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19 सितंबर 2017

पंचकर्म क्या है? What is Panchkarma? | Natural Process of Detoxification


पंचकर्म एक आयुर्वेदिक प्रोसेस है जिसमे बॉडी की सफ़ाई की जाती है यानि शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकाला जाता है. इसे अंग्रेज़ी में Detoxification प्रोसेस कहते हैं, तो आईये जानते हैं पंचकर्म का प्रोसेस और फ़ायदे की पूरी डिटेल - 
सबसे पहले जानते हैं कि पंचकर्म क्यों करवाना चाहिए? 

जब तरह-तरह की दवा खाने से भी फ़ायदा नहीं हो रहा हो तो पंचकर्म करवाना चाहिए. पंचकर्म के बाद साधारण सी दवा भी तेज़ी से असर करती है. और बिना दवा के सिर्फ़ पंचकर्म से ही अनेकों रोग दूर हो जाते हैं. 

जिस तरह से गन्दी और मैली चादर पर रंग नहीं चढ़ता है, ठीक उसी तरह शरीर में जब Toxinsऔर मल दोष जमा हों तो दवाइयाँ असर नहीं करती हैं. जब चादर धुली हुयी साफ़ और सफ़ेद हो तो आप आसानी से इसे कलर कर सकते हैं. इसी तरह पंचकर्म के बाद जब बॉडी साफ़ हो जाती है तो कोई भी दवा सही से असर करती है. 
पंचकर्म एक छोटा सा शब्द है पर इसका प्रोसेस बहुत ही बड़ा होता है. पंचकर्म के बारे में विस्तार से बताऊंगा को घंटों का समय लग सकता है. आज पंचकर्म के बारे में ओवरव्यू देता हूँ ताकि आप सभी को समझ आ जाये कि पंचकर्म क्या होता है? 


दोस्तों, पंचकर्म का शाब्दिक अर्थ होता है पाँच तरह का काम यानि पाँच तरह के प्रोसेस जिनका नाम कुछ तरह से है - 

1. वमन (Vomiting)

2. विरेचन(Purgation)

3. बस्ति(Enema)

4. नस्य(Nasal Drops)

5. रक्तमोक्षण(Blood Letting)

पंचकर्म करने से पहले दो तरह का पूर्वकर्म किया जाता है जिसे करने के बाद पंचकर्म करने से बॉडी के Toxins निकल जाते हैं और बीमारी दूर होती है. इस पूर्वकर्म में दो तरह का प्रोसेस होता है - स्नेहन और स्वेदन 

स्नेहन(Oil Massage)- स्नेहन कर्म में औषधि युक्त तेल और घी से बॉडी की मालिश भी की जाती है और दवा मिला हुवा तेल और घी पिलाया भी जाता है. स्नेहन कर्म से बॉडी पंचकर्म के लिए रेडी हो जाती है. 

स्वेदन(Sweating)- बॉडी से पसीना निकलवाने के प्रोसेस को स्वेदन कहते हैं. इसके लिए भाप या Steam, गर्म कपड़े और धूप का भी इस्तेमाल किया जाता है. पूर्वकर्म के इन दोनों प्रोसेस के बाद ही पंचकर्म का सही लाभ होता है. 


आईये अब जानते हैं पंचकर्म के पाँचों कर्म के बारे में- 

वमन(Vomiting)-

वमन यानि उल्टी, इस प्रोसेस में उल्टी कराने वाली चीज़ें खिलाकर उल्टी कराया जाता है जिस से प्रकुपित दोष बाहर निकलता है. पेट में जमे कफ़ और पित्त जैसे दोष निकल जाते हैं. एसिडिटी,  हाइपर एसिडिटी, अस्थमा, खांसी, हार्ट के रोग, मोटापा जैसी कई तरह की प्रॉब्लम में इस से फ़ायदा होता है. 

विरेचन(Purgation)- 

विरेचन का मतलब होता है दस्त के ज़रिये शरीर के मल और प्रकुपित दोष को बाहर निकालना. इसमें मोशन लूज़ करने वाली 'ईच्छाभेदी रस' जैसी दवाएँ देकर पेट साफ़ कराया जाता है. इस प्रोसेस से स्किन डिजीज, कुष्ठ, पाइल्स-फिश्चूला, पाचन की समस्या जैसी कई तरह की बीमारियों में फ़ायदा होता है. 

बस्ति (Enema)- 

बस्ति या एनीमा पंचकर्म का वह प्रोसेस है जिसमे गुदामार्ग(Anus) के ज़रिये औषधियुक्त तेल या जड़ी-बूटी के काढ़े को स्पेशल डिवाइस से चढ़ाया जाता है. मूत्रमार्ग में भी बस्ति दी जाती है. बहुत सारी बीमारियों के लिए इस प्रोसेस को किया जाता है. इस से जोड़ों का दर्द, आमवात, अर्थराइटिस, कब्ज़, शुगर, पक्षाघात जैसे अनेकों रोग दूर होते हैं. 


नस्य(Nasal Drops)- 

इस प्रोसेस में जड़ी-बूटी से बने आयुर्वेदिक तेल या फिर जड़ी-बूटियों का फाइन पाउडर को नाक में डाला जाता है इसे नस्यकर्म कहते हैं. नस्यकर्म से सर के रोग, सर दर्द, माईग्रेन, Sinositis और अजीर्ण जैसे कई तरह के रोग दूर होते हैं. 

रक्तमोक्षण(Blood Letting)-

रक्तमोक्षण पंचकर्म का वह प्रोसेस है जिसमे दूषित रक्त को निकाला जाता है. यानि इम्प्योर ब्लड या गंदे खून को निकाला जाता है. इस प्रोसेस में ब्लेड से चीरा लगाकर या फिर जलौकावचारण( Leech Treatment) किया जाता है. नसों के चीरा लगाकर खून निकालने को शिरावेध कहते हैं. जबकि एक दुसरे प्रोसेस Cupping Therapy में भी दूषित रक्त को निकाला जाता है.  रक्तमोक्षण करने से कई तरह के जटिल रोग दूर होते हैं जैसे खून की ख़राबी, स्किन डिजीज, साइटिका, फ़ाइलेरिया वगैरह. जलौकावचारण या Leech Treatment से पुराना से पुराना फ़ाइलेरिया या हाथीपाँव भी ठीक हो जाता है. इसके बारे में पूरी डिटेल किसी दुसरे विडियो में दूंगा. 

पंचकर्म अनुभवी डॉक्टर से ही करवाना चाहिए. पंचकर्म में पाँच तरह के प्रोसेस हैं और यह कोई ज़रूरी नहीं कि हर रोगी के लिए पाँचों तरह के प्रोसेस किये जाएँ. रोग और रोगी की कंडीशन के मुताबिक़ की प्रोसेस सेलेक्ट किये जाते हैं.  


पंचकर्म में कितना समय लगता है?

रोग और रोगी की दशा के अनुसार इसमें अलग-अलग टाइम लगता है. इसमे सात, ग्यारह, इक्कीस और एकतालीस दिन तक का टाइम लग सकता है. यह सब डिपेंड करेगा किस तरह की बीमारी या है बीमारी कितना जटिल है. 

पंचकर्म करते हुवे खान-पान पर भी बहुत ध्यान रखा जाता है. प्राकृतिक चिकित्सा वाले तो कई बार सिर्फ दूध, छाछ या जूस का ही इस्तेमाल कराते हैं. पंचकर्म के साथ छाछ कल्प, दुग्ध कल्प जैसे प्रयोग भी किये जाते हैं. 

असरदार और गुणकारी होने के वजह से ही पंचकर्म हमारे देश भारत के अलावा दुसरे कई देशों में पोपुलर है. 

तो दोस्तों, ये थी पंचकर्म के बारे में आज की जानकारी संक्षेप में. उम्मीद है अब आप समझ सकते हैं कि पंचकर्म क्या है. 


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