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15 May 2022

नवजीवन रस | Navjivan Ras | नया जीवन देने वाली औषधि !

 

navjivan ras

नवजीवन रस वास्तव में मनुष्य को नया जीवन देता है, तो आईये जानते हैं कि नवजीवन रस क्या है? और जानेंगे इसके गुण उपयोग, फ़ायदे और निर्माण विधि के बारे में सब कुछ विस्तार से - 

नवजीवन रस 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है नया जीवन देने वाली रसायन औषधि 

नवजीवन रस के गुण 

इसके गुणों की बात करें तो यह दीपक, पाचक है, शरीर में वात और कफ़ दोष को संतुलित करता है. 

नवजीवन रस के फ़ायदे 

जहाँ तक नवजीवन रस के फ़ायदे की बात है तो वैद्यगण अनुपान भेद से इसे कई रोगों में प्रयोग करते हैं. 

कुचला प्रधान औषधि होने से यह नस नाड़ियों को शक्ति देता है और जागृत करता है. ज्ञान वाहिनी नाड़ियों, चेष्टावाहिनी नाड़ियों और शुक्रवाहिनी नाड़ियों इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है. 

आसान शब्दों में कहूँ तो भूलने की बीमारी, यादाश्त की कमज़ोरी, नसों की कमज़ोरी, मर्दाना कमज़ोरी और माईग्रेन जैसी प्रॉब्लम में भी इस से फ़ायदा होता है. 

शरीर की कमज़ोरी, खून की कमी, थकावट को दूर करता है

इसके सेवन से पाचक प्रचुर मात्रा में उत्त्पन्न होने और आमरस को पचाने से दस्त की पुरानी बीमारी, पेट दर्द, आँतों का दर्द  जैसी परेशानी भी दूर होती है. 

नवजीवन रस की मात्रा और सेवन विधि 

एक-एक गोली या 125 mg की मात्रा में सुबह-शाम अदरक के रस के साथ शहद मिक्स कर या फिर रोगानुसार उचित अनुपान के साथ सेवन करना चाहिए. 

इसे स्थानीय वैद्य जी की देख रेख में ही लें

वीर्य विकारों में बंग भस्म, प्रवाल भस्म इत्यादि के साथ मक्खन से, माईग्रेन और दीमाग को ताक़त देने के लिए अभ्रक भस्म के साथ घी या उचित अनुपान से अनुभवी वैद्यगण इसका प्रयोग कराते हैं. कहने का मतलब है कि वैद्य की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करें. 

आयुर्वेदिक कंपनीयों का यह मार्किट में मिल जाता है. जानकारी के लिए इसकी निर्माण विधि भी बता रहा हूँ - 

नवजीवन रस निर्माण विधि 

इसके निर्माण के लिय चाहिए होता है शोधित कुचला, लौह भस्म, रस सिन्दूर और त्रिकटु का बारीक कपड़छन चूर्ण सभी समान भाग 

निर्माण विधि यह है कि सबसे पहले रस सिन्दूर को खरल कर दूसरी चीजें मिलाकर देसी अदरक के रस में एक दिन तक घोंटकर एक-एक रत्ती की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख  लिया जाता है. बस यही नवजीवन रस कहलाता है. 

तो दोस्तों, यह थी आज की जानकारी नवजीवन रस के बारे में,कोई सवाल हो तो कमेंट कर पूछिये, आपके सवालों का स्वागत है. 



24 March 2022

M-Oil Benefits | एम- आयल के फ़ायदे

m oil

जैसा कि आप सभी जानते हैं पुरुष रोगों में मैं अक्सर एम- आयल सजेस्ट करता हूँ जो पुरुषों के अंग विशेष के ढीलापन, टेढ़ापन, पतलापन और छोटापन जैसी समस्याओं में असरदार है. 

तो आईये आज इसका कम्पोजीशन और फ़ायदे के बारे में सबकुछ विस्तार से जानते हैं- 

एम- आयल 

एम का यहाँ पर दो अर्थ है - मेल और मसाज, पूरा मतलब है पुरुषों के लिए मसाज का तेल 

सबसे पहले एक नज़र इसके कम्पोजीशन पर 

 इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसे असगंध, शतावर, मैनसिल, हरताल, त्रिकटु, अकरकरा, कनेर, सेंधा नमक, पंचकोल, दशमूल, त्रिजात, जुन्द, केसर, लघु पंचकमूल, वृहत पंचकमूल, अष्टवर्ग और चतुर्जात जैसी जड़ी-बूटियों के द्वारा त्रिगुण तेल में तेल-पाक विधि से सिद्ध कर बनाया जाता है. 

एम- आयल के फ़ायदे 

यह लिंग का ढीलापन, छोटापन, तनाव की कमी, लूज़ रहना, नसें दिखना, बेजान रहना जैसी पुरुषों की सभी समस्या को दूर करता है. 

नपुँसकता को दूर करता है और साइज़ को इम्प्रूव करने में भी मदद करता है. 

कुल मिलाकर देखा जाये तो पुरुषों हर तरह की समस्या के लिए इसे बेफिक्र हो कर इस्तेमाल कर सकते हैं. यह पूरी तरह से सुरक्षित है, इसके प्रयोग से छाले-फुन्सी या किसी भी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. 

सुबह-शाम इसकी मालिश करनी चाहिए 

30 ML की क़ीमत है 300 रूपये, जिसे ऑनलाइन ख़रीदने का लिंक दिया गया है. 

 एम- आयल Buy Online




20 March 2022

Gangadhar Ras Benefits, Use and Ingredients | गंगाधर रस के फ़ायदे

gangadhar ras


यह एक शास्त्रीय रसायन औषधि है जो अतिसार में प्रयोग की जाती है. तो आईये जानते हैं गंगाधर रस के घटक, निर्माण विधि और फ़ायदे के बारे में विस्तार से - 

गंगाधर रस के घटक या कम्पोजीशन 

इसके निर्माण के लिए चाहिए होता है शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, अभ्रक भस्म, कुटज छाल, अतीस, लोध्र पठानी,  बेल गिरी और धाय के फूल प्रत्येक बराबर वज़न में.

निर्माण विधि यह है कि सबसे पहले पारा-गंधक की कज्जली बना लें, इसके बाद दूसरी सभी चीजों का बारीक कपड़छन चूर्ण मिक्स कर पोस्त डोडा के क्वाथ में तीन दिनों तक खरल करने के बाद दो-दो रत्ती की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यही गंगाधर रस कहलाता है. 

गंगाधर की मात्रा और सेवन विधि 

एक-एक गोली रोज़ दो-तीन बार तक छाछ के साथ या फिर रोगानुसार उचित अनुपान से, वैद्य जी की देख रेख में ही लें. 

गंगाधर रस के गुण 

यह स्तंभक, संग्राही, आमपाचक जैसे गुणों से भरपूर होता है. 

गंगाधर रस के फ़ायदे 

यह हर तरह के अतिसार यानी दस्त या लूज़ मोशन रोकने वाली औषधि  है.

मूल ग्रन्थ के अनुसार यह रक्तातिसार और आमातिसार में बहुत लाभ करती है. 

यह मन्दाग्नि को दूर करती है और भूख बढ़ाती है. 

आसान शब्दों में कहूँ तो यह पतले दस्त, डायरिया, ख़ूनी दस्त और आँव वाले दस्त की असरदार दवा है. 

इसे ऑनलाइन खरीदने का लिंक निचे दिया गया है 




गंगाधर चूर्ण के फ़ायदे 



12 March 2022

Sarpgandharishta | सर्पगन्धारिष्ट के फ़ायदे

sarpgandharishta
आज की जानकारी है सर्पगन्धारिष्ट के बारे में. आज से पहले आपने इसका नाम शायेद ही सुना होगा. मैं अक्सर आयुर्वेद की वैसी औषधियों की जानकारी लेकर आता हूँ जो कहीं और नहीं मिलती. 

तो आईये जानते हैं कि सर्पगन्धारिष्ट क्या है? इसकी निर्माण विधि, गुण-धर्म और फ़ायदे के बारे में सबकुछ विस्तार से- 

यह आसव-अरिष्ट केटेगरी की औषधि है जो सिरप या लिक्विड फॉर्म में होती है. 

सर्पगन्धारिष्ट के फ़ायदे

यह औषधि हाई ब्लड प्रेशर और इस से सम्बंधित विकारों में बहुत अच्छा लाभ करती है.

इस के सेवन से वायु विकार नष्ट होकर शान्ति मिलती है.

उर्ध्वगामी वायु के कारण होने वाले उपद्रवों का इससे शमन होकर ह्रदय और मस्तिष्क को शान्ति मिलती है. 

अनिद्रा या नीन्द नहीं आना और हिस्टीरिया में भी इसका अच्छा प्रभाव होता है. 

शामक तथा जीवनीय औषधियों का मिश्रण होने से सर्पगन्धा का कार्यक्षेत्र और भी बढ़ जाता है. 

किडनी पर भी इसका अच्छा असर होता है, इस से पेशाब साफ़  आता है और खून की गर्मी दूर होती है. 

सर्पगन्धारिष्ट की मात्रा और सेवन विधि 

15 से 30 ML तक सुबह-शाम बराबर मात्रा में पानी मिलाकर भोजन के बाद लेना चाहिए.

सर्पगन्धारिष्ट मार्किट में नहीं मिलती है, सिद्धहस्त वैद्यगण इसका निर्माण ख़ुद करते हैं. इसके जैसा ही काम करने वाली औषधि 'सर्पगन्धा वटी' मिल जाएगी जिसका लिंक दिया गया है. 

सर्पगन्धा वटी ऑनलाइन ख़रीदें 


सर्पगन्धारिष्ट के घटक या कम्पोजीशन 

इसे बनाने के लिए चाहिए होता है सर्पगन्धा 5 किलो, बला, असगंध, जटामांसी प्रत्येक 500 ग्राम, शालपर्णी, प्रिश्नपर्णी, नागबला, गम्भारी, गोखरू, जीवक, ऋषभक, मेदा, महा मेदा, ऋद्धि, वृद्धि, काकोली, क्षीरकाकोली, पीपल की छाल, वट की छाल, पलाश की छाल, गूलर की छाल, खस, गन्ध तृष्ण, कुश की जड़, काश की जड़, सरकंडा की जड़, रास्ना, कचूर, बड़ी हर्रे, कूठ और मुलेठी प्रत्येक 120 ग्राम

सभी चीज़ों को जौकूट कर 60 लीटर पानी में पकाया जाता है. जब 20 लीटर पानी शेष बचे तो इसे चूल्हे से उतार कर छानकर, 5 किलो चीनी, 4 किलो शहद, धाय के फूल डेढ़ किलो अच्छी तरह से मिलाने के बाद 

नागकेशर, प्रियंगु, तालीसपत्र, तेज पात, दालचीनी और शीतल चीनी प्रत्येक 60 ग्राम लेकर चूर्ण बनाकर प्रक्षेप द्रव्य के रूप में मिलाकर संधिबंद कर सन्धान के लिए एक महीने के लिए रख दिया जाता है. एक महिना बाद छानकर बोतल में भरकर रख लें. यही सर्पगन्धारिष्ट है. 

 



06 March 2022

Shivtandav Ras | शिवताण्डव रस

 

shivtandav ras

आज की आयुर्वेदिक औषधि का नाम है 'शिवताण्डव रस' तो आईये जानते हैं कि शिवताण्डव रस क्या है? इसकी निर्माण विधि और उपयोग के बारे में सबकुछ विस्तार से - 

शिवताण्डव रस 

इसका यह नाम कैसे पड़ा यह तो मुझे नहीं पता पर इसका वर्णन 'रस तरंग्नी' में है. इसके घटक और निर्माण विधि कुछ इस प्रकार से है - 

शिवताण्डव रस निर्माण के लिए चाहिए होता है शुद्ध बच्छनाग, रस सिन्दूर, शुद्ध पारद, शुद्ध गंधक और शुद्ध हरताल प्रत्येक 10-10 ग्राम और काली मिर्च का बारीक कपड़छन चूर्ण 40 ग्राम. 

निर्माण विधि यह है कि सबसे पहले पारा-गंधक की कज्जली बनाकर दूसरी सभी चीज़ें मिक्स कर अदरक के रस में घोटकर एक-एक रत्ती की गोलियां बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यही शिवताण्डव रस कहलाता है. 

इसे सन्निपात रोग की उत्तम औषधि कहा गया है. रोगानुसार मात्रा और अनुपान देना चाहिए. 



22 February 2022

Kshudhasagar Ras | क्षुधासागर रस के फ़ायदे

kshudhasagar ras

आज मैं जिस आयुर्वेदिक औषधि की जानकारी देने वाला हूँ इसका नाम है क्षुधासागर रस 

यह एक रसायन औषधि है जो अग्नि को बढ़ाकर कड़ाके की भूख लगाती है तो आईये इसके घटक, निर्माण विधि और फ़ायदे के बारे में सबकुछ विस्तार से जानते हैं - 

क्षुधासागर रस के घटक और निर्माण विधि 

भैसज्य रत्नावली का यह योग है इसे बनाने के लिए चाहिए होता है शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, सोंठ, मिर्च, पीपल, हर्रे, बहेड़ा, आँवला, जवाखार, सज्जीखार, टंकण भस्म, काला नमक, सेंधा नमक, समुद्र लवण, विड लवण, साम्भर लवण प्रत्येक एक-एक भाग और शुद्ध बच्छनाग दो भाग. 

निर्माण विधि कुछ इस तरह से है कि सबसे पहले पारा-गंधक को पत्थर के खरल में डालकर कज्जली बना लें इसके बाद दूसरी सभी चीजों का बारीक कपड़छन चूर्ण बनाकर मिलाकर तीन दिन तक पानी के साथ खरल कर एक-एक रत्ती या 125 मिलीग्राम की गोलियाँ बनाकर सुखाकर रख लिया जाता है. यही क्षुधासागर रस कहलाता है. 

क्षुधासागर रस की मात्रा और सेवन विधि 

एक-एक गोली सुबह-शाम लौंग का चूर्ण मिलाकर गर्म पानी के साथ, या रोगानुसार उचित अनुपान से 

क्षुधासागर रस के फ़ायदे 

यह न सिर्फ़ भूख बढ़ाता है बल्कि पेट की बीमारियों जैसे पेट दर्द, गोला बनना, गैस चढ़ना, पेट फूलना, अपच, दस्त, पेट गुड़-गुड़ करना इत्यादि को दूर करता है. 

वात और कफ जनित विकारों में इसका सेवन करना चाहिए. बढ़े हुए पित्त दोष और अल्सर में इसका सेवन न करें. 

चूँकि यह रसायन औषधि है तो इसे स्थानीय वैद्य जी की देख रेख में ही लें. मार्किट में यह शायेद ही मिले, सिद्धहस्त वैद्यगण इसका निर्माण कर प्रयोग कराते हैं. 

इसी के जैसा काम करने वाली भूख बढ़ाने वाली औषधि 'अग्निवर्द्धक क्षार' आप ऑनलाइन ख़रीद सकते हैं जिसका लिंक दिया गया है. 

अग्निवर्द्धक क्षार




13 February 2022

Honey Truth | मीठा ज़हर, बाज़ार का शहद | कहीं आप मीठा ज़हर तो नहीं खा रहे हैं?

 

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शहद और इसके फ़ायदे के बारे में कौन नहीं जानता. छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े सभी लोग इसे पसन्द करते हैं. और आयुर्वेद की अधिकतर औषधियों को शहद के साथ सेवन किया जाता है. 

पर क्या आप जानते हैं कि जिस मीठी चीज़ को अमृत समझ कर आप सेवन कर रहे हैं वह मीठा ज़हर भी हो सकता है? पर कैसे? यही सब आज बताने वाला हूँ, आईये सबकुछ विस्तार से जानते हैं - 

मधु, हनी या शहद आप जो भी नाम लें इसका, सबसे ज़्यादा मिलावट की जाने वाली दुनिया की चीजों में से यह एक है. 

असली शहद अमृत तुल्य माना जाता है जिसे हर उम्र के लोग हर तरह की बीमारी इसका सेवन कर लाभ उठाते हैं. 

शहद के फ़ायदे 

इसके फ़ायदे तो आप जानते ही होंगे, संक्षिप्त में बता दूँ कि यह इम्युनिटी बूस्टर, एन्टी, ऑक्सीडेंट, एंटी सेप्टिक, एन्टी बैक्टीरियल जैसे गुणों से भरपूर होता है. यह सब फ़ायदे आपको तभी मिलेंगे जब शहद असली हो. 


विज्ञान ने आज इतना तरक्की कर ली है कि बिल्कुल शहद जैसी चीज़ प्रयोगशाला में बनने लगी है जो की बहुत सस्ती होती है कौड़ी के भाव की. 

आपको यकीन नहीं होगा भारत में बिक रहे शहद के जितने भी पॉपुलर ब्रांड हैं उनमे से अधिकतर नक़ली शहद है. रिपोर्ट में आया है कि 13 में से 10 ब्रांड के शहद बिल्कुल बनावटी हैं, मिलावटी हैं. इनमे छोटे-बड़े ब्रांड से लेकर नयी-पुरानी बहुत सी कंपनियाँ हैं जिसमे डाबर, बैद्यनाथ, पतंजलि, झंडू जैसी कम्पनियां. 

इनके बड़े-बड़े ऐड/विज्ञापन आप सुबह से शाम तक टीवी पर देख सकते हैं, जो असली शहद के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाते हैं.

आज के समय में शहद का जितना खपत होता है उसका 25% तक भी मधुमखियों से या प्राकृतिक तौर पर उत्पादन नहीं होता है. पर जहाँ भी मार्केट में देखें शहद की कभी क़िल्लत नहीं होती है, आप जितना चाहें मिल जायेगा.

इसी से आप समझ सकते हैं कि इतना शहद आता कहाँ से है. सस्ती वस्तुओं का वैश्विक निर्माता चाइना बनावटी शहद दुनिया के अधिकतर देशों को सप्लाई कर रहा है. यह ऐसा बनावटी शहद बनाता है कि हमारे देश भारत की किसी भी लेबोरेटरी में आप टेस्ट करा लो, पकड़ में नहीं आयेगा. यह लोग खुले तौर पर बताते हैं कि हमारा शहद लो आपके देश के फलां-फलां टेस्ट में यह पकड़ में नहीं आयेगा. यह नक़ली शहद जो है वह शुगर सिरप का मॉडिफाइड वर्ज़न है. 

मिलावट का यह बाज़ार कोई नया नहीं है, कभी-कभार न्यूज़ में इस तरह की सच्चाई आती है पर यह लोग इतने बड़े मार्केट लीडर और माफ़िया हैं कि कोई इनके सामने टिक नहीं पायेगा. आप चाहें तो गूगल पर सर्च कर लें इस से रिलेटेड ख़बर मिल जाएगी. 

अब सवाल यह उठता है कि असली शहद कहाँ से मिलेगा? 

असली शहद के लिए अगर आपके आस-पास मधुमक्खी का छत्ता है तो वहां से निकलवाएँ, या फिर हनी फार्म जाकर अपने सामने शहद निकलवाएँ. 

मेरे चिकित्सालय में औषधिय प्रयोग के लिए असली शहद निकलवाता हूँ. झारखण्ड/बिहार के बॉर्डर के जंगल से बिल्कुल प्राकृतिक आर्गेनिक हनी. स्थानीय आदिवासी समुदाय के व्यक्ति जंगली पेड़ों से ढूंडकर शहद निकालते हैं हमारे गाइड की देख रेख में. यह अलग-अलग सीजन में अलग टेस्ट और थोड़ा अलग रंग का होता है. यह सिमित मात्रा में ही मिलता है, जिस से हमारे क्लिनिक की ज़रुरत पूरी हो जाती है.

अगर आप यह असली शहद ट्राई करना चाहते हैं तो इसका लिंक दिया गया है, मंगाकर यूज़ कीजिये और अपने अनुभव कमेंट कर बताईये. 

असली शहद ऑनलाइन ख़रीदें 

यदि आप शहद के रोगानुसार प्रयोग और इसके फ़ायदों के बारे में डिटेल जानकारी चाहते हैं तो कमेंट कर ज़रूर बताईये. 





07 February 2022

Chavikasava Benefits | चविकासव के फ़ायदे

chavikasava benefits


आज मैं जिस आयुर्वेदिक औषधि की जानकारी देने वाला हूँ उसका नाम है चविकासव

इसका नाम आज से पहले आपने शायेद ही सुना होगा, तो आईये जानते हैं चविकासव क्या है? इसके गुण उपयोग और निर्माण विधि के बारे में सबकुछ विस्तार से - 

 चविकासव के घटक या कम्पोजीशन 

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है चव्य इसका मुख्य घटक है, इसे ही चाभ, चव्यक जैसे नामों से भी जाना जाता है. 

chavya


चविकासव के घटक या कम्पोजीशन की बात करें तो इसके निर्माण के लिए चाहिए होता है- 

क्वाथ द्रव्य 

चव्य ढाई किलो, चित्रकमूल सवा किलो, काला जीरा, पोहकरमूल, बच, हाऊबेर, कचूर, पटोलपत्र, हर्रे, बहेड़ा, आमला, अजवायन, कूड़े की छाल, इन्द्रायणमूल, धनियाँ, रास्ना, दन्तीमूल प्रत्येक 500 ग्राम, वायविडंग, नागरमोथा, मंजीठ, देवदारु, सोंठ, काली मिर्च, पीपल प्रत्येक 250 ग्राम 

प्रक्षेप के लिए- 

धाय के फूल 1 किलो, दालचीनी, छोटी इलायची, तेजपात, नागकेशर प्रत्येक 75 ग्राम, लौंग, सोंठ, काली मिर्च, पीपल और शीतल चीनी प्रत्येक 50-50 ग्राम 

गुड़- 15 किलो और पानी 200 लीटर

चविकासव निर्माण विधि 

सबसे पहले क्वाथ द्रव्यों को मोटा-मोटा जौकूट कर 25 लीटर पानी रहने तक क्वाथ किया जाता है. इसके बाद छानकर गुड़ और प्रक्षेप द्रव्यों का जौकुट चूर्ण मिलाकर चिकने पात्र में डालकर एक महिना के लिए संधान के लिए छोड़ दिया जाता है. एक महिना के बाद छानकर बोतलों में भर लिया जाता है. यही चविकासव है. 

चविकासव की मात्रा और सेवन विधि 

15 से 30 ML तक सुबह-शाम भोजन के बाद बराबर मात्रा में जल मिलाकर लेना चाहिए

चविकासव के गुण 

दीपक, पाचक, सारक, गुल्म, मेह नाशक और उष्ण वीर्य है 

चविकासव के फ़ायदे 

इसके सेवन से वातज गुल्म, कफज गुल्म और वात कफज गुल्म नष्ट होते हैं. 

लिवर और अग्नाशय की विकृति को दूर कर इक्षुमेह, लालामेह को नष्ट करता है. 

सर्दी, खाँसी, बार-बार छींक आना, नाक और गले का दर्द, बदन दर्द, नाक से पानी बहते रहना जैसी समस्याओं को दूर करता है. 

लिवर-स्प्लीन की विकृति, पाचन की कमज़ोरी, अजीर्ण इत्यादि को दूर कर सम्पूर्ण पाचन तंत्र को दृढ़ बनता है. यह रक्त वर्धक और पित्त वर्धक भी है.

आसान शब्दों में कहूँ तो गैस, पेट में गोला बनना, लिवर-स्प्लीन की बीमारी और सर्दी-जुकाम के लिए यह असरदार औषधि है. 

चविकासव ऑनलाइन ख़रीदें - Kotakkal Chavikasava 450ml