कर मंजन करना चाहिए. हमारे स्टोर पर मिलने वाला दन्त रक्षक पाउडर में संगजराहत मुख्य घटक है और यह दन्त मंजन दाँतों की समस्या के लिए बेजोड़ है. यह सारी जानकारी मेरी पुस्तक 'आधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा' में भी दी गयी है.

कट छिल जाने या किसी तरह की इंजुरी होने पर- किसी धारदार चीज़ से कट छिल जाने पर संगजराहत भस्म को पाउडर की तरह डालकर पट्टी कर देने से न सिर्फ़ ब्लीडिंग बन्द हो जाती है बल्कि इन्फेक्शन होने का भी ख़तरा नहीं रहता है. तो इस तरह से संगजराहत भस्म हर घर में रखने लायक घरेलु औषधि भी है.

संगजराहत भस्म मार्केट बहुत मुश्किल से मिलता है, पर यह अवेलेबल है ऑनलाइन जिसका लिंक  दिया गया है. 50 ग्राम की क़ीमत सिर्फ़ 60 रुपया है.


06 January 2020

Sanda Oil | सांडा तेल - जानिए इसकी सच्चाई


सांडा आयल या सांडे के तेल बारे में लगभग सभी जानते हैं, इसे लोग मर्दाना कमज़ोरी में यूज़ करते हैं. सांडे का तेल है क्या? क्या सच में इसकी मालिश से पुरुषों के यौन अंग की कमज़ोरी दूर होती है? इसके बारे में आयुर्वेद क्या कहता है? क्या इसका प्रयोग करना चाहिए? आईये सबकुछ डिटेल में जानते हैं इसके बारे में- 

सबसे पहले जानते हैं कि सांडा है क्या चीज़?

सांडा एक तरह का रेगिस्तानी छिपकली है जो भारत और पाकिस्तान के रेगिस्तानी इलाक़ो, जंगलों और कई दुसरे देशों में भी पाया जाता है. इसी की वसा या  चर्बी का तेल निकाल कर लोग बेचते हैं. 

फुटपाथ पर बाज़ारों में मजमा लगाकर इसका तेल बेचने वाले लोग अक्सर दिख जायेंगे. कई जगह पर साप्ताहिक बाज़ारों में भी यह लोग दिख जाते हैं. झारखण्ड में तो मैंने अक्सर आदिवासियों को इसे बेचते हुए देखा है. कम पढ़े लिखे और अनपढ़ लोग सुनी-सुनाई बातों में आकर इसे यूज़ करते है और कई लोगों को तो इस से नुकसान भी हो जाता है. 

इसे बेचने वाले कुछ लोग तो असली तेल देने के लिए इसे आपके सामने की चिर-फाड़ कर चर्बी को पिघलाकर तेल बनाकर देते हैं. 

इसे बेचने वाले लोग कभी एक जगह नहीं टिकते और बड़े धूर्त होते हैं, बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. इसकी मालिश से ये हो जायेगा वो जायेगा. 

तो क्या सांडे का तेल असरदार होता है? 

जैसा कि दावा किया जाता है एफ्रोडेसियाक या यौनेक्षा बढ़ाता है, सांडे का तेल इरेक्टाइल डिसफंक्शन और लिंग की कमज़ोरी को दूर कर देता है, यह बिल्कुल ग़लत है. इसके तेल में किसी जानवर में पाई जाने वाली चर्बी के गुण ही हैं. 
आधुनिक डॉक्टर भी इसे नहीं मानते जबकि आयुर्वेद में भी इसका कोई प्रयोग  नहीं बताया गया है. 

आपने देखा होगा इसका तेल बेचने वाले लोग जिन्दा सांडा को रखे रहते हैं जो भागता नहीं है, क्यूंकि इसके कमर के हड्डी को तोड़ दिया जाता है. जब कमर की हड्डी ही टूट गयी हो तो बेचारा मासूम प्राणी हिल भी कैसे सकता है? 

इसी मिथक और अन्धविश्वास के चलते यह बेजुबान जानवर अपनी जान गँवा रहा है और लगभग विलुप्त होने की कगार पर है. 

मिथक और सच्चाई - 

सांडा के बारे में बात बहुत पुराने समय से चली आ रही है कि इस प्राणी में अद्भुत शक्ति पाई जाती है जिसकी वजह से यह रेगिस्तान के तपाने वाली गर्मी में भी ज़िन्दा रहता है, इसलिए इसके तेल को लोग पावरफुल मानते हैं. यह सब बिल्कुल झूठ है, इसमें कोई सच्चाई नहीं, मॉडर्न रिसर्च से भी यह साबित हो चूका है कि इसके तेल में ऐसा कोई गुण नहीं. 

मर्दाना कमज़ोरी के लिए अगर मालिश ही करनी है तो आयुर्वेद में इसके लिए कई तरह के तेल हैं, इनका इस्तेमाल कीजिये. M-Oil और तरंग मसाज आयल का प्रयोग कीजिये और फ़ायदा उठाइए बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के. यह ऑनलाइन अवेलेबल है जिसका लिंक  दिया गया है.