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09 दिसंबर 2023

makardhwaj vati | Sidha Makardhwaj Benefits | सिद्ध मकरध्वज कैसे सेवन करें ?

 

sidha makardhwaj ke fayde

ठण्ड का मौसम आ गया है और अभी यानी नवम्बर-दिसम्बर से लेकर फरवरी मार्च तक मकरध्वज सेवन करने का सबसे बेस्ट समय है.

जी हाँ दोस्तों, आज मैं मकरध्वज के बारे में कुछ कमाल की जानकारी देने वाला हूँ. 

मकरध्वज आयुर्वेद की एक ऐसी पॉपुलर दवा है जिसके बारे में सभी लोग कुछ न कुछ जानते ही हैं. 

मकरध्वज अपने आप में एक बेजोड़ औषधि है जिसे बड़े-बड़े डॉक्टर भी मान चुके हैं. सिद्ध मकरध्वज टॉप क्लास का होता है और इसी के बारे में आज विशेष चर्चा करूँगा. 

सिद्ध मकरध्वज पारा गंधक और स्वर्ण का विशेष योग है. यह त्रिदोष नाशक होता है, यानी इसके सेवन से सभी तरह के रोग दूर होते हैं. बस शर्त यह है कि रोगानुसार उचित अनुपान के साथ इसका सेवन किया जाये.

सिद्ध मकरध्वज के सेवन से ताक़त बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है. वैसे तो यह पुरे शरीर के लिए लाभकारी है पर हार्ट, ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर इसका सबसे ज्यादा असर होता है. बच्चे, बड़े, बूढ़े, जवान, महिला और पुरुष सभी के लिए यह फ़ायदेमंद है. 
अनुपान भेद से इसे अनेकों रोगों में प्रयोग किया जाता है. किस बीमारी में इसे किस चीज़ के साथ लेना है, आगे सब बताऊंगा. पर उस से पहले ठण्ड के इस मौसम में इसका प्रयोग जान लिजिए-

चूँकि इंडिया में अभी जाड़े का मौसम आ गया है, कई लोगों को ठण्ड बहुत ज़्यादा महसूस होती है उनके लिए सिद्ध मकरध्वज बड़े काम की चीज़ है.

तो भईया, अगर आपको ठण्ड ज़्यादा लगती है और गर्म कपड़ों से दबे रहते हैं तो अभी से सिद्ध मकरध्वज का विधि पूर्वक सेवन शुरू कीजिये और फिर देखिये इसका चमत्कार.

ठण्ड को दूर करने के लिए मकरध्वज का मैं प्रत्यक्ष अनुभव कर देख चूका हूँ. आप भी एक बार ट्राई ज़रूर कीजिये. सिद्ध मकरध्वज ओरिजिनल होना चाहिय तभी पूरा लाभ मिलेगा. 

ओरिजिनल सिद्ध मकरध्वज का लिंक दे रहा हूँ, जहाँ से आप ऑनलाइन आर्डर कर सकते हैं. 
सिद्ध मकरध्वज नम्बर-1 के 1 ग्राम की प्राइस है 300 रुपया. यह सबसे चीप एंड  बेस्ट है, क्यूंकि यह सभी के बजट में भी है.

सिद्ध मकरध्वज स्पेशल स्वर्ण-मुक्ता युक्त के 1 ग्राम की प्राइस है 1755 रुपया आज की डेट में. यह सबसे बेस्ट है पर इसके लिए जेब थोड़ी ढीली करनी होती है.

इस एक ग्राम की 8 मात्रा बनाकर शहद के साथ खरल कर सेवन कीजिये और फिर इसका असर देखिये, इसका चमत्कार देखिये.

इसके विकल्प के रूप में मकरध्वज वटी का भी सेवन कर सकते हैं.

मकरध्वज के प्रकार, इसके घटक और निर्माण विधि के बारे में डिटेल जानकारी के लिए मेरी यह वाली विडियो देख सकते हैं- 



सिद्ध मकरध्वज की मात्रा और सेवन विधि 

मकरध्वज को एक विशेष विधि से सेवन करने का विधान है. सही विधि से सेवन करने पर ही इसके सारे गुणों की प्राप्ति होती है.

तो अब सवाल यह उठता है कि इसके सेवन की सही विधि क्या है?

सिद्ध मकरध्वज को शहद के साथ अच्छी तरह से खरल कर सेवन से इसका पूरा लाभ मिलता है. जैसा कि शास्त्रों में भी कहा गया है - 'मर्दनम गुणवर्धनम' 

अथार्त- मर्दन करने से इसके गुणों में वृद्धि हो जाती है. जितना पॉसिबल हो इसे शहद के साथ खरल या पेश्टर में डालकर मर्दन कर ही यूज़ करना चाहिए.

125 mg से 375 mg तक आयु के अनुसार इसकी मात्रा लेकर एक स्पून शहद के साथ दस से 15 मिनट तक खरल कर रोज़ दो से तीन बार तक इसका सेवन करें और फिर चमत्कार देखें. अगर किसी ख़ास बीमारी के लिए इसे लेना है तो उस बीमारी में इस्तेमाल होने वाली दवा के साथ इसे मिक्स कर लेना चाहिए.

सिद्ध मकरध्वज के गुण या प्रॉपर्टीज 

अगर मैं कहूँ कि सिद्ध मकरध्वज गुणों की खान है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. मकरध्वज के जैसी दवा दुनिया की किसी भी पैथी में नहीं है. यह मरणासन्न रोगी को भी  बचा देती है.
आयुर्वेदानुसार यह त्रिदोष नाशक है जिस से यह हर तरह की बीमारी में लाभकारी है.

सिद्ध मकरध्वज के फ़ायदे

इसके फ़ायदों की बात करें तो यह ताक़त बढ़ाने वाली बेजोड़ दवा है. यह हार्ट और नर्वस सिस्टम को ताक़त देती है. खून की कमी और कमज़ोरी दूर कर वज़न बढ़ाती है.
शीघ्रपतन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन,नपुँसकता और वीर्य विकारों के लिए बेजोड़ है. न्युमोनिया, खांसी, दमा, टी. बी., हृदय रोग, हर तरह की बुखार, हर तरह की कमज़ोरी, चेहरे पर झुर्रियाँ पड़ना इत्यादि अनेकों रोगों में इसका प्रयोग करना चाहिए.

यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है. बहुत सारे लोग ठण्ड के मौसम में इसका सेवन कर पुरे साल उर्जावान बने रहते हैं. अभी का मौसम इसके इस्तेमाल के लिए सबसे बेस्ट है.

हाल के दिनों में कई लोगों की मौत हो रही है अचानक से हार्ट फ़ेल होने से, जिनमे अधिकतर संख्या कोरोना वैक्सीन लिए हुए लोगों की है,ऐसा लोगों का कहना है. आपने भी ख़बरों में ऐसा सुना होगा. मकरध्वज के सेवन से हार्ट फ़ेल नहीं होता है और हार्ट फ़ेल होने से यह बचाव करती है.

चूँकि सिद्ध मकरध्वज योगवाही भी है, मतलब जिस किसी भी दवा के साथ मिक्स कर यूज़ करेंगे यह उसके गुणों को बढ़ा देता है. अनुपान भेद से यह अनेकों रोगों में प्रयोग किया जाता है.

 तो आईये यह भी जान लेते हैं कि किस बीमारी में इसे किस चीज़ के साथ सेवन करना चाहिएय - 

सर्दी खाँसी में - पान के रस, अदरक के रस, मुलेठी चूर्ण, पीपल चूर्ण के साथ इसे लेना चाहिए

साधारण बुखार में - पीपल और अदरक के रस के साथ
मलेरिया में - करंज बीज या सुदर्शन चूर्ण के साथ

टाइफाइड में - मोती पिष्टी के साथ
जीर्ण ज्वर या पुरानी बुखार में - पीपल चूर्ण के साथ

कब्ज़ में - त्रिफला चूर्ण या त्रिफला क्वाथ के साथ
एसिडिटी में - आँवला चूर्ण या गिलोय सत्व के साथ

आँव वाले दस्त में - बेलगिरी चूर्ण या आमपाचक चूर्ण के साथ
बवासीर में - सुरण चूर्ण या कंकायण वटी के साथ

संग्रहणी या आई बी एस में - भुने हुवे जीरा के चूर्ण, शहद और छाछ के साथ
हृदय रोगों में - मोती पिष्टी और अर्जुन की छाल के चूर्ण के साथ

पागलपन में - सर्पगंधा चूर्ण के साथ
मृगी में - बच के चूर्ण के साथ

गैस में - भुनी हींग के साथ
पथरी में - गोक्षुर और कुल्थी के क्वाथ के साथ

धात रोग में - गिलोय के रस के साथ
स्वप्नदोष में - कबाब चीनी चूर्ण के साथ

शीघ्रपतन में - कौंच बीज चूर्ण, बाजीकरण चूर्ण या दिर्घायु चूर्ण के साथ
डायबिटीज में - गुडमार और जामुन गुठली चूर्ण के साथ

एनीमिया या खून की कमी में - लौह भस्म के साथ
ल्यूकोरिया में - तण्डूलोदक के साथ

मकरध्वज के साइड इफेक्ट्स 

जेनेरली इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. बस किडनी के रोगियों को लम्बे समय तक इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए. और रोगानुसार उचित अनुपान से ही इसका सेवन करना चाहिए. किसी रोग विशेष के लिए लेना है तो स्थानीय वैद्य जी की सलाह से ही सेवन करना चाहिए. 

होम्योपैथिक दवा लेते हुए भी इसका सेवन कर सकते हैं. विटामिन्स और हेल्थ सप्लीमेंट का सेवन करते हुए भी इसका यूज़ कर सकते हैं. 

अगर आपकी कोई अंग्रेज़ी दवा चलती है तो इसका सेवन अपने डॉक्टर की सलाह से ही करें. 




30 नवंबर 2023

Avipattikar Churna Ke Fayde | अविपत्तिकर चूर्ण कैसे यूज़ करें?

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अविपत्तिकर चूर्ण एसिडिटी और पित्त विकारों के लिए यूज़ किया जाता है, यह आप सभी जानते हैं. कई लोगों को इस से एसिडिटी में फ़ायदा नहीं होता है. फ़ायदा क्यूँ नहीं होता है? यह भी मैं बताऊंगा.

अविपत्तिकर चूर्ण का कम्पोजीशन क्या है? 

इसे बनाने का तरीका क्या है?

इसका डोज़? 

इसके फ़ायदे क्या हैं? क्या इसके कुछ नुकसान या साइड इफेक्ट्स भी हैं? 

और यदि आपने इसका सेवन किया तो लाभ क्यूँ नहीं हुआ? इसका दूसरा विकल्प क्या है? 

तो आईये इन सभी चीजों के बारे में विस्तार से जानते हैं - 

अविपत्तिकर चूर्ण के घटक या कम्पोजीशन 

आयुर्वेदिक ग्रन्थ भैषज्य रत्नावली का योग है. इसके घटक या कम्पोजीशन की बात करूँ तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है सोंठ, काली मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आँवला, नागरमोथा, विडनमक, वायविडंग, छोटी इलायची और तेजपात प्रत्येक एक-एक तोला, लौंग 11 तोला, निशोथ 44 तोला और मिश्री 66 तोला. 

इन्ही जड़ी-बूटियों को पीसकर बनाया गया पाउडर है अविपत्तिकर चूर्ण. अनेकों ब्राण्ड का मार्केट में यह बना हुआ मिल जाता है, बेस्ट क्वालिटी वाले का लिंक दे रहा हूँ. 

अविपत्तिकर चूर्ण ऑनलाइन ख़रीदें 

निशोथ को ही त्रिवृत, विधारा जैसे नामों से भी जाना जाता है. इसलिए कंफ्यूज न हों, क्यूंकि कोई कम्पनी इसके कम्पोजीशन में निशोथ लिखेगी, कोई विधारा लिखेगी तो कोई त्रिवृत लिखेगी. सभी एक ही चीज़ है. 

ग्रन्थ का मूल श्लोक आप पढ़ सकते हैं, जिसमे इसकी निर्माण विधि और फ़ायदे के बारे में श्लोक में बताया गया है.

avipattikar churna ingredients

अविपत्तिकर चूर्ण का डोज़ यानी की मात्रा और सेवन विधि 

तीन से छह ग्राम सुबह-शाम ठन्डे पानी, नारियल पानी या धारोष्ण दूध के साथ. 

अविपत्तिकर चूर्ण के गुण या प्रॉपर्टीज 

यह पित्त शामक है, पित्त और वात को बैलेंस करता है. 

अविपत्तिकर चूर्ण के फ़ायदे 

यह पैत्तिक विकारों यानी पित्त की विकृति से उत्पन्न समस्याओं को दूर करता है. 

एसिडिटी, पेट दर्द, क़ब्ज़, भूख की कमी इत्यादि में इसके सेवन से लाभ होता है. 

प्रमेह रोग में भी इसके सेवन से लाभ होता है. यानी यूरिनरी सिस्टम में भी इसका असर होता है.

काफ़ी मात्रा में निशोथ मिला होने से यह क़ब्ज़ को भी दूर कर देता है. 


अविपत्तिकर चूर्ण के साइड इफेक्ट्स 

वैसे तो यह सुरक्षित औषधि है पर कई लोगों को यह सूट नहीं करती है. कुछ लोगों को इस से पतले दस्त, पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्या भी हो सकती है. 

लॉन्ग की काफ़ी मात्रा होने से यह कुछ लोगों को सूट नहीं करती है. बच्चों को और प्रेगनेंसी में इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

शुगर, BP, अल्सरेटिव कोलाइटिस, दस्त, और Sensitive Stomach वाले लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

आपने इसका सेवन किया तो लाभ क्यूँ नहीं हुआ? 

अगर आप इस यूज़ कर चुके हैं और फ़ायदा नहीं हुआ तो इसका कारण हो सकता है इसका आपको सूट नहीं करना. यदि एसिडिटी के साथ गैस भी समस्या हो तो इसमें शंख भस्म मिलाकर लेना चाहिए. 

साथ में सूतशेखर रस, कपर्दक भस्म जैसी औषधि मिक्स कर उचित अनुपान से लेने से ही लाभ होता है. 

इसका दूसरा विकल्प क्या है? 

इसका दूसरा विकल्प है 'अम्लपित्तान्तक चूर्ण', विकल्प नहीं बल्कि इस से ज़्यादा असरदार और सभी को सूट भी करता है. 

अम्लपित्तान्तक चूर्ण एसिडिटी और हाइपर एसिडिटी के लिए चीप एंड बेस्ट मेडिसिन है. 





25 नवंबर 2023

Gokshuradi guggul ke fayde | गोक्षुरादि गुग्गुल की सम्पूर्ण जानकारी

gokshuradi gugul ke fayde

गोक्षुरादि गुग्गुल के बारे में आज कुछ ऐसी जानकारी देने वाला हूँ जिसे कोई नहीं बताएगा. 

इसके गुण या प्रॉपर्टीज क्या हैं? 

इसके क्या क्या फ़ायदे हैं? किन बीमारियों को यह दूर करता है?

गोक्षुरादि गुग्गुल का डोज़ क्या है? इसे कैसे यूज़ करें? 

और क्या इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी है? 

तो आईये इन सभी के बारे में सबकुछ विस्तार से जानते हैं - 

गोक्षुरादि गुग्गुल 


जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है गोक्षुर या गोखुरू नाम की बूटी ही इसका मुख्य घटक यानि की मेन इनग्रीडेंट है.

इसके अलावा गुग्गुल और दूसरी जड़ी-बूटियाँ भी इसमें होती हैं. 

गोक्षुरादि गुग्गुल के घटक या कम्पोजीशन 

इसके कम्पोजीशन की बात करूँ तो आयुर्वेदिक ग्रन्थ शारंगधर संहिता के अनुसार इसे गोक्षुर पँचांग, शुद्ध गुग्गुल, त्रिकटु, त्रिफला, नागरमोथा और घी या एरण्ड तेल के मिश्रण से बनाया जाता है. 
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यह मार्केट में कई सारे ब्राण्ड का मिल जाता है. बेस्ट क्वालिटी का होम मेड गोक्षुरादि गुग्गुल का लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रहा हूँ, जहाँ से आप ऑनलाइन खरीद सकते हैं. आज की तारीख में 100 ग्राम का प्राइस है सिर्फ़ 430 रुपया. यदि किन्ही को गोक्षुरादि गुग्गुल किलो के रेट में चाहिए तो भी मिल जायेगा. 


गोक्षुरादि गुग्गुल के गुण या प्रॉपर्टीज 

आयुर्वेदानुसार यह वात दोष को शांत करता है, इसमें रसायन गुण भी हैं. 
गोक्षुरादि गुग्गुल का डोज़ 
दो गोली रोज़ दो से तीन बार तक पानी से. या गोक्षुर क्वाथ, उशिरासव या रोगानुसार उचित अनुपान से लेना चाहिए

किन बीमारियों को यह दूर करता है?

यूरिनरी सिस्टम के कोई भी रोग, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, प्रमेह, रुक-रुक कर पेशाब होना, पथरी, पेशाब रुक जाना, महिलाओं का प्रदर रोग, पुरुषों का शुक्र रोग और वीर्य विकार, वातरक्त और मधुमेह जैसे रोगों में लाभकारी है. इस दवा का असर मूत्राशय, मूत्र नली और वीर्यवाहिनी शिराओं पर अधीक होता है. 

आईये अब आसान भाषा में इसके फ़ायदे जानते हैं- 

पेशाब की जलन हो, पेशाब का पीलापन हो, रुक-रुक कर पेशाब आता हो, खुलकर पेशाब नहीं होता हो, UTI हो, सुज़ाक हो, बून्द-बून्द पेशाब आता हो, पेशाब करने में बहुत तकलीफ़ होती हो,बहुत दर्द होता हो तो इसका यूज़ करना चाहिए.

 यानी यह समझ लीजिये कि किसी भी वजह से पेशाब की प्रॉब्लम हो तो इसका प्रयोग करें. यह खुलकर पेशाब लाने वाली जानी-मानी दवा है.

किडनी की पत्थरी हो, ब्लैडर की पत्थरी हो, किडनी का दर्द हो, पेडू का दर्द हो, पेडू फूल जाये तो गोक्षुरादि गुग्गुल यूज़ करने की सलाह दी जाती है.

महिलाओं के प्रदर यानी लिकोरिया की समस्या हो, हैवी पीरियड होता हो तो भी दूसरी दवाओं के साथ इसका प्रयोग किया जाता है.

पुरुषों के प्रमेह रोग, धात गिरना, वीर्य विकार, स्पर्म काउंट की कमी जैसी प्रॉब्लम में भी इसका प्रयोग करने से प्रॉब्लम दूर होकर बॉडी स्ट्रोंग हो जाती है. 

जोड़ों का दर्द, गठिया, अर्थराइटिस में भी इसे सहायक औषधि के रूप में प्रयोग कराया जाता है.

गोक्षुरादि गुग्गुल के साइड इफेक्ट्स 

यह सुरक्षित दवा है, इसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता है. अगर पहले से आप कोई अंग्रेज़ी लेते हैं इसे कम से कम 30 मिनट के गैप के बाद ही यूज़ करें, या फिर अपने डॉक्टर से सलाह लेकर यूज़ करें.

होम्योपैथिक दवा लेते हुए भी इसका सेवन कर सकते हैं, यह किसी तरह का इंटरेक्शन नहीं करती. 




18 नवंबर 2023

yograj guggul ke fayde | योगराज गुग्गुल | yograj guggul benefits

 

yograj guggul benefits

योगराज गुग्गुल को आप जानते ही हैं, यह आयुर्वेद की बहुत ही प्रसिद्ध दवाओं में से एक है. आज मैं योगराज गुगुल के बारे में कुछ ऐसे सीक्रेट और ऐसे-ऐसे यूज़ बताने वाला हूँ जिसके अक्सर वैद्यगण छुपाते हैं. तो आईये जानते हैं कि योगराज गुग्गुल क्या है? इसका कम्पोजीशन, इसे बनाने का तरीका और गुण उपयोग के बारे में सबकुछ विस्तार से - 

योगराज गुग्गुल 

मतलब योगो का राजा, या दुसरे शब्दों में कहूँ तो King of the Ayurvedic Medicine 

यह वाकई में किंग है राजा है, बहुत सारी बीमारीओं में आँख मूँद कर यूज़ कर सकते हैं. और लम्बे समय तक भी यूज़ कर सकते हैं, छह महिना से दो-चार साल तक लगातार यूज़ करने से भी कोई प्रॉब्लम नहीं होती बल्कि रोग समूल नष्ट होते हैं.

सबसे जानते हैं योगराज गुग्गुल के घटक या कम्पोजीशन -

इसे टोटल 28 तरह की चीज़ें मिलाकर बनाया जाता है. इसके कम्पोजीशन की बात करूँ तो इसे बनाने के लिए चाहिए होता है-

चित्रकमूल, पीपरामूल, अजवायन, काला जीरा, विडंग, अजमोद, सफ़ेद जीरा, देवदार, चव्य, छोटी इलायची, सेंधा नमक, कूठ, रास्ना, गोखरू, धनियाँ, हर्रे, बहेड़ा, आँवला, नागरमोथा, सोंठ, मिर्च, पीपल, दालचीनी, खस, यवक्षार, तालीसपत्र और तेजपत्र प्रत्येक एक-एक तोला या 10 ग्राम. त्रिफला और गिलोय क्वाथ से शुद्ध किया हुआ शोधित गुग्गुल 270 ग्राम और थोड़ी मात्रा में देशी गाय का घी. 

योगराज गुग्गुल निर्माण विधि- 

सभी जड़ी-बूटियों का बारीक कपड़छन चूर्ण बना लें, इसके बाद शोधित गुग्गुल में चूर्ण मिलाकर इमामदस्ते में डालकर चिपके नहीं इसके लिए थोड़ा-थोड़ा घी मिक्स करते हुए इतना कुटाई करें की गोली बनाने योग्य हो जाये. इसके बाद 500mg की इसकी गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यही योगराज गुग्गुल है. पुरे विधि विधान से सही तरीके से शुद्ध किये गए गुग्गुल में प्रोसेस होने से इसकी गोलियां बिल्कुल काले रंग की और सोन्धी खुशबु वाली बनती हैं, जो की असरदार होती हैं. सस्ता बेचने के चक्कर में कुछ कम्पनी सही विधि से नहीं बनाती है और सही रिजल्ट भी नहीं मिलता. 

योगराज गुग्गुल ऑनलाइन ख़रीदें 

योगराज गुग्गुल की मात्रा और सेवन विधि -

दो से छह गोली रोज़ दो-तीन बार तक आप इसे ले सकते हैं, उचित अनुपान के साथ. बच्चों को कम डोज़ में लेना चाहिए, इसे बच्चे, बड़े,बूढ़े सभी लोग यूज़ कर सकते हैं.

योगराज गुग्गुल के गुण या प्रॉपर्टीज 

यह वात नाशक है, वातरोग के लिए इसे सभी लोग जानते हैं. पर असल में यह सभी तरह के रोगों को दूर करता है, क्यूंकि यह त्रिदोष नाशक है. विशेस रूप से वात और आम दोष को नष्ट करता है. 

योगवाही है यानी जिस भी दवा के साथ यूज़ करेंगे यह उसकी पॉवर को बढ़ा देता है. रसायन  है और धातुओं का पोषण करता है. 

योगराज गुग्गुल के फ़ायदे 

अगर मैं सीधे तौर पर और आसान भाषा कहूँ तो आपको कोई भी रोग क्यूँ न हो, आप इसका सेवन कर सकते हैं. 

इसे हर घर में होना चाहिए, घरेलु दवा के तरह आप इसे यूज़ कर सकते हैं. कहाँ, कब और कैसे इसे यूज़ कर सकते हैं यही सब आगे बताने वाला हूँ - 

जोड़ों का दर्द, गठिया, आमवात, कमर दर्द जैसे रोगों के लिए इसे सभी लोग यूज़ करते हैं.

आपको अगर बदन दर्द हो जाये, मसल्स में दर्द हो जाये, थकावट हो जाये तो भी इसे गर्म पानी से ले सकते हैं. 

कहीं पर इन्फ्लामेशन हो जाये, सुजन हो जाये तो योगराज गुग्गुल को गर्म पानी से लिजिए.

सर्दी-जुकाम, हो जाये, गला ख़राब हो जाये, ठण्ड लग जाये तो भी योगराज गुग्गुल का सेवन कर सकते हैं. 

पेट में गैस बनती हो, गोला बनता हो तो योगराज गुग्गुल का इस्तेमाल किजिए

खाँसी हो तो भी इसे यूज़ करना चाहिए, यह अंग्रेज़ी एन्टी बायोटिक की तरह काम करती है वह भी बिना साइड इफ़ेक्ट के.

महिला पुरुष के Reproductive सिस्टम की कोई भी प्रॉब्लम हो तो इसे यूज़ कर सकते हैं. महिलाओं के पीरियड की प्रॉब्लम, पुरुषों के स्पर्म काउंट की प्रॉब्लम सभी में इसे यूज़ कर सकते हैं. किसी भी कारन से महिलाओं को बाँझपन हो तो उसमे भी यह असरदार है.

क़ब्ज़ या Constipation की समस्या हो तो यूज़ कर सकते हैं.

बवासीर, भगंदर में भी इसे यूज़ करना चाहिए.

पेट के कीड़ों को भी योगराज गुग्गुल दूर करता है.

यह बॉडी से टोक्सिंस या विषैले तत्वों को दूर करता है और शरीर को उचित पोषण भी देता है. 

योगराज गुग्गुल बॉडी के एक्स्ट्रा फैट को दूर करता है, मोटापा में इसे अवश्य  यूज़ करना चाहिए. 

यह आपके मेटाबोलिज्म को सही करता है, इम्युनिटी को बढ़ाता है. 

अगर आपके एरिया में वायरल फ्लू, वायरल बुखार चल रहा है तो इस से बचने के लिए भी योगराज गुग्गुल को गुनगुने पानी से यूज़ कर सकते हैं.

ब्रेन के लिए भी अच्छा है, यह ब्रेन के टिशुज़ को ताक़त देता है, नर्व को ताक़त देता है, मेमोरी पॉवर भी दुरुस्त करता है. इसे एक अच्छा Nervine टॉनिक भी कह सकते हैं. 

दमा या अस्थमा के रोगियों को भी योगराज गुग्गुल का सेवन करना चाहिए.

बहुमूत्र या बार-बार पेशाब आने की समस्या में भी असरदार है. 

यह रस-रक्तादि सभी धातुओं को पुष्टि करता है और शरीर में जमे हुए सभी दोषों को दूर कर देता है. 

अब आप समझ गए होंगे कि यह कितने काम की दवा है, ऐसे ही नहीं इसे योगराज यानी योगों का राजा कहा गया है. 

किसी भी रोग में, कोई भी बीमारी क्यूँ न हो आप इसे यूज़ कर सकते हैं उचित अनुपान से. 

उचित अनुपान क्या है? 

उचित अनुपान वह औषधि है जो उस रोग को दूर करने में सहायता करती है. जैसे पित्त विकारों में गिलोय, धनियाँ का काढ़ा, एलो वेरा जूस के साथ. कफ के रोगों में अदरक का रस, तुलसी क्वाथ के साथ. इसी तरह से वात रोगों में लेना है तो दशमूल क्वाथ, रास्ना क्वाथ के साथ. 

योगराज गुग्गुल के साइड इफ़ेक्ट 

इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है, मैंने एक साल तक रेगुलर लोगों को खिलाकर देखा है, कोई प्रॉब्लम नहीं होती है. इसे दो चार साल तक भी यूज़ कर सकते हैं. पित्त प्रकृति और बहुत गर्म तासीर के लोगों को इसे गिलोय के रस, धनियाँ क्वाथ, एलो वेरा जूस, दूध या अमृतारिष्ट इत्यादि के साथ लेना चाहिए. 



30 अक्तूबर 2023

Salt Side Effects | नमक आपको बीमार कर रहा है ! जानिए कैसे?

 

namak ke nuksan

बिना नमक वाला भोजन करना असंभव तो नहीं बार मुश्किल ज़रूर है. बचपन से ही हमारी ऐसी आदत डाली गयी है, इसके बिना खाना में स्वाद ही नहीं आता, टेस्ट नहीं आता  है. आज लगभग 99 प्रतिशत घरों में सफ़ेद नमक ही यूज़ किया जाता है. यह सफ़ेद नमक नहीं बल्कि नमकीन ज़हर है, धीमा ज़हर. 

धीमा ज़हर मैं इस लिए कह रहा हूँ यह आपको डायरेक्टली नहीं मारता है, बल्कि चुपके से बहुत-बहुत धीरे मारक बीमारी को जन्म देने में हेल्प करता है और इसे समझ नहीं पाते हैं. 

यदि आप चाहते हैं कि इसकी वजह से होने वाली बीमारियों से आप बचे रहें और परिवार सुरक्षित रहे तो आज से और अभी से ही इस सफ़ेद नमक को यूज़ करना बंद कर दीजिये और सेंधा नमक कोई यूज़ कीजिये. 

फ्री फ्लोइंग नमक, वाइट नमक, आयोडीन नमक सब बकवास है. 

आपको जान कर हैरानी होगी कि हमारे शरीर रोज़ जितने नमक की ज़रूरत होती है वह अलग से बिना नमक खाए ही हमारे भोजन से, यानी रोटी, चावल, सब्ज़ी, फल इत्यादि से पूरी हो जाती है. 

आसान शब्दों में कहूँ तो हमारे शरीर को अलग से नमक की कोई ज़रूरत नहीं होती है, और हम हैं कि भर-भर कर अलग बहुत सारी चीज़ों में नमक मिलाकर खाते रहते हैं. जिसके विपरीत प्रभाव से शरीर को नुकसान होता है और बीमारियों का जन्म होता है. 

कुछ लोग सोचते हैं कि अरे भईया नमक नहीं खाऊंगा को शरीर को ताक़त नहीं मिलेगी. यह सोच बिल्कुल ग़लत है. 

ग़लत कैसे है? आईये मैं आपको एक उदाहरण से समझाता हूँ - 

गाय, बैल, सभी जानवर और सभी पक्षी कभी नमक खाते हैं क्या? नहीं ना

किसी जानवर या पक्षी जो जीवनभर नमक नहीं खाता है, उसे नमक नहीं खाने से कमज़ोर होते हुए देखा है क्या? अगर आपने देखा हो तो कमेंट कर ज़रूर बताईयेगा. 

अब आप बोलियेगा कि मैंने शुरू में बताया कि सेंधा नमक खाओ, चूँकि आपको शुरू से नमकीन की आदत है तो अचानक से इसे बंद नहीं कर सकते हैं. और नमक बिना स्वाद नहीं आता, इस लिए स्वाद के लिए सेंधा नमक यूज़ कीजिये. 

सेंधा नमक का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है, इसमें कई सारे ज़रूरी मिनरल्स होते है जिस से शरीर को फ़ायदा होता है. 

अब बात यह कि सफ़ेद नमक से क्या क्या नुकसान होता है? 

मैं आपको फिर से कहता हूँ कि हमारे बॉडी कोई सफ़ेद नमक की कोई ज़रूरत नहीं है. जब कोई ज़रूरत ही नहीं होती और बॉडी में नमक डालते रहेंगे तो बॉडी रियेक्ट करेगी ही और इसके परिणाम स्वरुप आपको हाई ब्लड प्रेशर, स्किन डिजीज, किडनी फेलियर जैसे गंभीर रोग जन्म लेते हैं. 

नमक के बारे में आयुर्वेदिक ग्रन्थ चरक संहिता में कहा गया है - 

आपातभद्रं प्रयोग समसादगुण्यात, दोषसंचयानुबन्धम|| 

इसका अर्थ यह है कि अल्पमात्रा में बहुत थोड़ी मात्रा में नमक प्रयोग करने से तत्काल लाभप्रद है, और अधीक मात्रा में और अधीक समय तक प्रयोग करने से यह दोषों का संचय करता है|

आज की मॉडर्न साइंस क्या कहेगी- हमारे ऋषियों में हजारों साल पहले यह बता दिया था. दोषों का संचय का सीधा मतलब है कि दोष जमा होंगे और दोष जमा होंगे तो बीमारी पैदा होगी. 

आज के समय में हाई BP और किडनी डिजीज लिए इस सफ़ेद नमक का ज़्यादा इस्तेमाल इसके कारणों में से एक है. 

अगर आपको हाई BP की प्रॉब्लम है, किडनी की कोई समस्या है, स्किन की कोई प्रॉब्लम है तो आज से ही सादा नमक को  गुड बाय कहिये और सेंधा नमक यूज़ करना शुरू कीजिये, धीरे धीरे ही सही आपको फ़ायदा दिखेगा. कोई हेल्थ इशू नहीं भी है तो वाइट साल्ट को रिप्लेस कीजिये, स्वस्थ रहने के लिए.

आप की जानकारी के लिए मैं आपको बता देना चाहूँगा कि दुबई में रहते हुए भी मैं खाना बनाने से लेकर किसी चीज़ में ऊपर से नमक ऐड करना हो तो उसके लिए भी सेंध नमक ही यूज़ करता हूँ. 

इंडिया में आपको पंसारी की दुकान से सेंधा नमक नाम से पत्थर जैसे टुकड़े मिल जायेंगे, जिसे पीसकर यूज़ कर सकते हैं. 

वैसे पिंक साल्ट के नाम से पाउडर और दानेदार फॉर्म में भी मिल जाता है, जिसे ऑनलाइन ख़रीदने का लिंक दिया गया है.

और अंत में यह भी बता दूँ कि आयुर्वेदिक दवाओं में सेंधा नमक ही प्रमुखता से प्रयोग किया जाता है. टोटल पांच तरह के नमक आयुर्वेद में बताये गए हैं, अगर इनके बारे में भी जानकारी चाहते हैं तो कमेंट कर ज़रूर बताईयेगा. 

15 अक्तूबर 2023

वातेभ केशरी रस | Vatebh Keshri Ras

vateb keshri ras

आज मैं जिस आयुर्वेदिक औषधि की जानकारी देने वाला हूँ उसका नाम है- वातेभ केशरी रस 

जी हाँ दोस्तों इसका नाम आपने शायेद ही पहले सुना हो. इसलिए मैं आपके लिए आयुर्वेद की गुप्त औषधियों की जानकारी लेकर आते रहता हूँ. 

आपका ज़्यादा समय न लेते हुए आईये जानते हैं वातेभ केशरी रस गुण-उपयोग, फ़ायदे, इसका कम्पोजीशन और निर्माण विधि के बारे में सबकुछ विस्तार से - 

वातेभ केशरी रस का घटक या कम्पोजीशन 

इसे बनाने के आपको चाहिए होगा शुद्ध बच्छनाग, शुद्ध सोमल, काली मिर्च, लौंग, जायफल, छुहारे की गुठली और करीर की कोंपलें प्रत्येक 10-10 ग्राम, अहिफेन और मिश्री प्रत्येक 20-20 ग्राम. 

वातेभ केशरी रस निर्माण विधि 

बनाने का तरीका यह है कि सभी चीज़ों का बारीक कपड़छन कर बरगद के दूध में मर्दन कर सरसों के बराबर की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लें. बस यही वातेभ केशरी रस है. यह एक गुप्त-सिद्ध योग है, कहीं भी किसी कंपनी का बना हुआ नहीं मिलता है. पुराने वैद्यगण इसका निर्माण कर यश अर्जित करते थे. 

वातेभ केशरी रस की मात्रा और सेवन विधि 

एक से तीन गोली तक रोज़ दो से तीन बार तक रोगानुसार उचित अनुपान के साथ देना चाहिए.

वातेभ केशरी रस फ़ायदे 

यह वात और कफ़ दोष से उत्पन्न अनेकों रोगों को दूर करने में बेजोड़ है. 

न्युमोनिया में इसे मिश्री के साथ देने से न्युमोनिया दूर होता है.

खाँसी और अस्थमा में इसे शहद के साथ लेना चाहिए.

मरन्नासन रोगी को इसे अकरकरा और सफ़ेद कत्था के साथ देने से रोगी की जान बच जाती है.

हिचकी रोग में मूली के बीज के क्वाथ के साथ देना चाहिए.

दस्त या लूज़ मोशन में जीरा के चूर्ण के साथ सेवन करना चाहिए.

रक्त प्रदर में शहद या घी के साथ सेवन करने से समस्या दूर होती है.

नपुंसकता और शीघ्रपतन जैसे रोगों में मलाई के साथ सेवन करें.

सुज़ाक में गुलकन्द के साथ और 

पॉवर-स्टैमिना बढ़ाने के लिए इसे जायफल के साथ सेवन करना चाहिए. 



11 सितंबर 2023

Chitrak Haritki | चित्रक हरीतकी के फ़ायदे

chitrak haritaki

 चित्रक हरीतकी 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है चित्रक मूल और हरीतकी इसका मुख्य घटक होता है. यह अवलेह टाइप की यानी च्यवनप्राश के जैसी दवा होती है.

तो आईये सबसे पहले जानते हैं इसके फ़ायदे 

आयुर्वेदानुसार पुराने और बार-बार होने वाले प्रतिश्याय या जुकाम में इसके सेवन से अच्छा लाभ होता है. खांसी, कृमि रोग, गैस, वायु गोला बनना, अस्थमा, बवासीर और मन्दाग्नि जैसे रोगों में भी लाभकारी है. 

विशेष रुप से दमा के रोगी को अत्यधिक लाभ पहुंचाता है.

फेफड़ों की श्वासनलीयों को विस्फारित कर श्वास लेने की कठिनाई को दूर करता है.

बदलते मौसम के साथ होने वाले वायरल संक्रमण से बचाता है.

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है.

फेफड़ों में उपस्थित बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है.

अस्थमा के रोगियों के लिए सेवन फायदेमंद होता है.

मौसम के कारण होने वाला जुकाम, ट्यूबरक्लोसिस के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है.

पुराने से पुराना नजला जुकाम दूर करता है.

पेट के कीड़े को मारता है.

पाचन तंत्र को मजबूत करता है.

पेट में होने वाली कब्ज गैस की शिकायत को दूर करता है.

आम का पाचन करता है.

अर्श या बवासीर रोग में सेवन करना फायदेमंद है.


चित्रक हरीतकी की मात्रा और सेवन विधि 

5 ग्राम या एक स्पून सुबह-शाम गाय के गर्म दूध के साथ लेना चाहिए. पुराने नज़ला-जुकाम में इसके साथ 'जीर्ण प्रतिश्यायहर वटी' और 'प्रतिश्यायहर योग' का इस्तेमाल करने से तेज़ी से लाभ होता है. 

इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है, बिल्कुल सुरक्षित औषधि है. 

आईये अब जान लेते हैं इसके घटक और निर्माण विधि 

आयुर्वेदिक ग्रन्थ सिद्ध योग संग्रह के अनुसार इसकी निर्माण विधि कुछ इस तरह से  है- 

चित्रक मूल क्वाथ 4 लीटर, आँवले के रस या क्वाथ 4 लीटर, गिलोय का रस चार लीटर, दशमूल क्वाथ 5 लीटर, बड़ी हर्रे का चूर्ण 2.5 किलो, गुड़ चार किलो सभी को मिक्स कर इतना पकायें की हलवे की तरह गाढ़ा हो जाये. इसके बाद इसमें सोंठ, काली मिर्च, पीपल, दालचीनी, तेजपात और छोटी इलायची प्रत्येक 80 ग्राम और जौक्षार 20 गर्म लेकर बारीक चूर्ण बनाकर मिक्स कर रख लें. अब दुसरे दिन इसमें 320 ग्राम शहद और 640 ग्राम शहद मिक्स कर अच्छी तरह से मिलाकर काँच के बर्तन में रख लें. बस यही चित्रक हरीतकी है. 

चित्रक हरीतकी ऑनलाइन ख़रीदें 





19 अगस्त 2023

Appendix ka Upchar | अपेंडिक्स का आयुर्वेदिक उपचार | Vaidya Ji Ki Diary

 

appendix ka ilaj

आज वैद्यजी की डायरी में बताने वाला हूँ अपेंडिक्स के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जिस से आप बिना ऑपरेशन के इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं. 

दोस्तों, आपने अक्सर सुना होगा कि फलां आदमी को अपेंडिक्स हो गया और इसका ऑपरेशन कराना पड़ा. 

अगर आपको गैस की वजह से भी पेट दर्द है तो कई धूर्त सर्जन लोग पैसा बनाने के चक्कर  में मरीज़ को डराकर ऑपरेशन कर देते हैं. जबकि गैस की वजह से होने वाला दर्द ऑपरेशन के बाद भी बना रहता है. 

यदि आपने इस तरह की परेशानी झेली है या आपके जानने वाले के साथ ऐसा कुछ हुआ है तो कमेन्ट कर ज़रुर बताईयेगा.

अपेंडिक्स क्या है? 

सभी के शरीर में यह होता है जो बड़ी आंत के निचे दाहिनी साइड अँगुली के जैसी लम्बी एक छोटी से पूंछ होती है जो अन्दर से खोखली होती जिसकी लम्बाई दो से चार इंच होती है. इसकी औसत लम्बाई 3.5 इंच होती है. 

आंत के साथ पूंछ के जैसा जुड़ा होने से इसे 'आंत्रपुच्छ' कहा जाता है आयुर्वेद में. इसे ही अंगेज़ी में Appendix कहा जाता है. 

शरीर में इस अंग का क्या काम है, मेडिकल साइंस अब तक पता नहीं लगा पाया है. 

जब किसी वजह से इस अंग में यानी में अपेंडिक्स में सुजन हो जाये तभी इसकी जगह पर पेट में दर्द होता है और तब इसे Appendicitis कहा जाता है. इस स्थिति को आयुर्वेद में आंत्रपुच्छ शोथ, आंत्रपुच्छ प्रदाह, उन्दुकपुच्छशोथ, उपान्त्रशोथ जैसे नामों से जाना जाता है. 

तो अब आप समझ गए होंगे कि अपेंडिक्स यानी आंत्रपुच्छ और Appendicitis यानि आंत्रपुच्छ प्रदाह में क्या अन्तर होता है. 

आम बोलचाल में लोग Appendicitis को ही अपेंडिक्स बोल देते हैं. 

Appendicitis यानि आंत्रपुच्छ शोथ के कारण 

इसमें सुजन और संक्रमण होना ही मुख्य कारन है, कई लोगों का मानना है कि निम्बू, संतरा के साबुत बीज या भोजन का कोई अंश जब बड़ी बड़ी आंत से इसमें चला जाता है तब सड़कर वहां रोग की उत्त्पत्ति करता है. 

Appendicitis यानि आंत्रपुच्छ शोथ के लक्षण या Symptoms

इसके लक्षणों की बात करुँ तो यह दर्द वाली बीमारी है. पेट में बहुत तेज़, न सहने वाला दर्द होना ही इसका प्रधान लक्षण होता है. पहले पेट के उपरी हिस्से या नाभि के एरिया में दर्द उठता है इसके बाद निचे दाहिने तरफ़ जाकर दर्द स्थिर हो जाता है. तेज़ दर्द के बाद उल्टी और बुखार जैसे लक्षण भी पाये जाते हैं. 

सोनोग्राफी से इस रोग का सटीक निदान हो जाता है, वैसे अनुभवी वैद्यगण रोगी का पेट चेक कर भी बता देते हैं. 

Appendicitis यानि आंत्रपुच्छ शोथ का आयुर्वेदिक उपचार 

मैं आपको बता देना चाहूँगा कि अगर समस्या बहुत बढ़ी नहीं हो रोग की शुरुआत ही हो तो आयुर्वेदिक उपचार से यह रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है. सिर्फ़ इमरजेंसी में ही इसका ऑपरेशन करवाना चाहिए. 

Appendicitis के आयुर्वेदिक उपचार के लिए मैं आपको अनुभवी वैद्यों की सफ़ल चिकित्सा का निचोड़ बता रहा हूँ जो इस बीमारी में शत प्रतिशत सफल है- 

Appendicitis के लिए आयुर्वेदिक व्यवस्था 

1) शंख वटी दो-दो गोली खाना के बाद गर्म पानी से 

2) आंत्रपुच्छ शोथहर योग एक-एक पुड़िया सुबह-शाम शहद से 

3) कुमार्यासव 2 स्पून + पुनर्नवारिष्ट 2 + 4 स्पून पानी मिक्स कर सुबह-शाम खाना के बाद 

4) उदरशोथारी लेप - दर्द वाली जगह पर रोज़ दो-तीन बार लेप करने के लिए 

5) सुगम चूर्ण या पंचसकार चूर्ण रात में सोने से पहले गर्म पानी से 

आंत्रपुच्छ शोथहर योग और उदरशोथारी लेप अनुभूत योग है जो बना हुआ आपको मार्केट से नहीं मिलेगा. इन दोना का नुस्खा आपको बता रहा हूँ - 

आंत्रपुच्छ शोथहर योग 

अग्नितुंडी वटी 20 ग्राम + शुल्वार्जिनी वटी 20 ग्राम + पुनर्नवादि मंडूर 20 ग्राम लेकर पीसकर वरुनादि क्वाथ और घृतकुमारी की एक-एक भावना देकर सुखा कर रख लिया जाता है. 

उदरशोथारी लेप 

इसे बनाए के लिए चाहिए होता है - दशांग लेप 100 ग्राम + शुद्ध कुचला चूर्ण 10 ग्राम + आमा हल्दी चूर्ण 10 ग्राम. सभी को मिक्स कर रख लें.

इसकी प्रयोग विधि 

दो स्पून इस चूर्ण को लेकर स्टील के बर्तन के डालकर इतना पानी मिक्स करें की पेस्ट जैसा हो जाये फिर इसको चूल्हे पर रखकर हलवे के जैसा उबाल कर पका लेना है. इसके बाद सुहाता-सुहाता दर्द वाली जगह पर लेप कर देना है. लेप करने के एक घंटे के बाद जब लेप सुख जाये तो हलके से लेप को छुड़ाकर उस जगह पर कोई तेल क्रीम या विषगर्भ तेल लगा लेना चाहिए. 

यह दोनों योग बनाने में यदि किसी कोई समस्या हो तो आप मुझे मेसेज किजिए, मैं उपलब्ध करा दूंगा. 

वैद्य जी की डायरी में आज जो प्रयोग मैं बताया हूँ इसे आप वैद्यगण आंत्रपुच्छ शोथ के अलावा बड़ी आंत की सुजन, लिवर-स्प्लीन की सुजन और अग्नाशयशोथ इत्यादि में भी प्रयोग कर सकते हैं.