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29 May 2020

Thalassemia Ayurvedic Treatment | थैलेसिमिया का आयुर्वेदिक उपचार | Vaidya Ji Ki Diary#18


आज वैद्य जी की डायरी में मैं बात करने वाला हूँ थैलेसिमिया के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में. जी हाँ दोस्तों, थैलेसिमिया का नाम सुना होगा इसके बारे में आयुर्वेद क्या कहता है और कौन-कौन सी औषधि इसके लिए लेनी चाहिए आईये सब विस्तार से जानते हैं - 

थैलेसिमिया क्या है?

मॉडर्न साइंस ने इसे थैलेसिमिया का नाम दिया है जिसके कारण शरीर में खून की इतनी कमी हो जाती है कि रोगी को प्रत्येक दस-पंद्रह दिनों में ब्लड Transfusion कराना पड़ता है जीवन भर, एलोपैथ में इसका कोई और उपाय नहीं है इसके अलावा. लिवर-स्प्लीन का बढ़ जाना, पीला-लाल पेशाब होना, हल्का बुखार, पीली आँखें, पीला शरीर, रक्तपित्त जैसे लक्षण इसमें पाए जाते हैं. यह अधिकतर बच्चों में पाया जाता है, पर यह किसी को भी हो सकता है. इसके कारण, लक्षण तो आपको हर जगह मिल जायेंगे गूगल करने पर भी, इन सब पर अधीक चर्चा न कर आईये जानते हैं -

थैलेसिमिया को आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेदिक ग्रंथों में इस नाम से कोई रोग नहीं मिलता है. परन्तु इसके कारण और लक्षण के अनुसार कठिन पांडू रोग मान सकते हैं. थैलेसिमिया के रोगी आयुर्वेद की शरण में नहीं आते हैं. पर आयुर्वेद में इसका समाधान है.

थैलेसिमिया की आयुर्वेदिक चिकित्सा 

आयुर्वेदिक औषधियों से थैलेसिमिया का उपचार संभव है, उचित चिकित्सा मिलने से रक्त कणों का क्षरण रुक जाता है, नया खून बनने लगता है और ख़ून चढ़ाने की ज़रूरत नहीं पड़ती, पर इसमें समय लगता है और धैर्यपूर्वक औषधि सेवन करनी पड़ती है. 

थैलेसिमिया को कठिन पांडू रोग मानकर ही चिकित्सा करनी चाहिए. इसके लिए औषधि व्यवस्था कुछ इस प्रकार से करें - 

1) सिद्ध स्वर्णमाक्षिक भस्म 5 ग्राम + ताप्यादी लौह 5 ग्राम + स्वर्णबसन्त मालती 5 ग्राम + कहरवा पिष्टी 5 ग्राम + गिलोय सत्व 5 ग्राम + पुनर्नवादि मंडूर 5 ग्राम, सभी को अच्छी तरह से खरलकर बराबर मात्रा की 40 पुड़िया बना लें(यह व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है)

सेवन विधि- एक-एक पुड़िया सुबह-शाम शहद से 

2) कुमार्यासव दो स्पून + पुनर्नवारिष्ट 2 स्पून + एक कप पानी में मिक्स कर भोजन के बाद रोज़ दो बार 

यही औषधि वैद्य जी के देख रेख में लगातार सेवन करते रहने से थैलेसिमिया के रोगी को धीरे-धीरे लाभ हो जाता है. ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कराने की अवधि धीरे-धीरे बढ़ जाती है और कुछ महीनों में ब्लड ट्रांसफ्यूज़न की आवश्यकता नहीं रहती. मतलब किसी-किसी को हफ़्ता दस दिन में खून चढ़ाना पड़ता है तो धीरे-धीरे यह Duration बढ़ जाता है, क्यूंकि शरीर में नया खून बनने लगता है. 

सभी औषधि उत्तम क्वालिटी की होनी चाहिए तभी वांछित लाभ मिलेगा. अगर औषधि मिलने में समस्या हो तो इस नम्बर पर संपर्क कर सकते हैं. 
+971524115684(Dubai), 07645065097(India), My WhatsApp



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